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जिसने कभी कम्प्यूटर देखा तक नहीं, कैसे बना जोमेटो का सीटीओ

हिम्मत और जूनून

इंसान की हिम्मत और जूनून ही सबसे बड़ी ताकत होती है और इसी बात का सबसे अच्छा उदाहरण है उत्तर प्रदेश में उरुई के रहने वाले प्रशांत, जिन्होनें गाव में पढाई के दौरान कभी कंम्प्यूटर तक नहीं देखा । उन्हें उनके हुनर की बदौलत पहले स्नैपडील जैसी कंपनी में काम करने का मौका मिला और उसके बाद इंटरनेशनल कंपनी जीमेटो मे सीटीओ की पोस्ट ।

प्रशांत उरुई जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं । जहां बच्चों के पढने के लिए प्राइमेरी से आगे स्कूल भी नहीं है। प्रशांत ने प्राइमेरी से आगे की पढाई उरुई से की । जहां उस दौर में शहरों में कम्प्यूटर आधुनिक जीवन का हिस्सा बनता जा रहा था वहीं प्रशांत ने 12वीं पास करने तक  कम्प्यूटर को देखा तक नहीं था। प्रशांत के पिता आयुर्वैदिक डॉक्टर थे। कम आय होने बावजूद भी प्रशांत के पिता अपने बेटे को एक अच्छी शिक्षा देना चाहते थे।12 वीं पास करने के बाद प्रशांत ने लोगों से आईआईटी के बारे में सुना और उसमें एडमिशन लेने के लिए तैयारी करने लगे ।

हिम्मत और जूनून

प्रशांत का एडमिशन आईआईटी में तो नहीं हो पाया।

लेकिन उन्होंने झांसी के एक इंजीनियरिंग कॉलेज मे दाखिल ले लिया। प्रशांत पराशर ने नए – नए चले कम्प्यूटर सांइस कोर्स में एडमिशन लिया ।और पहली बार कम्प्यूटर पर बैठे और उसे चलाना सीखा। लेकिन एक हिंदी मिडियम से पढें लड़के लिए यहां के फराटेदार इंग्लिश बोलने वाले स्टूडेंस के साथ एडजेस्ट कर पाना काफी मु्श्किल था । कई बार मजाक का विषय भी बना पड़़ता था। लेकिन प्रशांत के तेज दिमाग, हिम्मत और जूनून ने उन्हें कम्प्यूटर का मास्टर बना दिया । कोर्स के आखिर साल में प्रशांत ने कॉलेज में आयोजित कम्प्यूटर लैगंवेज कंपीटिशन को भी जीता था । लेकिन कॉलेज खत्म होने के बाद उन्हे कॉलेज से कोई प्लेसमेंट नहीं मिली । और उनका नाम भी कुछ वक्त के लिए बेरोजगार इंजीनियरो की लिस्ट में शामिल हो गया था । लेकिन वो बिना नौकरी के घर नहीं लौटना चाहते थे । इसलिए प्रशांत दिल्ली आ गए और अपने सीनियर्स के स्टार्टअप में मदद करने लगे । कुछ वक्त अपने सीनियर्स के साथ काम करने के बाद प्रशांत न्यूजेन में अपनी पहली नौकरी मिली ।

इसके बाद प्रशांत ने कभी मुड़कर नहीं देखा ।

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2011 में स्नैपडील ज्वाइन किया इस वक्त स्नैपडील बहुत तेजी से आगे बढ़ रही थी । स्नैपडील में प्रशांत तकनीकी विशेषज्ञ थे। प्रशांत के अनुसार इंटरनेट की असली ताकत को उन्होंने यहां आकर जाना । इसके एक साल बाद 2012 में प्रशांत ने अपना कार्टमैजिक नाम से स्टार्टअप खोला ।

लेकिन ये स्टार्टअप पूरी तरह फेल हो गया ।

जिसके बाद स्नैपडील ने प्रशांत की काबलियत देखते हुए उन्हें दोबारा कंपना ज्वाइन करने का ऑफर दिया । और प्रशांत ने ऑफर स्वीकार किया और दोबारा स्नैपडील में काम करने लगे ।

हिम्मत और जूनून

इसके बाद प्रशांत की मुलाकात जोमेटो के फाउंडर दीपेंद्र मिश्रा से हुई । जिन्होनें प्रशांत को अपनी कंपनी में सीटीओ की पोस्ट ऑफर की । और आप सभी जानते हैं कि जोमेटो आज मार्केट की सबसे बेहतरीन और तेजी से आगे ग्रो कर रही कंपनियों में से एक हैं । जिसका श्रेय प्रशांत को भी जाता हैं । ये थी प्रशांत के हिम्मत और जूनून की कहानी !

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