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बुलेट चलाकर लड़कियों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह देने वाली लड़की हर तरफ छायी हुई है

बुलेटवाली लड़की – बात अगर उत्तर प्रदेश की हो, तो ज़्यादातर लड़कियों को परदे में ही देखा जाता है.

इन लड़कियों को पढने की आज़ादी तो मिल जाती है, लेकिन वो भी बहुत कम घरों में. आज भी इस प्रदेश की हालत लड़कियों के मामले में बहुत पीछे है.

लड़कियों की जल्दी शादी से लेकर इन्हें जल्दी बच्चा पैदा करने और किसी और के घर की ज़िम्मेदारी सौंप दी जाती है.

ऐसे में अगर इसी प्रदेश की कोई बुलेटवाली लड़की बुलेट चलाती हुई दिख जाए, तो आपको उसे देखकर या उसके बारे में सुनकर हैरानी तो ज़रूर होगी.

एक ऐसी ही बुलेटवाली लड़की की कहानी आज हम आपको बतानी जा रहे हैं, जो सच में बीड़ा उठा चुकी है लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने की.

ये कहानी है मथुरा की पावनी की. नाम ही इतना सुंदर है कि जीवन का मकसद नज़र आ जाता है.

पावनी बुलेट चलाती हैं और बाकी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की सलाह देती हैं. आत्मनिर्भर स्कूटर ड्राइविंग स्कूल फॉर वूमेन, मथुरा की रहने वाली पावनी खंडेलवाल की एक पहल है. जिसका मकसद छोटे शहरों-नगरों और कस्बों की महिलाओं को सशक्त और सक्षम बनाना है ताकि अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए उन्हें किसी और का मुंह ना देखना पड़े.

पावनी नहीं चाहतीं की अज की लड़कियों को किसी लड़के का मुंह देखना पड़े किसी काम को करने में.

पावनी आज से नहीं बल्कि बचपन से ही ये सपना मन में पाले बैठी थीं कि उन्हें ऐसा कुछ करना है, जिससे उनके घर का ही नहीं बल्कि आसपास के लोगों का भी भला हो.

उन्हें बचपन से ही बाइक और कार चलाने का शौक रहा है.बचपन में ही पिता ने हाथों में स्कूटी थमा दी जिसके बाद उनका ये शौक, जुनून में बदल गया.

पुणे में पढ़ाई के दौरान भी पावनी अपने पिता द्वारा गिफ्ट में दी गई बुलेट लेकर कॉलेज जाती थीं और लोग उन्हें हैरान होकर देखते थे. पावनी जैसा पिता हर बेटी को नसीब नहीं होता, इसलिए पावनी पुणे से आकर मथुरा में ये काम कर रही हैं.

पावनी ने पुणे मैनेजमेंट की पढ़ाई की है, लेकिन उन्हें मथुरा में लोगों को गाड़ी सिखाते देख आप भी ये सोच सकते हैं कि क्या अजीब लड़की है.

मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद ये काम कर रही है, लेकिन जब आप तह तक जाएंगे तब आपको पता लगेगा की पावनी कितना बाद काम कर रही हैं. पावनी गाड़ी सिखाने की शुरुआत अपने घर से कीं.

मां को हो रही परेशानियों को देखते हुए पावनी ने खुद उन्हें ड्राइविंग सिखाने का फैसला लिया.

इस दौरान पावनी को महसूस हुआ कि देश में ना जाने ऐसी कितनी महिलाएं होंगी जो ड्राइविंग सीखना चाहती हैं लेकिन बिना महिला प्रशिक्षक के उनका सपना पूरा नहीं हो पा रहा.बस यहीं से शुरू होता है आत्मनिर्भर का सफर. बस वही एक पल था कि पावनी के सपना बदल गया.

पावनी जैसी दूसरी लड़कियां खुद तो आत्मनिर्भर बन जाती हैं, लेकिन उन्हें अपने जैसी दूसरी लड़कियों का सरोकार करना नहीं आता. वो अपने लिए सबकुछ अर्जित कर लेती हैं, लेकिन एक भी दूसरी लड़की का सपना पूरा नहीं कर पातीं. पावनी जैसी अगर हर लड़की हो जाए तो लड़कियों की परेशानी ही ख़त्म हो जाए.

Shweta Singh

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