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जब तक देश में राजनीति ठीक नहीं होगी तब तक कुछ ठीक नहीं होगा !

राजनैतिक असंतुलन

राजनैतिक असंतुलन – हिन्दुस्तान जैसे विशाल और महान देश में, जहाँ की जनसँख्या भी अपने आप में रिकॉर्ड रखती है, उसकी गिनती साधारण से देशों में कर लेना मुमकिन नहीं है।

आज हिन्दुस्तान एक अच्छी बुनियाद बना चूका है लेकिन कुछ बुद्धि जीवियों के नज़रिए से देखें तो आज हिन्दुस्तान और भी ज्यादा प्रगति कर चूका होता या शायद विकसित देशों की लिस्ट में भी आ गया होता अगर देश में राजनैतिक असंतुलन ना होता।

अगर संक्षेप में कहा जाए तो राजनीती आज हर क्षेत्र में अपनी टांग अडाती है तो उसे जिम्मेदारी भी लेनी होगी, और इसलिए यह सत्य है कि भारत आज भी पिछड़ा हुआ है तो इसकी जिम्मेदार भी हमारी शासन प्रणाली है। नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए जो कुछ किया है, उसी का परिणाम है कि ये देश आज भी नक्सल वाद जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, ये नेताओं का ही किया कराया है, जो आज काश्मीर और पूर्व के राज्य अलग देश की मांग कर रहे हैं।

राजनैतिक असंतुलन –  इसलिए अगर गिनने लगे तो सरकार ने ऐसे सैकडो कार्य किये है, जिनमें देश से ज्यादा सरकार को खुद का हित दिखाई देता है।

राजनैतिक असंतुलन –

राजनैतिक असंतुलन

१ – नक्सलवाद:

आज के दौर में नक्सल एक बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है। अगर कहा जाए तो 60 के दशक में दार्जिलिंग जिले से शुरू हुई ये कहानी ने अब उपन्यास का रूप ले लिया है। किसानो के लिए शुरू हुआ ये आन्दोलन अब खुद का स्वार्थ देखने लगा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार नक्सलवाद की उग्रवादी या हथियारबंद गतिविधियों में आज करीब 20 हज़ार से ज्यादा लोग लगे हुए हैं। वही नक्सल वाद की दूसरी धारा राजनीती में अपना बर्चस्व बनाना चाहती है। भारतीय कमुनिस्ट पार्टी इत्यादि इसी विचार धारा की देन है।

२ – जनसँख्या:

पिछले 2 दशक में भारत में जिस तरह जनसँख्या वृधि हुई है, उसका बहुत बुरा परिणाम देखने को मिल रहा है. आज जहाँ लोगों के पास रहने के लिए जमीन नहीं है, उसी तरह प्राकृतिक संसाधनों का दोहन भी खूब हो रहा है। अगर सरकार जनसँख्या नियंत्रण में अब भी कोई कानून ले आती है, तो अब भी इस देश के लिए फायदेमंद ही होगा।

३ – काश्मीर मुद्दा:

भारत में काश्मीर मुद्दा बहुत ही सेसीटिव है, और हो भी क्यों ना प्रणव मुखर्जी जैसे रास्ट्रीय नेता ने अपनी जान गंवाई है। मेरे ख्याल से परिस्थितयां बदल गई है, इसलिए काश्मीर से अब धारा 370 हटाने का समय आ गया है।

४ – चुनाव के दौरान धन का अपव्यय:

उद्योगों से चंदा बसूली और अपना चुनाव प्रचार करना, सरकार के लिए एक नेगेटिव पॉइंट ही है।

५ – सेना में नेताओं का दखल:

आप अक्सर देखते होगे सेना में नेताओं का बे-वजह का दखल रहता है, जिसका नियंत्रण बहुत ही जरूरी है।

६ – अनगिनत दल बनाने की स्वतंत्रता:

इस देश में चाहे कोई भी नेता अपना दल बना सकता है, जो नहीं होना चाहिए। बल्कि एक ही दल को सुचारू रूप से काम करना चाहिए।

७ – लोगों की मूलभूत सेवाओं की कमी:

आज लोगों के लिए रोटी कपडा और मकान ये सबसे जरूरी है, लेकिन फिर आज के समय में करीब एक चौथाई जनसख्या गरीबी रेखा से नीचे है।

राजनैतिक असंतुलन

ये है राजनैतिक असंतुलन – उपरोक्त कथनों से हमें समझ में आता है कि अभी सरकार को किन क्षेत्रों में काम करने की आवश्यकता है, लेकिन इसके अलावा शिक्षा, व्यवसाय इत्यादि की पालिसी में सुधार भी करने की जरूरत भी है।

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