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	<title>Manish Sharma, Author at Youngisthan.in</title>
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		<title>देश के स्वाभिमान की रक्षा करते हुए श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने पूरे परिवार का बलिदान कर दिया !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/shri-guru-govind-singh-ji-38730/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Feb 2019 12:45:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[श्री गुरु गोविंद सिंह जी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="श्री गुरु गोविंद सिंह जी" decoding="async" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />श्री गुरु गोविंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरू हैं। सिख समाज इस पर्व को धूमधाम से मनाता है। इनका जन्म पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सन् 1666 को जो की 5 जनवरी 2017 गुरुवार को आ रही है। को पटना में माता गुजरी जी तथा पिता श्री गुरु तेगबहादुर जी के घर हुआ। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="श्री गुरु गोविंद सिंह जी" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/guru-govind-singh.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>श्री गुरु गोविंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरू हैं।</p>
<p>सिख समाज इस पर्व को धूमधाम से मनाता है।</p>
<p>इनका जन्म पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सन् 1666 को जो की 5 जनवरी 2017 गुरुवार को आ रही है। को पटना में माता गुजरी जी तथा पिता श्री गुरु तेगबहादुर जी के घर हुआ। उस समय गुरु तेग बहादुर जी बंगाल में थे। उन्हीं के वचनोंनुसार गुरुजी का नाम गोविंद राय रखा गया और सन् 1699 को बैसाखी वाले दिन गुरुजी पंज प्यारों से अमृत चखकर गोविंद राय से गुरु गोविंद सिंह जी बन गए।</p>
<p>कश्मीरी पंडितों को बचाते हुए श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने दिल्ली के चाँदनी चैक में सन 1675 मे बलिदान दिया।</p>
<p>इसके पश्चात श्री गुरु गोविंद सिंह जी 11 नवंबर 1675 को गुरु गद्दी पर विराजमान हुए।</p>
<p>उन्होंने सभी जातीयों को एक किया एवं उंच-नीच को समाप्त करके सभी का समान माना एवं समाज में एकता स्थापित की और उनमें स्वभिमान की भावनाओं को जाग्रत किया।</p>
<p>श्री गुरु गोविंद सिंह जी के बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह बड़े पुत्र थे जिन्होंने चमकौर के युद्ध में विरता से युद्ध लडते हुए शहीद हुए थे। और छोटे पुत्रों में बाबा जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सरहंद के नवाब ने जीवित दीवारों में चुनवा दिया था। आपने कई किलों का निर्माण भी करवाया एवं पौंटा साहिब में साहित्यीक कार्यो को किया।</p>
<p>स्वयं की शक्तियों से श्री गुरू्ग्रंथ साहिब का उच्चारण करते एवं उसका अर्थ श्रद्धालुओं को बताते जाते थे एवं श्री मनी सिंह जी से गुरूवाणी का अर्थ लिखा करते थे। इस तरह पांच महिनों में गुस्वाणी का अर्थ उन्होने संपूर्ण किया था।</p>
<p>देश के धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के लिए उन्होने कई प्रयास एवं युद्ध किए। देश को आंतकियो से सुरक्षित किया एवं धर्म की रक्षा के साथ देश के सम्मान को भी बना रखा। श्री गुरु गोविंद सिंह जी नांदेड में (श्री हुजूर साहिब) में गुरुग्रंथ साहिब को गुरु का दर्जा देते हुए और इसका श्रेय भी प्रभु को देते हुए कहते हैं- आज्ञा भई अकाल की तभी चलाइयो पंथ, सब सिक्खन को हुक्म है गुरू मान्यो ग्रंथ।</p>
<p>42 वर्ष की आयु तक श्री गुरु गोविंद सिंह जी अत्याचार का डट कर मुकाबला किया एवं इस तरह 1708 में वे भी सचखंड गमन हो गए। देश के स्वाभिमान एवं शान की रक्षा करते हुए उन्होने अपने पूरे परिवार का बलिदान कर दिया।</p>
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    	</item>
		<item>
		<title>गणेश उत्सव मनाने का महत्व क्या है ! कैसे मनाना चाहिए !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/significance-of-ganeshotsav-52201/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Aug 2017 08:30:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[significance of ganeshotsav]]></category>
		<category><![CDATA[गणेशजी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="गणेशजी" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />गणेशजी का उत्सव &#8211; कन्या राशि में गुरु-चंद्र की युति के साथ गणेश स्थापना हुई जो देश के लिए आनंददायक समय होंगा। इसके पूर्व ऐसा २८ अगस्त १९५७ को ६० साल पूर्व हुआ था। जब कन्या राशि में गुरु-चंद्र की युति के साथ गणेश स्थापना हुई थी, एवं उस वर्ष भी ग्यारह दिनों तक गणेश [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="गणेशजी" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/ganpati.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><div>गणेशजी का उत्सव &#8211; कन्या राशि में गुरु-चंद्र की युति के साथ गणेश स्थापना हुई जो देश के लिए आनंददायक समय होंगा। इसके पूर्व ऐसा २८ अगस्त १९५७ को ६० साल पूर्व हुआ था।</div>
<div></div>
<div>जब कन्या राशि में गुरु-चंद्र की युति के साथ गणेश स्थापना हुई थी, एवं उस वर्ष भी ग्यारह दिनों तक गणेश उत्सव मनाया गया था।</div>
<div></div>
<div><strong>१-माता पिता की आज्ञा सर्वोपरि-</strong></div>
<div></div>
<div>पित्रोश्च पूजनं कृत्वा प्रक्रान्तिं चं करोति य:।</div>
<div>तस्य वै पृथिवीजन्यफलं भवति निश्चितम्।।</div>
<div></div>
<div>अर्थ-जो माता-पिता की पूजा-प्रणाम करता है। उसे पृथ्वि की परिक्रमा का फल प्राप्त होंता है। उसे संसार के सभी सुख प्राप्त होंते है।</div>
<div>गणपती को हमारे जीवन में कई बातों को सीख लेने की प्रेरणा देते है। बाल्यकाल में ही उनकी माता द्वारा उनको द्वारपाल का कार्य दिया था। जो उन्होनें सहर्ष स्विकार किया तथा उसका दृढृता से पालन किया। माता की आज्ञा के पालन में उन्होनें प्राणों का भी मोह नही किया। उनके इसी बलिदान का फल उनको अग्रपूजा के रूप में प्राप्त हुआ। उनको सभी और सम्मान प्राप्त हुआ। हर व्यक्ति को गणेशजी यह संदेश देते है की माता-पिता की आज्ञा का पालन उनको सर्वोपरी बना सकता है। शास्त्रों मे कहा गया है, कि जो कुछ न करके केवल अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन और सेवा कर लेता है। उसको अपने जीवन में कभी कष्ट का अनुभव नही होता है तथा उसको सभी और से सम्मान एवं समृद्धि प्राप्त होती है।</div>
<div></div>
<div><strong>२-गणेश की उपेक्षा पतन का कारण-</strong></div>
<div></div>
<div>विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।</div>
<div>संग्रामे संकटे चैव विघ्रस्तस्य न जायते।।</div>
<div>गणेश बुद्धि एवं विद्या देने वाले देवता है। रिद्धि एवं बुद्धि उनकी पत्नि तथा लाभ एवं क्षेम उनके पुत्र है। पूर्व काल में शिक्षा कार्य आरंभ करने के पूर्व बालकों का गणेश जी का स्मरण कराया जाता था। तख्ती पर सर्वप्रथम उनका ही नाम लिखाया जाता था। जिससे वह जो विद्या ग्रहण करते थे उसको सात्विक कार्यो में लगाते थें। गणेशोत्सव का आयोजन भी भगवान की भक्ति एवं देश भक्ति के लिए किया जाता था। वर्तमान में यह एक दिखावा बन कर रह गया है। जब तक पालक एवं विद्यार्थी गणेश पूजन को महत्व देते रहें। बुद्धि शुद्ध बनी रही। वर्तमान में हम प्रत्यक्ष देखते है कि वह अधिकतम युवा वर्ग एवं विद्यार्थी अनैतिकता और अनुशासनहिनता की और अग्रसर हो रहे है। क्योंकि अब अध्ययन गणेशजी से आरंभ न होकर ए, बी सी, डी से आरंभ होता है। बालकों की बुद्धि अशुद्ध होकर माता-पिता के लिए ही कष्टकारक हो रही है।</div>
<div></div>
<div><strong>३-कुतर्कों के सवार है। ज्ञान गणपती-</strong></div>
<div></div>
<div>मूषकं वाहनं चास्य पश्यन्ति वाहनं परम्।</div>
<div>तेन मूषकवाहोयं वेदेषु कथितोभवत्।।</div>
<div></div>
<div>गणेशजी की सवारी है चूहा अर्थात मूषक चूहा हर वस्तु को कुतर डालता है। वह यह नही देखता की वस्तु आवश्यक है या अनावश्यक, किमती है अथवा बेशकिमती वह बिना कारण उसे कुतर डालता है। इसी प्रकार कुतर्की भी यह विचार नही करते की कार्य शुभ है अथवा अशुभ। हितकर है अथवा अहितकर वह हर कार्य में कुतर्को द्वारा व्यवधान उत्पन्न करते है। किंतु ज्ञान का उदय होते ही कुतर्को का  अंधकार समाप्त हो जाता है। कुतर्क दब जाता है। गणेश बुद्धि एवं ज्ञान है तथा कुतर्क मूषक है। जिसको गणेशजी ने अपने निचे दबा कर अपनी सवारी बना रखा है। यह हमारे लिए भी शिक्षा है कि कुतर्को को परे कर उनका दमन कर ज्ञान को अपनाएं।</div>
<div></div>
<div><strong>४-गणेश के साथ आएं समृद्धि-</strong></div>
<div></div>
<div>सिद्धिबुद्धिपतिं वन्दे ब्रह्मणस्पतिसंज्ञितम्।</div>
<div>मांङगल्येेशं सर्वपुज्यं विघ्रानां नायकं परम्।।</div>
<div></div>
<div>गणेश की दो पत्नि है। बुद्धि एवं सिद्धि तथा दो पुत्र लाभ एवं क्षेम। गणेश का पूजन अर्थात गणेश जी के गुणों को अपनानें से बुद्धि शुद्ध होती है तथा सिद्धि की प्राप्ति होती है। गणेश जी का गुण है। सतत प्रयास करना, माता-पिता का आज्ञाकारी होना, इमानदारी से सद़कार्य करना उपलब्ध वस्तुओं सावधानी से उपयोग करना ऐसा करने वाला व्यापार, नौकरी एवं जीवन में लाभ प्राप्त करता है तथा उस लाभ की रक्षा करने की शक्ति अर्थात क्षेम की भी प्राप्ति होती है। गणेशजी अपने साथ इन चारों को भी साथ लेकर आते है। वह जो गणेश के गुणों का अपनाते है। उनका पूजन भक्ति करते है। वह निरंतर अपनी बुद्धि को शुद्ध रखकर ज्ञान, सुख, धन, वैभव, ऐश्वर्य प्राप्त करते है।</div>
<div></div>
<div><strong>५-गणेशजी प्रथम पूज्य क्यों-</strong></div>
<div></div>
<div>ऊंकारमाद्यं प्रवदन्ति संतो वाच: श्रुतीनामपि यं गृणन्ति।</div>
<div>गजाननं देवगणानताङ्घ्रिं भजेहमर्धेन्दुकृतावतंसम्।।</div>
<div></div>
<div>कोई भी शुभ कार्य के पहले गण्ेाशजी का पूजन किया जाता है। क्योंकि हर कार्य को आरंभ करने के पूर्व श्रद्धा एवं विश्वास का होना आवश्यक होता है। श्री रामचरितमानस में पार्वती जी को श्रद्धा एवं शंकरजी को विश्वास का रुप माना गया है। गणेशजी को इन दोनों की ही संतान है। अर्थात कोई भी कार्य श्रद्धा एवं विश्वास के साथ किया जाए तो वह निर्विघ्र संपन्न होता है तथा लाभ दिलाने वाला  एवं सफलता दायक होता है। गणेशजी को उनके आकार के कारण ओंकार स्वरुप भी कहा जाता है। जिस तरह हर मंत्र के आरंभ में ओंकार का प्रयोग होता है। उसी तरह हर शुभ कार्य में सर्वप्रथम गणेश का पूजन होता है।</div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>६-गृहस्वामी को होना चाहिए गणेश के समान-</strong></div>
<div>ईश्वर: सर्वभोक्ता च चोरवत्तत्र संस्थित:।</div>
<div>स एव मूषक: प्रोक्तो मनुजानां प्रचालक:।</div>
<div>मायया गूढरूप: सन् भोगान भुङत्के हि चोरवात।।</div>
<div></div>
<div>जिस तरह गणेश जी का सर हाथी के  समान धड़ मनुष्य के समान एवं सवारी चूहे की होती है। उसी तरह के गुण घर के स्वामी को भी अपनाना चाहिए। जैसे हाथी गंभीर होता है, दूर दृष्टि रखता है, तथा खुब विचार कर ही कार्य करता है, क्रोध भी कम करता है।  वैसे ही घर के मुखीया को धैर्य से कार्य करना चाहिए। गणेशजी का वाहन चूहा जिस तरह से छुपा हुआ रहता है। विशेष प्रयोजन से ही वह बाहर आता है तथा अपना कार्य करके वापस छुप जाता है। उसी तरह गृहस्वामी को अपनी योजनाओं को गुप्त रखना चाहिए, तथा किसी विशेष प्रयोजन एवं कार्य सिद्धि के लिए ही उसको प्रकट करना चाहिए। इस तरीके से कार्य करने पर परिवार समृद्धि की और अग्रसर होता है।</div>
<div><strong> </strong></div>
<div><strong>७-एकता का संदेश दिया गणेश ने-</strong></div>
<div></div>
<div>गणानां जीवजातानां य: ईश:- स्वामी स गणेश:।</div>
<div>गणेश शब्द का अर्थ जो समस्त जीव जाती के स्वामी हो-</div>
<div></div>
<div>गण का अर्थ राज्य भी होता है। अत: सभी गणों का स्वामी गणेश कहलाता है।</div>
<div>गणेशजी के  जन्म के पहले देवता दानवों से त्रस्त थे। उनमें सगंठन का अभाव था । गणेशजी ने  जन्म के पश्चात सबको एक किया तथा उनका सफलता पूर्वक नेतृत्व किया।  कई दानवों को उन्होनें समाप्त किया। इसी से प्रथम पूज्यनीय, लोकप्रिय एवं सम्मानीय हुए। सभी को साथ लेकर कार्य करना उनका लक्ष्य था। कार्तीकेय देव सेना के सेनापती थे तथा गणेशजी अपनी युक्तियों एवं बुद्धि बल से  देव शक्तियों को संगठीत करने का कार्य करते थे। अपनी बुद्धिमत्ता एवं सभी को साथ लेकर कार्य करने से उन्होनें वह कार्य किए जो किसी ओर से नही हो सकें। गणपती का संगठन-तत्व आसान एवं देश की उन्नती के लिए ग्रहण करने योग्य है।</div>
