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क्या है संचार उपग्रह GSAT-29 को लॉन्च करने वाला रॉकेट बाहुबली

संचार उपग्रह GSAT-29

संचार उपग्रह GSAT-29 – देश प्रगति कर रहा है और रोज नई इबारतें लिख रहा है।

रोज नहीं तो कम से कम हर महीने तो वह अपने इतिहास में जोड़ने वाले ऐसे कारनामे कर रहा है जो इससे पहले दुनिया ने कभी सोचा ही नहीं होगा। अब जैसे कि इसी महीने दिवाली में पूरे देश को गिफ्ट देते हुए वैज्ञानिकों ने संचार उपग्रह GSAT-29 लॉन्च किया। वह भी बाहुबलि के जरिए…

दरअसल संचार उपग्रह GSAT-29 को जिस रॉकेट से लॉन्च किया गया है वह काफी शक्तिशाली है जिसके कारण इसे बाहुबलि कहा जा रहा है।

संचार उपग्रह GSAT-29

दिवाली का था तोहफा

दिवाली में जब देशवासी पटाखे फोड़ने में लगे थे और सुप्रीम कोर्ट पटाखों को बेचने पर बैन लगा रही थी तब वैज्ञानिक कड़ी मेहनत कर के आपके कम्युनिकेशन की समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे। दिवाली के मौके पर ISRO ने देशवासियों को खुश होने का एक मौका दे दिया है। दरअसल, दिवाली की सुबह को एक कम्युनिकेशन सैटेलाइट लॉन्च कर दिया गया। इससे फोन या संचार तंत्र का इस्तेमाल कर बात करने में आने वाली समस्या में आने वाली दिक्कतें कम हो जाएंगी।

संचार उपग्रह GSAT-29

रॉकेट बाहुबलि से किया गया लॉन्च

संचार उपग्रह GSAT -29 को जिस रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया है जो काफी शक्तिशाली है जिसके कारण इसे बाहुबलि भी लोग कह रहे हैं। इस रॉकेट को बाहुबलि क्यों कहा जा रहा है ये जानने के लिए तो पूरी खबर पढ़नी पढ़ेगी।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (इसरो) ने संचार उपग्रह GSAT-29 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।

बाहुबलि रॉकेट 13 मंजिला इमारत से भी ऊंचा

इस रॉकेट की ताकत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि बाहुबलि रॉकेट की ऊंचाई 43 मीटर है यानी की किसी 13 मंजिला इमारत से भी ज्यादा ऊंचा है ये रॉकेट। 13 मंजिला इमारत से भी ज्यादा ऊंचे रॉकेट से उपग्रह संचार उपग्रह GSAT-29 को लॉन्च किया गया है।यह अब तक के सभी ऑपरेशनल लॉन्च व्हीकल्स (रॉकेट) में सबसे भारी (641 टन) है, लेकिन यह आकार में अपने उन सभी पूर्ववर्तियों से छोटा है। इसलिए इसे बाहुबली भी कहा जा रहा है।

संचार उपग्रह GSAT-29

15 साल में तैयार हुआ रॉकेट बाहुबलि

इस शक्तिशाली रॉकेट को तैयार करने में 15 साल का वक्त लगा। इस रॉकेट को लॉन्च करने का अनुमानित खर्च करीब 300 करोड़ रुपये है। कई वैज्ञानिकों ने इस रॉकेट को बनाने में दिन रात मेहनत की है और उपग्रह से इसका तालमेल बैठाने के लिए एक सटीक गणना को पूरा किया है।

संचार उपग्रह GSAT-29

गगनयान मिशन भी होगा इससे पूरा

इसरो अगले साल चंद्रयान-2 और 2022 में गगनयान के प्रक्षेपण के लिए भी इसी रॉकेट का इस्तेमाल करेगा। गगनयान (Gaganyaan) भारतीय मानवयुक्त अंतरिक्ष यान है। अंतरिक्ष कैप्सूल तीन लोगों को ले जाने के लिए तैयार किया गया है और उन्नत संस्करण डॉकिंग क्षमता से लैस किया जाएगा। इस योजना का अनावरण 28 अगस्त को किया गया था और इसे 2022 तक पूरा करने का संकल्प। इसके प्रक्षेपित होते ही 2022 में भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो अंतरिक्ष में इंसान को भेजने में सक्षम हैं।

GSAT -29 देश का 33वां संचार उपग्रह

आपको जानकारी होगी की अन्य देशों में 5जी की चर्चा होने लगी है। इसी तरफ एक कदम आगे बढ़ाते हुए और संचार को बेहतर करने के लिए इसरो ने संचार उपग्रह GSAT-29 लॉन्च किया है। इसे आंध्र प्रदेश के श्री हरिकोटा से बीते बुधवार शाम 5.08 बजे लॉन्च किया गया। श्री हरिकोटा से लॉन्च किया जाने वाला यह 67वां और भारत द्वारा बनाया 33वां संचार उपग्रह है। इसरो के चेयरमैन के सिवन ने बताया कि 3423 किलो वजनी जीसैट-29 से जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी भारत के दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट सेवा पहुंचाने में मदद मिलेगी। इस सेटेलाइट पर एक खास ‘हाई रेजोल्यूशन’ कैमरा लगा है, जिसे ‘जियो आई’ नाम दिया गया है। इससे हिंद महासागर में दुश्मनों के जहाजों पर नजर रखी जा सकेगी।

इससे पहले इसरो दिवाली पर संचार उपग्रह जीसैट-15 लॉन्च कर चुका है। जितनी तेजी से इसरो नए-नए उपग्रह लॉन्च कर रहा है उसे देखकर लगता है कि जल्द ही देश में भी विकसित देशों की तरह अबाधित संचार प्रणाली होगी।

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