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दुनिया ने भी माना पीएम मोदी का लोहा, बनें ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ !

पीएम मोदी का लोहा

पीएम मोदी का लोहा – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर हैं.

पूरा विश्व मोदी की लीडरशिप का कायल हो चुका है. फिटनेस से लकर पर्यावरण तक मोदी ने सबके प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने का काम किया है, तभी तो उन्हें संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े पर्यावरण सम्मान ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ से नवाजा गया है.

पीएम मोदी का लोहा मानते हुए मोदी को यह सम्मान उन्हें पॉलिसी लीडरशिप कैटिगरी में दिया गया है.

दुनिया ने पीएम मोदी का लोहा माना –

भारत के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में से एक मोदी ने वैश्विक स्तर पर देश की छवि सुधारने का काम किया है. मोदी को संयुक्त राष्ट्र की ओर से चैंपियंस ऑफ द अर्थ का अवॉर्ड मिला है उनके अलावा ये सम्मान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों को भी मिला है. दोनों को यह सम्मान इंटरनेशनल सोलर अलायंस और पर्यावरण के मोर्चे पर कई अहम काम करने के लिए दिया गया है.

इस पुरस्कार की शुरुआत 2005 में हुई.

यह अवॉर्ड उन लोगों या संगठन को दिया जाता है जिन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में असधारण काम किया हो. चैंपियंस ऑफ द अर्थ इन कैटेगरी में विजेताओं को दिया जाता है-लाइफटाइम अचीवमेंट, पॉलिसी लीडरशिप, कार्य और प्रेरणा, उद्यमी दृष्टि, विज्ञान और नई खोज. इस साल संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से ये सम्मान अलग-अलग कैटेगरी में 6 लोगों और संस्थाओं को दिया गया है.

जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इमैनुअल मैक्रों, जोआन कार्लिंग, चीन का जिनजिआंग ग्रीन रूरल प्रोग्राम, कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और बियोंड मीट एवं इंपोसिबल फूड्स के नाम शामिल हैं.

आपको बता दें कि पीएम मोदी ने देश को 2022 तक प्लास्टिक मुक्त करने का फैसला किया है और इसी के तहत कई राज्यों में प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है, मोदी को ये सम्मान इसी मुहीम के लिए दिया गया है. भारत के लिए बहुत गर्व की बात है कि मोदी के अलावा कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी इस सम्मान से नवाजा गया है.

हवाई अड्डे को सस्टेनेबल एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ये सम्मान दियागया. यह एयरपोर्ट दुनिया को बताने की कोशिश कर रहा है कि बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए भी विकास किया जा सकता है.

दरअसल, बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विकास ने पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाया है, लोग अपने आर्थिक फायदे के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते जा रहे हैं और उन्हें इस बात का ज़रा भी एहसास नहीं होता कि इसकी वजह से जब प्रकृति का संतुलन बिगड़ेगा तो मानव को कितनी हानि होगी.

ऐसे में थोड़ी कोशिश और नई खोज के जरिए पर्यावरण और विकास में संतुलन किया जा सकता है.

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