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‘तितली’ के बाद आएगा ‘लुबान’, कौन रखता है तूफानों के नाम?

तूफानों के नाम

तूफानों के नाम – पिछले हफ्ते दक्षिण-पश्चिम राज्यों उड़ीसा, पश्चिम बंगाल व आंध्रप्रदेश में ‘तितली’ चक्रवात ने कहर बरपाया था। इस भयानक चक्रवात के कारण तेज आंधियों व लहरों के चलते दर्जनों नागरिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। उड़ीसा के एक अस्पताल में तो तूफान के दौरान जन्मे कुछ बच्चों का नाम भी ‘तितली’ रखा गया है।

‘तितली’ से पहले भी आपने ‘नीलोफर’ या ‘कटरीना’ तूफान जैसे नाम सुने ही होंगे।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन तूफानों के नाम देने की जरुरत क्यों पड़ती है?  कौन इनका नामकरण करता है?

यदि आपके मन में तूफानों के नाम को लेकर ऐसे ही सवाल है तो चलिए इनके जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं।

क्या होता है चक्रवात?

तूफानों के नाम

जब हवाएं अत्यधिक गति से चक्कर में घूमती है और बड़े स्तर पर तबाही मचाती है तो इसे ‘चक्रवात’ कहां जाता है। चक्रवात के अलावा आपने ‘हरिकेन’ व ‘टायफून’ जैसे नाम भी सुने होंगे। दरअसल ये सभी एक ही है, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में इन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे हिंद महासागर में उठे तूफानों को ‘चक्रवात’, अटलांटिक महासागर में उठे तूफान को ‘हरिकेन’ व प्रशांत महासागर में उठे तूफान को ‘टायफून’ के नाम से जाना जाता है। जब हवा की गति 74 मील/घंटा से अधिक होती है, तभी तूफान इनमें से किसी एक केटेगरी में आता है।

क्यों दिया जाता है नाम?

तूफानों के नाम

एक दौर था, जब तूफानों को साल के हिसाब से ही याद रखा जाता था। लेकिन सालभर में एक से अधिक तूफान आ जाए तो इनके बारे में चर्चा करने में भ्रम की स्थिति बनती थी। इसलिए तूफानों को नाम देने की प्रथा शुरू की गई। इसकी शुरुआत अटलांटिक महासागर में उठे ‘हरिकेन’ से की गई। जिस तूफान में हवा 39 मील/घंटा से अधिक गति पर चलती थी उसे ही नाम दिया जाता था।

महिलाओं के नाम

तूफानों के नाम

1953 के दौरान अमेरिका में मौसम विभाग तूफानों का नामकरण A से W के अल्फाबेट की महिलाओं के नाम रखता था। फिर विरोध के बाद 1978 तक तूफानों को पुरुषों के नाम भी दिए जाने लगे। साल के पहले तूफान को ‘A’ से, दूसरे को ‘B’ इस तरह क्रमानुसार नाम दिया जाता था।

चक्रवातों को अब दिया जाने लगा है नाम

तूफानों के नाम

तटीय चक्रवातों का नामकरण बहुत बाद में शुरू हुआ। इस नामकरण प्रक्रिया में क्षेत्र के कई देश शामिल होते हैं और यह विश्व मौसम विज्ञान संगठन के सानिध्य में होता है। हिंद महासागर के क्षेत्र में 2004 के दौरान चक्रवातों के नाम के लिए सहमति बनी। भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार, ओमान, मालदीव्स और थाईलैंड इन आठ देशों कुछ नामों की लिस्ट बनाई थी और अब आने वाले तूफानों का नामकरण उस लिस्ट के हिसाब से किया जाता है।

‘तितली’ व ‘नीलोफर’ नाम पाकिस्तान द्वारा दिए गए तूफानों के नाम हैं। जबकि भारत ने ‘अग्नि’, ‘आकाश’, ‘जल’ व ‘वायु’ जैसे तूफानों के नाम दिए हैं। अगले तूफान का नाम ‘लुबान’ होगा, जो ओमान ने दिया है।

नाम होते हैं रिटायर

तूफानों के नाम

जिन नामों के तूफान से भारी जान-माल का नुकसान होता है, उनके नाम का कम से कम अगले 10 सालों तक इस्तेमाल नहीं किया जाता है। ऐसा मृत लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए किया जाता है। 1972 से अब तक करीबन 50 नाम रिटायर हो चुके हैं।

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