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जिस बटालियन में पिता शहीद हुए उसी में अफसर बन बेटे ने पेश की मिसाल

हितेश कुमार

हितेश कुमार – भारत-पाकिस्तान की सीमा पर पिछले कई दशकों से मौजूद तनाव ने न सिर्फ दोनों देशों के रिश्ते खराब किए है, बल्कि न जाने कितने घरों के आंगन सूने कर दिए.

इतने सालों में हज़ारों सैनिक सीम पर शहीद हो चुके हैं. दुश्मन की गोली खाकर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के जज्बे को पूरा देश सलाम करता है, लेकिन हैरानी तो तब होती है जब कोई परिवार अपना एक बेटा खोने के बाद बरसो बाद अपने फिर अपने दूसरे बेटे को सरहद पर भेजने के लिए तैयार हो जाता है. ऐसे परिवार सच्चे देशभक्त हैं जिनके लिए देश से बढ़कर कुछ नहीं है. एक ऐसा ही परिवार है हितेश कुमार का.

हितेश कुमार हाल ही में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं. आपको बता दें कि हितेश उसी बाटलियन में गए हैं जहां कभी उनके पिता थे और वो 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में शहीद हो गए. कारगिल युद्ध के समय कई सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर तिरंगे का मान बढ़ाया था और पाकिस्तानी धोखे का मुंहतोड़ जवाब दिया था. इन्हीं में से एक थे राजपूताना राइफल में सेकंड बटालियन में लांस नायक बच्चन सिंह. वह 12 जून 1999 में कारगिल में तोलोलिंग में शहीद हुए थे. इसे अजब संयोग ही कहेंगे कि आज बेटा हितेश कुमार उसी बटालियन में लेफ्टिनेंट बनकर सेना ज्वाइन कर रहा है.

हितेश कुमार

1999 में जब बच्चन सिंह शहीद हुए उस समय हितेश सिर्फ 6 साल का था. वह आर्मी ज्वाइन करने का सपना लेकर ही बड़ा हुआ. अब 19 साल बाद इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून से पास होकर वह राजपूताना राइफल्स ही ज्वाइन करेगा. इसी बटालियन में उसके पिता शहीद बच्चन सिंह थे.

देहरादून अकादमी से पासआउट होने के बाद हितेश ने अपने भाई और मां के साथ मुजफ्फरनगर सिविल लाइंस एरिया में मौजूद अपने पिता के मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की. एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, इस मौके पर हितेश ने कहा, ‘पिछले 19 सालों से मैं भारतीय सेना ज्वाइन करने का सपना देख रहा था. ये मेरी मां का भी सपना था. अब मैं अपने देश की सेवा करूंगा. ये मेरे लिए बड़े ही गर्व का क्षण है.’

हितेश कुमार

हितेश की मां कामेश बाला ने पति के शहीद होने के बाद बहुत मुश्किल से अपने दोनों बेटों की परवरिश की है और आज जब बड़ा बेटा सेना में अधिकारी बन गया है तो ज़ाहिर है उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया. पति को खोने के बावजूद कामेश बाला ने निडर होकर अपने बेटे को सेना में भेजा. इतना ही नहीं उनका छोटा बेटा भी सेना में जाने की ही तैयारी कर रहा है.

तमाम परेशानियों के बावजूद इस परिवार का देशभक्ति का जज़्बा ज़रा भी कम नहीं हुआ है, ऐसे सच्चे देशभक्तों की बदौलत ही आज हमारे देश की सीमाएं सुरक्षित हैं, मगर एक कड़वा सच यह भी है कि हमारे देश की सरकार शहीदों पर चंद पल आंसू बहाने के अलावा और कुछ नहीं करतीं.

हितेश कुमार

ऐसे बहुत से शहीदों के परिवार हैं जो गरीबी और अभावों में जी रहे हैं, मगर सरकार को इससे कोई मतलब नहीं है. देशभक्त के परिवार की ऐसी उपेक्षा लोकतंत्र में ठीक नहीं है.