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विश्व जनसंख्या दिवस – बढ़ती आबादी बनी लोगों के जीवन के लिए खतरा

विश्व जनसंख्या दिवस

विश्व जनसंख्या दिवस – बढ़ती जनसंख्या के बुरे परिणामों से लोगों को आगाह करने के लिए हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस बनाया जाता है.

इसके ज़रिए लोगों को बड़ी आबादी के प्रति जागरुक किया जाता है, लेकिन ऐसा लगता है कि हमारे देशवासियों पर इस जागरुकता अभियान का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. भारत दुनिया का दूसरी सबसे अधिक आबादी वाला देश है और हर साल जिस रफ्तार से जनसंख्या बढ़ रही है, वो दिन दूर नहीं जब इंसानों के लिए अच्छी ज़िंदगी जी पाना मुश्किल हो जाएगा.

फिलाहल पूरे विश्व की आबादी 7 अरब 63 करोड़ है जिसमें से अकेले भारत की करीब 1 अरब 35 करोड़ के आसपास है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि आजादी के समय देश की जनसंख्या सिर्फ 33 करोड़ थी यानी आज़ादी के 70 सालों में हमने जनसंख्या के मामले में बहुत तरक्की कर ली है. हमारे की बढ़ती आबादी का सबसे बड़ा कारण परिवार नियोजन के कमजोर तरीके, अशिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी, अंधविश्वास और बेटे की चाह है.

आज भी अधिकांश गांव और छोटे शहरों में बेटे की चाह में लोग कई लड़कियां पैदा कर लेते हैं.

एक अनुमान के मुताबिक यदि इसी तरह आबादी बढ़ती रही तो 2050 तक देश की जनसंख्या 1.6 अरब हो जायेगी. फिलहाल भारत की जनसंख्या विश्व जनसंख्या का 17.5 फीसदी है. जबकि पूरी दुनिया की जमीन का सिर्फ 2.5 फीसदी हिस्सा ही भारत के पास है बाकी संसाधन भी कम है. बढ़ती आबादी वजह से जहां प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है वहीं संसाधनों के भी जल्द खत्म होने का खतरा है. ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या की जड़ भी बढ़ती आबादी ही है.

चीन, भारत और अन्य एशियाई देशों में शिक्षा और जागरुकता की कमी की वजह से जनसंख्या विस्फोट के गंभीर खतरे साफ दिखाई देने लगे हैं. हालात यह है कि अगर भारत ने अपनी जनसंख्या वृद्धि दर पर रोक नहीं लगाई तो वह 2030 तक दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा. बढ़ती आबादी और संसाधनों की कमी के खतरनाक नतीजे शायद आपको अभी से दिखने लगे हैं.

आपने कभी गौर किया कि किसी भी नौकरी या संस्थान में जितनी सीटे होती हैं उससे कई गुणा ज्यादा आवेदन आ जाते हैं, इसकी वजह बढ़ती आबादी ही तो है. लोग ज्यादा है, मगर इतने लोगों के लिए नौकरी और शिक्षा के अवसर नहीं ऐसे में कॉप्टिशन तो बढ़ेगा ही. ज़रा सोचिए अभी से ही छोटे लेवल से लेकर उच्च शिक्षा और नौकरियों तक में कितनी प्रतिस्पर्धा है और यदि आबादी और बढ़ गई तो आने वाली पीढ़ी का क्या हाल होगा?

विश्व जनसंख्या दिवस – भारत में बढ़ती आबादी की एक मुख्य वजह मुस्लिम जनसंख्या भी है. आपने देखा होगा कि आमतौर पर मुस्लिम परिवार में एक या दो बच्चे होते ही नहीं है, इसकी वजह से भी देश की जनसंख्या विस्फोटक गति से बढ़ रही है, मगर राजनीतिक वजहों से इस तरफ कोई ध्यान नहीं देता और न ही उन्हें जागरुक करने और समझाने की कोशिश की जाती है. ऐसे में यदि जनसंख्या नियंत्रण की कोई पुख्ता तरकीब नहीं निकाली गई तो आने वाली पीढ़ी के लिए इस देश में जीना आसान नहीं होगा.

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