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मोदी को चाहिए जादू की झप्पी !

जादू की झप्पी

जादू की झप्पी – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्या चाहिए, इसका जवाब पूरी दुनिया को मिल गया.

बॉलीवुड फिल्म का एक बड़ा है मज़ेदार गाना था.. जादू की झप्पी ले ले तू अभी… इसी गाने की तर्ज पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ऐसी झप्पी मिली है, जिसकी कभी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी. मोदी को चाहिए थी ये झप्पी.

भारत में क्रिकेट हो या राजनीति कभी भी कुछ भी हो सकता है.

दुनिया देखती रह जाती है और यहां वो सब हो जाता है, जिसकी कल्पना दुनिया कर नहीं सकती. कभी आपने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो नरेंद्र मोदी को इस तरह से लताड़ते हैं जैसे कोई दूसरा नेता, वो कभी मोदी को प्यार से गले लगाएगा. लेकिन ऐसा हुआ. नरेंद्र मोदी को गले लगाने वाला कोई और नहीं बल्कि राहुल गांधी निकले.

जादू की झप्पी

पहले राहुल जी भरके मोदी सरकार को खरा-खोटा सुनाते रहे. उसके बाद वो अपना भाषण खत्म करके मोदी की तरफ इस तरह से बढ़े जैसे लगा कि वो मोदी से झगड़ा करने जा रहे हैं. संसद में बैठे हर किसी की निगाह सिर्फ और सिर्फ राहुल पर थी. राहुल वहां पहुंचकर पहले तो मोदी को खड़े होने को कहने लगे, लेकिन जब मोदी खड़े नहीं हुए, तो राहुल बैठे हुए ही मोदी को गले लगा लिए.

ये देखकर सिर्फ मोदी ही नहीं बल्कि सभी हैरान रह गए. मोदी दुबारा राहुल को बुलाकर उनकी पीठ थपथपाते हैं. ये नज़ारा लोग देखते ही रह गए. विश्व राजनीति में भी ऐसा कभी नहीं हुआ. मोदी को जादू की झप्पी तब मिली जब उन्हे इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी. असल में मोदी के खिलाफ विरोधी दल अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था.

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जादू की झप्पी

इस समय मोदी को जादू की झप्पी तो पक्का चाहिए थी. उन्हें इसे गिराना था. बस क्या था पहले राहुल खूब खरी खोटी सुनाए. उसके बाद एक पप्पू की तरह मोदी को गले लगा लिए. राहुल की इज्ज़त वहीं कम हो गई. असल में राहुल सिर्फ मोदी को गले नहीं लगाए बल्कि वहां से आने के बाद वो अपने एक साथ को आंख भी मारे. बस इसी वाकये ने राहुल को गिरा दिया. वो सबके सामने ऐसे गिरे कि फिर न उठ सके.

मोदी को कब क्या चाहिए उसका ख्याल उनकी टीम रखती है. लेकिन दुनिया को ये उम्मीद नहीं थी कि ऐसा भी कुछ होगा कि कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष खुद मोदी को जादू की झप्पी देकर पूरी दुनिया में अपनी थू थू करवाएंगे.

बहरहाल ये राजनीति हैं. यहां नेता कुछ भी कर सकते हैं. उन्हें बस अपनी रोटी सेंकनी होती है. हां, यहां एक बात गलत हो गई कि मोदी को गले लगाकर जहां राहुल शाबासी लेना चाहते थे वहीं उनका आंख मारना उन्हें ग़लत साबित कर गया. हर तरफ उनकी बुराई हो रही है.

ऐसा और कहीं नहीं होता. अगर राहुल को झप्पी देनी ही थी तो उन्हें आंख नहीं मारना चाहिए था.

वैसे एक बात तो है कि नरेंद्र मोदी को जादू की झप्पी भी मिल गई और पूरी दुनिया में राहुल की बेइज्ज़ती भी हो गई. अब इसे मोदी की चालाकी करें या राहुल की बवकूफी. ये आप खुद ही समझ लीजिए.

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