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एडस में खूबसूरत लड़कियां ही क्यों होती है !

खूबसूरत लड़कियां

खूबसूरत लड़कियां – अक्सर सड़क पर चलते चलते किसी ना किसी बैनर की तरफ नजर चली ही जाती है ।

खास बात ये है कि अधिकतर बैनर्स पर कोई न कोई खूबसूरत मॉडल होती है जो उस प्रोडक्ट का प्रोमशन कर रही होती है ।

और आते जाते हर व्यक्ति को एक बार अपनी ओर देखने पर मजबूर कर ही देती है ।

केवल बैनर या प्रिंट एड्स में नहीं बल्कि इलकटॉनिक मीडिया के एड्स में भी केवल खूबसूरत लड़कियों को दिखाया जाता है । दिलचस्प बात ये है कि खूबसूरत लड़कियां अक्सर उन प्रोडक्टस और सर्विसस के एड में भी दिखाई देती है जिन प्रोडक्टस का वो इस्तेमाल नहीं करती । जिस वजह से अक्सर मन में ये सवाल उठाता है कि अक्सर एड में केवल खूबसूरत लड़कियों को ही क्यों लिया जाता है और लड़कियों से वो एड क्यों कराए जाते है जो प्रोडक्टस उनके लिए है ही नहीं  ?

खूबसूरत लड़कियां

पर इन सवालों का जवाब जाने के  लिए पहले ये जाने की जरुरत है कि आखिर खूबसूरत लड़कियां एडवर्टाइजिंग कंपनी और अपने प्रोडक्ट के एड कराने वाली कंपनियों की नजर में कौन होती है ?

 अक्सर कई डार्क स्किन , डस्कि लडकियों का इल्जाम होता है कि एड कंपनियां केवल फेयर स्किन की लड़कियों को अपने एड में दिखाती है ।क्या इसका अर्थ ये है कि केवल फेयर स्किन की लड़कियां खूबसूरत होती है । कहा जा सकता है कि 99 प्रतिशत भारतीय एड में फेयर स्किन की लड़कियां नजर आती है । हालांकि कुछ वक्त पहले से ये तस्वीर बदलती नजर आई है लेकिन इसे पूरी तरह बदलने में अभी काफी वक्त लगेगा ।

खूबसूरत लड़कियां

खूबसूरत लड़कियों को लेकर कई लड़कियां ये सवाल भी उठाती है कि हर एड में खूबसूरत लड़कियों को दिखाकर एड कपंनियां अपना प्रोडक्ट बेचने की कोशिश करती है । क्योंकि उन्हें लगता है कि खूबसूरत लड़कियां जिनको देखकर लोग आसानी से आकर्षित होते हैं लेकिन खूबसूरत लड़कियों को हर एड में दिखाना एक तरह से सेक्सलाइड करने जैसा नहीं है क्या ?

ऐसा करके कही ना कहीं वो लड़कियों की खूबसूरती को अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं ।

खूबसूरत लड़कियां

वरना आप ही सोचिए एक एक मेल डियू , परफ्यूम या ट्रिमर के एड में जिस तरह लड़कियों को दिखाया जाता है वो कहां तक सही है ?

और इसके लिए पूरी एड कंपनियों को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता । क्योंकि उनके दारा बनाया गया वर्चुअल वर्ल्ड कही न कहीं हम लोगों की ही कल्पना से ही प्रेरित है । क्योंकि हमारी असल जिंदगी में हम लोग रंग, खूबसूरती को बहुत ज्यादा तवज्जूब देते हैं । अगर हमारा कलर थोड़ा भी डस्की या डार्क है या फिर हमारे चेहरे पर किसी तरह के दाग धब्बे है तो हमारी तुलना फेयर कलर की खूबसूरत लड़कियां होने लग जाती है । घर वालें अक्सर इसी बात का ताना देते है कि शादी कौन करेगा ।

खूबसूरत लड़कियां

दोस्त रिलेटिव सीधे सीधे न सही तो बातों बातों में तो ये कह ही देते है कि अगर थोड़ा कम काली होती तो अच्छा होता । उसके ऊपर टीवी पर आने वाले ब्यूटी प्रोडक्ट के एड जो हमारी गोरेपन की चाहत बढ़ा देते है । और हम ये भूल जाते है कि रंग कभी बदल नहीं सकता ।और हम जैसे भी है हमें उसी पर नाज होना चाहिए ।

आपका रंग, आपकी खूबसूरती दूसरों को भले ही आकर्षित कर सकती हो । लेकिन बिना हुनर के आप जिंदगी में आगे नहीं बढ़ सकते । इसलिए बजाय किसी एड से प्रभावित होकर अपने आप पर अफसोस करने से अच्छा है आप जैसे है उस पर नाज करें ।