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	<title>Devansh Tripathi, Author at Youngisthan.in</title>
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		<title>कर्म और भोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Jan 2019 14:30:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="167" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/single1-300x167.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="कर्म और भोग" decoding="async" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/single1-300x167.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/single1.jpg 710w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />हमें मनुष्य योनि कर्म और भोग के लिए मिली है. अकर्म का अर्थ कर्म न करना अथवा आलस्य माना जाता है. इस संसार में अनेक ऐसे व्यक्ति हुए हैं जो कोई कर्म करना नहीं चाहते हैं और केवल भोगों का आनंद लेना चाहते हैं. ऐसे व्यक्ति प्रायः अकर्मा या कर्महीन होते हैं. श्रेष्ठ मनुष्यों में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="167" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/single1-300x167.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="कर्म और भोग" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/single1-300x167.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/single1.jpg 710w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>हमें मनुष्य योनि कर्म और भोग के लिए मिली है. अकर्म का अर्थ कर्म न करना अथवा आलस्य माना जाता है. इस संसार में अनेक ऐसे व्यक्ति हुए हैं जो कोई कर्म करना नहीं चाहते हैं और केवल भोगों का आनंद लेना चाहते हैं. ऐसे व्यक्ति प्रायः अकर्मा या कर्महीन होते हैं. श्रेष्ठ मनुष्यों में क्रियाशीलता, संकल्प, ब्रम्हाचर्य, मननशीलता और मानवता आदि गुण होते हैं. इन गुणों से विपरीत गुण वाले को अकर्मा कहा जाता है.</p>
<p>भगवद्गीता में कहा गया है- ‘नहि कश्चित् क्षममपि जातु तिष्ठ्त्य कर्मकृत’ अर्थात मनुष्य एक क्षण के लिए भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता है. जिस समय शरीर कर्म नहीं करता उस समय भी मन और वाणी क्रियाशील रहते हैं.</p>
<p>हमसे परमेश्वर और उसके द्वारा बनाई गई पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्थाएं पुरुषार्थ और कर्म करते हुए अन्न, वस्त्र आदि विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन करने और सेवाएं प्रदान करने की अपेक्षा रखती हैं. बिना कर्म किए वस्तुओं और सेवाओं का उपभोग करने वाला परजीवी भोगी कहलाता है. ऐसी परिस्थितियों में उसके पालन का दायित्व उसके परिवार या समाज पर पड़ता है. हमारी संस्कृती में दान की अत्यंत महिमा बताई गई है. इसके होते हुए बहुत से लोग कोई अस्वस्थता न होते हुए और शारीरिक रूप से हष्ट-पुष्ट होते हुए भी भिक्षा मांगकर जीविका चलाते हैं. ऐसा करके वे स्वयं तो इसे एक तरह का कार्य ही मानते हैं, परंतु बिना उचित कर्म किए समाज पर भार बनना दासता ही कहलाता है फिर चाहे वो खुद को कुछ भी कहें या कुछ भी जानें.</p>
<p>कर्म न करने की अपेक्षा सदा कुछ न कुछ कर्म करना हितकर यानी सही ही है. ये एक तरह से स्वास्थ्य को उत्तम व्यवस्था में देखने के लिए भी आवश्यक है. पुरुषार्थी व्यक्ति अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए नियत कर्म करते रहते हैं. वहीं, सामान्य लोग इंद्रियों पर नियंत्रण का विशेष ध्यान नहीं रखते हैं. इसके साथ ही अधर्मी स्वभाव के लोग इंद्रियों को विषयों में फंसाते हुए अपने भोगों में उलझे रहते हैं. ऐसे लोग प्रायः आलसी रहते हुए दूसरों पर जीवन निर्वाह के लिए निर्भर रहते हैं और अपने आलस्य में डूबे हुए कोई कर्म करने का प्रयत्न नहीं करते हैं. ऋग्वेद में ऐसे लोगों के लिए ही कहा गया है- ‘अकर्मा दस्युरभि नो अमंतु’ अर्थात् अकर्मण्य और मूर्ख व्यक्ति दास माना जाता है.</p>
<p>देखा जाए तो मनुष्य के पास जीवन में करने को दो ही चीज़ें होती हैं या तो वो कर्म ही कर ले या अपनी ज़िंदगी भोग के सहारे ही आगे बढ़ाता जाए. इंसान के पास हमेशा से ही दो रास्ते रहे हैं, अब वो कौन से रास्ते पर चलता है और किसे जाने देता है इसका फैसला उसे खुद ही करना होता है. कर्म के रास्ते पर उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, भोग के रास्ते पर चलते हुए उसे ज़्यादा कुछ नहीं करना पड़ता, वो बस हाथ उठाए दूसरों से मांगने की अपेक्षा रखता है.</p>
<p>सिर्फ भोग करते रहने की चाह से व्यक्ति को हमेशा हिकारत की नज़र से ही देखा जाता है व उसका कोई वजूद नहीं रह जाता. इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम कर्म का हाथ पकड़ें और अपने सपनों को खुद पूरा करने का हौसला रखें. मन में जब विश्वास हो तो जीत पक्की मानी जाती है.</p>
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		<title>बनें ऊर्जावान कुछ इन जीवन के आयामों को जानकर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Jan 2019 11:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवन शैली]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="200" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/Good_Communicator-300x200.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/Good_Communicator-300x200.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/Good_Communicator-768x512.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/Good_Communicator.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />हर्बर्ट स्पेंसर ने जीवन के दो आयामों की चर्चा की है- लंबाई और चौड़ाई. दीर्घजीवी होना जीवन की लंबाई है. यदि लंबा जीवन प्रमाद में बीत गया तो समझो व्यर्थ गया. ‘पद-संपदा’ के इर्द-गिर्द लंबे समय तक नाचते रहना जीवन की श्रेष्ठता नहीं है. संयम के साथ अपने भीतर सद्गुणों का विकास करते हुए जीना [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/Good_Communicator-300x200.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/Good_Communicator-300x200.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/Good_Communicator-768x512.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/Good_Communicator.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>हर्बर्ट स्पेंसर ने जीवन के दो आयामों की चर्चा की है- लंबाई और चौड़ाई. दीर्घजीवी होना जीवन की लंबाई है. यदि लंबा जीवन प्रमाद में बीत गया तो समझो व्यर्थ गया. ‘पद-संपदा’ के इर्द-गिर्द लंबे समय तक नाचते रहना जीवन की श्रेष्ठता नहीं है. संयम के साथ अपने भीतर सद्गुणों का विकास करते हुए जीना जीवन की चौड़ाई कहलाता है. ऐसा अल्पजीवी जीवन दीर्घजीवी जीवन से बेहतर है.</p>
<p>जीवन की सार्थकता इस बात में है कि भीतर सद्गुण जीते और दुर्गुण हारे. जब भीतर राम जीतते हैं और रावण हारता है तो जीवन की चौड़ाई बढ़ती है. फिर समझो कि आत्मत्याग ही आत्मपरिष्कार है, आत्मपरिष्कार ही आत्मविजय है और आत्मविजय ही विश्वविजय है. यानी जिसने अपने को जीत लिया उसने सारी दुनिया को जीत लिया. ये केवल आत्मबल से ही संभव है. ये आत्मबल योग-साधना से का उपहार है. अतः जीवन के हर पल को योग बनने दो.</p>
<p>इस संसार में हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम योगी की तरह जीवन को होश में जीएं. होश में जिया गया जीवन उत्सवी जीवन कहलाता है. वहीं, बेहोशी का लंबा जीवन एक तरह के सिर्फ बोझ की तरह ही होता है. एक क्षण भी योग से विरत होना मानवता की तौहीन समझी जाती है. ये शरीर तो मात्र एक कच्चे घड़े की तरह होता है. इसे ताप से तपाना होता है फिर तभी वो अनंत चेतना को धारण करने में समर्थ होगा.</p>
<p>ध्यान रहे कि चेतना ही शरीर में दिव्यता भरती है. इसी तरह दिव्य शरीर ही सत्कर्मों के सहारे लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है. यही हमारे जीवन की चौड़ाई स्थापित करता है. इस भौतिकतावादी युग के चक्कर में पड़कर आज हमने अध्यात्म को छोड़ दिया है और ज़िंदगी को धन से संवारने में हम खंडहर हो गए हैं. नैतिक चौड़ाई घटती गई और इसी तरह लगातार हमारी भौतिक लंबाई बढ़ती गई. अब वैज्ञानिक बुद्धि का उपयोग सत्य, शिव और सुंदर की तलाश में करनी होगी. देखा जाए तो आज इस संसार को इसी ‘समग्र योग’ की मांग है. जब योग साधक के बीच जज़्ब होता है तो उसके भीतर छिपी प्रेम की खुशबू बाहर आ ही जाती है और सहज ही सत्कर्म होने लग जाते हैं.</p>
<p>वहीं, सर्वत्र ईश्वर की छवि निहारते रहना ‘ज्ञानयोग’ कहलाता है. इसी तरह निश्छल भाव से अपने को इश्वारार्पित कर देना ‘भक्तियोग’ कहलाता है. प्रभुभाव से सभी प्राणियों की सेवा करना ‘कर्मयोग’ कहलाता है. इस त्रिवेणी का संगम ‘समग्र योग’ कहलाता है. इन्हीं योग को समझकर हम अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं. यही जीवन की समृद्धि है और चौड़ाई का मंतव्य भी यही है.</p>
<p>जीवन के आयाम को कुछ इस प्रकार भी समझा जा सकता है कि हमें लंबी ज़िंदगी नहीं बल्कि बड़ी ज़िंदगी जीने की इच्छा रखनी चाहिए. ऐसे हमारे कर्म गलत चीज़ों की ओर नहीं बढ़ेंगे और हम सदैव अच्छे व नेकी के कर्मों को करने की कोशिश करेंगे. अच्छे कार्यों को करने से दूसरे लोगों पर भी आपका प्रभाव पड़ेगा और वे भी ऐसे कार्यों की तरफ उन्मुख होंगे. इस तरह हम एक बेहतर समाज एवं बेहतर भारत का निर्माण कर पाएंगे.</p>
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		<title>विश्व अर्थव्यवस्था में भारत और एशिया की हिस्सेदारी लगातार घटती क्यों रही?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Jan 2019 11:30:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="225" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-300x225.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-300x225.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-768x576.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-1024x768.jpg 1024w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-970x728.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty.jpg 1078w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />अर्थशास्त्री एंगस मेडिसन ने अनुमान लगाया है कि आज से तकरीबन 1000 वर्ष पूर्व यानी सन 1000 में विश्व की आय में एशिया का हिस्सा 67 प्रतिशत था और यूरोप का 9 प्रतिशत. वर्ष 1998 में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी. एशिया का हिस्सा घटकर 30 प्रतिशत रह गया था. वहीं, यूरोप का बढ़कर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="225" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-300x225.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-300x225.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-768x576.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-1024x768.jpg 1024w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty-970x728.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/India_rise_poverty.jpg 1078w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>अर्थशास्त्री एंगस मेडिसन ने अनुमान लगाया है कि आज से तकरीबन 1000 वर्ष पूर्व यानी सन 1000 में विश्व की आय में एशिया का हिस्सा 67 प्रतिशत था और यूरोप का 9 प्रतिशत. वर्ष 1998 में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी. एशिया का हिस्सा घटकर 30 प्रतिशत रह गया था. वहीं, यूरोप का बढ़कर 46 प्रतिशत हो गया था. एशिया के पतन में भारत का विशेष योगदान रहा है. पतन लगभग सन 1000 के बाद शुरू हुआ. इसके पहले लगभग 4000 वर्षों तक हम समृद्ध थे.</p>
<p>सिंधु घाटी, महाभारत कालीन इन्द्रप्रस्थ, बौद्धकालीन लिच्छवी, मौर्य, विक्रमादित्य, गुप्त, हर्ष एवं चालुक्य साम्राज्यों ने हमें निरंतर समृद्धि प्रदान की थी. इन 4000 वर्षों में हमारे प्रमुख ग्रंथ जैसे वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत की रचना हो चुकी थी. अतः मानना चाहिए कि इन ग्रंथों ने हमारे समाज को आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि और राजनीतिक वैभव का मंत्र दिया था.</p>
<p>वर्ष 1000 के बाद महमूद गजनी, मुग़ल और ब्रिटिश लोगों ने हम पर धावा बोला और हमें परास्त किया. विचार करने वाली है कि सन 1000 के आसपास ऐसा क्या हुआ कि 4000 वर्षों से समृद्ध सभ्यता एकाएक अधोगामी हो गई? प्रतीत होता है कि आदि शंकराचार्य के दर्शन के गलत प्रतिपादन के कारण ये हुआ. उनके समय को लेकर विद्वानों में विवाद है. कुछ का मानना है कि वो सन 800 ईसवीं से संबद्ध थे. वहीं, दूसरे विद्वानों का मानना है कि वे इससे पहले हुए थे. इस विवाद में पड़े बिना कहा जा सकता है कि वर्ष 800 के लगभग आदि शंकराचार्य स्वयं अथवा उनके किसी विशेष शिष्य ने इस धरती पर भ्रमण किया था. उपलब्ध विषय के लिए आदि शंकराचार्य का मुख्य मंत्र ‘ब्रम्हा सत्यम जगत मिथ्या’ है. उन्होंने सिखाया कि ये जो संपूर्ण जगत दिख रहा है वो एक ही शक्ति का विभिन्न रूपों में प्रस्फुटन है. मनुष्य स्वयं भी उसी एक ब्रम्हा का स्वरुप है. अतः मनुष्य को चाहिए कि इन सांसारिक प्रपंचों में लिप्त होने के स्थान पर उस एक ब्रम्हा से आत्मसात करे. तब उसे वास्तविक सुख की प्राप्ति होगी. अगला प्रश्न ये उठता है कि ब्रम्हा क्या चाहता है? यदि ब्रम्हा निष्क्रिय एवं अंतर्मुखी है तो साधक को भी निष्क्रिय और अंतर्मुखी हो जाना चाहिए. इसके विपरीत यदि ब्रम्हा सक्रीय है तो मनुष्य को उसके चाहे अनुसार सक्रीय रहना चाहिए.</p>
