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इन 5 हिंदी फिल्मी गाने की चोरी की है पाकिस्तान ने

भारत के गानों की चोरी

भारत के गानों की चोरी – जिंदगी गुलजार है….

ये पाकिस्तान का सीरियल है जो पिछले साल तक भारत में काफी चला था। अभी फिलहाल भारत में पाकिस्तान के सीरियल बंद है। इसलिए अभी पाकिस्तान के सीरियल्स भारत में नहीं दिखा जाते हैं। खैर उस पर बात कभी और। तो हम कहां थे…

पाकिस्ताने के सीरियल भारत में दिखाए जाते हैं। ये चैनल्स को काफी टीआरपी दे रहे थे इसलिए इन्हें बेधड़क दिखाए भी जाते हैं। लेकिन ये तो वे सीरियल हैं जो पाकिस्तानी सीरियल के नाम पर ही दिखाएं जाते हैं। इन सीरियल्स के अलावा ऐसे पाकिस्तानी गाने भी हैं जो फिल्म डायरेक्टर अपने फिल्मों में काफी यूज़ करते हैं। मतलब पाकिस्तानी गानों की चोरी करते हैं। लेकिन क्या केवल हम इंडियन्स ही पाकिस्तानी गानों की चोरी करते हैं।

जी नहीं जनाबा।

ताली एक हाथ से कभी नहीं बजती और भारत के गाने इतने भी बोगस नहीं कि कोई उनका यूज़ ना करें। हमारे कहने का मतलब है कि पाकिस्तान ने भी भारत के गानों की चोरी की है। लेन-देन दोनों तरफ से हुआ है।

कभी-कभी तो लगता है कि विभाजन की त्रासदियों ने दोनों देशों के फिल्म उद्योग का बंटवारा केवल इसलिए किया है कि दोनों एक-दूसरे के गाने, फिल्में और सीरियल्स का यूज़ कर सकें। खैर इस पर भी कभी और बात।

आज हम बात करने वाले हैं उन 5 भारत के गानों की चोरी जो  पाकिस्तान ने बेधड़क कर ली।

भारत के गानों की चोरी –

१ – फिल्म ‘शर्त’

01-01-1954 को भारत में फिल्म ‘शर्त’ रिलीज हुई थी। दीपक और श्यामा अभिनीत इस फिल्म का संगीत हेमंत कुमार ने दिया था। इस फिल्म में एक गाना था- ‘ना चांद होगा ना तारे रहेंगे’। ये गाना भारत में काफी पसंद किया गया था। इसे सरहदों के पार भी काफी प्रसिद्धि मिली थी।

संयोगवश इसी साल पाकिस्तान में जून महीने में रिलीज हुई फिल्म ‘सस्सी’ में भी इसी मुखड़े और इसी धुन के साथ राजदुलारी (कौसर परवीन) का गाया गीत थी। आप इन दोनों गानों को सुनोगे तो आपको भी ये बिल्कुल एक लगेंगे।

२ – फिल्म ‘जागृति’

इसी तरह दूसरी फिल्म है ‘जागृति’ जिसमें एक गाना है ‘हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के’। इसे कवि प्रदीप ने लिखा है। ये साल 1954 में ही रीलिज हुई थी। इसी के ठीक दो साल बाद पाकिस्तान में फिल्म ‘बेदारी’ (1956) रीलिज हुई थी जिसमें ये गाना थोड़े से दुन को बदलकर दिखाया गया था। दोनों मुल्क तब खुद को सही और सशक्त दिखाने की पुरजोर कोशिश में थे। पाकिस्तानी गीत के मुखड़े में महज देश को मुल्क से बदल दिया गया था।

३ – ‘जागृति’ फिल्म का दूसरा गाना

तीसरा गीत भी ‘जागृति’ फिल्म का है। इस फिल्म में एक और गाना था ‘साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल’। इस गाने की ही तरह पाकिस्तान में ‘ए कायदे आज़म तेरा एहसान है एहसान’ बोल से गाना रीलिज हुआ था। मतलब कि जहां एक गाने में गांधी जी कि बात हो रही है वहीं दूसरी ओर कायद-ए-आजम की। अब इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और ये आप डिसाइड कर लीजिए।

४ – 80 के दशक में यूज़ किए गए थे कई सारे हिंदुस्तानी गाने

जब पाकिस्तान में जनरल जिया का शासन आया था तो वहां फिल्म उद्योग जैसे रसातल में चला गया। उस समय वहां लाहौर फिल्मों का केंद्र माना जाता था जो लगभगग बंद होने की कगार पर आ गया था। तब वहां छोटी-छटी केवल पंजाबी फिल्में ही बनती थीं। फिर 80 के दशक के बाद वहां हालात सुधरने लगे और पाकिस्तानी पॉप संगीत का दौर आया जिसमें हिन्दुस्तानी धुनों से मुतास्सिर काफी धुनें प्रयोग की गईं।

५ – ‘रहना है तेरे दिल में’

‘रहना है तेरे दिल में’ के टाइटल सॉन्ग को तो पाकिस्तान ने वैसे का वैसा ही यूज़ कर लिया। सन 2001 में हैरिस जयराज के संगीत में आई फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ के टाइटल सॉन्ग के धुन को हुबहु पाकिस्तानी फिल्म ‘चलो इश्क़ लड़ाएं’ में यूज़ किया गया था।

ये थी भारत के गानों की चोरी – हिंदुस्तानी गानों की लिस्ट जिसे पाकिस्तान ने वैसे का वैसा ही यूज़ कर लिया। अगर आपको हमारी बातों पर विश्वास ना हो तो आप एक बार खुद ऊपर दिए गए फिल्मों के गानों के वीडियो यूट्यूब में सर्च कर सकते हैं। फिर उसके बाद कोई कहे कि अपने देश में पाकिस्तानी गानों की चोरी की जाती है तो आप भी इन हिंदुस्तानी गानों की लिस्ट उन्हें बता देना और उनका मुंह शांत कर देना।

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