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गोल्ड मेडलिस्ट की ऐसी दुर्गति भारत में ही हो सकती हैं.

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हमने कुछ दिन पहले क्रिकेट के अलावा बाकि खेलों के साथ हो रहे सौतेलें व्यवहार को लेकर एक लेख लिखा था.

लेकिन उस के बाद भी भारत के खेल परिद्रश्य में इंच मात्र का भी बदलाव नहीं आया हैं. जहाँ भारतीय क्रिकेट के खिलाड़ियों द्वारा किसी कमज़ोर टीम से एक मैच भी जीत लेने पर हम सभी लोग मीडिया के साथ मिल कर उनका राग अलापने लगते है वही बाकि खेल और उससे जुड़े खिलाड़ी देश के लिए चाहें गोल्ड मैडल जीतकर क्यों न ले आये उन्हें एक बार पूछना भी ज़रूरी नहीं समझते हैं.

आज मैं आपसे कुछ नहीं कहूँगा.

अपने इस लेख के माध्यम से कोई नाराज़गी नहीं जताऊंगा लेकिन इस सौतेले बर्त्ताव का शिकार हुए उस खिलाड़ी के बारे में ज़रूर बताऊंगा.

दुसरे खेलों को लेकर इसी अनदेखी के चलते गोल्ड मेडलिस्ट कमल कुमार नाम का यह बॉक्सर आज दिल्ली में कचरा उठाने का काम कर रहा हैं.

आप कमल की अचीवमेंट सुनकर चौक जायेंगे कि एक नेशनल लेवल का बॉक्सर इतने सारे मैडल जीतकर भी कैसे इतनी बद्तर ज़िंदगी जीने के लिए क्यों मजबूर हैं.

कमल ने अभी तक नेशनल लेवल बॉक्सिंग में 4 गोल्ड मैडल जीत चुके हैं, साथ ही अपने राज्य के लिए खेलते हुए 2 ब्राउन मैडल जीतें हैं लेकिन कमल के इतने अच्छे प्रदर्शन के बाद भी अगर उसकी यह हालत हैं तो इस देश के भविष्य को लेकर जो कल्पना दिमाग में आती हैं वह इतनी भयावह हैं कि उसे बयान करने के लिए शब्द नहीं मिलते हैं.

कमल की बातचीत से यही लगता हैं कि वह आज भी सरकार से यह उम्मीद लगाये बैठा हैं कि शायद सरकार हम जैसे खिलाड़ियों पर कभी मेहरबान हो जाये और हमारे खेल की कुछ तो कद्र कर ले पर भगवान् जाने वह दिन कब आएगा?

कमल के इस विडियो को आप भी देखियें और खुद ही तय कीजियें कि इन खिलाड़ियों के प्रति हमारा रवैया कितना सही हैं.

हम सारा दोष मीडिया पर डालने के बजाएं अपनी ओर भी देखें कि हम ऐसे खेल और खिलाड़ी को क्यों तवज्जु नहीं देते?

विडियो लिंक-

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खेल