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कश्मीर में आतंक के बीच ये कश्मीरी लङकी देती है लङको को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग

मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग

मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग – जम्मू  – कश्मीर को भारत का सबसे अशांत राज्य माना जाता है, जहां आए दिन आंतक गोलाबारी का मंजर देखने को मिलता रहता है ।

जिस वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित कश्मीर में रहने वाले परिवार और उनके बच्चे होते है । क्योंकि गोलाबारी के चलते कश्मीर में ज्यादातर स्कूल और काॅलेजस बंद ही रहते हैं ।  जिस वजह से यहां के बच्चों का भविष्य बहुत ही मुश्किल से बन पाता है  और ऐसी जगह जहाँ जीना ही बहुत मुश्किल है । वहां किसी लङकी का लङको को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देना और अंतराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना अश्वसनीय लगता है ।

मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग

लेकिन कहते है कीचङ में ही कमल खिलता है । इस अश्वसनीयता को हकीकत में बदला है कश्मीर की अबिदा ने  ।

20 साल की अबिदा 6 साल की उम्र से मार्शल आर्ट सीख रही है और मार्शल आर्ट में राष्ट्रीय  – अतंराष्ट्रीय स्तर देश के लिए गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं । अबिदा उन चंद लोगों में से जो सिर्फ खुद के लिए नहीं दूसरों के भी सपनों की उम्मीद बनते है । अबिदा को अपने जीवन में बहुत सी परेशानियाँ झेलनी पङी । लेकिन अबिदा ने कभी हार नही मानी  । क्योंकि कश्मीर जैसी जगह जहां आंतकी साए के कारण बच्चे स्कूल तक तो अच्छे से जा नही पाते ऐसे में अबिदा का मार्शल आर्ट करना कहाँ किसी को रास आ सकता था । हालाँकि परिवार और पिता के सोपर्ट ने आबिदा को आगे बढने की हिहिम्मत दी । आबिदा “तंग सू दो ” मार्शल आर्ट खेलती है । ये कोरियाई मार्शल आर्ट है जिसे आत्मरक्षा   के साथ – साथ  स्वास्थ्य को सेहतमंद बनाने के लिए किया जाता है । अबिदा  की मुश्किलें  तब ज्यादा बढ गई जब अबिदा का सबसे बङा सपोर्ट उनके पिता का निधन सो गया।

मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग

पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी भी अबिदा और  उसके भाई पर आ गई ।

अबिदा के अनुसार पैसो की तंगी की वजह से अमेरिका खेलने नहीं जा पाई । अबिदा के खेल में उनके भाई आदिल भी काफी साथ देते है । पूरे परिवार को अबिदा से काफी उम्मीदें है । अबिदा ने अपना पहला मेडल राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा के खिलाफ 1999 में जीता था। इसके बाद अबिदा ने कई राष्ट्रीय स्तर और अंतराष्ट्रीय मुकाबलों में गोल्ड जीता । अबिदा ने 2011 में भूटान में उसके बाद नेपाल और बांग्लादेश में मुकाबले जीत गोल्ड अपने नाम किया ।

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि अबिदा महज 20 साल की उम्र में एक खिलाङी होने के साथ – साथ  एक कोच भी है ।

अबिदा अपने इलाके के  लङके लङकियो को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देती  है ।

मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग

अबिदा से मार्शल आर्ट सीख चुके आमिर फयाद राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुके है । आमिर के अनुसार उन्हें फक्र है कि वो अबिदा जैसी खिलाङी से कोचिंग लेते है ।हालांकि अबिदा के अनुसार जिन बच्चों को वो सिखाती है उनमें लडकियों की संख्या बहुत कम है।इसलिए वो चाहती है कि सभी माता – पिता अपनी लङकियो को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने दे ताकि वो अपनी रक्षा खुद कर सकें ।अपने ओर अपने देश के लिए इतना कुछ करने वाली आबिदा को सरकार की तरफ से आज तक कोई  सहायता नहीं मिली है । ना ही उनके मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग सेंटर को क्लब का दर्जा मिला है ।

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