<div></div>
<div><strong>८-गणपती का दर्शन पिछे से नही-</strong></div>
<div></div>
<div>पृष्ठेथ पिप्पलजुषौ रतिपुष्पवाणौ</div>
<div>सव्ये प्रियङगुमभितश्च मही वराहौ।।</div>
<div></div>
<div>शास्त्रों में उल्लेखीत है कि गणेश का दर्शन पिछे से नही करना चाहिए। क्योकिं उनकी पीठ में दरिद्रता  या काम का वास होता है तथा सामने से उनका दर्शन करना सिद्धि बुद्धि प्राप्त कराने वाला होता है। अर्थात कोई भी संकट आए तो उसका सामना करों उससे मुंह छिपाने की आवश्यकता नही है। मुसीबतों से मुंह छिपाने से वह छुटती नही बल्कि ओर बढ़ती जाती है तथा उसका सामना करने से वह भाग जाती है। संकटों का आगे होकर निडरता से सामना करने वाला सफलता एवं धन पाता  है। बुरे समय में भी घबराने हताश होने के बजाय अपनी हिम्मत का कायम रखकर डटकर उसका मुकाबला करने से कुछ ही दिनों में वह समाप्त हो जाता है।</div>
<div></div>
<div><strong>९-भीतर के शत्रुओं का शमन किया गजानन ने-</strong></div>
<div></div>
<div>समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुंजरं दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम्।</div>
<div></div>
<div>गणेश द्वारा मारे गए मुख्य असुरों के नाम थे। अहंतासुर, कामासुर, क्रोधासुर, मायासुर, लोभासुर आदि। अहंतासुर अंहकार का, कामासुर काम का प्रतीक था, क्रोधासुर क्रोध का, मायासुर माया का एवं लोभासुर लोभ का प्रतीक था, अर्थात गणेश का दर्शन पूजन हमें काम, क्रोध, माया एंव लोभ से बचाने वाला होता है। यह सभी मनुष्य के भीतर के शत्रु है। गणेश जी ने इन सभी को समाप्त करने के लिए अपने अंकुश का प्रयोग किया। हमें भी अपने चित्त पर अंकुश लगाकर इन अंहकार, काम, क्रोध, माया, एंव लोभ रुपी असुरों पर नियंत्रण करना चाहिए। गणेशजी इसमें हमारें सहायक होगें तथा हमें ऋिद्धि-सिद्धि एवं लाभ क्षेम की प्राप्ति कराएगें।</div>
<div></div>
<div><strong>10 &#8211; कैसे मनाएं उत्सव-</strong></div>
<div></div>
<div>इस सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से शुद्ध होकर किसी भी नदी के किनारे पर जाकर वहां से साफ मिट्टी लेकर आएं उसको छानकर एवं शुद्ध जल मिलाकर एक आठ वर्षीय बालिका से उस मिट्टी को गुंथवा ले या  फिर स्वंय उस मिट्टी से यथाशक्ति जैसे हो सके एक गणेशजी की मूर्ती का निर्माण करें। तद्नुपरांत उस गणेश जी की मूर्ती को घी एवं सिंदूर से लेपन कर दें एव जनेउ धारण करवाएं। उसके बाद सरल शब्दों में प्रार्थना करें कि, है गणेजी आप स्वयं आकर इस मूर्ती में  प्रतिष्ठित हो तत्पश्चात  धूप अगरबत्ती से लगाकर लाल पुष्पों से बना हार एवं पांच रक्त पुष्प अर्पण करें। तत्पश्चात पांच लड्डु का भोग लगाएं।</div>
<div></div>
<div>अगले दस दिनों तक रोजाना सुबह शाम इस तरह इस मिट्टी के गणेशजी की इसी तरह सेवा करें हो सके तो चालीस दिन तक करें। यह अनुष्ठान सभी प्रकार की कामना को पूर्ण करने वाला होता है।</div>
<div></div>
<div>मूंग की दाल के आटे से बने दिए गणपती जी को बनाएं।  तो सात दिनों में किसी भी प्रकार कष्ट हरण हो। आठ दिनों में संतान चाहने वालों की कामना पूर्ण हो। धन धान्य सभी प्रकार की कामना की पूर्ती करने वाला यह अनुष्ठान कोई भी कर सकता है।</div>
<div></div>
<div>दस दिनों के पश्चात इस मूर्ती को वापस नदी में ही विसर्जन कर देना चाहिए। उसके साथ में चढ़े हुए हार-फू ल को नदी में नही डाले। चढ़े हुए प्रसाद को बच्चों में बांट दें एवं स्वयं परिवार सहित ग्रहण करें। इस प्रकार दस दिनों तक करने से यह पूजा समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली होती है।</div>
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		<title>भारत और चीन के युद्ध की भविष्यवाणी जो आपको हिलाकर रख देगी !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Aug 2017 04:30:20 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[भारत और चीन के युद्ध की भविष्यवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/india-china-1-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="भारत और चीन के युद्ध की भविष्यवाणी" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/india-china-1-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/india-china-1-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/india-china-1-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/india-china-1.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />भारत और चीन के युद्ध की भविष्यवाणी &#8211; भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी प्राप्त हुई थी। उस समय चंद्रमा कर्क राषि में था। आजाद भारत की राषि कर्क है। 18 अगस्त 2017 को राहु कर्क राषि में प्रवेष करेंगा। जो भारत देष की आजादी के समय की राषि है। मंगल नीच का होकर [&#8230;]</p>
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<div></div>
<div>उस समय चंद्रमा कर्क राषि में था। आजाद भारत की राषि कर्क है। 18 अगस्त 2017 को राहु कर्क राषि में प्रवेष करेंगा। जो भारत देष की आजादी के समय की राषि है। मंगल नीच का होकर पूर्व से कर्क मेें विराजमान है। 20 अगस्त को चंद्रमा कर्क में प्रवेष करेंगा।</div>
<div></div>
<div>भारत और चीन के युद्ध की भविष्यवाणी के हिसाब से यह समय भारत के लिए अच्छा नही माना जाएंगा। इस समय चीन आक्रमक होकर अपनी साख बचाने हेतु कोई गलत कदम उठा सकता है। 7 अगस्त 2017 को पडने वाला चंद्र ग्रहण भी इसमें महती भूमिका अदा करेंगा।</div>
<div></div>
<div>1962 में 55 साल पहले भी ऐसे ही हालात का निर्माण हुआ था।</div>
<div></div>
<div>20 अक्टूबर 1962 को भी चीन ने भारत पर हमला किया था। उस समय भी राहु कर्क राषि में था एवं मंगल नीच का होकर उसमे था। चंद्रमा भी साथ ही कर्क राषि में विराजमान था। उस समय एक माह तक युद्ध चला था। उस साल भी जुलाई में चंद्र ग्रहण हुआ था। जिसमें भारत को नुकसान हुआ था। मंगल राहु की युति कर्क में पूरे समय गोचर कर रहे थे।</div>
<div></div>
<div>भारत और चीन के युद्ध की भविष्यवाणी में इस बार यह शुकून वाली बात है कि, मंगल 27 अगस्त को ही राषि बदलकर सिंह में चला जाएंगा। लेकिन 18 से 27 अगस्त तक का यह समय हिंदुस्तान के लिए संभलने का होंगा। 26 अगस्त की सुबह ही शनि मार्गी होकर वृष्चिक में गोचर करेंगा। इसके कारण भी युद्ध के बादल छंट सकते है।</div>
<div></div>
<div>1962 में शनि की दृष्टि भी कर्क पर थी। इसलिए ज्यादा नुकसान हुआ था। इस बार ऐसा नही हो रहा है। अर्थात हालात बिगडेगे तो शीघ्र ही संभल भी जाएंगें</div>
<div></div>
<div>ये है भारत और चीन के युद्ध की भविष्यवाणी &#8211;</div>
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    	</item>
		<item>
		<title>चंद्र ग्रहण का राशिफल &#8211; श्रावण शुक्ल पूर्णीमा सोमवार २०७४ दिनांक ७ अगस्त २०१७</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/moon-eclipse-zodiac-prediction-51470/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Aug 2017 02:30:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[moon eclipse zodiac prediction]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्र ग्रहण का राशिफल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="चंद्र ग्रहण का राशिफल" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />चंद्र ग्रहण का राशिफल &#8211; खंडग्रास चंद्र ग्रहण श्रावण शुक्ल पूर्णीमा सोमवार २०७४ दिनांक ७ अगस्त २०१७ को रहेंगा। इसका समय रात्री १० बजकर २९ मिनट से प्रारंभ होकर रात्री १२ बजकर २२ मिनट तक रहेंगा। ग्रहण का सूतक ७ अगस्त की  दोपहर १ बजकर २९ मिनट से प्रारंभ होंगा। यह ग्रहण श्रवण नक्षत्र में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="चंद्र ग्रहण का राशिफल" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/rashi-grahan.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><div>चंद्र ग्रहण का राशिफल &#8211; खंडग्रास चंद्र ग्रहण श्रावण शुक्ल पूर्णीमा सोमवार २०७४ दिनांक ७ अगस्त २०१७ को रहेंगा।</div>
<div></div>
<div>इसका समय रात्री १० बजकर २९ मिनट से प्रारंभ होकर रात्री १२ बजकर २२ मिनट तक रहेंगा। ग्रहण का सूतक ७ अगस्त की  दोपहर १ बजकर २९ मिनट से प्रारंभ होंगा।</div>
<div></div>
<div>यह ग्रहण श्रवण नक्षत्र में मकर राशि में लगेगा। इसलिए मकर राशि वालों के लिए यह विशेष चिंतनीय रहेंगा।</div>
<div></div>
<div><strong>चंद्र ग्रहण का राशिफल &#8211; </strong></div>
<div></div>
<div><strong>मेष-</strong></div>
<div>दशम राशि में चंद्र ग्रहण होगा यह भी साधारण फल देने वाला होगा। आय सामान्य बनी रहेगी एवं चिंताओं से मुक्ति मिलेगी। नई जिम्मेदारी मिल सकती है। अधिकारी प्रसन्न रहेंगे , किंतु कार्य अधिक करना पड़ सकता है। विरोधाी को परास्त करने के लिए प्रयास करना होगा।</div>
<div></div>
<div><strong>वृषभ-</strong></div>
<div>इस राशि को नवम राशि में चंद्र ग्रहण का असर रहेगा। न्यायलयीन एवं विवादित मामलों में अपना पक्ष रखने के समय प्राप्त होगा। जिम्मेदारी बढ़ेगी एवं परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। नौकरी में बदलाव हो सकता है।</div>
<div></div>
<div><strong>मिथुन-</strong></div>
<div>अष्टम राशि में चंद्र का ग्रहण अशुभ फल का सूचक है। रोगों की वृद्धि हो सकती है। संतान से भी दुख प्राप्त होगा। नौकरी में भी चिंताजनक खबर मिल सकती है। यह समय शांत रहने का है। किसी से विवाद नही करें एवं परिवार वालों की सलाह पर ध्यान देना उचित होगा।</div>
<div></div>
<div><strong>कर्क-</strong></div>
<div>सप्तम राशि मे चंद्र ग्रहण का सामान्य फल देने वाला होगा। विचारों की अधिकता रहेगी। नए कार्यो को करने का मौका मिलेगा एवं कार्यशैली में सुधार होगा। क्रेडिट मिलने में संदेह रहेगा। परिवार का सहयोग बना रहेगा। धन की कमी महसूस होगी।</div>
<div></div>
<div><strong>सिंह-</strong></div>
<div>इस राशि के लिए यह चंद्र ग्रहण शुभ फलदायी होगा। धन का लाभ एवं छठी राशि मे चंद्र ग्रहण होने से रूके कार्यो में भी गति आएगी। विवादों में विजय प्राप्त होगी। शुभ समाचारों की वृद्धि होगी। बेरोजगारों को रोजगार की प्राप्ति होगी।</div>
<div></div>
<div><strong>कन्या-</strong></div>
<div>इस राशि से पांचवी राशि से ग्रहण लगेगा जो सामान्य फल प्रदान करने वाला होगा। अशुभों को निराकरण होगा एवं अच्छे कार्यो में संल्गन रहेंगे। उदासी का अंत होगा। रिश्तेदारों से संबंधों में सुधार होगा एवं धन की आवक सामान्य रहेगा।</div>
<div></div>
<div><strong>तुला-</strong></div>
<div>इस राशि चतर्थ राशि मे चंद्र ग्रहण होगा। यह समय संभलने का है। कोई भी कार्य ऐसा नही करें जिससे चिंताएं बढ़ जाए। धन की आवक कमजोर हो सकती है। निवेश स ेघाटे की संभाावना है। विवादों से हानी हो सकती है। चोरी आदि से भी सावधान रहना होगा।</div>
<div></div>
<div><strong>वृश्चिक-</strong></div>
<div>राशि से तीसरा चंद्र ग्रहण शुभ फल देने वाला होगा। शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी। रूके कार्य संपन्न होंगे एवं रोगों में सुधार होगा। उधार दिए गए पैसों की वसूली होगी एवं संपत्ति से लाभ होगा एवं नए कार्यो का आरंभ होगा।</div>
<div></div>
<div><strong>धनु-</strong></div>
<div>दूसरा राशि में चंद्र ग्रहण यह समय सामान्य लाभ देने वाला होगा। शुभ सूचनाएं मिलेगी, किंतु मन उदास रहेगा। मनचाही सफलताएं मिलने में संदेह रहेगा। आगे बढऩे में सहायता करने वाले पिछे हटेंगे। रोगों में वृद्धि हो सकती है, लेकिन कोई गंभीर समस्या नही होगी।</div>
<div></div>
<div><strong>मकर-</strong></div>
<div>चंद्र का गोचर इसी राशि में ग्रहण योग निर्मित करेगा। अत्यंत सावधानी बरतने का समय है। हर कार्य को सावधानी पूर्वक करे एवं किस से विवाद की स्थिति निर्मित होने पर पिछे हट जाएं तो बेहतर होगा। वाहनादि प्रयोग में सावधानी रखें एवं निवेश का जोखीम नही लें।</div>
<div></div>
<div><strong>कुंभ-</strong></div>
<div>द्वादश राशि में चंद्र ग्रहण संभलकर रहने का संकेत करता है। आय में कमी होगी एवं चिंताओं में वृद्धि होगी। कार्य क्षमता कमजोर हो सकती है। रिश्तेदारों स विवाद एवं विरोधाी प्रभावी हो सकते है। कार्यस्थल पर असम्मानीय स्थिति निर्मित हो सकती है।</div>
<div></div>
<div><strong>मीन-</strong></div>