<p>कैसा समझा जाए कि ब्रम्हा क्या चाहता है? उपनिषदों में लिखा है कि पूर्व में ब्रम्हा अकेला था. उसने सोचा ‘मैं अकेला हूँ, अनेक हो जाऊं.’ यानी अनेकता ही ब्रम्हा की इच्छा थी, जैसे अनेक प्रकार के पशु-पक्षी और पेड़-पौधें हैं, लेकिन अनेकता कष्टप्रद होती है जैसे भाई-भाई अपने को अलग मानने लगें. अपने को परिवार का मानें तो मित्रता और प्रसन्नता बनी रहती है. संसार में इस एकता को स्थापित करने के लिए आदि शंकराचार्य ने ‘जगत मिथ्या’ का मंत्र युक्ति के रूप में बताया था. जैसे कहा जाए ‘परिवार सत्यं, व्यक्ति मिथ्या’ तो परिवार सुखी हो जाता है, क्योंकि ऐसे में परिवार का हर सदस्य परिवार के हित को देखता है. लेकिन अगर कहा जाए कि ‘ब्रम्हा सत्यं, परिवार मिथ्या’ तो ऐसे में परिवार का हर सदस्य अपने को देखने लगेगा, चूंकि परिवार के बंधन से वो मुक्त हो जाएगा. इसी प्रकार ‘ब्रम्हा सत्यं, जगत मिथ्या’ का अर्थ है कि जगत के विभिन्न आकर्षणों को मिथ्या समझकर संपूर्ण जगत के हित के लिए कार्य करें. अपने 32 वर्ष के अल्प जीवन में वे सदा सक्रीय रहे- बौद्धों को शास्त्रार्थ में पराजित किया, मंदिरों का उद्धार किया, उपनिषदों पर टीका लिखीं और चार मठ स्थापित किए. यदि जगत मिथ्या थी तो इन कार्यों को करने की क्या आवश्यकता थी? 1000 ईस्वी के बाद भूल ये हुई है कि जगत मिथ्या की युक्ति को उनके अनुयायियों ने परम सत्य मान लिया था. उनके अनुयायी जगत को मिथ्या बताकर निष्क्रिय हो गए. जब देश पर आक्रमण हो रहे थे तब ये अनुयायी कंदराओं में बैठकर ब्रम्हा से एका कर रहे थे. शायद सन 1000 के बाद से भारत के पतन का यही प्रमुख कारण था.</p>
<p>वर्तमान में भारत निश्चित रूप से दबाव में है. इसका मूल कारण है कि देश के नेता अपने व्यक्तिगत हित साधने में लिप्त हैं. उन्हें राष्ट्र दिखाई नहीं दे रहा है. आज शंकराचार्य के मंत्र को सृष्टि सत्यं, व्यक्ति मिथ्या के रूप में देखे जाने की ज़रूरत है.</p>
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		<title>गंगा और यमुना सरीखी नदियों की हैरान कर देने वाली हकीकत</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/surprising-realities-of-rivers-like-ganges-and-yamuna-89983/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Jan 2019 13:30:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="126" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution-300x126.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution-300x126.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution-768x321.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution-970x406.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution.jpg 992w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />गंगा और यमुना सरीखी नदियों के पानी की गुणवत्ता में ज़रा भी सुधार किए बिना ही इसकी सफाई के नाम पर करोंड़ों रूपए खर्च करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. अबतक यमुना में सफाई के नाम पर लगभग 1,062 करोड़ रूपए खर्च किए जा चुके हैं. वहीं, इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारें भी [&#8230;]</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi/surprising-realities-of-rivers-like-ganges-and-yamuna-89983/">गंगा और यमुना सरीखी नदियों की हैरान कर देने वाली हकीकत</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi">Youngisthan.in</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="126" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution-300x126.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution-300x126.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution-768x321.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution-970x406.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2019/01/yamuna-pollution.jpg 992w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>गंगा और यमुना सरीखी नदियों के पानी की गुणवत्ता में ज़रा भी सुधार किए बिना ही इसकी सफाई के नाम पर करोंड़ों रूपए खर्च करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. अबतक यमुना में सफाई के नाम पर लगभग 1,062 करोड़ रूपए खर्च किए जा चुके हैं. वहीं, इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारें भी अपने स्तर से इस प्रयोजन में करोंड़ों रूपए खर्च कर चुकीं हैं. बड़े अफ़सोस की बात है कि इसके बावजूद भी यमुना में प्रदूषण घटने के बजाए और बढ़ गया है.</p>
<p>ध्यान रहे कि यमुना की सफाई के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी का ये पहला मामला नहीं है. 1994 में भी सुप्रीम कोर्ट ने यमुना की सफाई के लिए अपने स्तर पर सक्रियता दिखाई थी. तब उसने एक अखबार में प्रकाशित खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला शुरू किया था. बाद में 12 अप्रैल, 2005 को जस्टिस वाईके सब्बरवाल और तरुण चटर्जी की पीठ ने कहा कि यमुना को स्वच्छ करने के लिए दिल्ली सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति ही नहीं है. 2005 में दिल्ली सरकार बिना ट्रीटमेंट के ही यमुना में गंदा पानी डाल रही थी.साथ ही हज़ारों खारखाने भी ठीक यही कर रहे थे.</p>
<p>1994 से प्रदूषित पानी यमुना में प्रवाहित किया जा रहा है. यमुना ही नहीं देश की सभी नदियों को अनियोजित शहरीकरण मैला कर रहा है. नदियों की गंदगी के कारण देश को हर साल सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में अरबों रुपयों का नुकसान हो रहा है. इसी बीच थर्ड वर्ल्ड सेंटर फॉर वाटर मैनेजमेंट के अध्ययन के अनुसार देश में कुल 10 फीसदी गंदे जल को सही ढंग से एकत्रित करके, परिशोधन करके नदियों और झीलों में डाला जा रहा है.</p>
<p>वैसे तो पानी के प्रदूषण की समस्या दशकों से जारी है. हालांकि, राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव, नौकरशाही की लालफीताशाही, जनता की उदासीनता, मीडिया की सामाजिक सराकारों से जुड़े मुद्दे उठाने की अनिच्छा और भारी पैमाने पर व्याप्त भ्रष्टाचार आदि तमाम घटकों ने समस्या को विकराल बनाने में योगदान दिया है. आज नदियों का प्रदूषण एक राष्ट्रीय समस्या में तब्दील हो गया है.</p>
<p>यहां सवाल उठता है कि इतनी भारी-भरकम रकम खर्च करने के बाद भी गंगा-यमुना इतनी प्रदूषित क्यों हैं? नदी के पानी की गुणवत्ता का प्रबंधन कोई राकेट विज्ञान नहीं है. भारत में विशेषज्ञता, प्रौद्योगिकी और निवेश के लिए राशि उपलब्ध है. फिर क्यों हज़ारों-करोंड़ों रूपए सीधे-सीधे नाले में बहा दिए जाते हैं. इसके अनेक कारण हैं और इनमें सबसे प्रमुख कारण है राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव, दखलंदाजी और आपसी शत्रुता. उदहारण के लिए, केद्र और राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारें होने के कारण दोनों एक-दूसरे के कामों में अड़ंगे लगाते रहते हैं. इसके अलावा, हर स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की अक्षमता और भ्रष्टाचार भी गंगा-यमुना की सफाई में बाधक रहें हैं.</p>
<p>गंगा और यमुना की सफाई योजनाओं में दो बेहद महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की जाती रही है. पहला- अगर नदी के प्रदूषण को दूर करना है तो योजना दूरगामी होनी चाहिए. अगले 20 सालों में भारत की आबादी में जबरदस्त विस्फोट देखने को मिलेगा. आज के मुकाबले 2030 में भारत बिलकुल अलग देश होगा. तबतक भारत में जल संकट विस्फोटक रूप धारण कर लेगा. इसलिए योजनाएं भी वर्तमान हालात के साथ-साथ भविष्य को ध्यान में रखकर बनानी चाहिए. वहीं, भारत को अन्य देशों के उदाहरणों से सीख लेनी चाहिए. छठे दशक में सिंगापुर की नदियां भी गंगा-यमुना की तरह ही प्रदूषित थीं. तब सिंगापुर के तात्कालिक प्रधानमंत्री ली कुआन ये ने नदियों के स्वच्छीकरण का बीड़ा उठाया. नौकरशाही को नदियों की सफाई के लिए 10 साल का समय दिया और पर्याप्त बजट रखा. समयसीमा के भीतर ही कार्य पूरा हो गया. इसका प्रमुख कारण ये था कि सरकार ने नदी किनारे बसे तमाम लोगों का पुनर्स्थापन किया. परिणामस्वरूप, सिंगापुर की नदियों के तट अब आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं.</p>
<p>इससे स्पष्ट हो जाता है कि नदियों की सफाई न केवल संभव है बल्कि गंदगी में रहने के बजाए स्वच्छता में रहना काफी सस्ता भी है. यमुना औउर गंगा की सफाई की वर्तमान योजना को देखते हुए पूरे निश्चय के साथ भविष्यवाणी की जा सकती है कि जबतक इनमें आमूलचूल परिवर्तन नहीं होता, तबतक ये नदियां और भी अधिक प्रदूषित होती रहेंगी.</p>
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		<title>परिणाम पर नहीं, सफ़र पर हो नज़र! कामयाबी के कुछ अचूक मंत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Dec 2018 11:30:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिक्षा और कैरियर]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="200" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Good_Communicator-300x200.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Good_Communicator-300x200.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Good_Communicator-768x512.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Good_Communicator.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />एक सफल व्यक्ति से किसी ने पूछा कि उनकी सफलता और महानता का राज़ क्या है? इसके जवाब में उन्होंने तुरंत कहा, ‘जब मैं अपने बाल संवार रहा होता हूँ, तो उस समय उसके सिवाए मैं और कुछ नहीं सोचता.’ इस सांकेतिक जवाब के पीछे काफी गूड़ अर्थ छिपा था. उनके इस जवाब का तात्पर्य [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Good_Communicator-300x200.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Good_Communicator-300x200.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Good_Communicator-768x512.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Good_Communicator.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>एक सफल व्यक्ति से किसी ने पूछा कि उनकी सफलता और महानता का राज़ क्या है? इसके जवाब में उन्होंने तुरंत कहा, ‘जब मैं अपने बाल संवार रहा होता हूँ, तो उस समय उसके सिवाए मैं और कुछ नहीं सोचता.’ इस सांकेतिक जवाब के पीछे काफी गूड़ अर्थ छिपा था. उनके इस जवाब का तात्पर्य था कि वे एक समय में जो भी कार्य करते हैं, उनका पूरा ध्यान उसी पर होता है. उनकी सफलता का राज़ भी इसी में है क्योंकि एकाग्रता से ही उन्हें सफलता की ताकत मिलती है.</p>
<p>गुरु द्रोणाचार्य जब अपने शिष्यों की परीक्षा ले रहे थे तब सभी से उन्होंने एक चिड़िया पर निशाना लगाने को कहा. निशाना लगाने के दौरान उन्होंने सभी से पूछा कि उसे क्या दिख रहा है, तो किसी ने जिस वृक्ष पर चिड़िया बैठी थी, उसके बारे में बताया, तो किसी ने कहा कि उसे पेड़ के पत्ते दिख रहे हैं. जब उन्होंने अपने होनहार शिष्य अर्जुन से यही प्रश्न पूछा, तो जवाब में अर्जुन ने कहा कि उन्हें चिड़िया की आँख के अलावा और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा. इस जवाब से गुरु द्रोणाचार्य बड़े प्रसन्न हुए क्योंकि उन्हें अपना सच्चा शिष्य मिल चुका था. उन्हें इस बात पर गर्व था कि अर्जुन का पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर था.</p>
<p>वहीं, आज की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में अधिकांश लोग, खासकर स्टूडेंट्स किसी भी कार्य पर अपना ध्यान एकाग्र नहीं कर पाते. फलतः उन्हें मंजिल तक पहुंचने में नाकामयाबी ही हाथ लगती है. अधिकांश स्टूडेंट्स के सामने भी यही समस्या आती है. जब वे अपनी पुस्तक खोल के बैठते हैं, तो अक्सर उसमें लिखी बातें इसलिए उनकी समझ में नहीं आतीं क्योंकि उनका ध्यान कहीं और होता है. वे पन्ने पर पन्ने पलटते चले जाते हैं, पर उनके दिमाग में कुछ नहीं जाता. इससे समय तो नष्ट होता ही है, उनकी हताशा भी बढ़ती है. दरअसल, ध्यान भंग होने के कारण यही हैं कि उनका दिमाग कई तरफ लगा रहता है. वही, अगर तमाम कोशिशों के बावजूद भी दिमाग विचलित रहे, तो आपको थोड़ा-बहुत योग करना चाहिए. इससे भटकाव ख़त्म होगा और किसी भी विषय पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी.</p>
<p>जीवन में अनुशासन का काफी महत्व होता है. इसकी अवहेलना करने पर आपको हर तरफ नुकसान ही होगा. इसलिए बेहतर यही होगा कि आप अपनी दैनिक दिनचर्या से लेकर खान-पान तक को अनुशासित रखें. सुबह एक निश्चित समय पर सोकर उठें और नियम व समय से दैनिक कार्य निपटाएं. याद रहे, व्यवस्थित जीवन जीने से न केवल आपकी एकाग्रता की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि आप किसी भी विषय पर अपना ध्यान केंद्रित करने में सक्षम हो सकेंगे. जब आप अध्ययन कर रहे हों, तो कोशिश करें कि आपके दिमाग में उससे भी अलग और कोई बात न आए. हमें एक समय में एक ही कार्य पर ध्यान देना चाहिए. इसके लिए पहले से ये मानकर चलें कि अच्छी पढ़ाई से आपको सुखद व बेहतरीन परिणाम हासिल हो सकता है जो आपके उज्ज्वल व चमकदार भविष्य के लिए सहायक साबित होगा.</p>
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		<title>दिमाग की सोच में छिपा है लंबी आयु का रहस्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Dec 2018 11:30:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विज्ञान और टेक्नोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="169" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/secret-in-mind-300x169.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/secret-in-mind-300x169.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/secret-in-mind.jpg 750w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />आपका मूड, भावनाएं और विचार शरीर पर प्रभाव डालते हैं. आराम करने से ब्लड प्रेशर कम होने लगता है. अवसाद दूर होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसलिए सवाल उठता है कि अगर दिमाग शरीर को दुरुस्त कर सकता है तब क्या वो उसे फिर से जवान बना सकता है? क्या वो [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/secret-in-mind-300x169.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/secret-in-mind-300x169.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/secret-in-mind.jpg 750w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>आपका मूड, भावनाएं और विचार शरीर पर प्रभाव डालते हैं. आराम करने से ब्लड प्रेशर कम होने लगता है. अवसाद दूर होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसलिए सवाल उठता है कि अगर दिमाग शरीर को दुरुस्त कर सकता है तब क्या वो उसे फिर से जवान बना सकता है? क्या वो अपनी बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है?</p>
