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इन तरीकों से मुस्लिमों को रिझाने की कोशिश कर रहें पीएम मोदी

बोहरा मुस्लिम – मुस्लिमों के बीच नरेंद्र मोदी लोकप्रिय नहीं है, इसलिए अगले चुनाव में भी इस बात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिम वोटर बीजेपी की जीत का गणित बिगाड़ दे.

वैसे नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद से लगातार मुस्लिमों के दिल में अपनी छवि सुधारने की कोशिश में लगे हुए हैं और तीन तलाक से लेकर मुहर्रम के मातम तक में शरीक होना इसी कोशिश का नतीजा है.

मोदी के ये कदम साफ बताते हैं कि वो मुस्लिम वोटर्स को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं।

बोहरा मुस्लिम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को इंदौर में दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के 53वें धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के कार्यक्रम में शामिल हुए. बोहरा समाज के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई पीएम उनके धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुआ. हालांकि बोहरा मुस्लिम की आबादी बहुत कम है और ये हमेशा से मोदी के पक्ष में रहे हैं, ये बाकी मुसलमानों से अलग होते हैं और ये खासतौर पर व्यापारी होते हैं.

मुहर्रम के महीने में मोदी का बोहरा समुदाय के बीच पहुंचना और इमाम हुसैन की शहादत में मनाए जाने वाले मातम में शामिल होने से तो यही संदेश जाता है कि वो यह बताना चाहते है कि वो मुस्लिमो के दुश्मन नहीं है.

तीन तलाक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन तलाक के जरिए मुस्लिम महिलाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. तीन तलाक को खत्म करने से मुस्लिम महिलाएं बीजेपी के पक्ष में आई हैं. मोदी ने लोकसभा में तो बिल पास करवा दिया, लेकिन यह राज्यसभा में अभी अटका हुआ है. मोदी सरकार के इस कदम की मुस्लिम महिला संगठनों ने बहुत तारीफ की थी.

सुफी मुस्लिम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुसलमानों के कुछ ही कार्यक्रम में शरीक होते है. इसी में से एक है दिल्ली में हुए विश्व सूफी सम्मेलन में नरेंद्र मोदी का शामिल होना. उन्होंने सूफीज्म के जरिए इस्लाम के कट्टरवाद पर जमकर हमला करते हुए कहा था कि सूफीवाद इस्लाम की मानवता को दी गई अनमोल तोहफा है. देश में बरेलवी मुस्लिम की बड़ी आबाद है, जो कहीं न कहीं सूफीवाद के करीब है.

ऊर्दू में किताब

नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों के लिए लिखी गई किताब ‘एग्जाम वॉरियर्स’ का उर्दू संस्करण लांच होने जा रहा है.

इस किताब के जिरए परीक्षा की तैयारी और तनाव से बचने के लिए छात्रों एवं पैरेंट्स के लिए 25 मंत्रों का जिक्र किया गया है. बुक में एग्ज़ाम को लेकर स्टुडेंस की परेशानियों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है. ऊर्दू में ये बुक लॉन्च करके मोदी मुसलमान छात्रों पर अपनी पकड़ बनाना चाहते हैं.

नरेंद्र मोदी की छवि कट्टर हिंदूवादी नेता की रही है, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें समझ आ गया कि लंबे समय तक राजनीति में बने रहने के लिए सभी धर्म के लोगों को साथ लेकर चलना ज़रूरी है और अब तो चुनाव भी सिर पर है, ऐसे में वो किसी का विरोध मोल लेना नहीं चाहतें.

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