<div>एकादश राशि मे चंद्र ग्रहण शुभ फल देने वाला होगा। शुभ समाचार एवं आय की वृद्धि के संकेत है। संपत्ति से लाभ एवं रूके कार्यो के पूर्ण होने के संकेत है। रोगों में लाभ होगा एवं विरोधाी हताश होंगे। कार्य प्रणाली में सुधार होगा।</div>
<div></div>
<div>ये है चंद्र ग्रहण का राशिफल &#8211; इसका समय रात्री १० बजकर २९ मिनट से प्रारंभ होकर रात्री १२ बजकर २२ मिनट तक रहेंगा। ग्रहण का सूतक ७ अगस्त की  दोपहर १ बजकर २९ मिनट से प्रारंभ होंगा।</div>
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    	</item>
		<item>
		<title>इस वर्ष राखी पर चंद्र ग्रहण है &#8211; ग्रहण में क्या करें क्या न करें</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/moon-eclipse-rakshabandhan-51469/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Aug 2017 02:30:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[moon eclipse rakshabandhan]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्र ग्रहण]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/chandra-grahan-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="चंद्र ग्रहण" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/chandra-grahan-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/chandra-grahan-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/chandra-grahan-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/chandra-grahan.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />इस वर्ष राखी पर चंद्र ग्रहण हैॅ श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णीमा 7 अगस्त 2017 सोमवार श्रावणी उपाकर्म  राखी बंधन श्रवण पूजन कब करें चंद्र ग्रहण समय रात में 10.29 से मध्य रात 12.22 तक ग्रहण का कुल समय 1 घंटा 53 मिनट है; सूतक काल प्रारंभ दोपहर 1.29 से प्रारंभ- भद्रा रहेंगी दोपहर 11.04 मिनट [&#8230;]</p>
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<div>चंद्र ग्रहण समय रात में 10.29 से मध्य रात 12.22 तक ग्रहण का कुल समय 1 घंटा 53 मिनट है; सूतक काल प्रारंभ दोपहर 1.29 से प्रारंभ-</div>
<div>भद्रा रहेंगी दोपहर 11.04 मिनट तक इसलिए आपको श्रावणी उपाकर्म राखी बंधन श्रवण पूजन का मुहूर्त्त दोपहर के 11.05 से दोपहर 1.28 मिनट के बीच में करना है;</div>
<div></div>
<div><strong>ग्रहण में क्या करें क्या न करें &#8211;</strong></div>
<div></div>
<div>चंद्र ग्रहण ओर सूर्य ग्रहण में संयम रखकर जप ध्यान करने से कई गुना फल हेाता है।</div>
<div></div>
<div>श्रेष्ठ साधक उस समय उपवास पूर्वक ब्राहृमी घृत का स्पर्ष करके ओम नमो नारायाणाय मंत्र का जाप करने के पश्चात ग्रहण शुद्ध होने पर उस घृत को पीले ऐसा करने से वह धारण शक्ति, कवित्व  शक्ति एवं वाक शक्ति प्राप्त कर लेता है।</div>
<div></div>
<div>सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है। उतने वर्षो तक अरून्तुद नामक नरक में वास करता है।</div>
<div></div>
<div>सूर्य ग्रहण में ग्रहण चार  प्रहर 12 घंटे पूर्व ओर चंद्र ग्रहण में 3 प्रहर नौ घंटे पूर्व सूतक लग जाता है। इस काल में भेाजन नही करना चाहिए।</div>
<div>वृद्ध, बालक एवं रोगी। डेढ प्रहर साढे चार घंटे पूर्व तक खाना खा सकते है।</div>
<div></div>
<div>ग्रहण वेध के पूर्व जिन पदार्थ में कुुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती है। वे पदार्थ दुषीत नही होते। पके हुए। अन्न का त्याग करके उसे गाय कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए। ग्रहण वेध के प्रारंभ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग अत्य आवश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए। ओर ग्रहण शुरु होने से अंत तक जल या अन्न ग्रहण नही करना चाहिए।</div>
<div></div>
<div>ग्रहण के स्पर्श समय स्नान मध्य के समय के हो देव पूजन ओर श्राद्ध तथा अंत में सचेल स्नान करना चाहिए। स्त्रीयां सर धोए बगैर भी स्नान कर सकती है।</div>
<ul>
<li>ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चंद्र जिसका ग्रहण हो उसका शुद्ध बिंब देखकर भोजन करना चाहिए।</li>
</ul>
<ul>
<li>ग्रहण काल में स्पर्श कीए हुए वस्त्रादि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए।</li>
</ul>
<ul>
<li>ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नही बोलना चाहिए। ग्रहण के स्नान गर्म जल की अपेक्षा ठंडा जल। ठंडे जल में भी दूसरे के हाथ से  निकाले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकाला हुआ जल उपयोग करना चाहिए।</li>
</ul>
<ul>
<li>स्नान के लिए जमीन भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ, बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य नदी की अपेक्षा गंगा का, गंगा की अपेक्षा समुद्र का जल पवीत्र माना जाता है।</li>
</ul>
<ul>
<li>ग्रहण के समय गायों को घास पक्षियों को अन्न, जरूरतमंद को वस्त्रदान से अनेक गुणा पुण्य प्राप्त होता है।</li>
</ul>
<ul>
<li>ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके , लकडी ओर फूल नही तोडने चाहिए, बाल तथा वस्त्र नही निचोडने चाहिए।</li>
</ul>
<ul>
<li>ग्रहण के समय ताला खोलना , सोना, मलमूत्र त्याग करना, मैथुन एवं भोजन यह सब कार्य वर्जीत है।</li>
</ul>
<ul>
<li>ग्रहण के समय कोई भी नया कार्य नही करना चाहिए। ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका, करने से दरिद्र मल त्यागने से किडा, स्त्री प्रसंग करने से सुअर ओर उपटन लगाने से व्यक्ति कोडी होता हैं।</li>
</ul>
<ul>
<li>गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विेषेष सावधान रहना चाहिए।</li>
</ul>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi/moon-eclipse-rakshabandhan-51469/">इस वर्ष राखी पर चंद्र ग्रहण है &#8211; ग्रहण में क्या करें क्या न करें</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi">Youngisthan.in</a>.</p>
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		    <thumbimage>https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/08/chandra-grahan-150x150.jpg</thumbimage>
    	</item>
		<item>
		<title>उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर : क्यों खुलता है सिर्फ साल में एक दिन</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/nagchandreshwar-temple-ujjain-51208/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Jul 2017 11:30:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[nagchandreshwar temple ujjain]]></category>
		<category><![CDATA[नागचंद्रेश्वर मंदिर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="नागचंद्रेश्वर मंदिर" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />नागचंद्रेश्वर मंदिर &#8211; हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का,जो की उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="नागचंद्रेश्वर मंदिर" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p dir="ltr">नागचंद्रेश्वर मंदिर &#8211; हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है।</p>
<p dir="ltr">हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का,जो की उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है।</p>
<p dir="ltr">इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि  नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं।</p>
<p dir="ltr">नागचंद्रेश्वर मंदिर में  11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है, इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है।</p>
<p dir="ltr"><a href="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-1.jpg" class='wp-img-bg-off' rel='mygallery'><img decoding="async" loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-51210" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-1.jpg" alt="" width="700" height="465" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-1.jpg 700w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/chandreshwar-temple-1-300x199.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></a></p>
<p dir="ltr">पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं। मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति में शिवजी, गणेशजी और मां पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं। शिवशंभु के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं।</p>
<p>सर्पराज तक्षक ने शिवशंकर को मनाने के लिए घोर तपस्या की थी। तपस्या से भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया। मान्यता है कि उसके बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया।</p>
<p dir="ltr">लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही मंशा थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो अत: वर्षों से यही प्रथा है कि मात्र नागपंचमी के दिन ही वे दर्शन को उपलब्ध होते हैं। शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है। इस मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यक्ति किसी भी तरह के सर्पदोष से मुक्त हो जाता है, इसलिए नागपंचमी के दिन खुलने वाले इस मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है।</p>
<p dir="ltr">यह मंदिर काफी प्राचीन है। माना जाता है कि परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी के लगभग इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके बाद सिं‍धिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया ने 1732 में महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। उस समय इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार हुआ था। सभी की यही मनोकामना रहती है कि नागराज पर विराजे शिवशंभु की उन्हें एक झलक मिल जाए। लगभग दो लाख से ज्यादा भक्त एक ही दिन में नागदेव के दर्शन करते हैं।</p>
<p>नागपंचमी पर वर्ष में एक बार होने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए शनिवार रात 12 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। रविवार नागपंचमी को रात 12 बजे मंदिर में फिर आरती होगी व मंदिर के पट पुनः बंद कर दिए जाएंगे।</p>
<p dir="ltr">नागचंद्रेश्वर मंदिर की पूजा और व्यवस्था महानिर्वाणी अखाड़े के संन्यासियों द्वारा की जाती है।</p>
<p>नागपंचमी पर्व पर बाबा महाकाल और भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश की व्यवस्था की गई है। इनकी कतारें भी अलग होंगी। रात में भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की दर्शन की आस पूरी होगी।</p>
<p>नागपंचमी को दोपहर 12 बजे कलेक्टर नागचंद्रेश्वर मंदिर में पूजन करेंगे। यह सरकारी पूजा होगी। यह परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। रात 8 बजे श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति द्वारा पूजन होगा।</p>
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    	</item>
		<item>
		<title>कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा क्यों करनी चाहिये ।</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/why-to-worship-family-god-51240/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Jul 2017 02:30:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा &#8211; हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुलदेवता या कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है. प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है, बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के लिए, जो बाद में उनकी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/07/family-god.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p dir="ltr">कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा &#8211; हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुलदेवता या कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है.</p>
<p dir="ltr">प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है, बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के लिए, जो बाद में उनकी विशिष्टता बन गया और जाति कहा जाने लगा । हर जाति वर्ग, किसी न किसी ऋषि की संतान है और उन मूल ऋषि से उत्पन्न संतान के लिए वे ऋषि या ऋषि पत्नी कुलदेव / कुलदेवी के रूप में पूज्य हैं ।</p>