<p>इस बारे में विशेषज्ञ कहते हैं कि हमारे सोचने का तरीका बीमारी से लड़ने वाले सफ़ेद रक्त कणों को बढ़ाता है. ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले हार्मोन्स को नियंत्रित करता है. इसलिए वो क्यों नहीं हड्डियों को मज़बूत बना सकता है या दिल की बीमारी को टाल सकता है. या वो आयु बढ़ाने के साथ ख़त्म हो रही मस्तिष्क की कोशिकाओं को सुरक्षित रख सकता है.</p>
<p>हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर एलीन लैंगर की एक स्टडी केवल एक दिन एकाग्रता से ध्यान करने पर बुढ़ापे को बढ़ावा देने वाले जीन को नियंत्रित कर सकते हैं. 1970 के दशक में शोधकर्ताओं ने बुढ़ापा रोकने के लिए दिमाग के उपयोग पर गंभीरता से विचार करना शुरू किया. लैंगर की- काउंटर क्लॉक वाइस- स्टडी ने इसकी शुरुआत की थी. उन्होंने 1979 में एक स्ट्रीट में 70 वर्ष से अधिक आयु के आठ पुरुषों को पांच दिन के लिए रखा. इन सबका स्वास्थ्य न अच्छा था और न ही खराब. लेकिन, उनपर आयु का प्रभाव दिखता था. ये रिट्रीट पुराना मठ था. इसे 1959 की दुनिया के हिसाब से डिज़ाइन किया गया. पुराने टीवी पर पुराने कार्यक्रम दिखाए गए. 50 साल पुराने रेडियो पर पुराने गाने बजाए गए. उनकी बातचीत 1959 के विषयों पर केंद्रित रही. वहां से सभी आइने हटा दिए गए. पुरुषों की शारीरिक, मानसिक स्थिति जानने के लिए कई टेस्ट करवाए गए. सभी मापदंडों पर पुरुषों का परफॉरमेंस बेहतर रहा. कई मामलों में उनके परिणाम दस या बीस वर्ष छोटे पुरुषों जैसे रहे.</p>
<p>बेचैनी और चिंता की स्थिति बुढ़ापे को पास बुलाती है. जब हम चिंतित होते हैं तो नर्वस सिस्टम अनुमान लगाता है कि जीवन के लिए कोई खतरा पैदा हो गया है. मस्तिष्क एड्रेनल ग्लैंड को संकेत भेजता है. ग्लैंड होर्मोन छोड़ती है. ये होर्मोन इम्यून सिस्टम को प्रोटीन छोड़ने का सिग्नल देते हैं. प्रोटीन संभावित हमले की जगह पर सफ़ेद रक्त कणों और अन्य लड़ाके भेजती है. वास्तव में कोई हमला, चुनौती या घाव होने की स्थिति में सिस्टम काम करता है. यदि आप हमेशा अपने बॉस, सहयोगियों, परिवार के लोगों से लड़ते हैं. मामूली बातों को लेकर चिंतित होते हैं तब शरीर से उत्तेजक केमिकल्स बढ़ जाते हैं. ये केमिकल कैंसर, दिल की बीमारियों, दिमाग की गड़बड़ी पैदा करते हैं. इसी के साथ वे अपने बुढ़ापे को न्योता देते हैं.</p>
<p>शोधकर्ताओं का मानना है कि अच्छा भोजन, पर्याप्त नींद, एक्सरसाइज, सकारात्मक नजरिया लम्बे जीवन के आसान रास्ते हैं. इस बात पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है कि चिंता, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली से शरीर को नुकसान पहुंचा चुके अधेड़ लोगों को सोचने के तरीके में बदलाव और ध्यान से कितना फायदा होगा. लेकिन, ऐसी रिसर्च लगातार सामने आ रहीं हैं कि इससे फायदा है और कोई नुकसान तो निश्चित रूप से नहीं होगा.</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%9a-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9b%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b2%e0%a4%82-89977/">दिमाग की सोच में छिपा है लंबी आयु का रहस्य</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi">Youngisthan.in</a>.</p>
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		<title>आखिर मीडिया को इतना ‘सच’ दिखाने की बेचैनी क्यों?</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/after-all-why-restlessness-to-show-the-media-so-much-truth-89975/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Dec 2018 13:30:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="150" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-300x150.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-300x150.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-768x384.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-1024x512.jpg 1024w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-970x485.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media.jpg 2000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />मीडिया के मूल कर्तव्यों में से एक है जनता के सामने हर पक्ष रखा जाना, लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं जिनका अन्य पक्ष नहीं होता. उदहारण के लिए दुष्कर्म को ये कहकर उचित नहीं ठहराया जा सकता कि महिलाएं बाहर न निकलें या छोटे कपड़े न पहनें. इसी तरह भ्रष्टाचार का भी कोई दूसरा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="150" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-300x150.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-300x150.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-768x384.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-1024x512.jpg 1024w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media-970x485.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/media.jpg 2000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>मीडिया के मूल कर्तव्यों में से एक है जनता के सामने हर पक्ष रखा जाना, लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं जिनका अन्य पक्ष नहीं होता. उदहारण के लिए दुष्कर्म को ये कहकर उचित नहीं ठहराया जा सकता कि महिलाएं बाहर न निकलें या छोटे कपड़े न पहनें. इसी तरह भ्रष्टाचार का भी कोई दूसरा पक्ष नहीं हो सकता.</p>
<p>मीडिया के खिलाफ सत्ता पक्ष का अनुदार ही नहीं, बल्कि दमनकारी भाव नया नहीं है. संविधान अंगीकार होने के एक साल के भीतर ही तमाम बंदिशें प्रेस पर असंवैधानिक रूप से लगा दी गईं थीं. उदहारण के तौर पर स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार 19(1) (अ) को लेकर संविधान निर्माताओं ने मात्र चार प्रतिबंध- राज्य की सुरक्षा, नैतिकता, मानहानि एवं अदालत की अवमानना लगाए, लेकिन एक साल में ही संविधान सभा के फैसले को दरकिनार करते हुए तत्कालीन सरकार ने पहले संविधान संशोधन के ज़रिए तीन नए प्रतिबंध-जन-व्यवस्था, विदेशी राष्ट्र से मैत्रीपूर्ण संबंध और अपराध करने के लिए उकसाना शामिल कर लिया. जन-व्यवस्था रूपी प्रतिबंध महज इसलिए लाया गया क्योंकि तत्कालीन शासन को सुप्रीम कोर्ट का रोमेश थापर बनाम मद्रास में प्रेस के पक्ष में किया गया फैसला पसंद नहीं आया.</p>
<p>संविधान निर्माताओं की भावना के साथ शायद इतना बड़ा खिलवाड़ पहले कभी नहीं हुआ. संविधान के अनुच्छेद 13(2) में स्पष्ट रूप में लिखा हुआ है कि राज्य ऐसा कोई भी कानून नहीं बनाएगा जिससे किसी भी प्रकार से मौलिक अधिकार बाधित होते हों. इसके बावजूद संसद में प्रथम संशोधन के ज़रिए प्रेस स्वतंत्रता को ज़बरदस्त तरीके से बाधित किया गया. इस संशोधन के तत्काल बाद प्रेस एक्ट 1951 लागू किया गया और 185 अखबारों के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई की. इस संविधान संशोधन से कुपित होकर संविधान-सभा के सदस्य आचार्य कृपलानी ने कहा, ये संशोधन एक विचित्र छलावा है और सरकार की ऐसी मंशा के बारे में संविधान सभा सोच भी नहीं सकती थी. उनका मानना था कि अनुच्छेद 13(2) के स्पष्ट मत के बाद भी अभिव्यक्ति स्वतंत्रता को बाधित करना संविधान की आत्मा के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. इन सब बातों से बिना विचलित हुए सत्ताधारियों ने 1971 में एक अन्य संशोधन के ज़रिए 13(2) के प्रभाव को ख़त्म कर दिया. बाद में भी कुछ ऐसे प्रयास हुए जिनके माध्यम से प्रेस को पंगु बनाने की कोशिश की गई, परंतु इमरजेंसी के बाद से शासकों को ये अहसास हो गया कि इसे छेड़ना देश की प्रजातांत्रिक जनभावनाओं से खिलवाड़ करना होगा. स्व-नियमन के जिस मार्ग पर आज का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चल रहा है उसकी पहली ही शर्त है कि हर सलाह को खुले मन से आने देना और अपने प्रति समाज के हर वर्ग की राय को बगैर किसी पुर्वाग्रह के देखना.</p>
<p>मीडिया की आलोचना करने में तीन तरह के लोग होते हैं. एक जो आलोचना करके मीडिया के खिलाफ एक सरकारी नियामक/ नियंत्रक संस्था बनाने के मंसूबे को हवा देकर खुद उसका प्रमुख बन दिन-रात टीवी में अपना चेहरा दिखाना चाहते हैं. दूसरे, वे जो इसकी निंदा के नियमित लेख लिखकर आर्थिक आमदनी करने के अलावा समाज में बौद्धिक जुगाली के ज़रिए बने रहना चाहते हैं. तीसरा वो वर्ग है जो मीडिया में रहकर मोटी तनख्वाह लेकर समाजवादी चेहरा बनाए मीडिया को ही गाली देता है और ऐसा करके वो बताना चाहता है कि देखो हम नैतिक रूप से कितने मज़बूत हैं. मीडिया की निंदा सकारात्मक भाव से होनी चाहिए न कि अपनी दूकान चमकाने के लिए.</p>
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		<title>क्या कंप्यूटर पीछे छोड़ देगा मानव के दिमाग को?</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/will-the-computer-leave-behind-the-human-brain-89973/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Dec 2018 13:30:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विज्ञान और टेक्नोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="208" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/brain-computer-300x208.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/brain-computer-300x208.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/brain-computer.jpg 500w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />कभी-कभार हमारा सामना लम्बे समय तक चलने वाले गंभीर विवादों से होता है. कुछ प्रमुख इंजीनियरों और प्रभावशाली विचारकों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य ऐसा ही एक मामला है. क्या मशीनें मानवों के समान सोचना सीख जाएंगी और फिर हमें पीछे छोड़ देंगी? और अगर वे ऐसा करेंगी तो हमारा क्या होगा? [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="208" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/brain-computer-300x208.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/brain-computer-300x208.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/brain-computer.jpg 500w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>कभी-कभार हमारा सामना लम्बे समय तक चलने वाले गंभीर विवादों से होता है. कुछ प्रमुख इंजीनियरों और प्रभावशाली विचारकों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य ऐसा ही एक मामला है. क्या मशीनें मानवों के समान सोचना सीख जाएंगी और फिर हमें पीछे छोड़ देंगी? और अगर वे ऐसा करेंगी तो हमारा क्या होगा? किसी समय विज्ञान कथाओं का ये विषय उच्च टेक्नोलॉजी को परिभाषित करने वाला तथ्य बन गया है. प्रमुख आईटी कम्पनियां इस क्षेत्र में अरबों रूपए लगा चुकीं हैं.</p>
<p>वहीं, इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ हलचल के बीच इसके परिणामों से चिंतित होने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. सुविख्यात एस्ट्रो फिजिसिस्ट स्टीफन हॉकिंग चेतावनी देते हैं कि एआई का पूर्ण विकास मानव जाति का अस्तित्व ख़त्म कर सकता है. टाइम ने एआइ और मानव मस्तिष्क पर कंप्यूटर जीनियस डेविड जेलेरेंटर से बातचीत की. उन्होंने बाताया कि एआई का पूरा क्षेत्र खतरनाक रूप से पटरी से अलग है. इंटेलिजेंस की खोज में एक प्रमुख प्रश्न का कभी जवाब नहीं दिया गया है. वो है कि मानव शरीर के बिना मानव मस्तिष्क का क्या अर्थ है?</p>
<p>एआई के इतिहास में मस्तिष्क-शरीर के प्रश्न की अनोखी जगह है. कंप्यूटर विशेषज्ञ एलन टयूरिंग ने इसे इतना कठिन पाया कि किनारे कर दिया. इंजीनियर आधुनिक रोबोट बना सकते हैं पर वे मानव शरीर का निर्माण नहीं कर सकते हैं. शरीर चेतना का हिस्सा है इसलिए शारीरिक परिवर्तनों के साथ दिमाग भी बदलता जाता है. बच्चों, किशोरों और बुजुर्गों का मस्तिष्क एक समान नहीं होता है. भावनाओं में दर्द और प्रसन्नता के लम्हें शामिल रहते हैं. वे मस्तिष्क का निर्माण करते हैं. दिमाग हर दिन अलग तरह से कार्य करता है. शरीर के अति सतर्क होने और नींद की स्थिति में उसका व्यवहार अलग रहता है. मानव मस्तिष्क के निर्माण और उसकी हलचल में सभी तरह की शारीरिक स्थितियों की भूमिका है. इस सबको समझे बिना नकली दिमाग बनाना संभव नहीं है.</p>
<p>वहीं, कंप्यूटर को मौत का भय नहीं रहता. इसलिए गूगल के रे कुर्जवील और उनके प्रशंसकों को सिंगुलेरिटी इसलिए पसंद आ रही. अगर मानव को मशीन के साथ मिलाकर सॉफ्टवेयर बनाया जाएगा तो वो फिर मृत्यु से परे हो जाएगा यानी अमर हो जाएगा.</p>
<p>एआइ पर असंतोष व्यक्त करने वाले लोगों की कमी नहीं. सिलिकॉन वैली के आन्त्रप्रेन्योर रोमन ओरमंदी ने दिमाग को प्रोसेसर का मॉडल बताने की आलोचना की है. उनक्जा कहना है कि जैसे-जैसे रिसर्च आगे बढ़ेगी स्पष्ट होगा कि दिमाग बहुत अधिक पेचीदा है.</p>
