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क्या है आसिफा रेप केस और क्यों इसको हिंदु राजनीति का रंग देना है गलत?

आसिफा रेप केस

आसिफा रेप केस – “मेरी बच्ची को दाएं-बाएं तो पता नहीं, उसे हिंदु-मुस्लिम क्या पता होगा?”

यह आसिफा के पिता ने अपनी बेटी के लिए न्याय मांगने के दौरान कहा जब कुछ लोग इसे हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश बता रहे थे।

ऐसा केवल अपने देश में ही हो सकता है कि बच्ची का रेप होता है और लोग राजनीति करने में लग जाते हैं। चाहे फिर हरियाणा की बात हो या फिर बिहार की… लेकिन बात जब जम्मु-कश्मीर की हो तो फिर बिना राजनीति के तो बात पूरी हो ही नहीं सकती जिसका उदाहरण आसिफा के केस में देखने को मिल रहा है।

आसिफा रेप केस –

आसिफा रेप केस

कौन है आसिफा?

आसिफा 8 साल की बच्ची है जो जम्मु के रसाना के जंगलों में जानवर चराने वाले बकरवाल समूह से संबंध रखती है। इस बच्ची का अपहरण 10 जनवरी 2018 को हुआ जब वह कुठआ ज़िले के रसाना गांव में अपने घोड़ों को चराने गई थी और वापस नहीं लौटी। इसको लेकर एक मामला दर्ज किया गया था जिसके बाद पुलिस और स्थानीय बकरवालों ने लड़की को खोजना शुरू कर दिया। 17 जनवरी को जंगल के इलाके में झाड़ियों से उसका शरीर मिला जिस पर गहरी चोंटों के निशान थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि आसिफा को हत्या से पहले उसको नशीली दवाइयां दी गई थीं और उसका बलात्कार किया गया था।

पूरी तरह से साजिश

खबर आ रही है कि आसिफा की मौत और रेप पूरी तरह से एक साजिश है जो जमीन के कब्जे को लेकर की गई है। क्राइम ब्रांच के सूत्रों के अनुसार सांझी राम ने हीरानगर के दो नाबालिग युवकों (परवेश और शुभम) को इस घटना को अंजाम देने के लिए चुना। 10 जनवरी को इन दो नाबालिगों ने 8 साल की आसिफा का अपहरण किया और उसे पास के एक देवस्थान में ले गए। सूत्रों के मुताबिक उस देवस्थान की चाबियां सांझी राम के पास ही रहती हैं। उस देवस्थान में ही कई बार आसिफा का रेप किया गया।

आसिफा रेप केस

सूत्रों की मानें तो इस अपहरण को अंजाम देने के बाद सांझी राम ने जम्मू कश्मीर पुलिस में तैनात दो स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (एसपीओ – छोटे स्तर के जवान) दीपक और सुरेश को अपनी साजिश में शामिल किया। आरोप है कि बच्ची के अपहरण के बाद दीपक ने उसे बेहोश करने की दवाई दी और लगतार उसे वो दवाई खिलाते रहे ताकि किसी को उनपर शक न हो। आरोप है कि उसी स्थान पर पहले दोनों नाबालिगों ने आसिफा के साथ रेप किया। आरोप यह भी है कि उसके साथ दोनों स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स ने भो 14 जनवरी तक लगतार रेप किया। फिर 17 जनवरी को उसके पैर तोड़ के और चेहरे को पत्थर से बुरी तरह घायल कर के जंगल में फेंक दिया जिससे की किसी को घटना के बारे में पता ना चले और लगे कि किसी जानवर ने उसे खाया।

आसिफा रेप केस के मामले पर क्यों हो रही है राजनीति

फिर इस मामले में राजनीति शुरू होती है वह भी तीन महीने के बाद। क्योंकि आसिफा की लाश मिलने के बाद जब उसे जांच के लिए भेजा गया था तो उस के कपड़ों और उसके लाश पर कोई भी फिंगरप्रिंट्स नहीं मिले थे जिससे अनुमान लगाया जा रहा था कि लाश को धोकर भेजा गया है।

आसिफा रेप केस

क्या है मामला आसिफा रेप केस का

इस मामले की जड़ जमीन को कब्जे को लेकर है। मतलब की एक जमीन के टुकड़े के लिए एक आठ साल की बच्ची को इतनी यातना दी गई और उसका कई दिनों तक रेप किया गया। हद है… जिंदगी से ज्यादा लोगों को जमीन प्यारी है। बिल्कुल सही दिशा में जा रहा है अपना देश।
दरअसल रसाना गांव हिंदू बाहुल्य इलाका है और जंगल में गुर्जर और बकरवाल मुसलमान चरवाहों के साथ आते हैं। बच्ची उसी परिवार से थी। हिंदुओं का कहना है कि जमीन पर कब्जा हो रहा है और पशु खेत में जा रहे हैं। दो एसपीओ जो गिरफ्तार हुए हैं वो उसी रसाना गांव के हैं। मुसलामानों से इनकी झड़प होती रहती थी।

बन चुका है हिंदू रक्षा मंच

इसमें सभी आरोपी हिंदु है जिसके कारण उन्हें बचाने के लिए अब इस मुद्दे में हिंदू रक्षा मंच बन चुका है जिस ने इस मुद्दे की सीबीआई जांच मांग की है और कहा कि रेप जिसने किया है उसे फांसी होनी चाहिए। वे कह रहे हैं रेप जिसने किया है… इसका मतलब समझ में आता है। रेप जिसने किया है… वे नहीं मानते कि इन आरोपियों ने रेप किया है और आपको तो अच्छी तरह मालूम है कि जांच में कुछ भी निकाला जा सकता है। अंत में यह ना हो कि जांच में यह पता चले कि उस बच्ची को एक जानवर ने खाया था। क्योंकि हिंदू रक्षा मंच लगातार कह रहे हैं कि ये हिंदुओं के खिलाफ साजिश है।

ये है आसिफा रेप केस – तो आप भी साजिश पर लगातार नजर बनाए रखिए और देखिए कि सच में जानवर ने बच्चे को खाया है या फिर इस बार रेप साबित हो जाएगा।

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