<p dir="ltr">पूर्व के हमारे कुलों अर्थात पूर्वजों के खानदान के वरिष्ठों ने अपने लिए उपयुक्त कुल देवता अथवा कुलदेवी का चुनाव कर उन्हें पूजित करना शुरू किया था, ताकि एक आध्यात्मिक और पारलौकिक शक्ति कुलों की रक्षा करती रहे जिससे उनकी नकारात्मक शक्तियों/ऊर्जाओं और वायव्य बाधाओं से रक्षा होती रहे तथा वे निर्विघ्न अपने कर्म पथ पर अग्रसर रह उन्नति करते रहें |</p>
<p dir="ltr">समय क्रम में परिवारों के एक दुसरे स्थानों पर स्थानांतरित होने, धर्म परिवर्तन करने, आक्रान्ताओं के भय से विस्थापित होने, जानकार व्यक्ति के असमय मृत होने ,संस्कारों के क्षय होने, विजातीयता पनपने, इनके पीछे के कारण को न समझ पाने आदि के कारण बहुत से परिवार अपने कुल देवता /देवी को भूल गए अथवा उन्हें मालूम ही नहीं रहा की उनके कुल देवता /देवी कौन हैं या किस प्रकार कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा की जाती है. इनमें पीढ़ियों से शहरों में रहने वाले परिवार अधिक हैं, कुछ स्वयंभू आधुनिक मानने वाले और हर बात में वैज्ञानिकता खोजने वालों ने भी अपने ज्ञान के गर्व में अथवा अपनी वर्त्तमान अच्छी स्थिति के गर्व में इन्हें छोड़ दिया या इन पर ध्यान नहीं दिया |</p>
<p dir="ltr">कुल देवता /देवी की पूजा छोड़ने के बाद कुछ वर्षों तक तो कोई ख़ास अंतर नहीं समझ में आता, किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं, नकारात्मक ऊर्जा, वायव्य बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है, उन्नति रुकने लगती है, पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती, संस्कारों का क्षय, नैतिक पतन, कलह, उपद्रव, अशांति शुरू हो जाती हैं, व्यक्ति कारण खोजने का प्रयास करता है, कारण जल्दी नहीं पता चलता क्योकि व्यक्ति की ग्रह स्थितियों से इनका बहुत मतलब नहीं होता है, अतः ज्योतिष आदि से इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है, भाग्य कुछ कहता है और व्यक्ति के साथ कुछ और घटता है|</p>
<p dir="ltr">कुल देवता या देवी हमारे वह सुरक्षा आवरण हैं जो किसी भी बाहरी बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा के परिवार में अथवा व्यक्ति पर प्रवेश से पहले सर्वप्रथम उससे संघर्ष करते हैं और उसे रोकते हैं, यह पारिवारिक संस्कारों और नैतिक आचरण के प्रति भी समय समय पर सचेत करते रहते हैं ,यही किसी भी ईष्ट को दी जाने वाली पूजा को ईष्ट तक पहुचाते हैं, यदि इन्हें पूजा नहीं मिल रही होती है तो यह नाराज भी हो सकते हैं और निर्लिप्त भी हो सकते हैं, ऐसे में आप किसी भी ईष्ट की आराधना करे वह उस ईष्ट तक नहीं पहुँचता क्योकि सेतु कार्य करना बंद कर देता है , बाहरी बाधाये, अभिचार आदि, नकारात्मक ऊर्जा बिना बाधा व्यक्ति तक पहुचने लगती है, कभी कभी व्यक्ति या परिवारों द्वारा दी जा रही कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा कोई अन्य बाहरी वायव्य शक्ति लेने लगती है, अर्थात पूजा न ईष्ट तक जाती है न उसका लाभ मिलता है|</p>
<p dir="ltr">ऐसा कुलदेवता की निर्लिप्तता अथवा उनके कम शशक्त होने से होता है ।</p>
<p dir="ltr">कुलदेवता या देवी सम्बंधित व्यक्ति के पारिवारिक संस्कारों के प्रति संवेदनशील होते हैं और पूजा पद्धति, उलटफेर, विधर्मीय क्रियाओं अथवा पूजाओं से रुष्ट हो सकते हैं, सामान्यतया इनकी पूजा वर्ष में एक बार अथवा दो बार निश्चित समय पर होती है, यह परिवार के अनुसार भिन्न समय होता है और भिन्न विशिष्ट पद्धति होती है, शादी-विवाह-संतानोत्पत्ति आदि होने पर इन्हें विशिष्ट पूजाएँ भी दी जाती हैं.</p>
<p dir="ltr">यदि यह सब बंद हो जाए तो या तो यह नाराज होते हैं या कोई मतलब न रख मूकदर्शक हो जाते हैं और परिवार बिना किसी सुरक्षा आवरण के पारलौकिक शक्तियों के लिए खुल जाता है.</p>
<p dir="ltr">परिवार में विभिन्न तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं. अतः प्रत्येक व्यक्ति और परिवार को अपने कुल देवता या देवी को जानना चाहिए तथा यथायोग्य कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा प्रदान करनी चाहिए, जिससे परिवार की सुरक्षा -उन्नति होती रहे ।</p>
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    	</item>
		<item>
		<title>ज्योतिष के अनुसार क्या रहेंगा परिणाम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव का !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/up-uttara-khand-election-prediction-42919/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Mar 2017 06:30:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आपका भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[up uttara khand election prediction]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश और उत्तरा खंड चुनाव परिणाम]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="उत्तर प्रदेश और उत्तरा खंड चुनाव परिणाम" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />उत्तर प्रदेश &#8211; उत्तर प्रदेश और उत्तरा खंड चुनाव परिणाम &#8211; उत्तर प्रदेश में मुख्य मुकाबला समाजवार्दी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी एवं भारतीय जनता पार्टी के मध्य होने जा रहा है। चलिए ज्योतिष के अनुसार जानते है उत्तर प्रदेश और उत्तरा खंड चुनाव परिणाम &#8211; कांग्रेस का समाजवादी पार्टी से गठबंधन है। समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="उत्तर प्रदेश और उत्तरा खंड चुनाव परिणाम" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><div><strong>उत्तर प्रदेश &#8211;</strong></div>
<div></div>
<div>उत्तर प्रदेश और उत्तरा खंड चुनाव परिणाम &#8211; उत्तर प्रदेश में मुख्य मुकाबला समाजवार्दी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी एवं भारतीय जनता पार्टी के मध्य होने जा रहा है।</div>
<div></div>
<div><strong>चलिए ज्योतिष के अनुसार जानते है उत्तर प्रदेश और उत्तरा खंड चुनाव परिणाम &#8211;</strong></div>
<div></div>
<div>कांग्रेस का समाजवादी पार्टी से गठबंधन है। समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार अखिलेश यादव वर्तमान में मुख्यमंत्री है। उनका जन्म 1 जुलाई 1973 को ईटावा में हुआ था। वर्तमान में उनको बुध की महादशा चल रही है। इसी वजह से पिता के कारण उनको बड़ा पद प्राप्त हुआ। स्वयं की काबिलियत से वह यह नही  कर पाते।</div>
<div></div>
<div>उनकी राशि से गुरु अभी चतुर्थ है. यह उनके लिए एक ओर नेगेटिव बात है। गुरु उनकी कुंडली में नीच का है। बुध भी शत्रु राशि कर्क में स्थित है। उनके सहयोगी राहुल गांधी की राशि वृश्चिक से शनि निकल गया है। इसलिए मामुली सुधार हुआ है, किंतु ज्यादा सुधार की गुंजाईश अभी भी नही है। इन दोनो का गठजोड़ भी ज्यादा सफल रहे ऐसी संभावना कम ही है।</div>
<div></div>
<div>मायावती बहुजन समाज के जितने पर मुख्यमंत्री पद की दावेदार होंगी। उनकी उपलब्ध जन्म कुंडली के अनुसार उनका जन्म 15 जनवरी 1956 को हुआ था। उनको भी बुध की महादशा शुरु हो चुकी है। बुध उनका मित्र राशि में स्थित है। उनकी राशि मकर है। जिसमें शनि की साढ़ेंसाती शुुरु हो चुकी है। समय उनके लिए कुछ अनुकूल है, किंतु पूर्णत: उनके पक्ष में जायेगा ऐसा भी नही कहा जा सकता है।</div>
<div></div>
<div>भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के लिए कोई नाम घोषित नही किया है। इसलिए  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्य के अनुसार ही इस पार्टी को वोट मिलने है। प्रधानमंत्री की राशि भी वृश्चिक है, किंतु राशि स्वामी मंगल भी वृश्चिक राशि में चंद्रमा के साथ होने से उनकी स्थिति प्रबल बनी हुई है। बुध उनका उच्च का है, किंतु शनि के वृश्चिक राशि में से निकल जाने के कारण उनको भी बहुमत लायक सीटें मिले यह संभव नही दिखता।</div>
<div></div>
<div>11 मार्च 2017 शनिवार को परिणाम घोषित होंगा।</div>
<div></div>
<div>इस दिन केतु के स्वामित्व वाला मघा नक्षत्र होंगा एवं चंद्रमा सिंह राशि में होंगा।</div>
<div></div>
<div>मंगल मेष राशि में एवं शनि धनु राशि में स्थित होंगा। यह परिणाम किसी एक पार्टी के पक्ष में जाएं ऐसी संभावना नही दिखाई देती है। भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिल सकती है। सरकार बनाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ सकती है।</div>
<div></div>
<div><strong>उत्तराखंड-</strong></div>
<div></div>
<div>उत्तराखंड में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के हरीश रावत एवं भारतीय जनता पार्टी के मध्य होंगा।</div>
<div></div>
<div>हरीश रावत की राशि वृश्चिक है, एवं राहु की महादशा चल रही है। आगे यह सरकार बना पाएं यह संभव दिखाई नही देता। यहां भी भारतीय जनता  पार्टी का दबदबा बन सकता है। भारी बहुमत प्राप्त होंगा।</div>
<div></div>
<div>ये है उत्तर प्रदेश और उत्तरा खंड चुनाव परिणाम &#8211;</div>
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		    <thumbimage>https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/voting-1-150x150.jpg</thumbimage>
    	</item>
		<item>
		<title>महाशिवरात्रि पर इस तरह से करेंगे भगवान शिव की पूजा तो बसरेगी उनकी कृपा !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/maha-shivaratri-puja-vidhi-41927/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Feb 2017 02:30:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Maha Shivaratri Puja Vidhi]]></category>
		<category><![CDATA[महाशिवरात्रि]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="महाशिवरात्रि" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />देवों के देव महादेव को महाशिवरात्रि का पर्व बेहद प्रिय है. हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है जो साल में आनेवाली 12 शिवरात्रियों में सबसे श्रेष्ठ और महत्वपूर्ण है. कहते हैं इस दिन भगवान शिव की आराधना में जो भी लीन हो जाता है उसपर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="महाशिवरात्रि" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/mahashivratri-pooja.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>देवों के देव महादेव को महाशिवरात्रि का पर्व बेहद प्रिय है.</p>
<p>हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है जो साल में आनेवाली 12 शिवरात्रियों में सबसे श्रेष्ठ और महत्वपूर्ण है.</p>
<p>कहते हैं इस दिन भगवान शिव की आराधना में जो भी लीन हो जाता है उसपर भगवान शिव बेहद प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं.</p>
<p>आखिर महाशिवरात्रि का पर्व हर साल बड़े ही धूमधाम से क्यों मनाया जाता है. आखिर इस पर्व से कौन सी मान्यता जुड़ी हुई है, चलिए हम आपको बताते हैं.</p>
<p><strong>महाशिवरात्रि से जुड़ी पौराणिक मान्यता</strong></p>
<p>महाशिवरात्रि को कालरात्रि भी कहा जाता है क्योंकि शिवपुराण के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुदर्शी तिथि को रात्रि के समय भगवान शिव अग्रि स्तंभ के रूप में भगवान ब्रह्मा और विष्णु के मध्य प्रकट हुए थे.</p>
<p>कहा जाता है कि इस रात्रि को भगवान शिव ने यह आकाशवाणी की थी कि इस रात्रि को जागकर जो भी मेरे लिंग स्वरुप की पूजा-अर्चना करेगा उसे साल भर की जानेवाली पूजा का फल प्राप्त होगा और उसे समस्त सांसारिक सुखों के साथ अंत में शिवधाम में मोक्ष मिलेगा.</p>
<p>दूसरी मान्यता के मुताबिक महाशिवरात्रि को शिव पार्वती के विवाह के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है. लेकिन शिवपुराण के अनुसार शिव-पार्वती का विवाह मार्गशिर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था. इस दिन सोमवार का दिन था और चंद्र, बुध लग्र में थे तथा रोहिणी नक्षत्र था.</p>
<p>माता पार्वती से पहले भगवान शिव ने माता सती से विवाह किया था जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को हुआ था. इस दिन रविवार का दिन था और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र था.</p>
<p><strong>इस तरह से करें महाशिवरात्रि की पूजा</strong></p>
<p><strong>&#8211;</strong> महाशिवरात्रि के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें. फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर भगवान शिव की पंचोपचार या षोड़षोपचार पूजन करें.</p>
<p>&#8211; इस दिन अन्न ग्रहण ना करें, काम और क्रोध से दूर रहें. इसके अलावा चाय, कॉफी का सेवन ना करें और टीवी ना देखें. दिनभर ओम् नम: शिवाय का जाप करें.</p>