<p>आने वाले दिनों में कंप्यूटर और अधिक शक्तिशाली होंगे. आज की तुलना में उन पर निर्भरता बढ़ेगी. इससे मशीनें उन स्थानों में प्रवेश करेंगी जो पहले मानव बुद्धि के लिए आरक्षित था. तब कंप्यूटर की याददाश्त हमसे बड़ी होगी. उस तक तेज़ी से पहुंचा जा सकेगा. वे बिना थके अधिक कार्य करेंगे तो उनका महत्व बढ़ेगा. वे कार्य संस्कृति और सीखने के तरीकों में बदलाव करेंगे. कहीं-न-कहीं ऐसे में वे हमारे संबंधों पर भी असर डालेंगे. इसलिए हमें समझना होगा कि कंप्यूटर में क्या कमी है और वे क्या नहीं कर सकते हैं?</p>
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		<title>विदेशी धन की भूमिका पर सवाल</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/question-on-the-role-of-foreign-money-89971/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Dec 2018 11:30:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="169" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/foreign-money-300x169.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/foreign-money-300x169.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/foreign-money.jpg 624w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />इंटेलीजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार भारत के विकास में कुछ विदेशी धन से पोषित एनजीओ बाधा बन रहे हैं. इनमें ग्रीनपीस का नाम सबसे ऊपर है. ग्रीनपीस एक ऐसी वैश्विक स्तर पर कार्य करने वाली संस्था है जो पर्यावरण संरक्षण का कार्य करती है. इस संस्था के द्वारा कोयला तथा परमाणु बिजली परियोजनाओं का [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/foreign-money-300x169.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/foreign-money-300x169.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/foreign-money.jpg 624w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>इंटेलीजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार भारत के विकास में कुछ विदेशी धन से पोषित एनजीओ बाधा बन रहे हैं. इनमें ग्रीनपीस का नाम सबसे ऊपर है. ग्रीनपीस एक ऐसी वैश्विक स्तर पर कार्य करने वाली संस्था है जो पर्यावरण संरक्षण का कार्य करती है. इस संस्था के द्वारा कोयला तथा परमाणु बिजली परियोजनाओं का निरंतर विरोध किया जा रहा है. इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने ग्रीनपीस द्वारा विदेशी धन प्राप्त करने पर रोक लगा दी है.</p>
<p>तमाम देशों में एनजीओ ने मानव राहत के उल्लेखनीय कार्य किए हैं. रवांडा के नरसंहार के दौरान लगभग 200 एनजीओ द्वारा मौलिक जन सुविधाएं लोगों को मुहैया कराई गईं थीं. जो कि विदेशी धन से पोषित थे. अपने देश में विदेशी धन से शिक्षा और स्वास्थ्य मुहैया करवाने वाली तमाम संस्थाएं चल रही हैं. वहीं, दूसरी तरफ एनजीओ के आवरण के पीछे विदेशी धन का उपयोग देश की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए भी किया जा रहा है जैसे 26/ 11 मुंबई कांड को अंजाम देने के लिए विदेशी धन पहले भारत भेजा गया अथवा जाली नोटों को फैलाने के लिए विदेशी धन भेजा गया. इस प्रकार के कृत्य हमारे क्रिमिनल कानून के अंतर्गत प्रतिबंधित है. इन गतिविधियों का लक्ष्य विशेष राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि संपूर्ण देश होता है. ऐसी गतिविधियों के लिए विदेशी धन का प्रवेश कतई नहीं होने देना चाहिए.</p>
<p>इस प्रकार का विदेशी धन का पहला स्तर निर्लिप्त दान का है जैसा कि रवांडा में देखा जाता है. इसे जारी रखने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. वहीं, दूसरा स्तर देश के विरुद्ध आपराधिक गतिविधियों का है. इन पर सख्त प्रतिबंध होना चाहिए. इन दोनों छोरों के बीच एक विशाल धुंधला क्षेत्र है. इसमें पर्यावरण और राजनीतिक गतिविधियां आती हैं जैसे अमेरिका द्वारा वेनेजुएला की सत्तारूढ़ सरकार के विरोधियों को धन दिया जा रहा है अथवा नेताजी सुभाषचंद्र बोस को जापान द्वारा मदद उपलब्ध कराई गई थी. इस प्रकार के राजनीतिक विदेशी धन पर कोई एक फार्मूला लगाना उचित नहीं है. तानाशाही सरकार के विरोध में विदेशी धन उपलब्ध कराना उचित दिखता है, जैसा सुभाषचंद्र बोस जी को उपलब्ध करवाया गया, जबकि लोकतांत्रिक सरकार के विरोध में विदेशी धन उपलब्ध कराना अनुचित दिखता है, जैसा की वेनेजुएला में अमेरिका द्वारा किया गया था.</p>
<p>आज तमाम सरकारों के विरोध में विदेशी धन सक्रीय है. रूस में चुनावों पर नज़र रखने वाली संस्था गोलोस को विदेशी धन दिए जाने की पुष्टि हो चुकी है. नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित एमनेस्टी इंटरनेशनल तमाम देशों में तानाशाहों का विरोध करने वाले लोगों को मदद पहुंचती रही है. इसी तरह 1971 के बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में भारत ने मदद पहुंचाई थी. म्यांमार में अहिंसक क्रांति करने वाली आंग सान सू को भी विदेशी धन से पोषित बताया जाता है.</p>
<p>अगर विदेशी धन से पोषित संस्था जनता के विरुद्ध कार्य कर रही है तो इसका निर्णय करने का अधिकार जनता को होना चाहिए, न कि सरकार को. लोकतंत्र में गलत कार्य में लिप्त संस्थाओं का भंडाफोड़ करने की पर्याप्त गुंजाइश होती है. अतः जनता के सामने इनका खुलासा करना चाहिए और डोनरों को भी ये सूचना देनी चाहिए. इस प्रकार की गतिविधियों पर अगर हम संदेह के आधार पर प्रतिबंध लगाएंगे तो दोहरा नुकसान होगा. हम सही कार्य करने वाली विदेशी संस्थाओं को बंद कर देंगे, जैसे ग्रीनपीस अगर जंगल बचा रही है तो हम जंगल कटवा देंगे. दूसरी ओर, विदेशी धन पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार मेज़बान सरकार को देकर हम तानाशाहों को निरीह जनता को रौंदने को खुला मैदान उपलब्ध करा देंगे.</p>
<p>हमें ये ध्यान रखने की ज़रूरत है कि पूंजी का ग्लोबलाइजेशन हो चुका है इसलिए पूंजी के विरोधियों का भी ग्लोबलाइजेशन होने देना चाहिए. कोर्ट रूम में एक पक्ष को प्रवेश ही न करने दिया जाए तो कानूनी कार्यवाही ढकोसला रह जाती है. ग्लोबल एनजीओ पर प्रतिबंध लगाने से लोकतंत्र ढकोसला रह जाता है.</p>
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		<title>आखिर हम गलतियां क्यों करते हैं? जानिए जे. कृष्णमूर्ति से</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/why-do-we-make-mistakes-know-from-j-krishnamurti-89966/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Dec 2018 13:30:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="200" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes-300x200.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes-300x200.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes-768x512.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes.jpg 1024w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes-970x647.jpg 970w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />आप फूल क्यों तोड़ते हैं? पौधों को क्यों नष्ट करते हैं? क्यों आप फर्नीचर नष्ट करते हैं या कोई कागज़ इधर-उधर फेंक देते हैं. आपको ऐसा कार्य न करने के लिए कितने ही बार टोका गया होगा या रोका गया होगा पर ये सब आप करते नहीं थकते. अपनी गलतियों को आप इसी तरह दोहराते [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="200" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes-300x200.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes-300x200.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes-768x512.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes.jpg 1024w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Mistakes-970x647.jpg 970w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>आप फूल क्यों तोड़ते हैं? पौधों को क्यों नष्ट करते हैं? क्यों आप फर्नीचर नष्ट करते हैं या कोई कागज़ इधर-उधर फेंक देते हैं. आपको ऐसा कार्य न करने के लिए कितने ही बार टोका गया होगा या रोका गया होगा पर ये सब आप करते नहीं थकते. अपनी गलतियों को आप इसी तरह दोहराते जाते हैं. लेकिन क्या ऐसा नहीं लगता आपको कि ऐसे कार्य करते वक़्त आप अविचारशीलता की अवस्था में होते हैं? ये कार्यकलाप आप इसलिए करते हैं क्योंकि आप असावधान रहते हैं. आप ऐसे करते वक़्त कुछ सोचते ही नहीं. आपका मन तंद्रा में रहता है. आप पूर्णतः सजग नहीं हैं. वहां होकर भी स्वयं उस स्थान पर उपस्थित नहीं हैं. फिर ऐसी अवस्था में आपको मना करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता. आप उससे कुछ ग्रहण कर ही नहीं पाएंगे.</p>
<p>वहीं दूसरी ओर अगर मना करने वाले आपको विचारशील होने में, सही अर्थों में सजग होने में, वृक्षों, पक्षियों, सरिता और बसुधा के अद्भुत ऐश्वर्य का आनंद लेने में आपकी सहायता कर सकें. तब आपके लिए एक छोटा-सा इशारा भी काफी होगा. तब फिर आपके अंदर एक तरह की नई अनुभूति जिसको हम दूसरे शब्दों में कहें तो संवेदनशीलता विकसित हो चुकी होगी. तब आप पहले की तरह गलतियां नहीं दोहराएंगे. तब तो आप प्रत्येक वस्तु के प्रति संवेदनशील और सचेत हो चुके होंगे.</p>
<p>लेकिन सोचने वाली बात ये है कि ये कितने दुर्भाग्य का विषय है कि ‘ये करें’, ‘ये न करें’ कहकर कैसे हमारी संवेदनशीलता ही नष्ट कर दी जाती है. फिर आपके माता-पिता, शिक्षक, समाज, धर्म, पादरी, आपकी खुद की महत्वकांक्षाएं, आपका लालच और ईर्श्याएं, ये सभी आपको कहते रहते हैं- आप ये करें और ये न करें. हमें जितना हो सके उतना इन ‘करने’ और ‘न करने’ से मुक्त रहना चाहिए. इसके साथ ही आपको संवेदनशील भी होना चाहिए ताकि आप सहज दयालु बन सकें और स्थितियों को बेहतर ढंग से समझ पाएं. जैसे आप किसी को चोट न पहुंचाएं व इधर-उधर कागज़ न फेंकें. अपनी राह का पत्थर बिना हटाये आगे न बढ़ें. इन सारी बातों के लिए अंकुश की आवश्यकता नहीं बल्कि विचारशीलता की ज़रूरत होती है.</p>
<p>गलतियां करने के लिए सोचना नहीं पड़ता है, वो तो खुद-ब-खुद हो जाती हैं. क्योंकि उन्हें करने के लिए सचेत नहीं रहना पड़ता यानी होश के बगैर ये कदम उठ जाते हैं और हम ऐसे में गलतियां कर बैठते हैं. अगर हम अपने मन में विचारशीलता का दीपक जलाएं तो न जाने होने वाली कितनी ही गलतियों का दोष हम पर से उतर सकता है. लेकिन हम सहज होने से घबराते हैं, हम अपनी आँखें खोलने से बचते हैं. हमें अन्धकार में रहने में ही आनंद आता है. हमने तो सोचना-समझना ही जैसे बंद कर लिया है तो भला विचार कौन करे कि क्या अर्थ है और क्या अनर्थ? हम तो बस चले जा रहे हैं बिना सोचे-समझे कि आखिर जा किधर रहे हैं और पहुंचना कहां है?</p>
<p>सवाल कई सारे होंगे आपके मन में तो थोड़ा अपने से भी बातें करिए. उसको भी जानिए, सचेत बनिए और विचारशील बनकर बार-बार होने वाली गलतियों से छुटकारा पाइए.</p>
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		<item>
		<title>अपनी मुश्किलों से निकलना हो तो एक बार इसे ज़रूर पढ़िएगा</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/if-you-have-to-overcome-your-difficulties-then-you-will-definitely-read-it-89964/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Dec 2018 11:30:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवन शैली]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="178" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/overcome-dificulties-300x178.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/overcome-dificulties-300x178.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/overcome-dificulties.jpg 590w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />मानव के जीवन में अगाध शक्तियां कार्य करती हैं. शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक. ये तीन प्रमुख शक्तियां संपूर्ण विकास में सहायक हो सकती हैं. लेकिन तभी, जब मनुष्य के अंतःकरण में अगाध विश्वास हो. सिर्फ ईश्वर पर ही नहीं बल्कि खुदपर भी. ये समस्त जग विश्वास पर ही टिका हुआ है. जो ये विश्वास करते [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="178" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/overcome-dificulties-300x178.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/overcome-dificulties-300x178.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/overcome-dificulties.jpg 590w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>मानव के जीवन में अगाध शक्तियां कार्य करती हैं. शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक. ये तीन प्रमुख शक्तियां संपूर्ण विकास में सहायक हो सकती हैं. लेकिन तभी, जब मनुष्य के अंतःकरण में अगाध विश्वास हो. सिर्फ ईश्वर पर ही नहीं बल्कि खुदपर भी. ये समस्त जग विश्वास पर ही टिका हुआ है. जो ये विश्वास करते हैं कि कोई शक्ति है, जिसे हमने ईश्वर नाम दिया है या जो ये विश्वास करते हैं कि ईश्वर उसी रूप ,इ है जिसे उन्होंने मूर्तियों व चित्रों में देखा है, वे सच में इसी विश्वास के सहारे अपना आध्यात्मिक और नैतिक विकास करते हैं. ईश्वर की प्राप्ति में गहन विश्वास ही प्रेरक रूप में कार्य करता है. पत्थर की मूर्तियों में केवल विश्वास ही तो है जिसमें आप उस ईश्वर के विभिन्न रूपों को देख पाते हैं.</p>
<p>सिर्फ आध्यात्मिक लोगों को ही नहीं बल्कि वैज्ञानिकों की भी बड़ी-से-बड़ी खोजें विश्वास पर ही टिकी हुई हैं. शून्य से शिखर तक पहुंचे ऐसे कई व्यापारी हुए हैं जिनके पास पूंजी न होते हुए भी वे अपनी प्रतिभा पर विश्वास के सहारे ऊँचाइयों तक पहुंचे हैं. एवरेस्ट की चोटियों का स्पर्श करने वालों को भी स्वयं पर विश्वास होता है. जो विश्वास से लबरेज़ रहते हैं, उन्हें कठिनाइयां, बाधाएं या विपत्तियां न तो डरा पाती हैं और न ही डिगा पाती हैं. इसके विपरीत विषमताओं में वे दोगुने वेग से खड़े होते हैं.</p>
