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बिस्तर पर लेटे-लेटे पिछले 10 साल से पूरे स्कूल को चला रही है ये लकवाग्रस्त महिला !

प्रिंसिपल उमा शर्मा

प्रिंसिपल उमा शर्मा – स्वास्थ्य ही इंसान की सबसे बड़ी दौलत होती है इसलिए कहा जाता है कि जब तक इंसान का शरीर उसका साथ देता है तब तक वो सारे काम आसानी से कर लेता है.

लेकिन जब शरीर अस्वस्थ हो जाता है या फिर व्यक्ति किसी बीमारी से जूझने लगता है तो फिर वो लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

ऐसे में जरा सोचिए अगर किसी व्यक्ति का पूरा शरीर ही लकवाग्रस्त हो जाए तो फिर उसका जीवन कैसा होगा, जाहिर है वो अपनी इस बीमारी के आगे बेबस होकर बिस्तर पर ही पड़ा रहेगा.

लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो पिछले 10 सालों से लकवाग्रस्त है और बिस्तर पर पड़े-पड़े वो एक स्कूल चला रही है.

बिस्तर पर लेटकर प्रिंसिपल उमा शर्मा चला रही है स्कूल

दरअसल सहारनपुर के नेशनल स्कूल की 64 वर्षीय प्रिंसिपल उमा शर्मा, पिछले 10 सालों से लकवाग्रस्त हैं. पिछले 10 सालों से उमा के गले से नीचे का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त है. वो अपने शरीर से इतनी असहाय हो गई हैं कि वो सिर्फ अपने सिर और हाथों को ही हिला सकती हैं.

इस बीमारी के चलते उमा पिछले 10 सालों से बिस्तर पर ही पड़ी हुई हैं ऐसे में स्कूल जाना उनके लिए मुमकिन ही नहीं था. लेकिन उन्होंने अपनी इस बीमारी से कभी हार नहीं मानी और उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिखाया जो हर किसी के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है.

इतनी तकलीफों को झेलने के बावजूद उमा बिस्तर पर लेटे-लेटे सालों से अपने स्कूल को चला रही हैं. वो बिस्तर पर लेटकर ही बच्चों की वर्चुअल क्लास लेती हैं.

अपने जीवन में कई समस्याओं को झेल चुकी हैं प्रिंसिपल उमा शर्मा

आपको बता दें कि प्रिंसिपल उमा शर्मा पिछले 10 सालों से बिस्तर पर लेटे-लेटे ना सिर्फ स्कूल चला रही हैं बल्कि उन्हें इस बीमारी के अलावा अपने जीवन में कई संघर्षों का सामना करना पड़ा है.

सहारनपुर के नुमाईश कैंप में रहनेवाली उमा के संघर्ष की कहानी हर इंसान के लिए प्रेरणादायक है. बताया जाता है कि साल 1991 में उनके पति का देहांत हो गया था और अपने पति के देहांत के एक साल बाद ही उमा शर्मा ने एक स्कूल की स्थापना की.

स्कूल की स्थापना करने के कुछ समय बाद उनके 21 वर्षीय इकलौते बेटे की भी मौत हो गई. पति और बेटे को खो देने के बाद उमा को गहरा सदमा लगा था. फिर भी वो इस सदमें से बाहर निकलने की कोशिश रही थीं लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था लिहाजा साल 2007 में उन्हें पैरालिसिस का अटैक आ गया था जिसके बाद से ही वो बिस्तर पर पड़ी हुई हैं.

गौरतलब है कि बेटे और पति को खो देने के बाद प्रिंसिपल उमा शर्मा ने इस स्कूल के जरिए ही अपने गम को भूलाने की कोशिश की, शायद इसलिए पैरालिसिस की बीमारी की शिकार होने के बावजूद भी वो पिछले कई सालों से बिस्तर पर लेटे-लेटे ही अपने स्कूल के बच्चों को पढ़ाती हैं.

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