<p><strong>&#8211; </strong>भगवान शिव की पूजा उत्तर दिशा में मुंह करके करना चाहिए क्योंकि पूर्व में उनका मुख पश्चिम में पृष्ठ भाग एवं दक्षिण में वाम भाग होता है.</p>
<p><strong>&#8211;</strong> शिव पूजन से पहले मस्तक पर चंदन अथवा भस्म का त्रिपुंड लगाना चाहिए. शिलविंग की पूजा से पहले उसपर जो भी चढ़ा हुआ है उसे साफ कर लेना चाहिए. हालांकि बिल्वपत्र को धोकर वापस पूजा के उपयोग में लाया जा सकता है.</p>
<p><strong>&#8211;</strong> रात्रि का प्रथम प्रहर शाम ६ बजे से शुरु होता है इस दौरान शिव का षोड़षेापचार पूजन करें. इस समय गन्ने के रस से अभिषेक करने से सभी प्रकार के भोग और सुख की प्राप्ति होती है.</p>
<p><strong>&#8211;</strong> रात्रि को नौ बजे दूसरा प्रहर शुरु होता है इस दौरान भगवान शिव का दही से अभिषेक करें. इससे भगवान शिव शिव की कृपा के साथ धन की प्राप्ति होती है.</p>
<p><strong>&#8211; </strong>रात्रि को बारह बजे तीसरा प्रहर शुरू होता है इस दौरान भगवान शिव का दूध से अभिषेक करें. ऐसा करने से शिव प्रसन्न होते हैं और स्वर्ण की प्राप्ति होती है.</p>
<p><strong>&#8211;</strong> रात्रि के तीन बजे से चौथे और अंतिम प्रहर की शुरूआत होती है. इस दौरान पूजन करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्त को भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करते हैं.</p>
<p><strong>&#8211; </strong>शिव पूजन के दौरान इस बात का खास ख्याल रखें कि हर अभिषेक के बाद भगवान शिव की आरती जरूर होनी चाहिए. अंतिम प्रहर की पूजा पूरी करने के बाद सुबह किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर फिर अपना व्रत पूर्ण करें.</p>
<p>गौरतलब है कि महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव का सबसे प्रिय पर्व है इसलिए इस दिन बताए गए विधि-विधान से पूजन करके आप भगवान शिव की असीम कृपा पा सकते हैं.</p>
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    	</item>
		<item>
		<title>भगवान शिव की इन आठ मूर्तियों में समाया है पूरा संसार !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/8-faces-of-lord-shiva-41935/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Feb 2017 02:30:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शिव के रूप]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="रुद्राक्ष धारण करने के फायदे" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />भगवान शिव के रूप &#8211; जिस तरह से धागे में कई सारी मोतियों को पिरोकर एक माला बनाई जाती है ठीक उसी तरह से भगवान शिव की अलग-अलग अष्ट मूर्तियों में सारा संसार समाया हुआ है. हिंदू धर्म के अनुसार भगवान शिव इस संसार में आठ अलग-अलग रुपों में विराजते हैं. अगर भगवान शिव आपके [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="रुद्राक्ष धारण करने के फायदे" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/lord-shiva.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>भगवान शिव के रूप &#8211; जिस तरह से धागे में कई सारी मोतियों को पिरोकर एक माला बनाई जाती है ठीक उसी तरह से भगवान शिव की अलग-अलग अष्ट मूर्तियों में सारा संसार समाया हुआ है.</p>
<p>हिंदू धर्म के अनुसार भगवान शिव इस संसार में आठ अलग-अलग रुपों में विराजते हैं. अगर भगवान शिव आपके आराध्य देव हैं तो फिर उनके इन आठ रुपों के बारे में आपको पता होना चाहिए.</p>
<p>तो चलिए हम आपको रूबरू कराते हैं भगवान शिव की इन आठ मूर्तियों से, जिनमें सारा संसार समाया हुआ है.</p>
<p><strong>भगवान शिव के रूप</strong></p>
<p>इस विश्व में भगवान शिव आठ अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं और वो भगवान शिव के रूप<strong> </strong>हैं- शर्व, रूद्र, उग्र, भीम, ईशान, पशुपति, भव और महादेव.</p>
<p>भगवान शिव की इन आठ मूर्तियों में भूमि, जल, अग्नि, वायु, आकाश, क्षेत्रज्ञ, सूर्य और चंद्रमा समाहित है.</p>
<p><strong>1 &#8211; शर्व</strong></p>
<p><strong> </strong>शर्व रूप में भगवान शिव पूरे जगत को धारण करते हैं और इसलिए शर्व रूप को पृथ्वीमयी मूर्ती से दिखाया जाता है. भगवान शिव का ये रूप भक्तों को सांसारिक दुखों से बचाकर रखता है.</p>
<p><strong>2 &#8211; </strong><strong>रूद्र</strong></p>
<p>रूद्र रूप में भगवान शिव को अत्यंत ओजस्वी माना जाता है जिसमें इस संसार की समस्त ऊर्जा केंद्रित है. इस रूप में भगवान शिव जगत में फैली दुष्टता पर नियंत्रण रखते हैं.</p>
<p><strong>3 &#8211; उग्र</strong></p>
<p>वायु रूप में शिव को उग्र नाम से जाना जाता है. इस रुप में भगवान शिव संसार के सभी जीवों का पालन-पोषण करते हैं. शिवजी का तांडव नृत्य भी उग्र रूप में ही आता है.</p>
<p><strong>4 &#8211; भीम</strong></p>
<p>भीम रूप भगवान शिव की आकाशरूपी मूर्ती का नाम है जिसकी अराधना से तामसी गुणों का नाश होता है. भीम रूप में शिव के देह पर भस्म, जटाजूट, नागों की माला होती है और उन्हें बाघ की खाल पर विराजमान दिखाया जाता है.</p>
<p><strong>5 &#8211; ईशान</strong></p>
<p>ईशान रूप में भगवान शिव की सूर्य रुपी मूरत दिखाई देती है. इस रूप में भगवान शिव को ज्ञान और प्रकाश देने वाला माना गया है.</p>
<p><strong>6 &#8211; पशुपति</strong></p>
<p>जो समस्त क्षेत्रों का निवास स्थान है वह भगवान शिव का पशुपति रुप है. दुर्जन व्यक्तियों का नाश कर विश्व को उनसे मुक्त करने का भार भगवान के इस रूप पर है. इस रूप में प्रभु सभी जीवों के रक्षक बताए गए हैं.</p>
<p><strong>7 &#8211; भव</strong></p>
<p>भव रूप में शिव जल से युक्त होते हैं और वे जल के रुप में जगत को प्राणशक्ति प्रदान करते हैं. शिव को भव के रूप में पूरे संसार का पर्याय माना गया है.</p>
<p><strong>8 &#8211; महादेव</strong></p>
<p>चंद्र रूप में भगवान शिव की मूरत को महादेव कहा गया है. महादेव नाम का अर्थ है देवों के देव, यानी सारे देवताओं में सबसे विलक्षण स्वरूप व शक्तियों के स्वामी भगवान शिव ही हैं.</p>
<p>ये है भगवान शिव के रूप &#8211; गौरतलब है कि भगवान शिव ही इन अष्ट मूर्तियों के रुप में समस्त संसार के प्राणीयों में स्थित हैं. इसलिए संसार के किसी भी प्राणी को कष्ट पहुंचाना भगवान शिव को कष्ट पहुंचाने के समान है.</p>
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    	</item>
		<item>
		<title>जीवन की हर बाधा को दूर कर चमत्कारी शक्तियाँ प्रदान करता है ये रुद्राक्ष !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/benefits-of-wearing-rudraksh-41929/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Feb 2017 02:30:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[रुद्राक्ष धारण करने के फायदे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="रुद्राक्ष धारण करने के फायदे" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />रुद्राक्ष धारण करने के फायदे &#8211; कहा जाता है कि भगवान शिव एकमात्र ऐसे देव हैं जो आसानी से अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैं. भगवान भोलेनाथ इतने भोले हैं कि जो भी उन्हें मन से याद करता है वे उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं. जो कोई भी भगवान शिव के चरणों में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="रुद्राक्ष धारण करने के फायदे" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/02/Rudraksh.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>रुद्राक्ष धारण करने के फायदे &#8211; कहा जाता है कि भगवान शिव एकमात्र ऐसे देव हैं जो आसानी से अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैं.</p>
<p>भगवान भोलेनाथ इतने भोले हैं कि जो भी उन्हें मन से याद करता है वे उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं.</p>
<p>जो कोई भी भगवान शिव के चरणों में अपने शीश झुकाता है भगवान उसके जीवन की हर बाधा हर परेशानी को दूर करते हैं क्योंकि वे अपने भक्तों का कभी कोई अमंगल नहीं होने देते हैं.</p>
<p>भगवान शिव की तरह ही रुद्राक्ष भी इंसान के जीवन की हर बाधा को दूर करके चमत्कारी शक्तियां प्रदान करता है. आखिर ये रुद्राक्ष है क्या, इसकी उत्पत्ति कैसे हुई और इससे धारण करने से क्या लाभ होता है. ये सारी बातें हम आपको बताते हैं.</p>
<p><strong>भगवान शिव के आंसूओं से बना है रुद्राक्ष</strong></p>
<p>पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव कई सालों तक तपस्या में लीन रहे. तपस्या के पश्चात जब शिव ने अपनी आंखे खोली तो उनकी आंखों में से आंसू की कुछ बूंदे धरती पर गिरी. जहां पर ये आंसू गिरे थे वहां पर एक रुद्राक्ष का पेड़ बन गया.</p>
<p>भगवान शिव के आंसू कहे जानेवाले रुद्राक्ष 14 प्रकार के होते हैं, जिनमें से हर एक रुद्राक्ष व्यक्ति की अलग-अलग इच्छाओं को पूरा करने की चमत्कारिक शक्ति अपने आप में समेटे हुए है.</p>
<p>रुद्राक्ष आकार में जितना छोटा होता है उतना ही प्रभावशाली होता है. इसे पूरे विधि-विधान और शिव के आशीर्वाद के साथ धारण करना चाहिए.</p>
<p>आइए जानते हैं किस रुद्राक्ष को किस मंत्र के साथ धारण करना चाहिए और रुद्राक्ष धारण करने के फायदे &#8211;</p>
<p><strong>रुद्राक्ष धारण करने के फायदे और मंत्र</strong></p>
<p><strong>1- </strong><strong>एक मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>लक्ष्मी प्राप्ति के साथ ही भोग और मोक्ष की कामना करनेवालों को एकमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए और इसे धारण करने का मंत्र है <strong>ऊँ ह्रीं नम:</strong></p>
<p><strong>2- दो मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>समस्त कामनाओं की पूर्ति के लिए दो मुखी रुद्राक्ष धारण करना फायदेमंद होता है. इसे धारण करते वक्त <strong>ऊँ नम:</strong> मंत्र बोलना चाहिए.</p>
<p><strong>3- तीन मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>ज्ञान और विद्या की प्राप्ति के लिए तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है और इसे धारण करने का मंत्र है <strong>ऊँ क्लीं नम:</strong></p>
<p><strong>4- चार मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पाने की इच्छा रखनेवालों के लिए चार मुखी रुद्राक्ष बेहतर परिणाम देता है. इस रुद्राक्ष को <strong>ऊँ ह्रीं नम:</strong> मंत्र के साथ धारण करना चाहिए.</p>
<p><strong>5- पांच मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>सारी परेशानियों से मुक्ति और मनोवांछित फल पाने के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए और इसे धारण करने का मंत्र है <strong>ऊँ ह्रीं नम:</strong></p>
<p><strong>6- छ: मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>समस्त पापों से मुक्ति पाने के लिए छ: मुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभदायक होता है. इस रुद्राक्ष को <strong>ऊँ ह्रीं ह्रुं नम: </strong>मंत्र के साथ धारण करना चाहिए.</p>
<p><strong>7- सात मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाला दरिद्र व्यक्ति भी ऐश्वर्यशाली और संपत्तिशाली होता है. इस रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र है <strong>ऊँ हुं नम:</strong></p>
<p><strong>8- आठ मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>जो इंसान लंबी आयु पाने की इच्छा रखता है उसे आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए. इसे धारण करने का मंत्र है <strong>ऊँ हुं नम:</strong></p>
<p><strong>9- नौ मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>अपने जीवन में समस्त कामनाओं की पूर्ति के लिए नौ मुखी रुद्राक्ष को बाएं हाथ में धारण करना चाहिए और इसे धारण करने का मंत्र है <strong>ऊँ ह्रीं ह्रुं नम:</strong></p>
<p><strong>10- दस मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>संतान प्राप्ति की कामना करनेवाले व्यक्ति को दसमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए और इसे <strong>ऊँ ह्रीं नम:</strong> मंत्र के साथ धारण करना चाहिए.</p>
<p><strong>11- ग्यारह मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>हर कार्य हर क्षेत्र में सफलता पाने के लिए ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए और इसे धारण करने का मंत्र है <strong>ऊँ ह्रीं ह्रुं नम:</strong></p>
<p><strong>12- बारह मुखी रुद्राक्ष</strong></p>
<p>किसी बीमारी या रोग से उबरने के लिए बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए यह रोगों में लाभ पहुंचाता है. इस रुद्राक्ष को <strong>ऊँ क्रौं क्षौं रौं नम:</strong> मंत्र के साथ धारण करना चाहिए.</p>
