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भारत पाकिस्तान के बीच 71 सालों में हुए ये युद्ध और समझौते

भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध और समझौते

भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध और समझौते – भारत-पाकिस्तान के बीच के रिश्ते हमेशा से बेहद विवादास्पद रहे है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि दोनों देशों ने कभी इन्हें सुधारने या इस विषय पर कभी गहन चर्चा नहीं की।

भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच कई बार शांति बैठक हुई, कई समझौते हुए, लेकिन बीतते वक्त के साथ ये समझौते धरे के धरे रह गए।

दोनों देशों के बीच कई बार सुलह की बैठक हुई, लेकिन हर बार आतंकियों की नापाक नजरों और पाकिस्तान की कश्मीरियत की नगवार मांग ने इन सभी बैठकों को निथार्थ कर दिया। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत किसी भी मायने में पाकिस्तान से कशमीर को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा।

एक ओर ये बात तो समझ में जाती है कि पाकिस्तान, कश्मीर को लेकर भारत पर हमला करता है, लेकिन अन्य देशों से पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्तों की वजह समझ से बेहद परे है, या यूं कहे कि ये वजह ही पाकिस्तान की करतूतों का असल आइना है, जिससे आज हम आपकों रूबरू कराएंगे…

भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध और समझौते

भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध और समझौते

भारत पाक के बीच आखिर कब-कब हुए हमले

पाकिस्तान की कश्मीर पर नापाक नजरों के चलते भारत ने पाकिस्तान को कई बार समझाने और आइना दिखाने की कोशिश की, लेकिन कहते है ना कि ढीठ नजरियां कभी नहीं बदलता। कश्मीर को लेकर दोनों ही देश एक दूसरे के खिलाफ आग उगलते है। एक दूसरे पर राजनैतिक, समाजिक, और सीमा वार भी करते है, लेकिन इस मसले पर भारत का पक्ष समझना जितना आसान लगाता है, पाकिस्तान का पक्ष समझना उतना ही मुश्किल। बतां दे कि अब तक दोनों देशों के बीच इस मसले पर अनगिनत हमले हो चुके है, लेकिन बात अगर बड़े स्तर की करे तो इनकी सूची चार है, जिसमें पहली लड़ाई 1947, दूसरी लड़ाई 1965, तीसरी लड़ाई 1971 और 1999 में चौथी लड़ाई हुई। इन चारों युद्धों में भारत और पाकिस्तान के कई जवान शहीद हो गए, लेकिन इन जवानों की शहादत का किसी भी देश पर कोई असर देखने को नहीं मिला। दोनों देशों के बीच का मनमुटाव हर दिन और बढ़ता जा रहा है।

भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध और समझौते

भारत-पाकिस्तान के बीच आखिर कब-कब बातचीत और समझौते

भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध और समझौते – भारत ने अनगिनत बार पाकिस्तान को समझाने का प्रयास किया, लेकिन पाकिस्तान में मौजूद अराजक तत्वों और वहां कश्मीरियत को हासिल करने के नाम पर वजीरे-आजम का औहदा हासिल करने वाले राजनेताओं ने हमेशा भारत के इस प्रयास को सेंध लगाई है। बता दे कि भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार की सबसे बड़ी और पहली पहल भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वायपयी ने सन् 1999 में की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री पदभार संभाल रहे अटल बिहारी वायपयी ने लाहौर बस यात्रा का शुभारंभ करते हुए दोनों देशों के बीच एक आवागमन सेतु बनाने का प्रयास किया, लेकिन इसी साल पाकिस्तान की ओर से हुए 1999 के आतंकी हमले ने अटल बिहारी वायपयी जी के इस सपने पर सेँध लगा दी।

भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध और समझौते

इसके बाद साल 2001 में पाकिस्तान के वजीरे आजम की कमान संभाल रहे परवेज मुशर्रफ से दोनों देशों के संबधों को लेकर लंबी बातचीत हुई, लेकिन कुछ समय के उपरांत यह भी बेनतीजा हो गई। इसके बाद साल 2004 में भी एक बार फिर दोनों देशों के बीच बातचीत हुई। इसके बाद साल 2005 में भारत प्रशासित कश्मीर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के बीच बस सेवा की शुरूआत हुई, लेकिन यहां भी पाकिस्तान अपनी करनी से बाज नहीं आया और साल 2008 में जुलाई में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के भारतीय दूतावास पर आतंकी हमला हुआ, जिसके बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच संबध फिर बिगड़ गए। इसके बाद 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले ने दोनों देशों के बीच के संबधों को और अधिक बिगाड़ दिया।

भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध और समझौते – 26/11 हमले के दौरान करीब 166 लोगों की मौत हुई, जिसका जिम्मा खुद पाकिस्तान के जमात-उद-दावा के चीफ हाफिज सईद ने लिया। अब यहां ये बात तो लाजमी थी, कि जो देश लगातार आपके देश पर आघात कर रहा हो, आप उसे हर बार माफ तो नहीं कर सकते। पाकिस्तान द्वारा लगातार हो रही इन्ही नापाक हरकतों से तंग आकर आखिरकार भारत ने 26-27 सितंबर की मध्यरात्री सर्जिकल स्ट्राइक कर अपना गुस्सा निकाला। सर्जिकल स्ट्राइक को इस महीनों दो वर्ष हो गए है।

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