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क्या कोरोना की वजह से घट जाएगी आपकी सैलरी

दुनियाभर के 200 देश आज कोरोना संकट से जूंझ रहे हैं, इस बिमारी का असर ना केवल लोगों की सेहत पर पड़ रहा है बल्कि जल्द ही इसका लोगों की जेब पर भी साफ नजर आने वाले हैं.

हम और आप साल भर इस उम्मीद में काम करते हैं कि नए वित्त वर्ष में सैलरी बढ़ेगी और हम अपनी जरुरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पाएंगे, लेकिन कोरोना की वजह से अब आपके इन उम्मीदों पर पानी फिर सकता है, यही नहीं हो सकता है कि अगले महीने आपकी सैलरी बढ़ने की बजाय घटकर आए.

लॉकडाउन ने बर्बाद की दुनियाभर की अर्थव्यवस्था

कोरोना संकट के चलते दुनियाभर की इंडस्ट्री ठप पड़ी हैं, ज्यादातर देश एक-दो या तीन महीने के लॉकडाउन पीरियड में चले गए हैं, ऐसे में ना तो माल बन रहा है ना ही बाजार में बिक रहा है.

बाजार में केवल दवाईयों और ग्रॉसरी प्रोडक्ट की ही दुकानें खुली हैं, ऐसे में बाकी इंडस्ट्री पर ताले पड़े हैं, संक्रमण की वजह से काम तो नहीं हो रहा, लेकिन कंपनी को सैलरी तो अपने कर्मचारियों को देनी ही हैं.

घट सकती है आपकी सैलरी

भारत की बात करें तो सरकार ने कंपनियों को साफ किया है कि उन्हें अपने कर्मचारियों को इस लॉकडाउन पीरियड में भी सैलरी देनी होगी, लेकिन कंपनियां इस नुकसान को ज्यादा समय तक लेकर नहीं चल पाएंगी.

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार आने वाले महीने में नुकसान झेल रही कई कंपनियां अपने कर्मचारियों की सैलरी में 30 से 35 प्रेसेंट की कटौती कर सकती हैं.

केंद्र ने घटाई अपने सांसदों की सैलरी

हाल ही में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने एक बड़ा फैसला किया था. मंत्रिमंडल ने संसद के सभी सदस्यों का वेतन और पेंशन एक साल के लिए 30 फीसदी घटा देने की बात कही थी.

सरकार के मुताबिक इसकी पेशकश खुद सांसदों ने कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर की थी. इसके लिए मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट एक्ट, 1954 के तहत सैलरी, अलाउंस व पेंशन में संशोधन के अध्यादेश को मंजूरी दी गई.

यह कटौती 1 अप्रैल 2020 से लागू होगी. कटौती के दायरे में प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री समेत संसद के सभी सदस्य आएंगे. आपको ये बात सुनने में बहुत अच्छी लग रही होगी, लेकिन ये बातें कहीं ना कहीं संकेत दे रही है कोरोना के साथ बिगड़ी अर्थव्यवस्था की.

भारत में लॉकडाउन अगर इस तरह एक महीने और रहता है तो भारत फिर से कम से कम 3 से 4 साल पीछे चला जाएगा.

कोरोना का अर्थव्यवस्था पर वार

The Associated Chambers of Commerce of India की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत को इस महामारी से निपटने के लिए 200 बिलियन डॉलर्स का सपोर्ट चाहिए और अगले तीन महीने में भारतीय अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान और अलग-अलग इंडस्ट्रीज में जाने वाली नौकरियों की भरपाई के लिए कम से कम 50 से 100 बिलियन डॉलर कैश की जरुरत होगी.

यूएस की अर्थव्यस्था डगमगाई

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में कोरोना संकट की वजह से लाखों लोगों पर नौकरी जाने का खतरा है, हालांकि ये हाल सिर्फ भारत का नहीं यूएस, रुस, आस्ट्रेलिया, चीन, ईटली और फ्रांस जैसे देशों की अर्थव्यवस्था का भी है.

टूरिज्म और मनोंरजन इंडस्ट्री ठप  

कोरोना संकट से खास तौर पर सेवा देने वाली इंडस्ट्रीज जैसे रेल, बस और हवाई सेवा, मार्केटिंग कंपनियां, मनोरंजन और खेल इंडस्ट्री, प्रिंट मीडिया और टूरिज्म प्रभावित हुआ है. ये सभी इंडस्ट्री इस समय ठप पड़ी हैं और इन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के पास काम का कोई साधन नहीं बचा है.