<p><strong>13- तेरह मुखी</strong></p>
<p>सौभाग्य एवं मंगल की प्राप्ति के लिए तेरह मुखी रुद्राक्ष को उत्तम माना गया है. इसे धारण करने का मंत्र है <strong>ऊँ ह्रीं नम:</strong></p>
<p><strong>14- चौदह मुखी</strong></p>
<p>समस्त पापों के नाश के लिए चौदह मुखी रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए. इस रुद्राक्ष को <strong>ऊँ नम:</strong> मंत्र के साथ धारण करना चाहिए. इसके अलावा एक गौरीशंकर रुद्राक्ष भी होता है जो सभी प्रकार के सुखों को प्रदान करने वाला होता है.</p>
<p>ये है रुद्राक्ष धारण करने के फायदे &#8211; शिवपुराण के अनुसार हर कोई रुद्राक्ष को धारण कर सकता है. लेकिन जिसमें पिरोने योग्य छेद ना हो, टूटा हुआ हो या फिर जिसे कीड़े ने खा लिया हो उस रुद्राक्ष को धारण नहीं करना चाहिए.</p>
<p>अगर आप भी अपने जीवन की हर बाधा को दूर कर चमत्कारी शक्तियां पाना चाहते हैं तो इस महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रुद्राक्ष को धारण जरूर करें.</p>
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		<title>मकर संक्रांति &#8211; मकर संक्रांति देवताओं का प्रभात काल है !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/makar-sankranti-14-january-38731/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Jan 2017 02:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[मकर संक्रांति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="मकर संक्रांति" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />दिनांक 14 जनवरी 2017  शनिवार से दाेपहर 1 बजकर 55 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा एवं खरमास की समाप्ति भी हो जाएगी। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर संक्रांति कहलाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। सूर्य कर्क राशि में आने तक उत्तरायण रहेगा यह देवताओं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="मकर संक्रांति" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/makar-sankranti.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><div>दिनांक 14 जनवरी 2017  शनिवार से दाेपहर 1 बजकर 55 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा एवं खरमास की समाप्ति भी हो जाएगी।</div>
<div></div>
<div>सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर संक्रांति कहलाता है।</div>
<div></div>
<div>इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। सूर्य कर्क राशि में आने तक उत्तरायण रहेगा यह देवताओं को एक दिन एवं कर्क से धनु तक देवताओं की रात होती है।</div>
<div></div>
<div>मकर संक्रांति देवताओं का प्रभात काल है इस दिन स्नान, जाप, दान, श्राद्ध, पूजनादि का विशेष महत्व है। इस दिन घृत, कंबल, पादुकाएं आदि का दान दिया जाता है। यह दान संपूर्ण भोग एवं मोक्ष को देने वाला होता है।</div>
<div></div>
<div>मकर संक्रांति पर्व को देश के विभिन्न हिस्सों में अलग नामों एवं तरीके से मनाया जाता है. उत्तर प्रदेश में इसको खिचडी कहते है एवं तिल के साथ खिचडी का दान दिया जाता है।</div>
<div></div>
<div>महाराष्ट्र में विवाहित स्त्रियाँ पहली मकर संक्रांति पर तेल, कपास, नमकादि वस्तुएं सौभाग्यवती स्त्रीयों को दान करती है। बंगाल में भी स्नान कर तिल का दान दिया जाता है एवं दक्षिण में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है। असम में इस दिन बिहू का पर्व मनया जाता है। राजस्थान में सौभाग्यवती स्त्रीयां अपनी सास को तिल, तिल के लड्डु, घेवर, आदि का दान करती है। पंजाब एवं जम्मू कश्मिर में इसको लोहिड़ी के नाम से मनाया जाता है।</div>
<div></div>
<div>कथा के अनुसार इस दिन गोकुल में भगवान कृष्ण ने खेल ही खेल में लोहिता नामक राक्षसी का अंत किया था। इसलिए भी लोहिडी पर्व मनाया जाता है। गुजरात एवं महाराष्ट्र में कई खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन इस दिन होता है।</div>
<div></div>
<div>इस दिन से शीत का प्रकोप कम होने लगता है एवं धिरे-धिरे दिन बडे होने लगते है।</div>
<div></div>
<div>तिल के दान का इस दिन बडा महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन से सूर्य की गति तिल-तिल बढती है। सूर्य उर्जा का स्रोत है। इस दिन से दिन बडे होने लगते है एवं सूर्य की रश्मियाें का ज्यादा प्रभाव पृथ्वी को मिलने लगता है।</div>
<div></div>
<div>इससे प्राणी जगत की चेतना एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होती जाती है। इसलिए भी इस मकर संक्रांति पर्व को मनाने का विशेष महत्व है।</div>
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    	</item>
		<item>
		<title>पौष शुक्ल पक्ष &#8211; यह समय आरोग्य प्राप्ति के लिए अत्यंत लाभकारी होता है !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/posh-shukl-paksh-38729/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Jan 2017 02:30:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आपका भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पौष शुक्ल पक्ष]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="पौष शुक्ल पक्ष" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />इस बार 30/12/2016 से पौष शुक्ल पक्ष का आरंभ होंगा। इस समय मे सूर्य धनु की संक्रांति में रहता है। धनु गुरू की स्वामित्व वाली राशि होती है। सूर्य का धनु राशि में यानि अपने गुरू की राशि में होने से यह अत्यंत लाभकारी समय हो जाता है। पौष शुक्ल पक्ष का समय कई प्रकार [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="पौष शुक्ल पक्ष" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/panchang.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>इस बार 30/12/2016 से पौष शुक्ल पक्ष का आरंभ होंगा।</p>
<p>इस समय मे सूर्य धनु की संक्रांति में रहता है। धनु गुरू की स्वामित्व वाली राशि होती है। सूर्य का धनु राशि में यानि अपने गुरू की राशि में होने से यह अत्यंत लाभकारी समय हो जाता है।</p>
<p>पौष शुक्ल पक्ष का समय कई प्रकार से लाभ देने वाला है एवं पुराणों में इसके बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है।</p>
<p>आरोग्य प्राप्ति के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ होता है। विशेषकर पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि जो 31/12/2016 को होगी।</p>
<p>विष्णुधर्माेत्तरपुराण में वर्णन है कि इस दिन पौष शुक्ल पक्ष में व्रत करने से एवं गाय के सिंग को धोए जल से स्नान करके एवं सफेद वस्त्र धारण कर सूर्यास्त के समय द्वितीया के चंद्रमा का गंधादि से पूजन करके एवं जबतक चंद्रास्त न हो तब तक गुड़, दही, नमकादि से ब्राह्म्णों को संतुष्ट कर एवं स्वयं छाछ का सेवन करने से तथा इस दिन से आंरभ कर पूरे वर्षपर्यन्त मार्गशीर्ष की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तक ऐसे ही करने से एवं इस तिथि को जमीन पर शयन करने से समस्त प्रकार के रोगों को अंत हो जाता है।</p>
<p>आने वाले जन्मों भी कोई बडा जानलेवा रोग नही होता है।</p>
<p>इस पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मार्तण्ड सप्तमी कहा जाता है। इस दिन भी भगवान सूर्य के निमित्त हवन करने से एवं गौदान करने से वर्षभर उत्तम फलों की प्राप्ति होती है।</p>
<p>इसी माह की पौष शुक्ल पक्ष की तिथि पुत्रदा एकादशी तिथि होती है।</p>
<p>इस तिथि पर व्रत करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। शुक्ल त्रयोदशी को घृत का दान करने से भगवान मधुसूदन की प्रसन्नता प्राप्त होती है। माघमास का आरंभ भी पौष की पूर्णीमा से होता है।</p>
<p>केवल इसी दिन किसी पवीत्र नदी में स्नान करने से एवं भगवान विष्णु को पूजन करने से सभी वैभव एवं दिव्य लोक की प्राप्ति कराने वाला होता है।</p>
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    	</item>
		<item>
		<title>शनि के राशि परिवर्तन से होनेवाला है इन राशियों को फायदा !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/saturn-enters-in-dhanu-39791/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jan 2017 08:30:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आपका भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शनि का राशि परिवर्तन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="शनि का राशि परिवर्तन" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />शनि का राशि परिवर्तन &#8211; नवग्रहों में दंडाधिकारी ग्रह शनि का आगामी 27 जनवरी 2017 से धनु राशि में परिवर्तन हो रहा है. जाहिर है शनि का यह राशि परिवर्तन कुछ राशियों के लिए शुभ फलदायक होगा तो कुछ लोगों के लिए यह कष्टदायक भी हो सकता है. तो आइए जानते हैं शनि का राशि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="शनि का राशि परिवर्तन" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>शनि का राशि परिवर्तन &#8211; नवग्रहों में दंडाधिकारी ग्रह शनि का आगामी 27 जनवरी 2017 से धनु राशि में परिवर्तन हो रहा है. जाहिर है शनि का यह राशि परिवर्तन कुछ राशियों के लिए शुभ फलदायक होगा तो कुछ लोगों के लिए यह कष्टदायक भी हो सकता है.</p>
<p>तो आइए जानते हैं शनि का राशि परिवर्तन किस किस राशी पर  कैसे कैसा प्रभाव पड़नेवाला है.</p>
<p>शनि का राशि परिवर्तन &#8211;</p>
<p><strong>1 &#8211; मेष</strong></p>
<p>मेष राशि में नवम शनि यानी शनि की ढ़ैय्या का अंत हो गया है. इस राशिवालों के लिए शनि का यह राशि परिवर्तन हर तरह से अनुकूल और स्वास्थ्य प्रदान करनेवाला है.</p>
<p>आपका आलस्य समाप्त होगा और सभी कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे. अच्छी आय के साथ ही तरक्की के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं. यह समय बेरोजगारों के लिए काफी अनुकूल है क्योंकि उन्हें रोजगार के सुनहरे अवसर प्राप्त होंगे.</p>
<p>उपाय- हनुमानजी को घी का दीपक अर्पण करें.</p>
<p><strong>2 &#8211; वृषभ</strong></p>
<p>वृषभ राशि में शनि अष्टम होगा इसके साथ ही इस राशि पर शनि की ढ़ैया का प्रभाव देखने को मिलेगा. शनि के इस राशि परिवर्तन से वृषभ राशि वालों को जरा संभलकर रहने की जरूरत है.</p>
<p>इस दौरान किसी भी तरह के विवाद से खुद को दूर रखें. वाहन चलाते वक्त सावधानी बरतें और जोखिम भरे कामों में हाथ डालने से बचें. पूंजी-निवेश करने और किसी को उधार देने से बचें.</p>
<p>उपाय- हनुमानजी और गणेशजी की सेवा करें.</p>
<p><strong>3 &#8211; मिथुन</strong></p>
<p>मिथुन राशि से सप्तम शनि इस राशि को किसी भी तरह के बुरे प्रभाव से बचाएगा. शनि का यह राशि परिवर्तन मिथुन राशि के लिए हर तरह से अनुकूल रहेगा और यह समय धन लाभ के साथ किसी बड़ी मुसीबत से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होगा.</p>
<p>आपकी योजनाएं फलीभूत होंगी और जिन लोगों की शादी में देरी हो रही है. शनि का यह राशि परिवर्तन उन लोगों का विवाह कराने में भी सहायक सिद्ध होगा.</p>
<p>उपाय- बुजुर्गो को कोई उपहार भेंट करें.</p>
<p><strong>4 &#8211; कर्क</strong></p>
<p>कर्क राशि में षष्ठम एवं मित्र शनि सम्मान आपको दिलवाएगा और यह आपको कई कार्यो को करने के लिए सक्षम भी बनाएगा.</p>
<p>नौकरी के लिए अच्छे अवसर प्राप्त होंगे और आपके वर्तमान कार्यों में भी तेजी आएगी. धन के आगमन के लिए नए स्रोत खुलेंगे. परिवार में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा और आपके सभी बिगड़े काम भी बनेंगे.</p>
<p>उपाय- गणेशजी की सेवा करें.</p>
<p><strong>5 &#8211; सिंह</strong></p>
<p>शनि का यह राशि परिवर्तन सिंह राशि के लिए काफी राहत लेकर आ रहा है. इस राशि से शनि के ढ़ैय्या का प्रभाव खत्म होगा और करीब 27 महिनों बाद इस राशि के लोग राहत महसूस करेंगे.</p>
<p>इस परिवर्तन से आपको मानसिक शांति प्राप्त होगी और तबीयत में सुधार आएगी. आलस्य से आप पीछा छुड़ा सकेंगे साथ ही रुके हुए कार्य तेजी से आगे बढ़ने लगेंगे और आय में आ रही तमाम बाधाएं भी समाप्त हो जाएंगी. कुल मिलाकर यह समय आपके लिए बहुत अच्छा साबित होनेवाला है.</p>
<p>उपाय- छोटे बच्चों में मिठाई बांटे.</p>
<p><strong>6 &#8211; कन्या</strong></p>
<p>शनि का राशि परिवर्तन कन्या राशिवालों को संयम बरतने की सलाह दे रहा है. इस राशि में चतुर्थ शनि यानी शनि की ढै़य्या शुरू होने जा रही है. इसलिए आपको अगले 27 माह तक खुद को संभालना होगा.</p>
