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४ महीने के बच्चे के शरीर पर बांधा बम !

बच्चे के शरीर पर बांधा बम

बच्चे के शरीर पर बांधा बम – कुछ लोगों के लिए जीवन और मृत्यु एक खेल बन चुका है.

वो इस खेल में किसी को भी नहीं छोड़ते. जब लोग दर्दनाक मौत से दम तोड़ते हैं तो इनके चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ती है.

ऐसे जल्लाद हैं ये कि स्वयं यमराज भी इनसे खौफ खा जाएं. आजकल इस पूरी दुनिया में दो गुट हो चुके हैं. एक है मानवता का और दूसरा है शैतानों का. यही शैतान दुनियाभर में आतंकवाद फैलाते हैं.

कुछ देश तो ऐसे हैं जहाँ पर ये सुबह शाम बम बरसाते हैं. लोगों के उजड़ते घर इन्हें सुकून पहुंचाते हैं.

कभी ज़िन्दा लोगों की गर्दन काटते हुए विडियो बनाकर उसे दुनियाभर में दिखाना तो कभी कुछ और.

इनका निर्मम व्यवहार इन्हें दुनियाभर में आतंक फैलाने के लिए प्रेरित कर रहा है. एक ऐसा ही वाकया दुनिया को देखने को मिला, जिसे देखकर सबकी आँखें भर आयीं. तालिबान में आतंकी संगठनों ने दहशत फैलाने के लिए अब मासूम बच्चों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. हाल में अफगानिस्तान के कुंडूज प्रांत में तैनात सुरक्षाबलों को एक 4 माह का नवजात मिला. नवजात के शरीर पर लिपटे कपड़ों को खोलने पर सुरक्षाकर्मी दंग रह गए. दरअसल बच्चे के शरीर पर बांधा बम. ४ महीने के बच्चे को इन शैतानों ने अपने हथियार के तौर पर उपयोग किया. इंसानी जीवन से इन्हें कुछ लेना देना नहीं. इनका मकसद सिर्फ डर और दहशत फैलाना है.

एक खबर के मुताबिक़ ये आतंकवादी इस बच्चे के द्वारा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में दहशत फैलाने की फिराक में थे. क्योंकि इतने छोटे बच्चे पर कोई शक नहीं करेगा, इसलिए इन दहशत गर्दों नें इसे अपना हथियार बनाया. समय रहते सुरक्षाबलों ने 5 आतंकियों को गिरफ्तार किया और इन नन्हें से बच्चे को मौत के मुंह से निकाला. एक बात तो तय है कि आतंकवादियों का कोई मजहब और किसी से प्यार नहीं होता. इन्हें सिर्फ और सिर्फ मौत फैलाना होता है.

ऐसा पहली बार हुआ है. मानव बम की बात हम सभी जानते हैं, लेकिन आतंकवादी भी बच्चों को इसमें अपना शिकार नहीं बनाते थे, लेकिन अब ये लोग ऐसा करना शुरू कर दिए हैं. इससे पहले आतंकी 10 साल तक के मासूम बच्चों पर विस्फोटक बांधकर उनके जरिए फिदायीन हमले कर चुके हैं. हाल में आतंकी संगठन से जुड़े एक आतंकी ने अपनी 8 साल की बहन को फिदायीन हमले के लिए इस्तेमाल किया था लेकिन सुरक्षाबलों ने मासूम बच्ची को समय रहते बचा लिया. इन्हें खून से मतलब होता है, खून चाहे बच्चों का हो इन्हें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

अफगानिस्तान में ये बहुत हो रहा है. यहाँ पर धड़ल्ले से बच्चों का इस्तेमाल हमले के लिए किया जाता है. यहाँ पर आतंकी संगठन मासूमों का इस्तेमाल केवल फिदायीन हमले के लिए ही नहीं बल्कि हथियारों की तस्करी के लिए भी करते हैं. अंतरराष्ट्रीय और अफगानिस्तान के मानवाधिकार संगठन कई बच्चों को तालिबानी लड़ाकों के चंगुल से छुड़ा चुके हैं.

अपने मंसूबे को पूरा करने के लिए ये जानवरों की तरह बच्चों का इस्तेमाल करते हैं. उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता कि इन बच्चों का इस्तेमाल करके ये उनका भविष्य बिगाड़ रहे हैं.

बच्चे के शरीर पर बांधा बम – दुनिया में आतंकी हमला बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में अब मासूम जिन्दगियां भी इससे बची नहीं रहीं. उन्हें भी शिकार बनाया जा रहा है.

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