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मुसलमानों का ये गावं ईद की तरह मनाता है कृष्ण जन्माष्टमी !

मुसलमान मनाते है जन्माष्टमी

धर्म के नाम पर लोगो को भड़काने वाले कितने ही आग क्यों ना लगा ले, भारतीय बेहद समझदार हो चुके है.

भारतीय नागरिको को पता है कि, सर्वधर्म समभाव का दुसरा नाम ही भारत है.  अब धर्म के नाम पर तो राजनीती हो ही नहीं सकती.

इन सभी के बावजूद हम गर्व से कहते है कि धर्म और कट्टरवाद से ऊपर उठकर भी कुछ ऐसे लोग है जो हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतिक बने हुए है.

जैसा की हम जानते है कि भारत विविधताओं का देश है. यहाँ सभी धर्मो के त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाए जाते है.

जन्माष्टमी के अवसर पर हम आपको एक ऐसी जगह से रूबरू कराने जा रहे है, जहां एक बड़ी तादाद में मुस्लिम रहते है लेकिन जन्माष्टमी ऐसे मनाते है, जैसे श्री कृष्ण के सग्गे हो.

हम आपको लिए चलते है राजस्थान की ओर जहाँ मुसलमान मनाते है जन्माष्टमी –

राजस्थान जयपुर से 200 किलोमीटर की दूरी पर झुंझुन जिले के चिरवा गावं में जन्माष्टमी की बड़ी ज़ोरदार तैयारी की गई है. यहाँ हर साल हर घर में कृष्ण जन्म की पूजा अर्चना की जाती है. खास बात तो ये है कि, इस गावं में बहोत पुरानी दरगाह भी है, जिसे शरीफ हाजिब शकरबार दरगाह के नाम से जाना जाता है. इस दरगाह में मुसलमान मनाते है जन्माष्टमी का त्यौहार जो तीन दीन तक चलता है.

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त्यौहार के दौरान दरगाह के आस-पास की 400 दुकाने दुल्हन की तरह सज जाती है. जन्माष्टमी की रात दरगाह में कव्वाली, नृत्य, और नाटको का आयोजन होता है.

इस दरगाह के मौलवी नवाब मोहम्मद कहते है कि कृष्ण जन्माष्टमी कैसे शुरू हुआ ये तो वे नहीं जानते लेकिन ये त्यौहार मनाने में उन्हें बेहद खुशी मिलती है. मौलवी के अनुसार दरगाह में जन्माष्टमी पिछले 300-400 सालो से मनाया जा रहा है.

इस त्यौहार को मनाने का मुख्य उद्देश्य हिन्दू-मुस्लिम एकता है.

इस दरगाह और इस इलाके के बारे में ज्यादा लोगो को पता नहीं है लेकिन फिर भी देश के कोने कोने से यहाँ हज़ारो की तादाद में लोग कृष्ण जन्माष्टमी मनाने आते है.

जय श्री कृष्ण…

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