<p>इस दौरान क्रोध पर नियंत्रण रखें और जोश में आकर कोई कार्य ना करें. आपकी जिद आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है. आय के माध्यमों को शनि बाधित करने का प्रयास करेगा और आपको बचत करने में भी परेशानी होगी.</p>
<p>उपाय- हनुमानजी की सेवा से लाभदायक सिद्ध होगी.</p>
<p><strong>7 &#8211;  तुला</strong></p>
<p>तुला राशि में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव समाप्त हो जाएगा एवं खुशी के मौके प्राप्त होगें. ऐसा लगेगा जैसे आपके सिर से कोई बड़ा बोझ उतर गया है.</p>
<p>आपको अपने अंदर एक नई ऊर्जा और जोश का एहसास होगा. घर-परिवार में खुशियां आएंगी और आय के स्रोतों से फायदा मिलेगा. रुके हुए कार्य पूरे होंगे और नए वाहन, मकान की प्राप्ति हो सकती है.</p>
<p>उपाय- गणेशजी को भोग अर्पण करें.</p>
<p><strong>8 &#8211; वृश्चिक</strong></p>
<p>वृश्चिक राशि पिछले कई दिनों से शनि से प्रताड़ित चल रही है. फिलहाल इस राशि पर साढ़ेसाती का असर बना हुआ है लेकिन ये उतरती हुई साढ़ेसाती है. जो आपके लिए लाभदायक है.</p>
<p>शनि के राशि परिवर्तन से आपकी पिछली परेशानियों का अंत होगा और आपके कई कार्य बिना किसी रुकावट के पूरे होंगे. इस दौरान आपकी परेशानियों का अंत होगा और लाभ के रास्ते खुलेंगे.</p>
<p>उपाय- हनुमानजी की उपासना जारी रखें और सभी का आदर करें.</p>
<p><strong>9 &#8211; धनु</strong></p>
<p>धनु राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव पहले से ही है और इस राशि में शनि का प्रवेश हो रहा है. धनु राशिवालों के लिए यह समय बेहद सावधानी से चलने का है.</p>
<p>विवादों को टालें और अपनी भाषा पर संयम रखें. किसी भी तरह के निवेश से दूरी बनाएं और किसी भी काम को करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना ना भूलें. आपको सावधान रहने की सलाह दी जाती है.</p>
<p>उपाय- महीने में एक शनिवार को हनुमानजी को चोला चढ़ाएं.</p>
<p><strong>10- मकर</strong></p>
<p>मकर राशि में द्वादश शनि का साढ़ेसाती का प्रभाव आरंभ हो चुका है. हालांकि शनि ही इस राशि के स्वामी हैं फिर भी आपको सचेत रहने की सलाह दी जाती है.</p>
<p>जब तक कोई ठोस आधार न हो जमीन, मकानादि में धन नही लगाएं. निवेश में भी सावधानी रखें. उद्योग और व्यवसाय की स्वयं देखभाल करें. मीठी वाणी का प्रयोग करें एवं सभी का सम्मान करें.</p>
<p>उपाय- हनुमानजी के सामने हर शनिवार तेल का दीपक जलाएं.</p>
<p><strong>11- कुंभ</strong></p>
<p>एकादश शनि एवं स्वयं राशि स्वामी होने से आपको सभी प्रकार की खुशियां मिलेगी. आपके कार्य के मार्ग में आनेवाली सारी बाधाएं दूर होगी और धन लाभ भी होगा.</p>
<p>इस काल में आपकों सभी अच्छे कार्यो की ओर ध्यान देना चाहिए क्योंकि 27 महिनों बाद साढ़ेसाती का प्रभाव इस राशि पर आएगा.</p>
<p>उपाय- सभी का आदर सम्मान करें और दान दें.</p>
<p><strong>12- मीन</strong></p>
<p>शनि के राशि परिवर्तन से मीन राशिवालों को लाभ ही होगा और किसी प्रकार के नुकसान की संभावना भी नही है.</p>
<p>इस राशि के लिए सभी योग अच्छे बने हुए हैं. परिवार से वैचारिक मतभेद समाप्त होगा एवं माता से स्नेह प्राप्त होगा. संतान अनुकूल रहेगी. न्यायालयीन कार्यो में सफलता मिलेगी.</p>
<p>उपाय- सोमवार के दिन शिवलिंग पर दूध से अभिषेक करें.</p>
<p>ये था शनि का राशि परिवर्तन और उससे होनेवाले फायदे. गौरतलब है कि राशि के अनुसार दिए गए इन उपायों को करके आप शनि का राशि परिवर्तन आनेवाले कष्टों से मुक्ति दिला सकते हैं.</p>
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		    <thumbimage>https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/01/shani-dev-150x150.jpg</thumbimage>
    	</item>
		<item>
		<title>एकादशी का व्रत &#8211; भगवान कृष्ण की प्रसन्नता प्राप्त कराने वाला व्रत माना जाता है</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/ekadashi-ka-vrat-fasting-38783/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Dec 2016 02:30:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[एकादशी तिथि]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="एकादशी तिथि" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />प्रतिपदा से लेकर पूनम तक पंद्रह तिथियां शुक्ल पक्ष की होती है। पुन: प्रतिपदा से लेकर अमावस्य तक पंद्रह तिथियां कृष्ण पक्ष की होती है। इन दाेनों पक्षों को  मिलाकर एक माह होता है। इन तिथियों के एक-एक स्वामी भी होते है। इन दो पक्षो में दो बार एकादशी तिथि आती है। जिसक स्वामी विश्वेदेव [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="एकादशी तिथि" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/ekadashi.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><div>प्रतिपदा से लेकर पूनम तक पंद्रह तिथियां शुक्ल पक्ष की होती है।</div>
<div></div>
<div>पुन: प्रतिपदा से लेकर अमावस्य तक पंद्रह तिथियां कृष्ण पक्ष की होती है।</div>
<div></div>
<div>इन दाेनों पक्षों को  मिलाकर एक माह होता है। इन तिथियों के एक-एक स्वामी भी होते है।</div>
<div></div>
<div>इन दो पक्षो में दो बार एकादशी तिथि आती है। जिसक स्वामी विश्वेदेव होते है। इस तिथि पर व्रत करने का बड़ा महत्व हमोर शास्त्रों मे ंवर्णीत है। इन दिन अन्न का सेवन करना तो क्या दर्शन करना भी  निषेध माना गया है। इसी को एकादशी तिथि का व्रत या ग्यारस का व्रत कहते हे। यह व्रत बड़ा पवित्र माना गया है। भगवान कृष्ण की प्रसन्नता प्राप्त कराने वाला इसको माना जाता है।</div>
<div></div>
<div>शरीर में शास्त्रों के अनुसार पांच ज्ञान की -आंखे, कान, नाक, त्वचा, जिह्वा एवं पांच कर्म की हाथ, पैर, मुंह, गुदा एवं मूत्र द्वार यह दस इन्द्रियां बताई गई है। इसके अलावा एक होता है मन इस तरह दस इन्द्रिय एवं एक मन मिलाकर ग्यारहों पर नियंत्रण करने के लिए ही एकादशी तिथि का व्रत किया जाता है।</div>
<div></div>
<div>इस एकादशी तिथि के स्वामी विश्वेदेवा होते है। श्रीकृष्ण से संबंधीत कथाएं सुनने एवं उनके दर्शन करने से इस व्रत में बड़ा लाभ होता है।  इस व्रत का प्रांरभ एक दिन पूर्व शाम से ही आरंभ हो जाता है। दशमी तिथि की शाम को कुछ भी भोजन ग्रहण नही  किया जाता । अगले  दिन सुबह जल्दी उठकर भगवान श्रीकृ़ष्ण का विधि पूर्वक पूजनकर व्रत का  नियम लिया जाता है।</div>
<div></div>
<div>इस दिन किसी भी प्रकार के अन्न का सेवन त्याग करना होता है।</div>
<div></div>
<div>अगले दिन द्वादशी तिथि को सुबह ब्राह्मण को भोजन करा कर पूर्णत: संतुष्ट कर फिर आहार ग्रहण  किया जाता है।</div>
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    	</item>
		<item>
		<title>ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक यह योग मंत्रीपद दिलाता है !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/ruchak-yog-makes-one-minister-38786/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Dec 2016 09:30:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आपका भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[रुचक योग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="रुचक योग" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />मंगल अपनी राशि का होकर या मूल त्रिकोण अथवा उच्च का होकर केंद्र में हो तो रुचक योग होता हैं। इस रुचक योग मे जन्म लेने वाला व्यक्ति शारीरिक रुप से बलवान है। अपने कार्यो से वह संसार में प्रसिद्ध होता है तथा स्वयं के अतिरिक्त देश का नाम भी उंचा करता हैं। वह स्वयं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="रुचक योग" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><div>मंगल अपनी राशि का होकर या मूल त्रिकोण अथवा उच्च का होकर केंद्र में हो तो रुचक योग होता हैं।</div>
<div></div>
<div>इस रुचक योग मे जन्म लेने वाला व्यक्ति शारीरिक रुप से बलवान है।</div>
<div></div>
<div>अपने कार्यो से वह संसार में प्रसिद्ध होता है तथा स्वयं के अतिरिक्त देश का नाम भी उंचा करता हैं। वह स्वयं राजा होता हैं या पूर्ण जीवन राजा की तरह व्यय करता हैं। अपनी संस्कृति के प्रति वह आस्थावान होता  हैं तथा देश की उन्नति के लिए प्रयास करता हैं। वह भावना से युक्त होता हैं एवं उसके साथ कई लोग एक साथ रहते हैं। उसके मित्र सच्चे होते हैं एवं चरित्र उज्जवल होता हैं।</div>
<div></div>
<div>वह कभी भी धन का अभाव महसूस नही करता एवं प्रलोभन उसे पिघला नही सकते। वह उच्च अधिकारी बनने की योग्यता रखता हैं तथा यदि वह राजनीति में हो तो मंत्रीपद दिलाता है या मुख्यमंत्री बनने तक का माद्द रखता हैं।</div>
<div></div>
<div>यह यहां ध्यान रखने योग्य है कि मंगल 10 से 25 डीग्री अंश के मध्य होना चाहिए किंतु यदि 10 से कम एवं पच्चीस से ज्यादा अंश होने पर रुचक योग होने पर भी पूर्ण फल प्राप्त नही होता।</div>
<div></div>
<div>यह रुचक योग भी तभी कार्य करता  हैं, जब मंगल पूर्ण बलिष्ठ होकर कार्य करें।</div>
<div></div>
<div>कभी कभी यह देखने में आता है कि मंगल उच्च का होने के बावजूद रुचक योग फल नही  दे पाता ।</div>
<div></div>
<div>इसका कारण मंगल का अष्टम् या षष्ठम होना होता है। इसके अलावा मंगल यदि भाग्य स्थान का स्वामी होकर केंद में उच्च का हो जाएं तो जातक निश्चित कोई  बहुत बड़ा राजनीतिक पद प्राप्त करता है।</div>
<div></div>
<div>इस रुचक योग में जातक की कुंडली में यदि मंगल उच्च का होकर नवांश में आ जाए तो उसको बड़े सरकारी लाभों को प्राप्त करता है।</div>
<div></div>
<div>गुरु की ये युक्त हो या नवांश में गुरु से युक्त या दृष्टि हो जाएं तो विदेश मे सफलता अर्जीत करता है।</div>
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		    <thumbimage>https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/minister-150x150.jpg</thumbimage>
    	</item>
		<item>
		<title>ईसा मसीह ने समस्त मानव जाति का कल्याण करने के लिए जन्म लिया था।</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/25-december-jesus-christ-born-38727/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Dec 2016 12:19:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[ईसा मसीह]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="ईसा मसीह" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />प्रतिवर्ष 25 दिसम्बर को विश्वभर में मनाया जाने पर्व क्रिसमस ईसाई समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार है और संभवतः सभी त्यौहारों में क्रिसमस ही एकमात्र ऐसा पर्व है, जो एक ही दिन दुनियाभर के हर कोने में पूरे उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है। ईसाई समुदाय के लोग क्रिसमस के अवसर पर अपने [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="ईसा मसीह" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Jesus-Christ.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>प्रतिवर्ष 25 दिसम्बर को विश्वभर में मनाया जाने पर्व क्रिसमस ईसाई समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार है और संभवतः सभी त्यौहारों में क्रिसमस ही एकमात्र ऐसा पर्व है, जो एक ही दिन दुनियाभर के हर कोने में पूरे उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।</p>
<p>ईसाई समुदाय के लोग क्रिसमस के अवसर पर अपने घरों को सजाते हैं। इस अवसर पर शंकु आकार के विशेष प्रकार के वृक्ष क्रिसमस ट्रीज् को सजाने की तो विशेष महत्ता होती है, जिसे रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया जाता है।</p>
<p>25 दिसम्बर को ईसा मसीह ने समस्त मानव जाति का कल्याण करने के लिए पृथ्वी पर जन्म लिया था। ईसा के जन्म के साथ ही समूचे विश्व में एक नए युग का शुभारंभ हुआ था, यही वजह है कि हजारों वर्ष बाद भी प्रभु यीशु के प्रति लोगों का वही उत्साह, वही श्रद्धा बरकरार है और २५ दिसम्बर की मध्य रात्रि को गिरिजाघरों के घडि़याल बजते है।</p>
<p>इस अवसर पर लोग गिरिजाघरों के अलावा अपने घरों में भी खुशी और उल्लास से ऐसे गीत गाते हैं, जिनमें ईसा मसीह द्वारा दिए गए शांति, प्रेम एवं भाईचारे के संदेश की महत्ता स्पष्ट परिलक्षित होती है।</p>
<p>खुशी के इस अवसर पर लोग गिरिजाघरों में एकत्रित होते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं।</p>
<p>इसराइल के जेरुसलम के बेथलेहम नामक एक छोटे से गांव में आधी रात के वक्त खुले आसमान तले एक अस्तबल में एक गरीब यहूदी यूसुफ की पत्नी मरियम की कोख से जन्मे थे यीशु। उनके जन्म की शुभ सूचना भी सबसे पहले हेरोद जैसे क्रूर सम्राट को नहीं बल्कि गरीब चरवाहों को ही मिली थी। माना जाता है कि ये चरवाहे उसी क्षेत्र में अपनी भेड़ों के झुंड के साथ रहा करते थे और जिस रात ईसा ने धरती पर जन्म लिया, उस समय ये लोग खेतों में भेड़ों के झुंड की रखवाली करते हुए आग ताप रहे थे।</p>
