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अपनी आलोचनाओं का ऐसे करें सामना

क्रिटिसिज्म मैनेजमेंट स्किल्स

क्रिटिसिज्म मैनेजमेंट स्किल्स – ऑफिस में बॉस ने आपके प्रोजेक्ट को रिजेक्ट कर दिया हो या किसी कलीग ने आपके क्रिएटिव आईडिया को बकवास ठहरा दिया हो, इनमें रिएक्शन्स दो ही तरह के हो सकते हैं.

पहला आप उनको काउंटर अटैक करें पर इससे आपकी बतौर एम्प्लोई या फिर कलीग इमेज पर असर पड़ सकता है.

दूसरा, आप चुपचाप इसे सुन लें जिसका रिजल्ट आपके कार्य पर पड़ सकता है. आपके लिए बेहतर यही होगा कि ये एक्सेप्ट कर लें कि क्रिटिसिज्म लाइफ का पार्ट है और इसे काउंटर करने के लिए क्रिटिसिज्म मैनेजमेंट स्किल्स सीखना ज़रूरी है.

क्रिटिसिज्म मैनेजमेंट स्किल्स –

क्रिटिसिज्म मैनेजमेंट स्किल्स

ध्यान रहे कि अगर आपके ऊपर की गई आलोचना सकारात्मक है और आपको लगता है कि ये आपके इम्प्रूवमेंट में मदद कर सकता है तो इस पर गौर करना चाहिए. वहीं, अगर आपको लगे कि ये आलोचना सिर्फ आपके पॉवर या जेलसी की वजह से है तो इस पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए. आलोचना चाहे आपके प्रोफेशनल लेवल पर हो या पर्सनल लेवल पर आपको इसमें प्रॉपर डीलिंग की ज़रूरत पड़ती है. गौर करने वाली बात ये भी है कि हर बॉस इतना अंडरस्टैंडिंग नहीं हो सकता इसलिए करियर ग्रोथ के लिए आलोचना को मैनेज करना आना चाहिए.

कई बार जब किसी व्यक्ति की आलोचना होती है तो अक्सर देखने में आता है कि वो अपना पक्ष ठीक से नहीं रख पाते. जिसके पीछे की एक वजह उनमें कॉन्फिडेंस की कमी या घबराहट हो सकती है.

क्रिटिसिज्म मैनेजमेंट स्किल्स

अगर हम अपनी बात को समय रहते साफ़ कर देंगे तो आपके दिमाग की उलझन काफी हद तक कम हो जाएगी. ये बिल्कुल भी ज़रूरी नहीं कि आप सामने वाले पर अटैक कर दें. आप स्माइल के साथ कुछ सकारात्मक वाक्य बोलकर या अपना पॉइंट रखकर बात को हल्का कर सकते हैं.

आप तुरंत रिस्पांस देने के लिए ब्रेन को ट्रेनिंग दे सकते हैं कि जैसे अगर आपको मालूम हो कि यहां आपकी आलोचना होगी ही तो पहले दिमाग को शांत करके जाएं. वहीं, अपने कॉन्फिडेंस को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है शीशे के सामने खड़े होकर बोलने की प्रैक्टिस करना क्योंकि वर्बलाइज करने से ब्रेन एक्टिव रहता है. इसके साथ ही अपनी आलोचना के वक़्त अपने बचाव में हमेशा सही लॉजिक दें.

अगर आपको यकीन है कि आप सही बोल रहे हैं तो आप अपनी बात कॉंफिडेंट होकर रख सकेंगे.

क्रिटिसिज्म मैनेजमेंट स्किल्स

हमें सबसे पहले एनालाइज करना चाहिए कि सामने वाले की आलोचना का मकसद क्या है. उसकी की गई आलोचना कंस्ट्रकटिव या डिसट्रकटिव. आपकी आलोचना होते वक़्त आपको उसके सजेशंस गौर करने चाहिए न कि बोलने वाले की टोन पर. अगर आलोचना कंस्ट्रकटिव और वाजिब है तो इसका मतलब कि सामने वाला आपको एक अच्छी सलाह दे रहा है जिसे दिल पर न लेकर इसे पॉजिटिव इनपुट के तौर पर लें. वहीं, अगर आपको लगे कि आपकी आलोचना किसी पर्सनल वजह से या आपको नीचा दिखाने के लिए हो रही है तो उस पर भड़कने की बजाए खुदको इसे टैकल करना सिखाएं.

अगर कोई ऐसी पोजीशन पर है जिसकी कही बातों का आप जवाब नहीं दे सकते या किसी ने आपकी आलोचना की और ये विचार आपके दिमाग से नहीं जा रहे तो ऑटो-ट्रेनिंग की मदद से आप खुदको रिलैक्स कर सकते हैं. जैसे कि जब ऐसा हो तो वर्तमान परिस्थिति से खुद को अलग कर लें और अच्छे विचारों के बारे में सोचें. या फिर आप अपना ध्यान अपने इंटरेस्ट की चीज़ों में लगाएं. अगर आपको ऐसा लगता है कि कोई बेवजह हर बात पर आपकी आलोचना कर रहा है और ये आपसे टॉलरेट नहीं हो रहा तो आप उस व्यक्ति से शांत मूड में बात करें. बताएं कि आपको उनका कहने का तरीका थोड़ा बुरा लगा और अगर वे इसे बेहतर तरीके से समझाते तो ज़्यादा बेहतर होता.

इन कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप आसानी से अपनी क्रिटिसिज्म मैनेजमेंट स्किल्स सीख सकते है और आलोचनाओं का सामना कर पाएंगे.

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