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गरुड़ की स्पीड जानकार हैरान रह जाएंगे आजकल के युवा

गरुड़ की स्पीड – बुद्धि में बड़े से बड़े संत और ऋषि को भी पराजित करने वाला, शरीर ऐसा की हाथी को भी अपनी चोंच में उठा ले और गति इतनी कि हवा पर भी राज़ करे.

कुछ ऐसी ही उपमा दी जाती है गरुड़ पक्षी की. एक ऐसा पक्षी जो सबसे ज्यादा बलशाली, विशालकाय और बुध्दिमान होता है. आमतौर पर अब धरती पर इस प्रजाति के पक्षी नहीं है, लेकिन एक युग ऐसा था जब इस तरह के पक्षी पाए जाते थे.

ज़रा सोचिए जो पक्षी भगवान् विष्णु का वाहन बन जाए उस गरुड़ की स्पीड कितनी होगी.

वायु देवता भी गरुड़ के मार्ग का रोड़ा नहीं बनते थे. आमतौर पर कहा जाता है कि ये एक ऐसा पक्षी था, जिसका एक भाई सूर्य का वाहन बन गया और दूसरा भगवान् विष्णु का. इस पक्षी की महानता इसी बात से लगाईं जा सकती है कि हिन्दू धर्म में इसी के नाम के एक पुराण लिख दिया गया. अब तो आपको ज्ञात हो ही गया होगा कि इस पक्षी का क्या रुतबा था.

गरुड़ पक्षी को भगवान् विष्णु के अलावा और कोई रोक नहीं सकता था. एक समय ऐसा था जब वो संसार में सबसे ज्यादा गतिशील माने जाते थे. विशालकाय शरीर होने के नाते उनके मार्ग में आने वाले छोटे छोटे पक्षी मारे जाते थे. तब जाकर सभी पक्षियों ने भगवान विष्णु का ध्यान किया और उन्हें गरुड़ को रोकने की मांग की. भगवान् विष्णु ने सभी पक्षियों की खातिर गरुड़ को अपनी सवारी बना लिया. तब से गरुड़ उसी तरह उड़ते जैसा भगवान् उन्हें कहते.
कैसे हुआ जन्म ?
आपको ये जानना बहुत ज़रूरी है कि इस भारी भरकम गरुड़ का जन्म कैसे हुआ. गरुड़ के जन्म की यह कहानी कश्यप ऋषि की दो पत्नियों विनता और कद्रु के साथ शुरू होती है. विनता नामक कन्या का विवाह कश्यप ऋषि के साथ हुआ. विनिता ने प्रसव के दौरान दो अंडे दिए. एक से अरुण का और दूसरे से गरुढ़ का जन्म हुआ. अरुण तो सूर्य के रथ के सारथी बन गए तो गरुड़ ने भगवान विष्णु का वाहन होना स्वीकार किया. आगे चलकर अरुण से सम्पाती और जटायु हुए. ये दोनों भी अपने पिता और चाचा की ही तरह थे. ये भी सूर्य तक उड़ान भर सकते थे.
ऐसा कहते हैं कि जब गरुड़ का जन्म हुआ तो बेहद तेज़ था उस समय आसमान में.
अंडे में से निकले गरुड़, जिनका चेहरा, सिर और चोंच चील की तरह और शरीर इंसान का था, का जन्म हुआ. गरुड़ बहुत ताकतवर थे और अपनी इच्छानुसार अपना स्वरूप बदल सकता थे. ऐसा माना जाता है कि अगर मौत के बाद गरुड़ पुराण पढ़ी जाए तो मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति और धरती के बंधन से मुक्ति मिलती है. उनका स्वरुप बदलना ही उन्हें बाकी पक्षियों से अलग करता था. अपने पिता के वो बहुत ही प्रिय था.
ऐसी थी गरुड़ की स्पीड – अरुड और गरुड़ दोनों ही भाई की उड़ान को मापना मुश्किल था. बस, इतना कह सकते हैं कि गरुड़ जो हवा से भी तेज़ उड़ान भरते थे, उनकी गति को आज भी किसी सयंत्र से मापा नहीं जा सकता. आज तक ऐसी कोई मशीन नहीं बनी जो गरुड़ की स्पीड को माप सके.
Shweta Singh

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