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तेल की खपत और आयात कम करके बचाया जा सकता है अर्थव्यवस्था को

अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था – इन दिनों भारत की ग्रोथ पर ब्रेक लग गया है और वजह है रुपए का लगातार गिरता मूल्य और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में हर दिन कच्चे तेल की कीमतों में हो रहा इज़ाफा, इसकी वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं.

जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी कुछ राहत की उम्मीद नहीं है, ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था को बचाने का बस एक ही विकल्प है कि कच्चे तेल का आयात कम कर दिया जाए और खपल पर लगाम लगाया जाए.

कच्चे तेल लगातर बढ़ती कीमतों और रुपए के गिरते मूल्य ने भारत की परेशानी बढ़ा दी है. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से जहां लोग परेशान हैं, वहीं अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर दिख रहा है. ऐसे में सरकार तेल का आयात घटाने पर विचार कर रही है, क्योंकि मौजूदा हालात में इस संकट से निपटने का कोई और विकल्प नहीं है. भारत अपनी ज़रूरत का 81 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. वो ईरान से सबसे ज़्यादा तेल का आयात करता है, लेकिन अब अमेरिका के ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत के लिए ईरान से आयात मुश्किल हो गया है और इस प्रतिबंध का असर तेल की कीमतों पर भी पड़ा है. आने वाले कुछ दिनों में तो इससे राहत की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही, बस एक ही तरीका है कि हम अपने तेल का खर्च कम करके आयात घटा दें.

इस मामले में इंडियन आयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के चेयरमैन संजीव सिंह का कहना है कि, “पब्लिक सेक्टर की रिफाइनरी कंपनियां अपने कच्चे तेल के स्टॉक को देखते हुए आयात कम करने की सोच रही है. रिफाइनरी कंपनियां आमतौर पर टैंकों में सात आठ दिन का स्टॉक रखती हैं. इसके अलावा वे पाइपलाइन और मार्ग में जहाजों में भी स्टॉक रखा जाता है. अब रिफाइनरी कंपनियां इस स्टॉक को कम करने पर विचार कर रही हैं ताकि कच्चे तेल का आयात घटाया जा सके. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से ही देश में पेट्रोल 90 रुपए लीटर तक पहुंच गया है. यदि ऐसे ही चलता रहा तो इसके 100 रुपए प्रति लीटर तक पहुंचने का भी अंदेशा है.

बहरहाल, आयात कम करना को स्थाई समाधान नहीं है, क्योंकि ज्यादा दिनों तक ऐसा करने पर बाज़ार में तेल की कमी हो सकती है, लेकिन थोड़े समय तक स्टॉक से काम चलाकर आयात को थोड़ा तो घटाया ही जा सकता है और अर्थव्यवस्था को बचाया जा सकता है.

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