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यहां रुपयों की जगह चलता है इंसानी मल-मूत्र 

इंसानी मल-मूत्र

इंसानी मल-मूत्र – भारत एक ऐसा देश हैं जिसमें कई धर्मों के लोग अपने रीति-रिवाज़ मनाते हैं इसके अलावा यहां पर कई ऐसी रीतियां भी हैं जो सुनने और देखने में अजीब लगती हैं।

लेकिन आपको बता दें कि सिर्फ भारत ही एकमात्र ऐसा देश नहीं है जहां की परंपराएं हैरान कर देने वाली हैं।

दुनियाभर में ऐसे कई देश हैं जहां की परंपराएं लोगों को अचंभित कर देती हैं। आज भले ही ये देश विकसित हो चुके हों लेकिन फिर भी यहां पर सालों पुरानी परंपराओं का प्रचलन है।

आज हम आपको एक ऐसे ही देश की प्राचीन परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगें।

इंसानी मल-मूत्र

क्‍या है इस देश का नाम

हम जिस देश की बात कर रहे हैं उसका नाम जापान है। ये देश पूरी दुनिया में अपनी टेक्‍नोलॉजी को लेकर मशहूर है। इस जगह पर एक ऐसी प्रथा है जिसके बारे में सुनकर अच्‍छे-अच्‍छे लोगों के चेहरे का रंग उड जाएगा।

क्‍या है अनोखी परंपरा

आपको बता दें कि जापान में पैसों की जंगी इंसानी मल-मूत्र चलता है। ये परंपरा 16वीं शताब्‍दी पुरानी है और तब से लेकर आज तक यहां पर इस परंपरा का पालन किया जा रहा है।

आइए अब जान लेते हैं कि जापान जैसे देश में इस इंसानी मल-मूत्र की अनोखी परंपरा के पीछे क्‍या कारण है।

अशांत देश है जापान

16वीं शताब्‍दी में जापान को अशांत देश कहा जाता था और उस समय यहां पर गृह युद्ध भी चल रहा था। उस समय 1603 में तोकुगावालेयासु ने जापान पर कब्‍जा कर रख था। इसके बाद जापान में थोड़ा विकास हुआ और वहां पर शांति की स्‍थापना हुई। इस दौरान तोकुगावालेयासु ने कई नियम बनाए थे जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगें।

इन नियमों में से एक इंसानी मल-मूत्र का उपयोग भी था।

इंसानी मल-मूत्र

उस दौरान ये भी नियम बनाया गया था कि कोई भी जापान से बाहर ना तो जा सकता था और ना ही आ सकता था। इस समय तलाक प्रथा यहां पर बहुत आम हो गई थी। इस तरह के अजीब नियम उन दिनों जापान में बहुत आम थे। यह प्रथा इस देश में तकरीबन 250 साल तक चली और जब जापान का विकास हुआ तो इन सबको धीरे-धीरे लोग भूलने लगे।

इस तरह की अजीब प्रथाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं लेकिन इनके बारे में जानकर हर किसी को हैरानी जरूर होती है। अगर बात करें इंसानी मल-मूत्र के प्रयोग की प्रथा की तो ये काफी गंदी पंरपरा है। समय चाहे कोई भी, राजा चाहे कोई भी हो, किसी को भी ऐसी किसी प्रथा को चलाना नहीं चाहिए। इससे देश के नागरिकों की सेहत और इच्‍छाओं का हनन होता है। अब की बात करें तो अब लोग इतने पढे-लिखे और सशक्‍त हो चुके हैं कि वो आज ऐसी कोई परंपरा चलने नहीं देंगें और यही हम सबके लिए भी अच्‍छा है। हमें ऐसी किसी भी परंपरा का पालन नहीं करना चाहिए जो हमे और हमारे समाज को नुकसान पहुंचाती हो।

जापान में इंसानी मल-मूत्र की परंपरा को लेकर आपके क्‍या विचार हैं?