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क्या आप जानते हैं ईद क्यों मनाई जाती है?

बड़ा त्योहार है ईद

मुस्लिमों का सबसे बड़ा त्योहार है ईद. ईद का मतलब ही होता है जश्न मनाना.

बड़ा त्योहार है ईद के दिन नए कपड़े पहनने से लेकर एक-दूसरे के गले लगकर मुंह मीठा कराने की रस्म है. ईद का त्योहार देश ही नहीं पूरी दुनिया में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है, क्योंकि पूरी दुनिया में मुस्लिमों की आबादी काफी ज़्यादा है. हमारे देश में भी ईद पर बाज़ारों में खूब रौनक देखने को मिलती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर ये त्योहार मनाया क्यों जाता है?

रमजान के 30 रोजों के बाद चांद देखकर अगले दिन बड़ा त्योहार है ईद मनाई जाती है. इसे लोग ईद-उल-फित्र भी कहते हैं. इस्लामिक कैलेंडर में दो ईद मनाई जाती हैं. दूसरी ईद जो ईद-उल-जुहा या बकरीद के नाम से भी जानी जाती है. ईद-उल-फित्र का यह त्योहार रमजान का चांद डूबने और ईद का चांद नजर आने पर इस्लामिक महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है. मुसलमानों का ये त्योहार भाईचारे और प्रेम को बढ़ावा देने वाला पर्व है.

बड़ा त्योहार है ईद

 बड़ा त्योहार है ईद को सभी आपस में मिल के मनाते हैं और खुदा से दुआएं करते हैं कि सुख-शांति और बरक्कत बनी रहे.

जब पहली बार ईद मनाई गई

मान्‍यता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र के युद्ध में विजय हासिल की थी, इसी खुशी में ईद उल-फितर मनाई जाती है. माना जाता है कि पहली बार ईद उल-फितर  624 ईस्वी में मनाई गई थी. इस दिन मीठे पकवान बनाए और खाए जाते हैं. अपने से छोटों को ईदी दी जाती है.

रमज़ान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद इसके खत्म होने की खुशी में ईद के दिन कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं. सुबह उठकर ईदगाह और मस्जिदों में नमाज अदा की जाती है और ख़ुदा का शुक्र अदा किया जाता है कि उन्होंने पूरे महीने हमें रोजा रखने की शक्ति दी.

बड़ा त्योहार है ईद

ईद से पहले दान

ईद से पहले जकात और फितरा देने का महत्व- इस दिन इस्लाम को मानने वालों का फर्ज होता है कि अपनी हैसियत के हिसाब से जरूरतमंदों को दान दें. इस दान को इस्लाम में जकात और फितरा कहा जाता है. सभी हैसियतमंद मुसलमानों का फर्ज है कि वो जरूरतमंदों को दान दें. दरअसल, रमजान के महीने में ईद से पहले फितरा और जकात देना हर हैसियतमंद मुसलमान पर फर्ज होता है. ईद के त्‍योहार पर लोग ईदगाह में नमाज पढ़ने जाते हैं. इसके बाद एक दूसरे के गले मिलते हैं और ईद मुबारक बोलते हैं. इतना ही नहीं सब लोग साथ में मिलकर खाना भी खाते हैं.

बड़ा त्योहार है ईद

कहा जाता है कि आपसी प्रेम व भाईचारे को अपनाने वालों पर अल्‍लाह हमेशा मेहरबान रहता हैं. बड़ा त्योहार है ईद को मीठी ईद भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन सवईंयों और खीर से लोग एक-दूसरे का मुंह मीठा कराते हैं.

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