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एक बार फिर रूला गई निर्भया की यादें, आखिर कब होगा इंसाफ !

निर्भया की यादें

निर्भया की यादें – रेप… दो शब्द… चंद घंटे और एक लड़की की पूरी जिंदगी तबाह।

आखिर ऐसा क्यों? गुनाह लड़के ने किया, किसी की जिंदगी में जबरदस्ती दखल लड़के ने किया। फिर सजा लड़की को क्यों?… कई ऐसे सवाल आज भारत की हर बेटी के जहन को रौंद रहे है कि जब सब कुछ उस लड़के ने किया, तो सजा हमें क्यों?

भारत में रेप मामलों पर कानून तो बदल रहा है, लेकिन उस कानून का खोफ दरिन्दों और हैवानों के जहन में जरा भी दिखाई नहीं देता। हां ये जरूर होता है कि जब रेप हो जाता है तो लोग कैंडल मार्च निकालते है और वो रेपिस्ट भी 5 रूपये के कैंडल लिए उसमें शामिल हो जाता है। रेप पर कैंडल जलाने से पहले अपने दिमाग की बत्ती जलायों और खुद को समझाओं, खुद को सुधारों… तब दुनिया को सुधारने निकलों।

निर्भया की यादें

कबीदास जी ने कहा है-

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलया कोई

जो मन देखा आपना, मुझसे बुरा ना कोई

निर्भया, दामिनी इन लड़कियों के अपने भी असली नाम थे, जो इन्हें इनके परिवार ने जन्म के समय दिये थे। बच्चपन से पापा की दुलारी, मम्मी के नखराली बिटियां को उसके नाम से बुलाया जाता था। और वो नाम ही उसकी पहचान था। लेकिन इन हैवानों ने पहले इनकी रूह को रौंदा, और फिर हमने अपने कैंडल मार्च में इनके नाम को रौंद दिया। गलती लड़की की नहीं थी ये जग जाहिर था, लेकिन लड़की का नाम बदनाम हो जायेगा इसलिए देश की जागी जनता ने उसे दामिनी, निर्भया जैसे नाम दे दिये।

निर्भया की यादें

आखिर क्यों?

निर्भया की यादें – जब निर्भया के साथ हैवानियत हुई, तब हर बेटी के माता-पिता घबराये और सबसे रेप मामले में कानून सख्त किये जाने की लड़ाई लड़ी, लेकिन आज जो मंदसौर में 7 साल की बच्ची के साथ हुआ। हां वहीं जिसे सुनने के बाद आपकी रूह कांप गई, जिसे देखने के बाद आपको अपने मर्द होने पर शर्म आ गई, जी हां वहीं जिसे देखने के बाद आपका जमीर आपकों आपके इंसान होने पर धिक्कार रहा है।

7 साल की बच्ची जो अपनी जिंदगी के हर पल को खेल समझती थी। जिसे रेत के घर बनना, गुडियां को साड़ी पहनान, अपने छोटे से किचन सेट में मम्मी का बना खाना ला दुबारा पकाना ही जिंदगी की असल खुशी नजर आता था। लेकिन स्कूल के बाद की वो दोपहर वो अब कभी नहीं भूलेगी।

निर्भया की यादें

7 साल की बच्ची के साथ 20 साल के लड़के ने अपनी हैवानियत दिखाई, हालांकि पुलिस ने दरिंदे को गिरफ्त में ले लिया है और उसने पुलिस की कड़ी सख्ताई के बाद अपना गुनाह भी मान लिया है। लेकिन आज इस मामले ने एक ओर मोड़ आ गया। गुनहेगार कि मां… जो शरीर से तो एक महिला है, लेकिन मां की छवि ने उसे उस 7 साल की बच्ची के दर्द का अहसास तक नहीं होने दिया। 7 साल की मासूम का दर्द जानकर भी उससे अंजान बन आरोपी की मां ने अपने बेटे का बचाव कर कहा है “मेरा बेटा बेकसूर है, मुझे इस मामले में सीबीआई जांच चाहिए”

ये है निर्भया की यादें –  इन मामलों में अगर मां-बाप ही अपने गुन्हेगार बेटों का साथ देंगे, तो कैसे किसी दूसरे माता-पिता अपनी बेटी को इन हैवानों से बचायेंगे। देश के इन हालातों ने एक बार फिर लोगों को निर्भया की याद दिला दी।

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