<p>तभी अचानक चारों ओर अलौकिक प्रकाश फैल गया और एक देवदूत प्रकट हुआ।</p>
<p>अचानक हुए तेज प्रकाश से चरवाहे घबरा गए और भागने लगे किन्तु तभी उस देवदूत ने कहा कि तुम लोगों को डरने की जरूरत नहीं है बल्कि मैं तो तुम्हें इस समय बहुत आनंद का संदेश सुनाने आया हूं। तब देवदूत ने बताया कि आज दाऊद नगर में तुम्हारे मुक्तिदाता प्रभु ईसा मसीह का जन्म हुआ है, जो एक अस्तबल में घोड़ों के झुंड के बीच लेटे हुए हैं। डरते-डरते चरवाहे वहां पहुंचे और उन्होंने देवदूत के बताए अनुसार अस्तबल में ईसा तथा उनके माता-पिता के दर्शन किए तो खुद को धन्य मानते हुए उन्हें दण्डवत प्रणाम कर अपने झुंड की ओर लौट गए।</p>
<p>घोर गरीबी के कारण ईसा मसीह की पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था तो नहीं हो पाई पर उन्हें बाल्यकाल से ही ज्ञान प्राप्त था। गरीबों, दुखियों व रोगियों की सेवा करना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। उनके उपदेशों से प्रभावित होकर उनके शिष्यों की संख्या दिनोंदिन बढ़ने लगी तथा उनकी दयालुता और परोपकारिता की प्रशंसा सर्वत्र फैल गई।</p>
<p>एक बार ईसा मसीह प्रार्थना कर रहे थे तो उन्हें अपना शत्रु मान चुके यहूदियों के पुजारी व धर्मगुरू उनको पकड़कर ले गए।</p>
<p>जब उन्हें न्यायालय में उपस्थित किए गया तो न्यायाधीश ने राजा और धर्मगुरूओं के दबाव में ईसा मसीह को प्राणदंड की सजा सुना दी। यहूदियों ने यीशु को कांटों का ताज पहनाया और फटे कपड़े पहनाकर उन्हें कोड़े मारते हुए पूरे नगर में घुमाया। फिर उनके हाथ-पांवों में कीलें ठोंककर उन्हें क्रॉस पर लटका दिया गया लेकिन यह यीशु की महानता ही थी कि इतनी भीषण यातनाएं झेलने के बाद भी उन्होंने ईश्वर से उन लोगों के लिए क्षमायाचना ही की।</p>
<p>सूली पर लटके हुए भी उनके मुंह से यही शब्द निकले, हे ईश्वर!</p>
<p>इन लोगों को माफ करना क्योंकि इन्हें नहीं पता कि ये क्या कर रहे हैं?।</p>
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    	</item>
		<item>
		<title>लौंंग का इस्तेमाल कर सकता है धन की वर्षा !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/clove-helps-you-get-rich-38387/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Dec 2016 10:30:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आपका भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[लौंग का उपयोग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="लौंग का उपयोग" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />लौंग का उपयोग &#8211; कई लोगों की यह  शिकायत होती है कि उनके धन रुकता नही बचत नही होती। जितने कमाई नही होती उससे ज्यादा खर्चा हो जाता है। उसके लिए यहां एक छोटा से उपाय से बताया जा रहा है। जिसको करने से धन वृद्धि के साथ उसमें बचत भी होंगी। उपाय है लौंग [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="लौंग का उपयोग" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/Clove-Health-Benefits.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>लौंग का उपयोग &#8211; कई लोगों की यह  शिकायत होती है कि उनके धन रुकता नही बचत नही होती।</p>
<p>जितने कमाई नही होती उससे ज्यादा खर्चा हो जाता है। उसके लिए यहां एक छोटा से उपाय से बताया जा रहा है। जिसको करने से धन वृद्धि के साथ उसमें बचत भी होंगी।</p>
<p>उपाय है लौंग का उपयोग</p>
<div>किसी भी शुक्रवार को शुभ मुहूर्त्त में लक्ष्मी जी के सामने लाल वस्त्र रखकर गुलाबों के फूलों से सजाएं तथा लाल वस्त्र पर तीन लौंग एक साथ जोड़कर रखें।</div>
<div></div>
<div>खीर बनाकर माता लक्ष्मी को भोग लगाएं एवं गुलाब की पंखुडी को भीगोकर निम्न मंत्र को बोलकर लौंगे पर चढ़ातें जाएं।</div>
<div></div>
<div>मंत्र है।</div>
<div></div>
<div><strong>ऊँ महालक्ष्म्यै नम:।। </strong></div>
<div></div>
<div>इस तरह 108 बार करना है। जाप पूरे हाेने के पश्चात लौंग को हाथ में लेकर अपनी मनोकामना माता लक्ष्मी से कहें एवं शेष बचीं खीर को छोटी बच्चीयों में बांट दें। बचीं हुई लौँग को अपने पास या तिजोरी में सुरक्षित रख दें। ऐसा करने से कुछ ही  दिनो में लक्ष्मी में वृद्धि होते  दिखाई देंगी एवं बचत के साथ घर में बरकत भी दिखाई देंगी।</div>
<div></div>
<div>इस प्रयोग से घर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य में भी वृद्धि होती है।</div>
<div></div>
<div>पूजा के उपरांत इस लौंग को जो खाता है, वह किसी रोग से पीडित हो तो आराम  मिलता हे। इन तीन लौंग में से एक लौंग घर के दरवाजें के उपर रखने से घर में कोई विषैला जीवन प्रवेश करने  की हिम्मत नही करता। साथ ही बुरी भावना के साथ यदि कोई घर में आना चाहता है, तो उसका कार्य सिद्ध नही होता है।</div>
<div></div>
<div>किसी भयानक स्वप्न दिखाई देते हो या ज्वर आदि  से कोई बालक पीडित हो जाएं तो यह लौंग उसको  खिलाने से आराम होता है। अन्न मे इस लौंग को रखने से किड़े नही पड़ते एवं अन्न में वृद्धि भी होती है।</div>
<div></div>
<div>इस तरह से लौंग का उपयोग आपके धन में वृद्धि करता है.</div>
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    	</item>
		<item>
		<title>हिंदु देवी देवता पशु या पक्षी को वाहन के रुप में प्रयोग क्यों करते है?</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/hindu-gods-vehicles-animals-birds-38024/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Dec 2016 02:30:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पशु पक्षी]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदु देवी देवता]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="पशु पक्षी" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />हिंदु देवी देवता पशु पक्षी को वाहन के रुप में प्रयोग करते है। इसमें संदेश के साथ यह कई रहस्य भी जुडे है। यह पशु पक्षी हमारे लिए भी उपयोगी होते है। यह हमारी कई समस्याओं को दूर करने वाले हो सकते हे। आईए जानते है यह पशु पक्षी हमारे किस प्रकार की सीख ले [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="पशु पक्षी" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/shiva.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>हिंदु देवी देवता पशु पक्षी को वाहन के रुप में प्रयोग करते है।</p>
<p>इसमें संदेश के साथ यह कई रहस्य भी जुडे है। यह पशु पक्षी हमारे लिए भी उपयोगी होते है। यह हमारी कई समस्याओं को दूर करने वाले हो सकते हे।</p>
<p>आईए जानते है यह पशु पक्षी हमारे किस प्रकार की सीख ले सकते है।</p>
<p><strong>बैल-</strong></p>
<p>यह शिवजी का वाहन एवं किसानो के लिए यह सर्वधिक उपयोग पशु है। यह शक्तिशाली होते हुए भी शांत रहता है। मेहनती होता है, एवं ज्यादा डिमांड नही करता है। सीधा पशु होता है। मशीनों के आने के पूर्व एवं आज भी यह कृषी कार्यो में प्रयोग हाेता है।</p>
<p><strong>शेर-</strong></p>
<p>यह दुर्गाजी का वाहन है। इसके दांत, नाखुन, खाल आदि सभी अंग तंत्र प्रयोग में आते है। इन प्रयोगो से धन एवं ताकत प्राप्त की जाती है। (प्रतिबंधित होने के कारण इसका पूर्ण उल्लेख नही किया जा रहा ) शक्ति का प्रतीक है। यह जंगली पशु पालतु नही है।</p>
<p><strong>मोर-</strong></p>
<p>यह कार्तीकेय का वाहन है। इसका पंख घर मे रखने से सांप बिच्छु आदि का घर में आने का भय नही रहता। मोर सुंदर हाेता है। इसलिए कृष्ण सदाा मोर पंख सर पर धारण करते हे।</p>
<p><strong>चूहा-</strong></p>
<p>यह गणेशजी का वाहन है। चूहा बिना कारण वस्तुओं को कुतर डालता है। ऐसे ही कुतर्क करने वाले बिना कारण हर बात पर बहस करते है। इनकी सवारी ज्ञान गणपति ही कर सकते है।</p>
<p><strong>सर्प-</strong></p>
<p>यह जहर से युक्त भी होता है। शिवजी के गले में एवं विष्णु जी की शैय़्या के रुप में रहता है। यह चूहों का भक्षण कर अनाज की रक्षा कर किसानों की सहायता करता है।</p>
<p><strong>हंस-</strong></p>
<p>देवी सरस्वती का यह वाहन ज्ञानवान होता है। यह पानी में मिश्रित दुध को पी लेता है, एवं जल छोड़ देता है। यानि की अच्छी बातों को ग्रहण करता है एवं बुरी बातों का त्याग कर देता है। यह ज्ञान का प्रतीक है।</p>
<p><strong>उल्लू- </strong></p>
<p>देवी लक्ष्मी का वाहन उल्लु होता है। यह रात में भी क्रियाशील होता है। मेहनत करने वालें को ही लक्ष्मी प्राप्त होती है। हाथी भी उनका वाहन है। हाथीयों में स्त्री ही ग्रुप लीडर होती है। अर्थात जहां महिलाओं को सम्मान होता है। वहां लक्ष्मी का वास होता है।</p>
<p><strong>भैंसा-</strong></p>
<p>यमराज का वाहन है। यह सामाजिक प्राणी होता है। एकता का संदेश देता है। भैंसा एकता से रहकर शेरों के झुंंड से अपने एवं अपने परिवार की रक्षा कर लेते है।</p>
<p>तो इसलिए हिंदु देवी देवता पशु पक्षी को वाहन के रुप में प्रयोग करते है।</p>
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		<title>कालसर्प योग परेशानी है तो उसका निदान भी है।</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/kaalsarp-dosha-yog-remedies-38023/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Manish Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Dec 2016 02:30:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आपका भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कालसर्प योग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="कालसर्प योग" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />कालसर्प योग किसे कहते है। जब कुंडली के सारे ग्रह राहु केतु के मध्य हो तो कालसर्प योग बनता है । कालसर्प ग्रसीत कुंडली कहलाती है। लेकीन ऐसा देखा गया है की एक या दो ग्रह इससे छुट जाएं तो भी कालसर्प के समान ही तकलीफ भोगनी होती है। काल का अर्थ समय सर्प का सांप। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="कालसर्प योग" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/12/kaal-sarp-dosh-problem-solution.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><div>कालसर्प योग किसे कहते है।</div>
<div></div>
<div>जब कुंडली के सारे ग्रह राहु केतु के मध्य हो तो कालसर्प योग बनता है । कालसर्प ग्रसीत कुंडली कहलाती है।</div>
<div></div>
<div>लेकीन ऐसा देखा गया है की एक या दो ग्रह इससे छुट जाएं तो भी कालसर्प के समान ही तकलीफ भोगनी होती है। काल का अर्थ समय सर्प का सांप। राहु सर्प का मुख है तथा केतु पुंछ। यह सारे ग्रहों को ग्रसीत कर लेता है, तब जातक को जकडऩ महसूस होती है। उसके हर कार्य में बाधा आती है। वह स्वप्र में नदी, नाले, तालाब, समुद्र कुआं, बावली आदि देखता है। स्वप्न में उसकों सर्प पिछे भागता हुआ अथवा काटता हुआ दिखाई देता हेै।</div>
<div></div>
<div>कालसर्प योग 3456 प्रकार के होते है। मुख्यत: कालसर्प योग बारह प्रकार का होता है। यह है -अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापद्म तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड, घातक, विषधर एवं शेषनाग।</div>
<div></div>
<div><strong>क्या होता है कालसर्प योग का प्रभाव-</strong></div>
<div></div>
<div>कालसर्प से ग्रसीत कुंडली वालों को हमेश भय बना रहता है। उसको पानी से भय रहता है। बेकार के कार्य ज्यादा करने पड़ते है। प्रतिभाशाली होते हुए भी हमेशा नीचे ही रहते है। धन प्राप्ति मेें बाधा होती है। प्रोग्रेस नही होता। आंख कान में रोग होता है। अकारण परेशानी होती है। इसका सबसे ज्यादा असर संतान प्राप्ति में बाधा होता है और भी अनेक दुष्प्रभाव है।</div>
<div></div>
<div><strong>कालसर्प योग वाले नागपंचमी पर क्यों करे पूजन-</strong></div>
<div></div>
<div>पंचमी तिथि नागों को अतिशय प्रिय है। पंचमी तिथि के स्वामी भी नाग होत है। वह चाहे शुक्ल पक्ष की हो अथवा कृष्ण पक्ष की। पंचमी तिथि पर नागों का एवं सर्पो का पूजन करने से वह अपने दुष्प्रभाव को समाप्त  कर देेते है तथा प्रसन्न होकर जातक को आर्शीवाद देकर पूजा ग्रहण करके चले जाते है।</div>
<div></div>
<div>पुराणों की कथाओं के अनुसार आस्तिक नामक ब्राह्मण ने जनमेजय के सर्प यज्ञ से समस्त नागों की रक्षा पंचमी के दिन ही की थी। इसलीए सर्प पूजन के लिए यह तिथि सर्वोत्तम है।</div>
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