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आखिर कैसे गोल्डा मेयर ने 1971 के युद्ध में की थी भारत की मदद

गोल्डा मेयर एक ऐसी हस्ती, जिनका नाम इज़राइल के सम्मान में चार चांद लगा देता है।

गोल्डा मेयर इज़राइली शिक्षिका, किबूती, राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ इज़राइल की चौथी प्रधानमंत्री पद पर भी रह चुकी है। गोल्डा मेयर ने 17 मार्च 1969 को बतौर प्रधानमंत्री इज़राइल की पहली महिला प्रधानमंत्री का पदभार संभाला था।

उन्हें इज़राइल की राजनीति की “आयरन लेडी” भी कहा जाता है।

भारत और गोल्डा मेयर का रिश्ता

बात 1971 के दौर की है जब भारत और पाकिस्तान युद्ध के दौरान इज़राइल की प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर ने भारत की गुप्त रूप से मदद की थी। अगर बात उस वक्त के दोनों देशों के संबंध की करे, तो बता दे कि उस दौरान दोनों देशों के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं थे, लेकिन फिर भी भारत के सबसे मुश्किल दौर में इसराइल ने भारत का साथ दिया। जहां एक ओर इज़राइल 1971 के इस युद्ध में भारत का साथ दे रहा था वहीं दुसरी तरफ इज़राइल का सबसे नजदीकी दोस्त अमेरिका इस युद्ध में पाकिस्तान का साथ निभा रहा था।

इस युद्ध को लेकर लिखी गई किताब “बल्ड टेलिग्राम” में लिखा गया है कि इज़राइल की प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर ने गुप्त रूप से इज़राइली शस्त्र विक्रता ‘श्लोम जबलुदोविक्ज’ के जरिए भारत को कुछ ‘मोर्टास और हथियार’ भिजवाये थे। इतना ही नहीं गोल्डा मेयर ने उन हथियारों के साथ कुछ इज़राइली प्रशिक्षकों को भी भारत भेजा था।

गोल्डा मेयर के इतने समर्थन के बाद जब भारत की ओर से भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव पी. एन. हक्सर ने और हथियारों की मांग की, तो जवाब में गोल्डा मेयर ने आश्वासन देते हुए कहा कि ‘बेफिक्र रहिये हम आपकी मदद करना जारी रखेंगे’।

“बल्ड टेलिग्राम” के अनुसार उस समय इज़राइल ने ये भी संकेत दिये थे कि इस मदद के बदले भारत को इज़राइल से कूटनीतिज्ञ संबंध बनाने चाहिए। इज़राइल के इस प्रस्ताव को भारत ने उस समय बड़ी ही विनम्रता के साथ अस्वीकार कर दिया था, और इस बात का कारण बताते हुए भारत की ओर से ये कहा गया कि इस समय भारत और इज़राइल के इन संबंधों को सोवियत संघ पसंद नहीं करेगा। लेकिन ठीक 20 साल बाद भारत और इज़राइल के बीच नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली सरकार ने इज़राइल के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच पहली बार राजनीतिक संबंध स्थापित हुए।

उम्र 75 की, काम 25 का

गोल्डा मेयर पर लिखे गए कई लेखों और किताबों में कहा जाता है कि वो काम के मामले में अपनी उम्र से कही ज्यादा यंग थी। 75 साल की उम्र में वो 25 साल की युवती की तरह काम करती था और उनके दिन सुबह 4 बजे समाप्त होता था। इस बात की पुष्टी गोल्डा मेयर ने खुद अपनी किताब में की है, कि जब लोगों के दिन की शुरूआत होती है तब मेरा दिन खत्म होता था। साथ ही उन्होंने अपनी किताब ‘माई लाइफ’ में लिखा है कि कभी-कभी तो मेरे इतनी देर तक जगने और साथ ही मेरी रसोई घर की लाइट के जलने के कारण मेरे घर के बाहर तैनात मेरे रक्षक मुझे अंदर देखने चले आते थे, कि मै ठीक हूं ना।

गोल्डा मेयर एक ऐसी महिला प्रधानमंत्री रही है, जिनका जिक्र आज भी कई बड़े-बडे राजनीतिक मामलों में मिसाल के तौर पर किया जाता है।

Kavita Tiwari

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