<p>हमेशा ये याद रखिए, शक्तियां आपके भीतर बीज रूप में विद्यमान हैं. आवश्यकता है तो बस उन्हें जाग्रत करने की और जीवन के प्रति गहन विश्वास पैदा करने की. विश्वास उत्पन्न होते ही ये शक्तियां भी सक्रीय हो जाती हैं. विश्वास से पूर्ण व्यक्ति के जीवन में तीन तत्व प्रमुख रूप से कार्य करते हैं- संकल्प, साहस और विजय. विश्वास के सहारे वो संकल्प लेता है और साहस के साथ परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करता है.</p>
<p>कौरव और पांडव दोनों के समक्ष ही तो ईश्वर थे, किंतु दुर्योधन तो सामने खड़े श्रीकृष्ण की परमसत्ता को नकारता रहा और अर्जुन उस परमसत्ता के अनंत रूपों के दर्शन करते रहे. मूल में एक ही बात सामने आती है और वो है विश्वास.</p>
<p>जिन्हें ईश्वर पर विश्वास होता है, वे ही अपने आप पर विश्वास कर सकते हैं. जिन्हें अपने आप पर विश्वास नहीं होता, वे ईश्वर पर भी विश्वास नहीं कर पाते. आज का जीवन बहुत जटिल है. जहाँ चारों ओर विकास के बहुत रास्ते हैं वहीं बहुत सी विपरीत परिस्थितियां आपके चारों तरफ होती हैं- कार्यालय में, आपके समाज में और आपके घर में. एक तरह से ऐसी विपरीत परिस्थितियां आपके विश्वास को पूरी तरह तोड़ने के लिए पर्याप्त होती हैं. लेकिन स्मरण रहे, जीवन की कठिन परिस्थितियां एक चुनौती भर हैं, न की विपत्ति. जीवन में चाहे चारों ओर कष्ट के बादल छाये हों, फिर चाहे जैसे भीषण परिस्थितियां हों, विश्वास को डगमगाने मत दीजिए. अगर आपमें विश्वास है तो इन परिस्थितियों से बाहर निकलने की आपमें शक्ति स्वतः आ जाएगी. ये वही शक्ति है जो आपके अंदर भी विद्यमान थी. स्वामी विवेकानंद के शब्दों में- इस जगत का इतिहास कुछ ऐसे लोगों का इतिहास है जिन्हें अपने आपमें विश्वास था. ज्यों ही कोई व्यक्ति अपने आपमें विश्वास खो बैठता है, उसी वक़्त उसे मृत्यु आकर दबोच लेती है. पहले अपने आप पर विश्वास करो, फिर ईश्वर पर.</p>
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		<title>शिव परिवार के वो रोचक तथ्य जिनसे आप हैं बेखबर</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/the-facts-about-shiva-family-that-you-are-unaware-of-89962/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Dec 2018 13:30:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="300" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-300x300.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Bhagwan Shivji Ka Parivar" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-300x300.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-150x150.jpg 150w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-250x250.jpg 250w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-345x345.jpg 345w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-320x320.jpg 320w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-90x90.jpg 90w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l.jpg 500w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />मानो तो भगवान और न मानो तो पत्थर. बात यहां सिर्फ मानने की है. हम जो कुछ भी मानते हैं वो सब हम अपनी सुविधानुसार ही मानते हैं. ये तो हमपे निर्भर करता है हम किसी में बुराइयां खोजकर उससे नफरत करते रहें या फिर उसकी अच्छाइयों से प्रेरणा लेते रहें. हम चाहें तो शंकर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="300" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-300x300.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Bhagwan Shivji Ka Parivar" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-300x300.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-150x150.jpg 150w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-250x250.jpg 250w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-345x345.jpg 345w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-320x320.jpg 320w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l-90x90.jpg 90w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/shiv-parivar2-251016_l.jpg 500w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>मानो तो भगवान और न मानो तो पत्थर. बात यहां सिर्फ मानने की है. हम जो कुछ भी मानते हैं वो सब हम अपनी सुविधानुसार ही मानते हैं. ये तो हमपे निर्भर करता है हम किसी में बुराइयां खोजकर उससे नफरत करते रहें या फिर उसकी अच्छाइयों से प्रेरणा लेते रहें. हम चाहें तो शंकर जी को मूर्ति मानकर पूजें या फिर उनके गुणों को जीवन में उतार लें. भगवान शंकर ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार आज के इस प्रतियोगितात्मक युग में काफी प्रेरणा प्रदान करता है. उनसे एक आम इंसान घर चलाने का हुनर सीख सकता है, तो वहीं एक सी.ई.ओ कंपनी चलाने के टिप्स भी ले सकता है.</p>
<p>भगवान शंकर के परिवार में जितनी विभिन्नता है, उतनी ही एकता भी. ठीक वैसे ही, जैसे किसी घर में अलग-अलग स्वभाव के सदस्य होते हैं या फिर किसी कंपनी में विभिन्न प्रकार के लोग कार्य करते हैं. परिवार के मुखिया भगवान शिव भोलेनाथ के रूप में जाने जाते हैं. उनके शरीर, पहनावे में किसी प्रकार का आकर्षण नज़र नहीं आता. वहीं, माता पार्वती अपने दोनों पुत्र, शिव गण और उनके भक्त उन्हें स्वामी मानते हैं. यानी बाहरी रूप और सौंदर्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण है आतंरिक गुण.</p>
<p>आम दिनों में ध्यान में खोए रहने वाले शिव, परिवार के मुखिया को ज़्यादा विचारमग्न रहने का संदेश देते हैं. उनकी ध्यानावस्था में शिव परिवार का हर सदस्य अपने कर्म में लीन रहता है. माता पार्वती से लेकर श्रीगणेश और नंदी बैल तक. जैसे कंपनी का सीईओ कंपनी के विकास के बारे में चिंतन करे और कर्मचारी अपनी ड्यूटी कंपनी के कार्य करने में लगाएं. शिव ने विषधर सर्प के साथ समुद्र मंथन से निकला विष भी अपने गले में सहेजा है. कुटिल प्रकृति वाले लोगों को अपने पास रखकर, उन्हें शांत रखने का गुण उनसे सीखा जा सकता है. संयुक्त परिवार के मुखिया के लिए भी परिवार की भलाई के लिए विष जैसी कड़वी बातों को अपने भीतर दबाकर रखना ज़रूरो हो जाता है.</p>
<p>पार्वती जी पारंपरिक भारतीय पत्नी की तरह पति की सेवा में तत्पर हैं. लेकिन वे स्त्री के महत्व को भी बता रही हैं. शिव की शक्ति वे स्वयं हैं. बिना उनके शिव अधूरे हैं और शिव का अर्धनारीश्वर रूप उनके अटूट रिश्ते का परिचायक है.</p>
<p>बुद्धि के देवता गणेश अपने से बेहद छोटी काया वाले चूहे की सवारी करते हैं. ये इस बात का संकेत है कि अगर आपमें बुद्धि है तो कमज़ोर समझे जाने वाले व्यक्ति से भी बड़ा कार्य करवा सकते हैं. इसी तरह गृहस्वामी भी अपने परिवार के लोगों की और कंपनी का अधिकारी अपने स्टाफ के लोगों की कार्यकुशलता को अपने बुद्धिकौशल से बढ़ा सकता है.</p>
<p>भगवान शंकर के परिवार में भातीं-भातीं के लोग हैं. उनके परिवार में भारतीय संस्कृति के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश निहित है. वैसे ही हर घर, परिवार, प्रांत अजुर देश को शिव परिवार से संयुक्त रहने और खामोशी से अपने कर्तव्य पालन की सीख लेने की आवश्यकता है.</p>
<p>वर्तमान अन्तरराष्ट्रीय माहौल में ये बात और भी प्रासंगिक हो जाती है. भगवान शंकर के परिवार में ऐसे पशु हैं, जिनमें सोचने-समझने की शक्ति नहीं है. इसके बावजूद सभी प्रेम से एक साथ रहते हैं. क्या हम मनुष्यों में इतनी भी समझ नहीं है कि जाति, धर्म और भाषा के भेद भुलाकर एकता के सूत्र में बंधे रहें?</p>
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		<title>मुस्लिम आबादी से उपजे सवाल</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/question-by-muslim-population-89960/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Dec 2018 09:30:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="162" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population-300x162.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Muslim Population Question" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population-300x162.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population-768x415.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population-970x525.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />लोकतंत्र में संख्या बल का अपना महत्व होता है और शायद धार्मिक जनसंख्या के आंकड़ों को बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के चुनावों से जोड़ने की कोशिश की जाती है. लेकिन मुस्लिम जनसंख्या से जुड़े सवालों को उठाने से पार्टियां परहेज़ करती नज़र आती हैं. उनको न जाने क्यों लगता है कि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="162" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population-300x162.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Muslim Population Question" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population-300x162.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population-768x415.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population-970x525.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/muslim-population.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>लोकतंत्र में संख्या बल का अपना महत्व होता है और शायद धार्मिक जनसंख्या के आंकड़ों को बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के चुनावों से जोड़ने की कोशिश की जाती है. लेकिन मुस्लिम जनसंख्या से जुड़े सवालों को उठाने से पार्टियां परहेज़ करती नज़र आती हैं. उनको न जाने क्यों लगता है कि इससे कहीं मुसलमान नाराज़ न हो जाएं और उनके वोट न कट जाएं पर सवाल पैदा होता है कि इतना मुसलमान पर अविश्वास क्यों किया जाता है? क्या मुसलमान भारत के हित में नहीं सोचते? क्या वे देश की समस्याओं के समाधान में कोई योगदान नहीं करना चाहते? क्या मुसलामानों का वोट इतना ज़रूरी है कि उसे लेने के लिए देश, समाज और स्वयं मुसलमानों के दूरगामी हितों के बारे में नहीं सोचा जाना चाहिए. दुर्भाग्य से बुद्धिजीवी वर्ग भी ऐसे प्रश्नों से बचता रहता है. उसे लगता है कि कहीं उस पर साम्प्रदायिक, भाजपाई और संघ परिवार से जुड़े होने का आरोप न लगे. सवाल है कि फिर इन प्रश्नों पर स्वस्थ चर्चा कैसे हो?</p>
<p>पाकिस्तान से धार्मिक आधार पर बंटवारे के बावजूद हमने सेक्युलर संविधान अपनाया. उसी संविधान से मुस्लिम समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा और तमाम मौलिक अधिकार मिले जिससे आज मुसलमान तरक्की कर रहा है लेकिन जब कभी इस्लाम और संविधान के प्रति निष्ठा का प्रश्न आता है तो मुस्लिम समाज कुछ ऐसे संकेत देता है जिससे लगता है कि संविधान के मुकाबले इस्लाम के प्रति उनकी निष्ठा कहीं ज़्यादा है. ऐसे में हिंदू समाज को चिंता होती है. इन चिंताओ को दूर कैसे किया जाए? राजनीतिक स्तर पर वोट-बैंक की राजनीति से हमें फुर्सत मिले तब न.</p>
<p>देखा जाए तो आज सामाजिक स्तर पर हिंदू-मुस्लिम मेलजोल में बहुत कमी आई है. लेकिन उसकी भरपाई करना न किसी पार्टी के एजेंडे में है और न ही हिंदुओं या मुस्लिमों की तरफ से कोई पहल हो रही है. सामान्यतः वे अपने-अपने समुदाय के परिवारों से मिलते हैं लेकिन एक-दूसरे के परिवारों से नहीं. वहीं, समाज में कोई हिंदू-मुस्लिम साझा मंच नहीं है जिससे एक समुदाय की चिंताएं दूसरे समुदाय तक पहुंच ही नहीं पातीं और कोई चर्चा खुलकर नहीं होती जिससे पारस्परिक तनाव बढ़ता है और छोटी-सी चिंगारी भी सांप्रदायिक हिंसा को जन्म दे देती है.</p>
<p>साम्प्रदायिक हिंसा के लिए भाजपा और संघ को उत्तरदायी ठहराने का फैशन सा हो गया है. इतना सरलीकरण कर हम एक शतुरमुर्गी समाधान प्राप्त कर लेते हैं लेकिन समस्या की तह तक नहीं पहुंचते. जिस तरह देश के विभिन्न राज्यों में मुस्लिम बस्तियां विकसित हुईं हैं क्या वो चिंता का कारण नहीं हैं? असम में मुस्लिम आबादी 34.22 फीसद है लेकिन वहां के आठ जिले ऐसे हैं जहाँ मुस्लिम आबादी 50 से 70 फीसद के बीच है. उत्तर प्रदेश में मुस्लिम जनसंख्या 19.2 फीसद है, लेकिन वहां के छह जिले ऐसे हैं जहाँ मुस्लिम जनसंख्या 40-50 फीसद पहुंच गई है. क्या इस तरह के जनसंख्या घनत्व से सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा नहीं मिलता. ऐसी स्थिति में फिर कैसे मुस्लिम अल्पसंख्यक हो सकते हैं?</p>
<p>कई शहरों में कुछ मुस्लिम बस्तियां जनसंख्या विस्फोट से त्रस्त हैं तो कई साम्प्रदायिक तनाव के लिए जानी जाती हैं. वहीं, कई शहरों में मुस्लिम बस्तियों का विस्तार करने हेतु धनी मुस्लिम आसपास की हिंदू संपत्तियां खरीद रहें हैं. वैसे भी आज मुस्लिम बस्तियों के बदतर हालात किसी से छिपे नहीं हैं. ऐसी बस्तियां कई बार गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल हो जाती हैं. उनका प्रयोग न केवल समाज विरोधी तत्व बड़ी आसानी से कर लेते हैं बल्कि उन्हें मुस्लिम युवाओं को कट्टर बनाने वाली नर्सरी के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.</p>
<p>ज्यादातार पार्टियों ने मुसलमानों को भारतीय नागरिक के रूप में पनपने के अवसर दिया ही नहीं और उन्हें सदैव अल्पसंख्यक और पीड़ित होने की मानसिकता में रखा है. कुछ साल पहले अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल जमीर-उद्दीन शाह ने कहा था कि मुस्लिमों को अब भेदभाव की शिकायत बंद कर देनी चाहिए और अपनी शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए. मुस्लिम समाज को बताया जाना चाहिए कि उनकी समस्याएं भी वही हैं जिनसे संपूर्ण भारतीय समाज जूझ रहा है. उन्हें भारतीय समाज के अभिन्न अंग के रूप में अपनी समस्याओं को परिभाषित करने और अपने समुदाय के अंदर के अंतर्विरोधों से निपटने की चुनौतियों को खुले मन से स्वीकार करना होगा.</p>
