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इस इस्लामिक देश में कोई भी कर सकता है नाबालिग लड़कियों से निकाह !

नाबालिग लड़कियों से निकाह

नाबालिग लड़कियों से निकाह – खेलने-कूदने की उम्र में लड़कियों की शादी कराना ना सिर्फ गैरकानूनी अपराध है बल्कि ये पाप भी है.

यही वजह है कि हमारे देश में 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी कराना गैरकानूनी समझा जाता है और जो लोग ऐसा करते हैं उन्हें इस अपराध के लिए सज़ा भी दी जाती है.

लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां संसद में नाबालिग लड़कियों से निकाह को खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया गया है.

आखिर कौन सा है वो देश जो कच्ची उम्र में ही लड़कियों की शादी करवाने के पक्ष में है चलिए हम आपको बताते हैं.

नाबालिग लड़कियों से निकाह –

इराक संसद में पेश किया गया प्रस्ताव

लड़कियों की शादी की उम्र 18 से घटाकर और कम कर दिया जाए इसलिए हाल ही में इराक के संसद में एक बिल पेश किया गया है. इस बिल में इराक में रहनेवाली मुस्लिम लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र की सीमा को समाप्त करने की पेशकश की गई है.

हालांकि इराकी संसद में पेश हुए इस प्रस्ताव की काफी आलोचना हो रही है और इसकी आलोचना हो भी क्यों ना, क्योंकि अगर ये प्रस्ताव पास हो जाता है तो फिर इस देश में हर किसी को शादी करके बच्चियों के साथ रेप करने का लाइसेंस मिल जाएगा.

बताया जाता है कि कंजर्वेटिव शित्ते के प्रतिनिधियों ने साल 1959 के कानून में संशोधन के साथ एक बिल पेश किया है. आपको बता दें कि 1959 के कानून में लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल है जिसे खत्म करके 9 साल करने की मांग की जा रही है.

नाबालिग लड़कियों से निकाह का मिल जाएगा लाइसेंस

अब इस नए कानून के तहत शित्ते और सुन्नी समुदाय के धार्मिक नेताओं की सहमति पर किसी भी उम्र में नाबालिग लड़कियों से निकाह कराने पर कोई बंदीश नहीं होगी.

लिबरल इंडिपेंडेंट सांसद फाइक अल शेख ने कहा इस बिल की वजह से जजों को शित्ते और सुन्नी उलेमाओं की बात मानने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. यहां उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम में 9 साल की लड़कियों की शादी की इजाजत है ठीक उसी उम्र में आयशा की पैगम्बर से शादी हुई थी.

सोशल मीडिया पर हो रही है जमकर आलोचना

एक ओर जहां संसद में यह बिल पेश किया गया तो वहीं इस बिल के विरोध में सोशल मीडिया पर आलोचनाओं की बाढ़ सी आ गई है.

पूर्व सैनिक हैदी अब्बास ने कहा है कि ‘यह कानून इस्लामिक स्टेट के लिए सही है जो बच्चों के रेप को कानूनी जामा पहनाता है’. वहीं बसरा शहर के एक टीचर अली लफ्ता ने कहा कि यह निर्दोष बच्चों की हत्या जैसा है.

इसके साथ ही इराक में मौजूद विदेशी मिशन और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस प्रस्ताव की जमकर आलोचना की है. इतना ही नहीं उन्होंने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भेदभाव को संस्थागत बनाने को लेकर चेतावनी भी दी है.

बहरहाल भले ही इस प्रस्ताव की दुनियाभर में आलोचना हो रही है लेकिन अगर इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है तो फिर यहां नाबालिग लड़कियों से निकाह करने वाले लोगों के खिलाफ कानून भी कुछ नहीं कर पाएगा.

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