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लड़का या लड़की कौन होता है ज्यादा बेवफा !

ज्यादा बेवफा

ज्यादा बेवफा – आजकल रिलेनशिपस में बेवफाई, चिंटिंग एक आम बात हो गई है ।

जिस वजह से आजकल के अधिकतर रिलेशनशिपस की उम्र ज्यादा लंबी नहीं होती । और कई बार बदनामी के डर के कारण कुछ पार्टनर्स अपने पार्टनर्स के धोखे को समाज से छुपाते हैं । हालांकि उनके रिलेनशिप में वो मिठास हमेशा के लिए खत्म हो जाती है । पर कई लोग धोखें को लेकर भी लिंग भेदभाव करते हैं कुछ लोगों का कहना है कि लड़कियां ज्यादा बेवफा होती है । वहीं कुछ लोगों का मानना है कि लड़के ज्यादा बेवफा होते हैं ।

हालांकि बेवफाई को किसी पैमाने में नहीं मापा जा सकता । लेकिन फिर भी रिश्तों में बढ़ते धोखों को लेकर कुछ खास रिसर्च सामने आई है ।

क्यों मिलता है रिलेशनसिप में धोखा

ज्यादा बेवफा

ये जाने से पहले की लड़के ज्यादा बेवफा होते है या लड़कियां ये जाना जरुरी है कि रिलेनशिपस में लोग पार्टनर को धोखा क्यों देते है ? या धोखें क्यों खाते है ?जब भी किसी रिलेशनशिप में एक पार्टनर दूसरे पार्टनर को चिट करता है तो सीधे तौर पर हम धोखा देने वाले को दोषी करार कर देतें है । जबकि ये जाना भी जरुरी है कि पार्टनर के धोखा देने की वजह क्या थी रिसर्च के मुताबिक अधिकतर लड़के फिजिकल होने के लिए धोखा देते है । जबकि लड़कियां अक्सर भावनात्मक कारणों से धोखा देती है । लेकिन रिसर्च ये भी कहती है कि पार्टनर्स का अपने पार्टनर को धोखा देने का मुख्य कारण उनकी मानसिक और शारीरिक इच्छाएं पूरी न होना और अपने पार्टनर दारा केयर न करना होता है । जिस वजह से वो किसी तीसरे की ओर आकर्षित होते हैं ।

कौन ज्यादा बेवफा लड़कियां या लड़के

ज्यादा बेवफा

वैसे तो बेवफाई . चिटिंग , धोखा को आप किसी लिंग के आधार पर नहीं बांट सकते । क्योंकि ऐसे मामलों में रिसर्च भी 100 प्रतिशत सही नहीं हो सकती । लेकिन फिर भी अगर रिलेशनशिपस में होने वाले धोखों पर की गई हाल ही की एक रिसर्च की बात करें तो इसके मुताबिक पिछले कुछ सालों में मैरिड कपल्स में बेवफाई के मामले लगातार बढ़े है । जिसका सबसे बड़ा कारण कपल्स की एक दूसरे को लेकर महत्वकाक्षाएं पूरा न होना है । रिसर्च के मुताबिक आज के वक्त में 100 में से 40 से 75 फीसदी लड़के अपने पार्टनर्स को चिट करते है । वहीं 100 में से 45 से 70 फीसदी महिलाएं अपने पार्टनर्स को धोखा देती है । लेकिन चौकांने वाली बात ये है कि अगर इन आकड़ो की पिछले 2 दशकों के साथ तुलना की जाए तो । पिछले दो दशकों में लड़कियों में बेवफाई का प्रतिशत 40 फीसदी बढ़ा है । जबकि पुरुषों का आज भी उतना ही है । यानी कि 90 के दशक से पहले लड़कियां में बेवफाई ,चिटिंग का प्रतिशत कम था ।

हालांकि कई मामले ऐसे भी देखे जाते हैं । जहां पार्टनर के धोखे की खबर उनके पार्टनर को होती है लेकिन इसके बावजूद भी उनके पार्टनर समाज में बदनामी के डर से चुप रहते हैं । अपने रिश्ते की सच्चाई को समाज से छुपाते हैं । लेकिन ऐसे हाल में तो बेवफाई करने वाले से ज्यादा उसे देखकर भी चुप रहने वाला अपने रिश्ते की हालत के लिए जिम्मेदार हुआ । फिर चाहे वो एक लड़का हो या लड़की ।

खैर बेवफाई सही है या गलत ये कहा नहीं जा सकता क्योंकि अक्सर जिसे बेवफाई करते है वही बेवफाई की वजह भी होता है । इसलिए ऐसे में दोनों का पक्ष जाना जरुरी है । वो कहते हैना  “जो अब तक मोहब्बत को न समझ सकें, वो बेवफाई को क्या समझेंगे, और अगर इतनी ही मोहब्बत थी तो, इल्जामों की बारिश करने वाले एक बार पूछ तो लेते बेवफाई की वजह क्या थी। “

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