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इन 10 फिल्मों के बिना अधूरी है हॉस्टल लाइफ

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 ८- गोलमाल / चुपके चुपके –

अमोल पालेकर उत्पल दत्त की गोलमाल और धर्मेन्द्र अमिताभ , ओमप्रकाश की चुपके चुपके . दो कालजयी कॉमेडी फिल्म्स और हर हॉस्टल की जान . हॉस्टल के शुरूआती दिनों से लेकर हॉस्टल से जाने के दिनों तक ये दोनों फिल्मे हर कमरे की जान होती है . हॉलीवुड और इंटरनेशनल सिनेमा के बड़े से बड़े फैन भी इनदोनो फिल्मों को देखने से खुद को नहीं रोक पाते .

राम प्रसाद और लक्ष्मण प्रसाद का गोलमाल हो या फिर प्यारे मोहन की शुद्ध हिंदी . हॉस्टल वालों की हंसी का पुख्ता इंतजाम है ये दोनों फ़िल्में. एक तरफ अमोल पालेकर  उत्पल दत्त को बेवकूफ बना कर गुदगुदाते है तो दूसरी तरफ धर्मेन्द्र अपने परम पूज्य जीजाजी ओम प्रकाश से to टू तो go गु क्यों नहीं जैसे सवाल पूछते है

golmaal

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