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अनोखा गांव जहां छत पर उतरते हैं विमान !

गाँव जहाँ के घरों की छत पर उतरते है विमान

गाँव जहाँ के घरों की छत पर उतरते है विमान – गाँव जहाँ छत पर उतारते है विमान आपने विमान को आजतक एयरपोर्ट पर ही खड़ा देखा होगा, लेकिन हम आपसे कहें कि एयर इंडिया के विमान रनवे की बजाय लोगों की छत पर खड़े रहते हैं तो शायद आपको यकीन नहीं होगा, मगर जालंधर में एक गांव ऐसा है जहां आपको छत पर एयर इंडिया के विमान खड़े दिखेंगे.

क्या है इन प्लेन के पीछे की कहानी, चलिए आपको बताते हैं गाँव जहाँ के घरों की छत पर उतरते है विमान –

पंजाब के जालंधर के गांव लांडा में हर घर की छत पर एयर इंडिया के जहाज खड़े मिलेंगे.

गाँव जहाँ के घरों की छत पर उतरते है विमान

एक एनआरआई के घर पर भी ऐसा जहाज खड़ा है, जो गांव में एंट्री करते ही नजर आने लगता है. इसके अलावा लोगों के घर की छतों पर आकर्षण की और भी कई चीज़ें लगी मिलेंगी- जैसे प्रेशर कुकर, पानी का जहाज, कंगारू आदि.

चलिए पहले तो आपको बता दें कि फोटो में आपको जो जहाज दिख रहा है असल में वो पानी का टैंक है.

गाँव जहाँ के घरों की छत पर उतरते है विमान

जी हां पानी के टैंक को ही एयर इंडिया के विमान की तरह डिज़ाइन किया गया है. कुछ लोगों ने शौकिया ऐसी टंकियां बनवाई हुई हैं तो कुछ ने घर में रहने वाले लोगों की पहचान कराने के लिए. जैसे अगर किसी की छत पर आर्मी का टैंक दिख जाए तो समझिए उस घर से कोई न कोई आर्मी में है. अगर छत पर प्लेन दिखे तो समझिए उस घर में एनआरआई रहते हैं. जालंधर में रहने वाले संतोख सिंह ने अपने घर के ऊपर एक हवाई जहाज बनवाया है, जो टंकी नहीं बल्कि एक कमरा है.

गांव में खास तौर पर एनआरआईज की कोठियां की छतों पर ऐसी टंकिया रखी गई हैं कि लोग किसी को नाम से कम पानी की टंकी के जरिये ज्यादा जानते हैं. अगर एयर इंडिया के जहाज वाली कोठी के बारे में पूछोगे, तो वहां के ग्रामीण आपको संतोख सिंह की कोठी पर ले जाएंगे. संतोख सिंह ने छत पर पूरा एयर इंडिया का जहाज बना रखा है, जिसको नाथ नामक कारीगर ने ही बनाया था. इसको बनाने में एक साल से अधिक का समय लगा.

गाँव जहाँ के घरों की छत पर उतरते है विमान

गाँव जहाँ के घरों की छत पर उतरते है विमान

गांव में अगर पानी वाले जहाज की कोठी के बारे में पूछोगे तो लोग आपको तरसेम सिंह बब्बू के घर ले जाएंगे, उनकी छत पर पानी का जहाज बना हुआ है. तरसेम सिंह उप्पल जब 70 साल पहले हांगकांग गए थे तो उन्होंने सफर शिप से किया था. अपने बेटों को अपनी पहली यात्रा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था कि हम भी अपने घर पर शिप बनवाएंगे. 1995 में यह शिप बनाई गई. इस ट्रेंड की शुरुआत करीब 70 साल पहले हांगकांग जाने वाले तरसेम सिंह ने की थी.

तरसेम सिंह ने अपनी कोठी के ऊपर पानी वाले जहाज के आकार की टंकियां बनवाई, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया. इसके बाद गांव में इस तरह की टंकी बनाने का क्रेज तेजी से चल पड़ा. फिर तो हर कोई अपनी अलग पहचान के लिए पानी की टंकियों को अलग-अलग डिज़ाइन में बनवाने लगे.

ये है गाँव जहाँ के घरों की छत पर उतरते है विमान – कमाल की क्रिएटिविटी है इस गांव के लोगों की. शौक और क्रिएटिविटी का बेहतरीन उदाहरण है ये गांव जहां लोगों ने विमान के स्टाइल में ही पानी की टंकी बनवा ली.

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