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250 लड़कों के साथ इस स्कूल में पढ़ती है ये इकलौती लड़की

अकेली लड़की

किसी भी स्कूल में या तो सिर्फ़ लड़के पढ़ते हैं या लड़कियां या तो दोनों साथ-साथ. लेकिन क्या ऐसे स्कूल के बारे में सुना है जहां 250 लड़कों के बीच में सिर्फ़ एक अकेली लड़की पढ़ती हो?

देहरादून का कर्नल ब्राउन क्रेम्ब्रिज स्कूल ऐसा ही स्कूल है और स्कूल में छठी क्लास में पढ़ने वाली शिकायना वो अकेली लड़की हैं. 12 साल की उम्र में शिकायना इस बात से बेहद खुश हैं. उनको इसमें कुछ भी नया नहीं लगता.

एक इंटरव्यू में शिकायना ने कहा, “थोड़ा अलग अनुभव ज़रूर है. पर लड़कियां सब कुछ कर सकती हैं तो फिर मैं ब्वॉएज़ स्कूल में क्यों नहीं पढ़ सकती.”लेकिन 2 50 लड़कों के बीच अकेले पढ़ने का फ़ैसला शिकायना ने अपनी मर्ज़ी से नहीं लिया. इसके लिए कुछ तो हालात ज़िम्मेदार थे और कुछ उसकी क़िस्मत.

शिकायना गाना भी बहुत अच्छा गाती हैं. टीवी पर कई शो में हिस्सा भी ले चुकी हैं. &TV पर आने वाले शो वॉयस ऑफ़ इंडिया में शिकायना ने पिछले सीज़न में हिस्सा लिया था और वो फ़ाइनल राउंड तक भी पहुंची थीं. इसके लिए सितंबर 2017 से फ़रवरी 2018 तक उसे अपने पुराने स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ी थी.

जब रिएलिटी शो के फ़ाइनल में हिस्सा लेने के बाद शिकायना वापस लौटीं तो स्कूल ने ज्यादा छुट्टियां लेने की वजह से उन्हें अगली क्लास में भेजने से मना कर दिया. इसके बाद शिकायना के पिता के पास बेटी को स्कूल से निकालने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं था. शिकायना के पिता देहरादून के कर्नल ब्राउंन केम्ब्रिज स्कूल में संगीत के टीचर हैं. उन्होंने शिकायना के लिए दो-तीन दूसरे स्कूलों में फ़ॉर्म भरा, पर शिकायना को कहीं दाख़िला नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने अपने ही स्कूल में शिकायना को दाख़िला देने के लिए बात की.

शिकायना के पिता के मुताबिक़, “स्कूल ने शिकायना के बारे में अपना फ़ैसला सुनाने में 15-20 दिन का वक़्त लिया. केवल शिकायना का एडमिशन ही एकमात्र समस्या नहीं थी. स्कूल को इस एडमिशन से उठने वाले कई दूसरे सवालों पर भी विचार करना था.”

शिकायना के पिता विनोद बताते हैं, “आख़िर स्कूल में शिकायना की ड्रेस क्या होगी? टॉयलेट रूम कहां होगा? अगर दूसरे टीचर भी ऐसी ही मांग करना चाहेंगे तो क्या होगा – स्कूल प्रशासन को इन मसलों का हल ढूंढना था.” 20 दिन बाद स्कूल प्रशासन ने अपना फ़ैसला विनोद को सुनाया जो शिकायना के पक्ष में था. शिकायना अपने पुराने स्कूल में ट्यूनिक पहनती थीं. लेकिन नए स्कूल में वो लड़कों जैसा ही यूनिफ़ॉर्म पहन कर जा रही हैं.

शिकायना के क्लास में 17 लड़के हैं और उनके बीच पैंट शर्ट और बेल्ट लगाकर वो भी उनमें से एक ही दिखती हैं. फ़र्क़ बस उनके लंबे बालों का है. शिकायना के एडमिशन के बाद एक दूसरी समस्या गर्ल्स टॉयलेट की भी थी. लेकिन स्कूल प्रशासन ने नया बंदोबस्त करने के बजाए शिकायना को टीचर्स टॉयलेट इस्तेमाल करने की इजाज़त दे दी. नए स्कूल में शिकायना ने लॉन टेनिस खेलना शुरू किया है. लेकिन यहां भी उनकी पहली पसंद गाना ही है. स्कूल के गाने की टीम में भी वो अकेली लड़की हैं और उन्हें इस बात पर गर्व है.

लेकिन क्या इतना आसान है 250 लड़कों के बीच अकेली लड़की का पढ़ना? शायद नहीं ये आसन तो नहीं है क्योंकि इतने लड़कों के बीच कहीं न कहीं लड़की को एक दोस्त की कमी भी खलती है जिससे वो मन की बातें शेयर कर सके, लेकिन पढ़ाई के जूनून के आगे सारी मुश्किलें छोटी नज़र आती हैं.

 

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