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दिल्ली में घरेलू हिंसा का जो कारण सामने आया है जानकर रूह कांप जाएगी

महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा एक ऐसा श्रॉप है जिससे वो चाहकर भी बाहर नहीं निकल पा रहीं.

पूरे देश में, गांव से लेकर शहर तक महिलाएं इसका शिकार होती रहती है. कभी पति तो कभी ससुराल वाले उसे तरह-तरह से प्रताड़ित करते हैं. कहीं देहज कम लाने तो कहीं बेटा न होने पर भी महिलाओं के साथ मारपीट की जाती है. आज के आधुनिक दौर में ये बेहद शर्मनाक बात हैं, लेकिन इन मर्दों को शायद शर्म नहीं आती. हाल ही में दिल्ली में एक सर्वे हुआ और इस सर्वे में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की जो वजह सामने आई है, उसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे.

दिल्ली की 500 महिलाओं पर किए एक सर्वे में ये बात सामने आई है कि ज्यादातर मर्द सेफ सेक्स नहीं करना चाहते.

बहुत सारे आदमी संबंध बनाने के दौरान कॉन्डम का इस्तेमाल नहीं करना चाहते इतना ही नहीं वो अपनी पत्नी को भी गर्भ रोकने की दवाइयां इस्तेमाल नहीं करने देते. ऐसे में यदि पत्नी विरोध करती है तो पति महाशय उन्हें मारते-पीटते हैं हैं. शारीरिक और मानसिक रूप से टॉर्चर करते हैं. इंडियन जर्नल ऑफ़ कम्युनिटी मेडिसिन के नए अंक की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है. नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे के हिसाब से भारत में 37 परसेंट औरतें अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में सेक्शुअल, मानसिक और शारीरिक हिंसा सहती हैं.

सर्वे में ये भी सामने आया कि ऐसा करने वाले ज़्यादातर आदमियों की महीने की सैलरी 25,000 रुपए से ज्यादा है यानी वो बिल्कुल गरीब वाली कैटेगरी के नहीं है.

आमतौर पर लोगों को लगता है कि घरेलू हिंसा अक्सर कम पढ़ी-लिखी औरतों के खिलाफ होती है.

लेकिन इस स्टडी में एक ज़रूरी बात सामने आई. कुछ ऐसी औरतें थीं, जो पढ़ी-लिखी नहीं थीं. कुछ ग्रेजुएट थीं. और कुछ डॉक्टरेट भी. इस स्टडी में 46 परसेंट औरतों ने बताया कि उनके पति कॉन्डम यूज़ नहीं करना चाहते. इस वजह से कई औरतें अपनी मर्ज़ी के बिना प्रेग्नेंट हो चुकी है. 39 परसेंट औरतों के पति उनका रेप करते हैं. गर्भ रोकने वाली दवाइयां इस्तेमाल करने पर वो उनके शरीर में रॉड, सेफ्टी पिन या दूसरी नुकीली चीज़ें चुभो देते हैं. 23 परसेंट औरतें हर रोज घरेलू हिंसा सहती है. 33 परसेंट को आए दिन सिर्फ कॉन्डम के इस्तेमाल की वजह से गालियां सुननी पड़ती हैं.

दरअसल, हमारे समाज में औरतों को बच्चे पैदा करने का फैसला लेने का हक नहीं है. ज़्यादातर जगहों पर अभी भी औरतों को फैमिली प्लानिंग का हक नहीं है. बच्चे पैदा करने का हक या तो पति का होता है या सास का. कब बच्चा पैदा करना है. कितने बच्चे. और बच्चों के पैदा होने पर रोक लगाने जैसी बातें आज भी कई जगहों पर बिलकुल नई हैं.

जो औरतें आदमियों पर डिपेंडेंट हैं. आदमी उनको कांट्रसेप्टिव के लिए पैसे ही नहीं देते. मानसिक रूप से टॉर्चर कर देते हैं. गालियां देते हैं. हर रोज़ सुबह-शाम मारपीट करते हैं. सिगरेट और प्रेस से जला देते हैं. फिर बिना कॉन्डम के ही सेक्स भी करते हैं. इस तरह से औरतें बार-बार प्रेगनेंट होती हैं. बार-बार एबॉर्शन करवाए जाते हैं. औरत का शरीर बिलकुल खोखला हो जाता है. कई औरतों के शरीर पर कभी ना ठीक हो पाने वाले घाव दिखते है. कई डिप्रेशन में चली जाती हैं. खुदकुशी कर लेती हैं. या बार-बार खुदकुशी की कोशिशें करती हैं.

स्टडी में पता चला कि ये सब घरेलू हिंसा झेलने वाली सिर्फ 29 परसेंट औरतें ही अनपढ है जबिक 71 प्रतिशत औरतें ग्रेजुएट थीं.

या उससे भी बहुत ज्यादा पढ़ी-लिखी थीं. तो साफ है कि पढ़ी-लिखी औरतों को ज्यादा झेलना पड़ता है. बार-बार टॉर्चर से महिलाओ का शरीर और दिमाग काफी खराब हो जाता है. उनके शरीर में खून की बहुत कमी हो जाती है. कम उम्र में ही वो बहुत कमजोर हो जाती हैं. बच्चे पैदा करने में कई बार उनकी मौत भी हो जाती है.

आज के दौर में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा वाकई झकझोर देता है, लेकिन ये हमारे समाज की सच्चाई है और इसे झूठलाया नहीं जा सकता. एक ओर फाइटर प्लेन उड़ाने वाली महिलाएं भी हैं तो दूसरी ओर डिग्रीधारी और नौकरी करने वाली महिलाएं भी पति के हाथों पिटने को मजबूर है.

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