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दिल्ली और मुंबई जितनी ही है भारत और इंग्लैंड के बीच दूरी!

द्वीप समूह

द्वीप समूह – अगर कोई आपसे पूछे की भारत से इंग्लैंड की दूरी कितनी है तो आप पहली बार में कहेंगे की इंग्लैंड सात समुंदर पार है और किलोमीटर में शायद आपको इसकी दूरी पता ही नहीं होगी, लेकिन आपको ये भी अंदाज़ा नहीं होगा कि भारत और इंग्लैंड की दूरी देश के दो राज्यों जितनी है.

जी हां, ये बिल्कुल सच है कि भारत और इंग्लैंज की दूरी दिल्ली से मुंबई जितनी ही है.

आपको भले ही ये मज़ाक लग रहा हो, लेकिन ये बात बिल्कुल सच है. दरअसल हिंद महासागर क्षेत्र में एक टापू है, जिस पर इंग्लैंड का कब्जा. यह इंग्लैंड के 14 ऐसे बाहरी कब्जे वाले क्षेत्र में से एक है. इस टापू का अपना संविधान है. हालांकि, ब्रिटिश के प्रभुत्व वाले इस टापू पर उसका सीधे तौर पर शासन नहीं है.

ये टापू भारत से बहुत नज़दीक है, इसलिए ऐसा कहा जा रहा है कि भारत और इंग्लैंड की दूरी दिल्ली से मुंबई जितनी है.

यहां की आबादी 4000 है जिसमें ज़्यादातर अमेरिकी सैन्य अधिकारी हैं और यहां पर कानून भी अमेरिकी संविधान के अनुसार ही चलता है. यहां तक कि टापू पर डॉलर का ही इस्तेमाल होता है. इस टापू का इतिहास बहुत दिलचस्प है.

1965 में इस टापू को लेकर इंग्लैंड और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ. दरअसल कागोस द्वीप समूह के 1500 लोगों को जबरन किसी और जगह पर बसाने को लेकर यह समझौता हुआ. उसी वक्त अमेरिका ने भी यहां मिलिट्री बेस बनाने के लिए सहमति दी और आसपास के दूसरे टापुओं को खाली ही छोड़ दिया गया.

टापुओं का यह समूह उपनिवेशवाद के दौर में फ्रेंच और ब्रिटिश कॉलोनी का हिस्सा थे. अब मॉरिशस इस द्वीप समूह पर अपना दावा यूनाइटेड नेशंस में ठोक रहा है. मॉरिशस ने इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में दावा किया है कि इस द्वीप समूह पर 18वीं शताब्दी से ही मॉरिशस का अधिकार था, लेकिन 1965 में अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन कर इसे ब्रिटेन ने हड़प लिया. अंतरराष्ट्रीय मामलों के कुछ जानकार भी यह मानते हैं कि अमेरिका कागोस द्वीप समूह पर अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है.

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र में मॉरिशस के दावे के समर्थन में भारत भी है. दूसरे 21 और देश भी मॉरिशस के ही समर्थन में हैं, लेकिन ब्रिटेन और अमेरिका को इजरायल और ऑस्ट्रेलिया का समर्थन है. फिलहाल तो इस टापू पर ब्रिटेन और अमेरिका का ही साझा कब्जा है.

ब्रिटेन और अमेरिका का इतिहास शुरू से ही दूसरों पर कब्ज़ा करने वाला रहा है और आज भी दोनों कुछ ऐसा ही कर रहे हैं. अमेरिका तो सभी देशों पर अपना रौब जमाता ही रहता है.

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