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जानिए क्या हुआ जब अर्जुन के रथ पर बैठे हनुमान जी चले गए !

हनुमान जी

हनुमान जी ने भीम को दिया था ये वरदान
हनुमान जी ने भीम से कहा कि तुम मेरे भाई हो और मैं तुम्हारा प्रिय करूंगा. जिस वक्त तुम शत्रु की सेना में पहुंच कर सिंहनाद करोगे, मैं उस समय अपने शब्दों से तुम्हारी गर्जना को बढ़ा दिया करूंगा. और अर्जुन के रथ की ध्वजा पर बैठकर ऐसी गर्जना करूंगा कि शत्रुओं के प्राण सूख जाएंगे. और उन्हें मारने में तुम्हें आसानी होगी. ऐसा कहने के बाद भीमसेन को हनुमान जी ने मार्ग दिखाया और फिर वहां से अंतर्ध्यान हो गए.

हनुमान जी

इसलिए जब महाभारत का युद्ध हो रहा था, तो भगवान श्री हनुमान अर्जुन की रथ की ध्वजा पर बैठे रहे और उन्होंने संपूर्ण युद्ध में अपनी मौजूदगी से भीम की सहायता की. और युद्ध की समाप्ति होते हीं वो वहां से चले गए. और उनके रथ पर से जाते हीं अर्जुन का रथ जलकर राख हो गया था.

भगवान हनुमान ने भीम को वरदान तो दिया हीं, साथ हीं उन्होंने भीम के घमंड को भी बहुत हीं चालाकी से चूर-चूर कर दिया. इसलिए कभी भी किसी व्यक्ति को घमंड नहीं करना चाहिए. बल्कि सदैव हर किसी का आदर और सम्मान करना चाहिए.

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