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जो योद्धा बड़े-बड़े युद्ध में न मरे उनकी मामूली चीज से हो गई मौत

योद्धाओं की मृत्यु

योद्धाओं की मृत्यु – जिन वीर योद्धाओं को कोई युद्ध में ना हरा सका उन्हें उनकी किस्मत ने बड़ी ही मामूली मौत दे दी.

आज हम जिन योद्धाओं की बात करने जा रहे हैं वह इतिहास के कई बड़े योद्धाओं में से एक थे. लेकिन इन सभी की मौत इतनी बड़ी नहीं रही, यह सभी बेहद मामूली चीज के कारण मौत के घाट उतर गए.

दोस्तों इसी में जिंदगी की सच्चाई है जिसे सब को स्वीकार करना होगा क्योंकि एक न एक दिन मौत आती जरूर है।

मौत किसी भी वजह से हो लेकिन मरने वाला आदमी तड़पकर या अचानक मरता है, किसी भी बहाने से मरता है, लेकिन आज हम आपको ऐसे कुछ मौत के किस्से सुनाने जा रहे हैं जो बहुत ही अजीब है।

योद्धाओं की मृत्यु –

१ – ग्रीक के सेनापति प्यूरोस

प्यूरोस की सेनापति से राजा बनने की कहानी जितनी बहादुरी की निशानी है लेकिन इनकी मौत उतनी ही अजीब है। इतनी लड़ाईयां जीतने वाला योद्धा इतनी आसानी से मर जाएगा किसी ने नहीं सोचा था। इतिहास बताता है कि जनाब रोम जीतने के बाद और आर्गोस की गोलियों के बीच चल रहे थे। एक वृद्ध महिला उनका पीछा कर एक छत से दूसरी छत पर कूद रही थी, उसने छत से ही निशाना लगाकर एक टाइल फेंकी जिससे प्योरोस के सर पर लगने से उनकी मौत हो गई।

योद्धाओं की मृत्यु

२ – ली बाई

यह चीन के कवि थे जिन्हें भावनात्मक कविताओं की रचना का चस्का था। इमोशनल-सेंसिटिव बहुत थे। रोमांटिक कविताएं लिखते थे, प्रकृति को महसूस करना चाहते थे। एक बार रात को खूबसूरत चांदनी रात में शांत दरिया किस सैर कर रहे थे। पानी में चांद की परछाई देखी, उन्हें यह परछाई इतनी अच्छी लगी कि वह चुनने के लिए जैसे ही नीचे झुककर गिर पड़े और तैरना ना आने के कारण डूब कर उस प्रकृति में ही लीन हो गए।

योद्धाओं की मृत्यु

३ – किन शीहुयांग

आप टेराकोटाआर्मी के बारे में जानते हैं? चलिए हम बताते हैं कि कुछ वक्त पहले हमारे प्रधानमंत्री चीन गए थे तो उन्होंने पत्थर की मूर्तियों वाली आर्मी को देखा था और उनके साथ फोटो खिंचवाई थी। वही टेराकोटाआर्मी हुआ करती थी, जिनकी प्रतिमाएं तत्कालिक राजा किन शीहुआंग ने बनवाई थी। यह बादशाह कभी मरना ही नहीं चाहते थे। कोई भी खतरा नहीं उठाना चाहते थे, लेकिन अमर होने के लालच में किसी की हिदायत देने पर मरकरी की गोलियां खाई ,ताकि अमर हो सकें। अमर तो नहीं हुए हां मर जरूर गए।

४ – उल्का पिंड गिरने से पहली मौत

तमिलनाडु में 40 वर्षीय बस ड्राइवर एक इंजीनियर कॉलेज से जा रहा था, तभी उस पर आसमानी पत्थर ( जिसे उल्का पिंड कहा जाता है ) गिरा, लोग उसे अस्पताल ले जा रहे थे तभी उसने दम तोड़ दिया दुनिया में उल्का पिंड गिरने से होने वाली यह पहली मौत है।

योद्धाओं की मृत्यु

इन महान योद्धाओं की मृत्यु इतनी आसानी हो गई यह जान कर अब तो लगने लगा है कि जब कभी जिसका भी समय इस धरती पर पूरा हो जाता है उसे भगवान किसी ना किसी तरह अपने पास बुला ही लेता है. साथ ही हमें इस से एक सीख भी मिलती है, हमें हर पल चौकना रहना चाहिए ना जाने कब और कहा क्या हो जाए.

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