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जाने सपनों की रहस्यमयी दुनिया की रोचक बातें

सपनों की रहस्यमयी दुनिया – सपनों कि दुनिया का एहसास ही कुछ अलग होता है.

सपनों में हम जो चाहे वो कर सकते हैं, फिर चाहे वो कोई सूपरहीरो बनना हो या किसी देश का राजा. जैसी ही हम गहरी नींद में जाते हैं तो खुद को एक रहस्यमयी दुनिया में पाते हैं. जहा सब कुछ कई बार बेहद सुंदर होता है तो कई बार बेहद खौफनाक. आज तक वैज्ञानिक सपनों की दुनिया को नहीं समझ पाए हैं और इस पर शोध आज भी जारी है.

आखिर कैसे हमें वो सब दिखाई देने लगता है जिसकी हम असल जिंदगी में केवल कल्पना ही कर सकते हैं तो आइए जानते हैं इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य –

सपनों की रहस्यमयी दुनिया –

१. सपने देखते समय हमारा शरीर स्तंभित हो जाता है. वैज्ञानिकों की माने तो 90 मिनट के अंदर हम लाइट स्लीपस्टेज से डीपस्लीपस्टेज में पहुंच जाते हैं. और इसके जैसे ही हम रैपिड आई मूमेंट (REM) स्लीप स्टेट में प्रवेश करते हैं हमारा शरीर स्तंभित हो जाता है. इसके बाद ही हमारे गहरे सपने शुरू होते हैं और यही कारण है की कई बार हम सपनों कि दुनिया में अपना हाथ-पैर हिलाने चाहते हुए भी नहीं हिला पाते. एहसास होता है मानो जैसे किसी ने हमारे हाथ-पैर जकड़ लिए हो.

२. सोते समय कई लोग स्लीप पैरालिसिस में चले जाते हैं. इस स्टेट में लोगों को ऐसा लगने लगता है जैसे की उनके आसपास कोई व्यक्ति घूम रहा हो और उन्हें अजीब-अजीब आवाजें भी सुनाई देने लगती हैं. ऐसे में उन्हें मानव आकार और यहाँ तक कि किसी अजनबी के कमरे में होने का एहसास होता है.

३. प्रति रात्रि हम सभी 4 से 6 सपने देखते हैं जिसका साल भर का औसतन निकाला जाए तो यह 1460 से 2190 होता है.

४. कोई भी सामान्य जीवन जीने वाला व्यक्ति अपने पूरे जीवन काल में 25 साल सोते हुए बिताता है, जिसमें से 6 साल या इससे ज्यादा सपने देखने में बीतते हैं.

५. हम सभी उठते ही 95 से 99 प्रतिशत देखा हुआ सपना भूल जाते हैं, जो हमें याद रहता है वह बचा हुआँ 1 से 5 प्रतिशत सपना होता है. अब आप सोचने लगेंगे की आपने आज तक जीतने भी सपने देखें वो सभी आपको अधूरे से भी अधूरे याद हैं.

६. जो लोग खर्राटे लेते हैं उनका सपने देखना असंभव है.

७. नेत्रहीन लोग भी सपने देख सकते हैं लेकिन जो जन्म से नेत्रहीन होते हैं उन्हें सपनों में भी अंधेरे के सिवा और कुछ नजर नहीं आता वह केवल जगह, आवाजें, स्पर्श और स्वाद वगैरह का अनुभव कर पाते हैं.

८. आप चाहे तो अपने सपनों को नियंत्रित भी कर सकते हैं. इस प्रक्रिया को ल्यूसिडड्रीमिंग कहते हैं और ऐसे सपनों को ल्यूसिडड्रीम्स.

९. गर्म कमरे में सोने से मीठे सपने आते हैं वही ठंडे कमरे में उसे से डरावने सपनों की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं.

ये है सपनों की रहस्यमयी दुनिया – अगर आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी ने आपको बेहद रोचक सपने से जगा दिया हो और उसके बाद जब आप फिर से सोने लगे और वह सपना वही से शुरू हो जहा से टूटा था तो इसका मतलब है आपने भी ल्यूसिड ड्रीमिंग को नैचरली एक्सपीरियंस किया है.

Shivam Rohatgi

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Shivam Rohatgi

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