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		<title>हंसिए तो मुल्ला नसीरुद्दीन की तरह</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/smile-like-mullah-nasiruddin-89958/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Dec 2018 03:30:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवन शैली]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="169" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/smile-300x169.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/smile-300x169.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/smile-768x432.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/smile.jpg 960w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />जीव-जगत में हंसने-मुस्कुराने की सुविधा सिर्फ इंसान को मिली है. एक मुस्कराहट आपको सबका प्रिय बना देती है. ऐसा ही एक किस्सा मुल्ला नसीरुद्दीन का है. मुल्ला नसीरुद्दीन को अरब के सुल्तान हमेशा अपने साथ रखते थे. नसीरुद्दीन की हाजिरजवाबी सुल्तान को बहुत भाती थी. एक बार सुल्तान का काफिला किसी रेगिस्तान से गुज़र रहा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="169" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/smile-300x169.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/smile-300x169.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/smile-768x432.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/smile.jpg 960w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>जीव-जगत में हंसने-मुस्कुराने की सुविधा सिर्फ इंसान को मिली है. एक मुस्कराहट आपको सबका प्रिय बना देती है. ऐसा ही एक किस्सा मुल्ला नसीरुद्दीन का है.</p>
<p>मुल्ला नसीरुद्दीन को अरब के सुल्तान हमेशा अपने साथ रखते थे. नसीरुद्दीन की हाजिरजवाबी सुल्तान को बहुत भाती थी. एक बार सुल्तान का काफिला किसी रेगिस्तान से गुज़र रहा था. उन्हें दूर से कोई अंजान कस्बा दिखाई दिया. कस्बे को देखकर सुल्तान ने नसीरुद्दीन से कहा, ‘मुल्ला, चलो देखते हैं कि इस कस्बे में कितने लोग अपने सुल्तान को पहचानते हैं. तुम किसी को मेरा परिचय मत देना.’</p>
<p>सुल्तान ने शाही कारवां उस कस्बे के बाहर ही रुकवा दिया और कस्बे में पैदल प्रवेश किया. सुल्तान को ये देखकर आश्चर्य हुआ कि आने-जाने वालों में से किसी ने भी सुल्तान की तरफ ध्यान नहीं दिया पर हर कोई मुल्ला को देखकर मुस्कुरा रहा था. इस पर सुल्तान चिढ़कर बोला, ‘मुल्ला, मुझे यहां कोई नहीं जानता पर तुम्हें तो यहां सब पहचानते हैं.’ नसीरुद्दीन ने कहा, ‘जहांपनाह, ये लोग मुझे भी नहीं पहचानते.’ सुल्तान ने हैरत से पूछा,’फिर ये तुम्हें देखकर मुस्कुराए क्यों?’ मुल्ला नसीरुद्दीन ने बड़े अदब से कहा, ‘हुज़ूर, क्योंकि मैं इन्हें देखकर मुस्कुराया.’</p>
<p>ये एक छोटा-सा किस्सा मुस्कराहट की ताकत को बखूबी बयां करता है. एक मुस्कराहट से हम दूसरे के होठों पर मुस्कराहट ला सकते हैं. अनजाने को भी अपना बना सकते हैं. हंसना-मुस्कुराना तो इंसान का प्राकृतिक स्वभाव है. नन्हा शिशु बिना किसी कारण के मुस्कुराता है. उसकी हंसी निर्मल और स्वार्थहीन होती है. परंतु जैसे-जैसे शिशु, बालपन और किशोरावस्था की ओर बढ़ता है, उसकी हंसी कम होती जाती है. युवावस्था आते-आते चेहरे पर तनाव जगह बनाने लगता है. ऐसे में मुस्कान ईद का चांद बन जाती है.</p>
<p>एक शेर कुछ इस तरह है- खुल के हंसना तो सबको आता है, लोग तरसते हैं इक बहाने को. आज लोगों को वो बहाना ही नहीं मिल पाता, जिसकी वजह से वे हंस-मुस्कुरा सकें. आजकल रोज़ी-रोटी के झमेलों में मध्यवर्ग इतना फंस गया है कि परिवार और मित्रों के संग हल्के-फुल्के लम्हों की कमी हो गई है. काम की अधिकता और समय-सीमा वाले लक्ष्य, तनाव को बढ़ावा देते हैं. लेकिन अगर आप इन तनावों में भी मुस्कुराते रहें तो तनाव को पराजित कर सकते हैं. संकटों के बीच मुस्कराहट को खींच लिया जाए तो संकट की प्रवणता कम हो जाती है. जिन्होंने अपनी मुस्कराहट को आदत बना लिया है उनके चेहरे देखकर ताज़गी का एहसास होता है. ऐसा लगता है कि गर्म लू के थपेड़ों के बीच ठंडी हवा का झोंका आ गया हो. मुस्कुराने वाले सकारात्मक सोच वाले होते हैं. ऐसे लोग अपनी परिस्थितियों से डरकर मुस्कराहट का साथ नहीं छोड़ते. वे तो बस यही शेर गुनगुनाते हैं- हुजूमे गम मेरी फितरत बदल नहीं सकते, क्योंकि मेरी आदत है मुस्कुराने की.</p>
<p>ऐसे लोग जहां भी जाते हैं, भारी और बोझिल वातावरण को भी हल्का और विनोदपूर्ण बना देते हैं. उनका सन्देश यही होता है कि अपनी मुस्कान से दुनिया के सारे दुःख-दर्द मिटा डालो और मन हमेशा बच्चे की तरह चंचल रखो जिससे मुस्कुराने के लिए अगली बार किसी वजह की ज़रूरत न पड़े.</p>
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		<title>कैसे आए समृद्धि? इसपर ओशो के कुछ अचूक मंत्र</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/how-come-prosperity-mantras-from-osho-89956/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Dec 2018 13:30:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="162" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/osho-300x162.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/osho-300x162.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/osho.jpg 650w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />हमारी ज़रूरतें जितनी कम हों, उतनी जल्दी हम समृद्ध हो जाते हैं. अगर ज़रूरतें ज़्यादा हों तो उतनी ही देर भी लगती है समृद्ध होने में. ज़रूरतें अगर बहुत ज़्यादा हों तो हम कभी समृद्ध नहीं हो सकते. वहीं, समृद्धि धन से नहीं आंकी जाती. समृद्धि तो धन और ज़रूरतों के बीच का फासला है. [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="162" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/osho-300x162.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/osho-300x162.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/osho.jpg 650w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>हमारी ज़रूरतें जितनी कम हों, उतनी जल्दी हम समृद्ध हो जाते हैं. अगर ज़रूरतें ज़्यादा हों तो उतनी ही देर भी लगती है समृद्ध होने में. ज़रूरतें अगर बहुत ज़्यादा हों तो हम कभी समृद्ध नहीं हो सकते. वहीं, समृद्धि धन से नहीं आंकी जाती. समृद्धि तो धन और ज़रूरतों के बीच का फासला है. फासला कम है तो हम समृद्ध हैं, फासला नहीं है तो हम सम्राट हैं. इसी के साथ अगर फासला बहुत अधिक है तो समझो हम दरिद्र हैं.</p>
<p>अब मान लीजिए एक व्यक्ति की ज़रूरतें एक रुपए में पूरी हो जाती हैं और उसके पास दस रुपए हैं. वहीं, एक दूसरा आदमी है जिसके पास पांच अरब रूपए हैं लेकिन उसकी ज़रूरतें उसमें भी पूरी नहीं होतीं, तो अब दोनों में समृद्ध कौन है? पांच अरब वाले के पास उसकी ज़रूरतों से आधे रूपए हैं जबकि दस रूपए वाले के पास उसकी ज़रूरत से दस गुने. अब ज़ाहिर है कि समृद्ध दस रूपए वाला ही कहलाएगा.</p>
<p>सही मायनों में समृद्ध व्यक्ति ही धर्म में प्रवेश करता है लेकिन समृद्धि का अर्थ धन-संपत्ति से नहीं होता. हमारी ज़रूरतें इतनी कम हों कि हम जब भी, जैसे भी हों, वहीं समृद्ध होने का अहसास हो. जब ज़रूरतें थोड़ी होंगी, तो जल्दी पूरी हो जाएंगी. तभी हमारी जीवन-ऊर्जा धर्म की यात्रा पर निकलेगी. जब हमारी ज़रूरतें पूरी होंगी, तो हम दूसरे संसार की यात्रा पर निकल पड़ेंगे. तब हम तैयार होंगे दूसरे किनारे पर जाने के लिए. हम अपनी नाव खोल सकते हैं, खूटियां छोड़ सकते हैं, पाल फैला सकते हैं क्योंकि इस किनारे की हमारी ज़रूरतें पूरी हो चुकी हैं.</p>
<p>जितना हो सके हमें अपनी ज़रूरतों को घटाते रहना चाहिए और व्यर्थ को छोड़ते जाना चाहिए. जो बहुत ज़रूरी है, वो बहुत थोड़ा है. बहुत थोड़े में आदमी की तृप्ति हो जाती है. अपनी प्यास के लिए समुद्र की ज़रूरत नहीं बल्कि इसके लिए तो छोटा-सा झरना ही काफी होता है. भला समुद्र से कभी किसी की तृप्ति हुई है? धन तो समुद्र का खारा पानी है, जितना पीते हो, उतनी ही प्यास बढ़ती है. समुद्र का पानी पीकर आदमी मर सकता है, जी नहीं सकता. वहीं, छोटे से झरने का चुल्लू भर पानी पीकर भी तृप्त हुआ जा सकता है.</p>
<p>समृद्ध वही है जो अपनी ज़रूरतों को ज़रूरत समझता है और गैर-ज़रूरतों को गैर-ज़रूरत. सोने-चांदी से न तो आजतक किसी की प्यास बुझी है और न ही हीरे-जवाहरातों से भूख. जिसने ये बात समझ ली और व्यर्थ के विस्तार को छोड़ दिया, उसे परम तृप्ति का स्वाद आता है. यही तृप्ति समृद्धि कहलाती है.</p>
<p>ऐसे में इसे न सभ्यता कह सकते हैं और न संस्कृति. क्योंकि इसमें न प्रेम है और न ही प्रार्थना. इसमें सब दिखावा है. खेत-खलिहान सूखे पड़े हुए हैं और दरबार में रौशनी है. लोग तलवारें लिए खड़े हैं और सम्राट हीरे-जवाहरातों के सिंघासन पर बैठा है. इधर आदमी की बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं हो रहीं. कोई ज़्यादा खाकर बीमार है तो कोई भूख से बीमार है. कुछ इसलिए बीमार हैं कि उनके पास इतना ज़्यादा है कि वे जानते नहीं कि इसका करें क्या? इसे सभ्यता नहीं, असभ्यता कहते हैं.</p>
<p>संस्कृति तो तब पैदा होगी जब लोग तृप्त होंगे और लोगों के पास जीवन बचेगा. अभी जो कुछ बचता है, वो युद्ध में चला जाता है. युद्ध संस्कृति नहीं, एक भयानक रोग है. लेकिन अगर हम लाओत्से को सुनें, महापुरुषों को सुनें, तो दूसरी जीवन-व्यवस्था पैदा की जा सकती है. इस व्यवस्था का आधार ये होगा कि हम गैर-ज़रुरतों को छाटें और कम-से-कम में एक आदर्श जीवन जीने का प्रयास करें और अपनी ऊर्जा को बचाएं. उस ऊर्जा को सृजन में, संगीत में, समाधि में लगा सकते हैं जो उसे परमात्मा तक ले जा सकती है.</p>
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		<title>जय कपीश तिहुं लोक उजागर</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/hanuman-ji-the-one-who-lightens-the-three-worlds-89954/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Dec 2018 03:30:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म और भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="193" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Panchmukhi-Hanuman-300x193.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Panchmukhi Hanuman" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Panchmukhi-Hanuman-300x193.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Panchmukhi-Hanuman-768x494.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Panchmukhi-Hanuman.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />पिता केसरी और माता अंजनी के पुत्र हनुमान का चरित्र रामकथा में प्रखर होकर उभरा है. राम के आदर्शों को गरिमा देने में हनुमान जी का बड़ा योगदान है. रामकथा में हनुमान के चरित्र में हम जीवन की उन्नति के सूत्र हासिल कर सकते हैं. वीरता, साहस, सेवाभाव, स्वामिभक्ति, विनम्रता, कृतज्ञता, नेतृत्व और निर्णय जैसे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="193" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Panchmukhi-Hanuman-300x193.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Panchmukhi Hanuman" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Panchmukhi-Hanuman-300x193.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Panchmukhi-Hanuman-768x494.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/Panchmukhi-Hanuman.jpg 800w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>पिता केसरी और माता अंजनी के पुत्र हनुमान का चरित्र रामकथा में प्रखर होकर उभरा है. राम के आदर्शों को गरिमा देने में हनुमान जी का बड़ा योगदान है. रामकथा में हनुमान के चरित्र में हम जीवन की उन्नति के सूत्र हासिल कर सकते हैं. वीरता, साहस, सेवाभाव, स्वामिभक्ति, विनम्रता, कृतज्ञता, नेतृत्व और निर्णय जैसे हनुमान के गुणों को हम अपने भीतर उतारकर सफलता के मार्ग पर अग्रसर हो सकते हैं.</p>
<p>हनुमान जी के भीतर अदम्य साहस और वीरता बाल्यकाल से ही दिखती है. वाल्मीकि रामायण में वर्णित है कि बालपन में हनुमान सूर्य को फल समझकर उसे खाने आकाश में उड़ चले. उधर राहू भी सूर्य को ख़त्म करने जा रहा था. लेकिन हनुमान जी की जोरदार टक्कर से राहू घबराकर इंद्र के पास पहुंच गया. इंद्र ने वज्र का प्रहार हनुमान की हनु (ठुड्डी) पर किया, तभी से उनका नाम हनुमान पड़ गया. राम के कठिन प्रयोजन को सिद्ध करने में हनुमान जी का साहस ही रंग लाया. सीता हरण के बाद न सिर्फ तमाम बाधाओं से लड़ते हुए हनुमान समुद्र पार कर लंका पहुंचे बल्कि अहंकारी रावण को बता दिया कि वो सर्वशक्तिमान नहीं है. जिस स्वर्ण-लंका पर रावण को अभिमान था, हनुमान ने उसे जला दिया. ये रावण के अहंकार का प्रतीकात्मक दहन था. लक्ष्मण के मूर्छित होने पर संजीवनी बूटी ही नहीं, पूरा पर्वत हनुमान लेकर आए.</p>
<p>हनुमान जी की निष्काम सेवाभावना ने उन्हें भक्त से भगवान बना दिया. एक दंतकथा है कि भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न ने भगवान राम की दिनचर्या बनाई जिसमें हनुमान जी को कोई काम नहीं सौंपा गया. उनसे राम को जम्हाई आने पर चुटकी बजाने को कहा गया. हनुमान जी भूख, प्यास व निद्रा का परित्याग कर चुटकी ताने सेवा को तत्पर रहते. रात्रि में माता जानकी की आज्ञा से उन्हें कक्ष से बाहर जाना पड़ा. वे बाहर बैठकर निरंतर चुटकियां बजाने लगे. इससे भगवान राम को लगातार जम्हाई आने लगी. जब हनुमान ने भीतर आकर चुटकी बजाई तब जम्हाई बंद हुई.</p>
<p>अपार बलशाली होते हुए भी हनुमान जी के भीतर अहंकार नहीं रहा. जहाँ उन्होंने राक्षसों पर पराक्रम दिखाया, वहीं वे श्रीराम, माता सीता और माता अंजनी के प्रति विनम्र भी रहे. उन्होंने अपने किए हुए सभी पराक्रमों का श्रेय भगवान राम को ही दिया है.</p>
