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मुंबई में एक बैचलर की कहानी! ऐसी होती है ज़िन्दगी!

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7) ये सब होने के बाद छुट्टी के दिन जब टाँग पर टाँग डाल के बैठोगे और सोचोगे ना तो एहसास होगा कि जैसी भी है, मुंबई में ज़िन्दगी कमाल की है! कहीं भी, कभी भी, किसी के भी साथ आने-जाने की आज़ादी, अपनी ज़िन्दगी, अपनी शर्तों पर जीने का मज़ा और जितनी मेहनत, उतने अच्छे नतीजे मिलने की गारंटी! बाकी दिक्कतें और मुश्किलें तो हर शहर में हर जगह आती हैं, चाहे अपने घरवालों के साथ ही क्यों ना रह रहे हो, क्यों?

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सौ बात की एक बात: मुंबई में बैचलर की ज़िन्दगी एडवेंचर से भरी है और जिसे ज़िन्दगी जीनी आती है, उसके लिए भरपूर मज़े लूटने के हज़ारों रास्ते हैं!

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