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यहां हुई मुस्लिम लड़कियों की हिन्दू रीति रिवाजों से शादी

सामुहिक विवाह

सामुहिक विवाह – आज पूरे देश में हिन्दु-मुस्लिम विवाद आए दिन एक के बाद एक नए विवाद खड़े करता है।

जाति भेद भाव के नाम पर कहीं दंगे फसाद होते है, तो कहीं एक भीड़ इक्कठा हो कर कभी किसी हिन्दु की या फिर मुस्लिम की बिना किसी वजह मात्र शक के बिनाह पर हत्या कर देती है। देश भर में फैले इस जाति विवाद में ये खबर देश के ऐसे तुफानी दंगों में शांति और प्रेम का अनुभव कराती है। जहां सामुहिक विवाह समारोह में चार अनाथ मुस्लिम लड़कियों का विवाह हिंदू लड़कों के साथ पूरे हिन्दु रीति रिवाजों के साथ कराया गया है।

इस सामुहिक विवाह के दौरान कुल 31 अनाथ लड़कियों की शादी हुई, जिनमें 4 मुस्लिम लड़कियां शामिल है।

सामुहिक विवाह

मजहबी सोच से बेहद परे रहा है ये सामुहिक विवाह कार्यक्रम

“मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना” कहावत को सही मायनों में चरितार्थ करता यह सामुहिक विवाह समारोह… जहां चार मुस्लिम लड़कियों की शादी बिना किसी रोक-टोक के पूरे हिन्दु रीति रिवाजों के साथ सम्मपन्न हुई। ये अनौखा विवाह लखनऊ के महानगर स्थित कल्याण भवन में आयोजित सामुहिक विवाह के दौरान हुआ। इस सामुहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन समाज कल्याण विभाग ने किया था, लेकिन इस कार्यक्रम का पूरा आयोजन महिला कल्याण विभाग और समाज कल्याण विभाग ने मिलकर किया।

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शादी समारोह में मौजूद थी रीता बहुगुणा जोशी

शेल्टर होम की लड़कियों के इस सामुहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश की महिला एवं कल्याण विभाग के मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी भी मौजूद रही।

27 हिन्दु और 4 मुस्लिम लड़कियों का हुआ सामुहिक विवाह

इस कार्यक्रम में कुल 31 अनाथ लड़कियों की शादी की गई, जिसमें कि 27 लड़कियां हिन्दु और 4 लड़कियां मुस्लिम थी। इस समारोह में हुई सभी शादियां हिन्दु रीति रिवाज के साथ की गई। शादी में शामिल सभी जोड़ो ने एक साथ हिन्दु रीति रिवाजों के साथ सात फेरे लिए, एक दुसरे को वर माला पहनाई और सात वचनों के साथ पंडितों ने मंत्र पढ़े और विवाह को  सम्मपन्न कराया गया।

सामुहिक विवाह

इस विवाह के दौरान जिन चार मुस्लिम लड़कियों की शादी हुई उनके नाम है रिजवाना, नूरी, सीमा, और सबा… जिनमें रिजवाना की शादी शाहजहांपुर के राजकुमार से, सीमा की शादी उमेश कुमार से, सबा की शादी हरदोई के विजय सिंह से, और नूरी की शादी अलीगढ़ के बबली के साथ पूरे हिन्दु रीति रविाजों के साथ सम्मपन्न हुई।

यह सभी लड़कियां शेल्टर होम मेें रहती थी। इन सभी लड़कियों को 6 से 10 साल की उम्र में शेल्टर होम लाया गया था। तब से इन सभी लड़कियों का पूरा पालन पोषण इसी शेल्टर होम में हुआ था। सभी लड़कियों का पालन पोषण बिल्कुल एक समान तौर पर किया गया। इनमें से किसी भी लड़की के पालन पोषण में कभी भी धर्म या जाति के आधार पर कभी कोई भेदभाव नहीं किया गया।

शोल्टर होम में की जाने वाली शादियों के लिए प्रशासन ने पहले अखबारों में विज्ञापन दिया, जिसके बाद कई लड़कों ने इन लड़कियों से शादी के लिए आवेदन भरे। इन सभी आवेदनों में से कुछ लड़कों को इन 31 लड़कियों के लिए चयनित किया गया, जिसके बाद पूरे रीति रिवाजों के साथ सभी लड़कियों की शादी को सम्मपन्न कराया गया।

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