<p>वहीं, भगवान राम की वानर सेना का भी हनुमान जी ने नेतृत्व किया था. समुद्र के पार जाने पर जब वे शापवश अपनी शक्तियों को भूल बैठे थे, तब भी याद दिलाए जाने पर उन्होंने समुद्रपार जाने में तनिक भी देर नहीं लगाई. वहीं, लक्ष्मण को चोट लग जाने पर जब वे संजीवनी बूटी लाने पर्वत पर पहुंचे, तमाम भ्रम होने पर भी उन्होंने पूरा पर्वत ले जाने का त्वरित फैसला लिया. भगवान हनुमान जी के इन गुणों को अपनाकर हम भी अपनी सभी तरह की कठिनाइयों से पार पा सकते हैं. रामकथा में हनुमान जी के सेवाभाव और अन्य गुणों ने ही उन्हें भक्त से भगवान बना दिया. तो क्यों न हम सब भी उनके गुणों को जीवन में उतारकर सफलता की ओर अग्रसर हों और जीवन का असली आनंद उठाएं.</p>
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    	</item>
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		<title>ऐतिहासिक गलतियों का बोझ</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/the-burden-of-historical-mistakes-89950/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Dec 2018 13:30:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="188" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/historical-mistakes-india-china-tussle-300x188.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="India China Tussle" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/historical-mistakes-india-china-tussle-300x188.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/historical-mistakes-india-china-tussle.jpg 640w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />भारत और चीन सीमा विवाद कुछ ऐतिहासिक कारणों से है. इसकी जड़ें रुसी और ब्रिटिश साम्राज्यों के बीच हुए बड़े खेल में है. देखा जाए तो इसकी शुरुआत 1807 में रूस की संधि पर हस्ताक्षर से हुई और समापन 1907 में परसिया (ईरान) की संधि से हुआ. भारत की सीमाएं दो चीनी क्षेत्रों से मिलती [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="188" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/historical-mistakes-india-china-tussle-300x188.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="India China Tussle" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/historical-mistakes-india-china-tussle-300x188.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/historical-mistakes-india-china-tussle.jpg 640w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>भारत और चीन सीमा विवाद कुछ ऐतिहासिक कारणों से है. इसकी जड़ें रुसी और ब्रिटिश साम्राज्यों के बीच हुए बड़े खेल में है. देखा जाए तो इसकी शुरुआत 1807 में रूस की संधि पर हस्ताक्षर से हुई और समापन 1907 में परसिया (ईरान) की संधि से हुआ. भारत की सीमाएं दो चीनी क्षेत्रों से मिलती हैं. एक सीमा अक्साई चिन शिनजियांग स्वायत्त क्षेत्र में और दूसरी तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से मिलती है. दोनों देशों के बीच नौ विवादित क्षेत्र हैं. इनमें अक्साई चिन और तवांग प्रमुख हैं. 17 मार्च, 1890 को अंग्रेज़-चीनी समझौते में बताई गई सिक्किम-तिब्बत सीमा को छोड़कर अन्य किसी भी हिस्से को द्विपक्षीय ढंग से चिन्हित नहीं किया गया है.</p>
<p>तिब्बत का 1640 तक लद्दाख पर और 17 मार्च, 1890 तक सिक्किम पर आधिपत्य था. तवांग वाला भूभाग दक्षिणी तिब्बत के रूप में जाना जाता था. यहीं छठे दलाई लामा का जन्म हुआ था. इस पर 20 जनवरी, 1951 से पहले किसी भारतीय ने शासन नहीं किया था. ये ऐसे ऐतिहासिक तथ्य हैं जिनसे इंकार नहीं किया जा सकता.</p>
<p>वहीं, अक्साई चीन 1890 तक नो मैन्स लैंड था. लद्दाख 1834 तक स्वतंत्र था. इस पर महाराजा रणजीत सिंह ने विजय पाई थी. आधुनिक इतिहास में चीनी साम्राज्य के अधीन शिनजियांग और तिब्बत तक किसी भारतीय शासक के सीमा फैलाने की वो पहली घटना थी. प्रथम अंग्रेज़-सिख युद्ध के बाद लद्दाख समेत जम्मू-कश्मीर को अमृतसर में हुए समझौते के अनुसार डॉ. कर्ण सिंह के पूर्वज महाराजा गुलाब सिंह को दे दिया गया. 1802 में भारत का सर्वेक्षण शुरू हुआ. भारत में जन्मे सहायक सर्वेयर विलियम जॉनसन को इस कार्य का जिम्मा सौंपा गया. जॉनसन ने अक्साई चिन को जम्मू-कश्मीर में शामिल कर लिया और अपना नक्शा देहरादून स्थित भारत के सर्वेयर जनरल को भेज दिया. जम्मू-कश्मीर के शासक ने कब्ज़े के लिए फौरन अपनी सेना भेज दी और शाहिद्दौला में महल का निर्माण कर लिया. ये ल्हासा-काशगर और लेह-काशगर व्यापार मार्ग के मिलन स्थल पर स्थित था. 19वीं शताब्दी के मध्य से बड़ा खेल शुरू हुआ. रूस और ब्रिटिश साम्राज्य अधिकतम क्षेत्र हड़पने की होड़ में लगे थे. अंग्रेजों के प्रभाव क्षेत्र वाले अफ़ग़ानिस्तान और रुसी क्षेत्रों के बीच सीमा का नक्शा खींचने के लिए रूस की राजधानी में बातचीत शुरू की गई. वहीं, अंग्रेजों की नज़र दक्षिण पूर्वी काराकोरम और कुनलुन शान के बीच बड़े नो मैंस लैंड पर पड़ी. उन्होंने चीनियों को उस पर कब्ज़े के लिए प्रोत्साहित किया क्योंकि वे खुद रूसियों से आंख नहीं मिलाना छह रहे थे. 1892 में चीनियों ने काराकोरम जलविभाजक क्षेत्र से सटे इलाके में सीमा के खंबे गाड़ दिए और अक्साई चीन को अपने क्षेत्र में शामिल कर लिया.</p>
<p>बीजिंग में कम्युनिस्ट शासन की घोषणा 1 अक्टूबर, 1949 को की गई. चीनी गणराज्य को मान्यता देने वाला भारत पहला गैर-कम्युनिस्ट देश था. एक साल के अंदर चीन नें तिब्बत पर नियंत्रण कर लिया. नेहरु का विरोध नरम था लेकिन असं के राज्यपाल जयराम दास रामदास सतर्क हो गए. उन्होंने नेहरू को बिना बताए दूसरे विश्व युद्ध के हीरो और नागा मेजर रालेंगनाव बॉब खटिंग को एक कार्य सौंपा. असम राइफल्स के तीन अफसरों और दो सौ दूसरे रैंक के जवानों के बल पर मेजर खटिंग ने तवांग के तिब्बती कमिश्नर जोंगपोंग से भारतीय हिस्से में तवांग के हिस्सों में घुसपैठ की बात पर हस्ताक्षर करा लिए. जो कार्य अंग्रेज़ भी नहीं कर सके थे वैसा अभूतपूर्व कार्य कर डालने से उत्साहित जयराम दास रामदास नेहरु को सूचना देने मेजर खटिंग के साथ दिल्ली पहुंचे. उनकी प्रशंसा करने की जगह नेहरु ने उन लोगों को भरी नासमझी के लिए डाटा. उन्होंने तवांग पर कब्ज़े की खबर को पूरी तरह ब्लैक आउट का आदेश दिया अन्यथा चीन नाराज़ हो सकता था. इतिहास की गलतियां सीमा मुद्दे पर नेहरु की अकुशल राजनीति के कारण और उलझती गई. नेविले मैक्सवेल ने उन्हें नेहरूवादी बोझ का पहाड़ कहा है. अगर टिकाऊ समाधान चाहिए तो मोदी सरकार को इन उलझनों को सुलझाना चाहिए.</p>
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    	</item>
		<item>
		<title>ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/tips-to-make-friends-forever-89945/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Dec 2018 16:01:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[संबंध]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="170" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/8sinais-300x170.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Friends" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/8sinais-300x170.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/8sinais.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />दोस्तों के बारे में बहुत कुछ कहा और सुना जाता है लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जिन पर अमल कर आप अपनी दोस्ती को जीवनभर बरकरार रख सकते हैं. आज की आपाधापी भरी ज़िंदगी में आप ये दलील दे सकते हैं कि क्या करें काम से फुर्सत ही नहीं मिलती. ऐसे में दोस्तों से मुलाकात [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="170" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/8sinais-300x170.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Friends" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/8sinais-300x170.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/8sinais.jpg 600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>दोस्तों के बारे में बहुत कुछ कहा और सुना जाता है लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जिन पर अमल कर आप अपनी दोस्ती को जीवनभर बरकरार रख सकते हैं.</p>
<p>आज की आपाधापी भरी ज़िंदगी में आप ये दलील दे सकते हैं कि क्या करें काम से फुर्सत ही नहीं मिलती. ऐसे में दोस्तों से मुलाकात कैसे संभव है. इस बारे में रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का कहना है कि आप इस बात का इंतज़ार न करें कि दूसरे जब आपसे मिलने की पहल नहीं करते तो फिर मैं क्यों करूं. अगर आप अपने दोस्त से मिलने की पहल करेंगे तो इससे आपका बड़प्पन कम नहीं होगा बल्कि बढ़ेगा ही. इसलिए जब भी मौका मिले आप अपने दोस्तों को चाय-कॉफ़ी पीने या लंच-डिनर पर आमंत्रित कर सकते हैं. दस-पंद्रह दिन में एक बार फोन पर बात कर सकते हैं या ऑनलाइन चैट कर सकते हैं.</p>
<p>वहीं एक रिसर्च के अनुसार, दोस्तों के साथ वक़्त बिताने से उदासी या डिप्रेशन की शिकायत नहीं होती. विशेषज्ञों के अनुसार, दोस्तों के साथ समय बिताने से मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्तर पर राहत मिलती है.</p>
<p>अगर आप काफी सामाजिक हैं तो संभव है कि आपका परिचय तमाम लोगों से होगा. ऐसे में आप ये ग़लतफहमी में पड़ सकते हैं कि आपके बहुत से दोस्त हैं जो खराब समय में आपकी मदद करेंगे पर यकीन मानिए ऐसा नहीं होता. अनेक अवसरों पर तमाम लोगों से आपकी बातें होती हैं लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं होता कि वे सभी ज़रूरतों में आपके काम ही आएं. दोस्तों के बारे में संख्या का महत्व नहीं होता बल्कि आपके प्रति उनकी निष्ठा एवं प्रेम से होता है.</p>
<p>इसी के साथ आपसी सम्मान, एक-दूसरे के प्रति वफादारी इन बातों को दोस्ती का पर्याय माना जाता है. इसीलिए अपने दोस्तों की भावनाओं का सम्मान करें व उनकी पसंद-नापसंद का ख्याल रखें. ये समझें कि आपके दोस्त केवल आपके ही नहीं, उसका अपना एक अस्तित्व है जिसका आपको सम्मान करना है.</p>
<p>अक्सर ये भी देखने में आता है कि कभी-कभी दोस्त आपस में अप्रिय शब्दों का प्रयोग करने लगते हैं. वे ये भूल जातें हैं कि ऐसे शब्द किसी को अप्रिय लग सकते हैं इसलिए भूलकर भी कभी किसी के लिए अप्रिय शब्दों का प्रयोग न करें. साथ ही किसी के सामने अपने दोस्त का मज़ाक भी न उड़ाएं.</p>
<p>वैसे कोई भी रिश्ता प्रेम और विश्वास पर आधारित होता है. ये बात दोस्ती के साथ भी लागू होती है. आप अपने करियर और परिवार के प्रति प्रतिबद्ध रहें पर अगर आप किसी दोस्त से किसी तरह का वायदा करते हैं तो उसे निभाने की कोशिश ज़रूर करें.</p>
<p>वहीं, दोस्ती को बरकरार रखने का एक महत्वपूर्ण उपाय है पैसों का लेन-देन न करना यानी अपने दोस्तों से न उधार लें और न उधार दें. पैसों का लेन-देन करने पर दोस्ती खतरे में पड़ने का जोखिम रहता है इसलिए जबतक बहुत ज़रूरत न हो पैसा उधार न मांगे.</p>
<p>आज के समय में ये भी ध्यान रखने की ज़रूरत है कि हम संबंधों को गणित न बनाएं. दोस्ती गणित के फार्मूलों से संचालित नहीं होती. आपने अपने दोस्त के लिए क्या किया और उसने आपके लिए क्या किया. ये बात माएने नहीं रखती. कभी-कभी ऐसा होता है कि जब आपको ज़रूरत होती है तब आपका दोस्त आपसे दूर होता है. इस तरह का वाक्या तो किसी के साथ भी हो सकता है इसलिए दोस्तों के लिए किसी तरह की गणना करना नासमझी ही कहलाएगी.</p>
<p>कहते हैं दोस्ती का रिश्ता खून के रिश्तों से बढ़कर होता है. शायद इसी वजह से हम दोस्तों के साथ होने पर खुश रहते हैं. दोस्त बनाना कठिन नहीं होता, कठिन होता है उन्हें सहेजकर रखना.</p>
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    	</item>
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		<title>क्या है भाजपा के ‘कमल’ का सफ़र?</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/the-journey-of-bjp-lotus-89941/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Dec 2018 07:59:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[feature]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="157" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/BJP-1483006810_835x547-300x157.jpeg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="BJP Journey Story" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/BJP-1483006810_835x547-300x157.jpeg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/BJP-1483006810_835x547.jpeg 646w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के आधार पर देश के दूसरे सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी आज केंद्र व देश के कई प्रदेशों में अपनी सरकार सफलतापूर्वक चला रही है. भाजपा के ‘कमल’ के सफ़र की बात करें तो बिना आरएसएस की बात किए भाजपा की कहानी अधूरी मानी जाएगी. क्योंकि आरएसएस ही भाजपा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="157" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/BJP-1483006810_835x547-300x157.jpeg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="BJP Journey Story" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/BJP-1483006810_835x547-300x157.jpeg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/12/BJP-1483006810_835x547.jpeg 646w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के आधार पर देश के दूसरे सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी आज केंद्र व देश के कई प्रदेशों में अपनी सरकार सफलतापूर्वक चला रही है.</p>
<p>भाजपा के ‘कमल’ के सफ़र की बात करें तो बिना आरएसएस की बात किए भाजपा की कहानी अधूरी मानी जाएगी. क्योंकि आरएसएस ही भाजपा का आधार स्तंभ माना जाता है. 1925 में नागपुर में हिंदुत्व विचारधारा की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना गैर राजनीतिक दल के रूप में हुई. वहीं, श्यामा प्रसाद मुख़र्जी ने आरएसएस से संबंधित राजनीतिक दल जनसंघ की स्थापना वर्ष 1951 में की थी. 1977 में जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद जनसंघ उसका हिस्सा बन गई. गौरतलब है कि तब जनता पार्टी देश में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी थी.</p>
<p>1979 में कुछ आतंरिक विरोधों के चलते सरकार गिर गई और छह अप्रैल, 1980 को पृथक दल के रूप में भाजपा अस्तित्व में आई. इसी के साथ जनसंघ के सहयोगियों के साथ अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के पहले अध्यक्ष बने. आपको जानकार ये हैरानी होगी कि भाजपा के अबतक के इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के बाद एक से अधिक बार पार्टी अध्यक्ष बनने वाले राजनाथ सिंह तीसरे नेता हैं. वहीं, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जनसंघ के भी अध्यक्ष रह चुके हैं.</p>
<p>अब अगर बात करें लोकसभा चुनावों में भाजपा के 1984 से लेकर 2009 तक के प्रदर्शन पर तो 1984 में भाजपा को 7.4 प्रतिशत वोट मिले थे और उसे सिर्फ 2 सीटों पर ही विजय प्राप्त हुई. इंदिरा गांधी की हत्या की पृष्ठभूमि में हुए इस आम चुनाव में कांग्रेस ने विरोधियों का सूपड़ा साफ़ कर दिया था लेकिन वोट प्रतिशत के मामले में भाजपा दूसरे स्थान पर रही.</p>
<p>1989 में भाजपा को 11.4 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 86 सीटों पर जीत दर्ज की थी. 1986 में लालकृष्ण आडवाणी भाजपा पार्टी के अध्यक्ष बने. उन्होंने राम जन्म भूमि आंदोलन शुरू किया. 1989 के चुनाव में भाजपा ने जनता दल को बिना शर्त समर्थन देकर कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था. तब वी.पी. सिंह प्रधानमंत्री बने थे. 25 सितंबर, 1990 को आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा शुरू की थी. लालू प्रसाद के आदेश पर बिहार के समस्तीपुर में रथयात्रा को रोककर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. तभी बदले में भाजपा ने केंद्र सरकार से अपना समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी थी.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>1991 में पहली बार भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर लोकसभा में उभरी. इस चुनाव में भाजपा को 20.8 प्रतिशत वोट मिले थे और 120 सीटें. गौरतलब है कि राजीव गांधी की हत्या की पृष्ठभूमि में हुए इस चुनाव में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी.</p>
<p>20.3 प्रतिशत वोटों और 161 सीटों के साथ 1996 में 11वें लोकसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी. वाजपेयी प्रधानमंत्री बने लेकिन समर्थन नहीं मिलने के कारण 13 दिनों में ही उनकी सरकार गिर गई थी.</p>
<p>1998 में भाजपा को 25.6 प्रतिशत वोट मिले एवं 182 सीटें अर्जित करते हुए भाजपा ने अबतक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया. इसी के साथ भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी. वाजपेयी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार का गठन हुआ.</p>
<p>1999 में मुख्य सहयोगियों के समर्थन वापस लेने के बाद भाजपा विश्वास मत नहीं हासिल कर सकी और सरकार गिर गई. फिर हुए आम चुनाव में भाजपा 23.8 प्रतिशत वोट हासिल कर सकी और 182 सीटें पाने में कामयाब हुई. आखिरकार, भाजपा ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर सत्ता में वापिसी की. वाजपेयी फिर प्रधानमंत्री बने और इस सरकार द्वारा कार्यकाल पूरा किया गया. इसी के साथ ये अपना कार्यकाल पूरा करने वाली पहली गैर-कांग्रेसी सरकार कहलाई.</p>
<p>2004 के आम चुनावों में भाजपा का ‘भारत उदय’ का नारा नाकाम रहा. उसके बदले कांग्रेस के आम आदमी के नारे को समर्थन मिला. कांग्रेस की सरकार बनी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने. इस आम चुनाव में भाजपा को 22.2 प्रतिशत वोट मिले और 138 सीटें मिलीं.</p>
<p>2009 में भी 18.8 प्रतिशत वोटों और 116 सीटों के साथ भाजपा पार्टी का निराशाजनक प्रदर्शन जारी रहा. वहीं, कांग्रेस ने अपने पिछले प्रदर्शन को सुधारा और इसी के साथ मनमोहन सिंह दोबारा प्रधानमंत्री बने.</p>
<p>इन सभी उतार-चढ़ावों को पार करके आखिरकार भाजपा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में हुए आम चुनावों में पूर्ण बहुमत के साथ विजयी हुई और फिलहाल अपने कार्यकाल को पूरा करने वाली है.</p>
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    	</item>
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		<title>जानें अबतक की सबसे महंगी नीलामी वाली चीज़ों को !</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/most-expensive-auction-88781/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devansh Tripathi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Nov 2018 15:00:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[most expensive auction]]></category>
		<category><![CDATA[सबसे महंगी नीलामी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="सबसे महंगी नीलामी" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1-970x582.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />सबसे महंगी नीलामी &#8211; सामान्य आदमी से जुड़ी पुरानी चीज़ें दूसरों के लिए भले ही मायने न रखती हों, लेकिन यही जब किसी हस्ती से जुड़ी होती हैं तो उनके दीवाने उस वस्तु की कोई भी कीमत चुकाने को बेताब रहते हैं. दुनिया में अब तक की सबसे महंगी नीलामी वाली चीज़ों पर पढ़िए ये दिलचस्प [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="सबसे महंगी नीलामी" decoding="async" loading="lazy" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1-970x582.jpg 970w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-1.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>सबसे महंगी नीलामी &#8211; सामान्य आदमी से जुड़ी पुरानी चीज़ें दूसरों के लिए भले ही मायने न रखती हों, लेकिन यही जब किसी हस्ती से जुड़ी होती हैं तो उनके दीवाने उस वस्तु की कोई भी कीमत चुकाने को बेताब रहते हैं.</p>
<p>दुनिया में अब तक की सबसे महंगी नीलामी वाली चीज़ों पर पढ़िए ये दिलचस्प आलेख.</p>
<p>सबसे चर्चित <a href="https://www.youngisthan.in/hindi/different-types-of-bra-12609/">पोशाक</a> की बात करें तो नाम आता है मर्लिन मुनरो द्वारा पहनी गई 1955 में बनी फिल्म ‘द सेवेन ईयर इट्च’ का. ये वही कालजयी पोशाक है जिसे फिल्म के प्रीमियर के वक्त न्यूयार्क के एक सब-वे के पास मुनरो ने पहना था. जब हवा के तेज़ झोंके से ये पोशाक उड़ती है तब मुनरो इसे संभालने की कोशिश करती नज़र आती हैं. विलियम ट्राविल्ला ने उनकी इस पोशाक को डिज़ाइन किया था. ये दृश्य इस अभिनेत्री के सबसे यादगार पलों में से एक है. इसी दीवानेपन में उनकी इस बहुचर्चित सफ़ेद पोशाक को 45 लाख 20 हज़ार डॉलर में नीलाम किया गया.</p>
<p><a href="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/marilyn-monroe-happy-birthday-mr-president-dress-fetches-usd-4810000-at-auction-4.jpg" class='wp-img-bg-off' rel='mygallery'><img decoding="async" loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-88817" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/marilyn-monroe-happy-birthday-mr-president-dress-fetches-usd-4810000-at-auction-4.jpg" alt="" width="616" height="347" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/marilyn-monroe-happy-birthday-mr-president-dress-fetches-usd-4810000-at-auction-4.jpg 616w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/marilyn-monroe-happy-birthday-mr-president-dress-fetches-usd-4810000-at-auction-4-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 616px) 100vw, 616px" /></a></p>
<p>जब बात हो सबसे महंगी पेंटिंग की तो पाब्लो पिकासो की अल्जीयर्स की नारी नामक पेंटिंग का नाम आता है जो क्रिस्टी नीलामघर में 1136 करोड़ में नीलाम हुई.</p>
<p><a href="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/PICASSO-FEMMES-DALGER-©-2015-Estate-of-Pablo-Picasso-Artists-Rights-Society-ARS-New-York.jpg" class='wp-img-bg-off' rel='mygallery'><img decoding="async" loading="lazy" class="alignnone wp-image-88821" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/PICASSO-FEMMES-DALGER-©-2015-Estate-of-Pablo-Picasso-Artists-Rights-Society-ARS-New-York.jpg" alt="" width="637" height="503" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/PICASSO-FEMMES-DALGER-©-2015-Estate-of-Pablo-Picasso-Artists-Rights-Society-ARS-New-York.jpg 1000w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/PICASSO-FEMMES-DALGER-©-2015-Estate-of-Pablo-Picasso-Artists-Rights-Society-ARS-New-York-300x237.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/PICASSO-FEMMES-DALGER-©-2015-Estate-of-Pablo-Picasso-Artists-Rights-Society-ARS-New-York-768x607.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/PICASSO-FEMMES-DALGER-©-2015-Estate-of-Pablo-Picasso-Artists-Rights-Society-ARS-New-York-970x766.jpg 970w" sizes="(max-width: 637px) 100vw, 637px" /></a></p>
<p>वहीं, सबसे महंगे परिधान के हिस्से की बात करें तो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के जन्मदिन से पूर्व आयोजित एक समारोह में अभिनेत्री मर्लिन मुनरो द्वारा पहने गए इस गाउन में आभूषण जड़े हुए थे. 1999 में इस परिधान को 12.67 लाख डॉलर में नीलाम किया गया था.</p>
<p>लियोनार्डो डा विंची की 72 पेज की पांडुलिपि को 1994 में 3,08 करोड़ डॉलर में नीलाम किया गया था जो अबतक की सबसे महंगी पांडुलिपि मानी जाती है. वहीं, इटली के जाने-माने वायलिन तैयार करने वाले एंटोनियो स्ट्रैदीवारी के एक चेले के पौत्र बार्तो जियुसेप एंटोनियो गुआरनीरी के वायलिन को अब तक सबसे अधिक कीमत में नीलाम किया गया है. 2007 में इसे 39 लाख डॉलर में एक रुसी वकील ने खरीदा था.</p>
<p><a href="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/55a4054769bedd6627db994f-750-563.jpg" class='wp-img-bg-off' rel='mygallery'><img decoding="async" loading="lazy" class="alignnone wp-image-88818" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/55a4054769bedd6627db994f-750-563.jpg" alt="सबसे महंगी नीलामी" width="603" height="453" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/55a4054769bedd6627db994f-750-563.jpg 750w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/55a4054769bedd6627db994f-750-563-300x225.jpg 300w" sizes="(max-width: 603px) 100vw, 603px" /></a></p>
<p>सबसे महंगा केशबंद एल्विस प्रेसले द्वारा उपयोग किए गए केशबंद को माना जाता है जिसे 2002 में 1.15 लाख डॉलर में नीलम किया गया था. इसी के साथ 1920 में रोम में एक खुदाई वाली जगह पर मिली 2 हज़ार साल पुरानी मूर्ति के नाम सबसे महंगी नीलाम होने वाली परावस्तु का रिकॉर्ड है. 2007 में इसे 2.86 करोड़ डॉलर में नीलाम किया गया था.</p>
<p>दुनिया में ऐसी केवल 21 कारें ही हैं जो सबसे महंगी कारें मानी जाती हैं पर इतनी भी महंगी नहीं जितनी फेरारी की टेस्टा रोसा है. 1957 में फेरारी की टेस्टा रोसा नामक इस कार ने 19 अंतर्राष्ट्रीय रेस में से 10 में सफलता हासिल की थी. 2009 में 1.22 करोड़ डॉलर की बोली में इसे नीलाम किया गया था.</p>
<p><a href="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024.jpg" class='wp-img-bg-off' rel='mygallery'><img decoding="async" loading="lazy" class="alignnone wp-image-88819" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024.jpg" alt="" width="594" height="395" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024.jpg 1024w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-300x200.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-768x511.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2018/11/1958_Ferrari_250TestaRossa-0-1024-970x645.jpg 970w" sizes="(max-width: 594px) 100vw, 594px" /></a></p>
<p>सबसे महंगे फर्नीचर की बात करें तो 18वीं सदी में बनी फ्लोरेंटाइन इबोनी चेस्ट द्वारा तैयार बेशकीमती पत्थरों से जड़ित बैडमिंटन कैबिनेट का नाम आता है. इस फर्नीचर पर 2004 में 3.6 करोड़ डॉलर में बोली लगी थी.</p>
<p>सबसे महंगी नीलामी &#8211; सबसे महंगा हीरा 17वीं सदी के 35.56 कैरट के ब्लू डायमंड का नाम आता है जो स्पेन के राजा फिलिप चतुर्थ ने अपनी बेटी के दहेज में दिए जाने वाले आभूषणों में चयन किया था. सदियों तक ये हीरा ऑस्ट्रिया और बावेरिया राजशाही के पास रहा. लेकिन <a href="https://www.youngisthan.in/hindi/which-two-countries-initiated-first-world-war-21408/">प्रथम विश्व युद्ध</a> के बाद बावेरिया के गणराज्य बनने के बाद इसकी नीलामी की गई. कोई खरीददार न मिलने पर 1962 में इसे फिर नीलाम किया गया. 1964 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता ने खरीदकर 2008 में इसकी नीलामी की जिसमें इस हीरे की 2.34 करोड़ डॉलर की बोली लगी.</p>
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