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भारत की वे 8 महान फिल्में जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते.

satyakam

पिछले 100 सालों में बॉलीवुड में बहुत सारी महान फिल्में बनी हैं लेकिन कुछ ऐसी फिल्में हैं जो लोगों तक पहुची नहीं हैं.

जीना, मौत, हंसी, आंसू, ये फिल्में, ज़िन्दगी की इन सभी चीज़ों को इतनी खूबसूरती से दिखाती हैं कि आप खुदको इन फिल्मों के किरदार महसूस करने लगेंगे. ज़िन्दगी की मौलिक सच्चाई में डुबोई ये फिल्में, मीठे को पसंद करनेवाले के लिए चाशनी का काम करती हैं.

हम आपके सामने लाए हैं वे 8 फिल्में जो महान थीं लेकिन लोग इनकी महानता पहचान नहीं पाए.

1) ओम दर ब दर
कमल स्वरूप द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में फिल्म मेकिंग की परिभाषा ही बदल डाली. कमल स्वरूप जी ने इस फिल्म को बनाने के लिए काफी पापड बेले थे तब जाकर NFDC द्वारा मिली आर्थिक सहायता से वे इस फिल्म की समाप्ति कर सके. आज भी कई जवान निर्देशक इस फिल्म को और इस फिल्म के निर्देशक को अपनी प्रेरणा मानते हैं.

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2) नीचा नगर
पहली भारतीय फिल्म और पहली एशियाई फिल्म जिसने पहले कांस फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का अवार्ड जीता था. भारतीय होने पर गर्व करने का एक और कारण आपको मिल गया है. देव आनंद के भाई, चेतन आनंद ने इस फिल्म का निर्देशन किया था और इस फिल्म ने आनेवाले पैरालेल सिनेमा के लिए एक नया रास्ता बना डाला.

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3) एक रुका हुआ फैसला
एक रुका हुआ फैसला सन 1986 में रिलीज़ हुई थी. इसका निर्देशन किया था महान न निर्देशक बासु चैटर्जी ने. 1957 की फिल्म 12 angry men की रीमेक इस फिल्म को कई क्रिटिक ओरिजिनल से बेहतर मानते हैं.

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4) सत्यकाम
1969 में रिलीज़ हुई इस फिल्म का निर्देशन किया था हृषिकेश मुख़र्जी ने. इस फिल्म में मौजूद थे उस ज़माने के कई बड़े सितारे, धर्मेन्द्र, शर्मीला टैगोर, संजीव कुमार और अशोक कुमार. हृषिकेश मुख़र्जी ने इस फिल्म की रिलीज़ के बाद यह तक कह डाला था कि वे इससे अच्छी फिल्म बना ही नहीं सकते.

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5) दो आँखें बारह हाथ
दो आँखें बारह हाथ सन 1957 में रिलीज़ हुई थी और इसका निर्देशन वी. शांताराम ने किया था. इस फिल्म ने बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में सिल्वर बेयर अवार्ड जीता था और पहली भारतीय फिल्म थी जिसने गोल्डन ग्लोब अवार्ड जीता था.

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6) गर्म हवा
गर्म हवा रिलीज़ हुई थी 1973 में और इसके निर्देशक थे एम. एस. सथ्यू. यह फिल्म भारत में बनाई गई सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है.

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7) सूरज का सातवा घोडा
सूरज का सातवा घोडा 1992 में रिलीज़ हुई एक ऐसी फिल्म है जिसने भारत में बनने वाली फिल्मों को एक नया आयाम दिया.

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8) दुविधा
1973 की फिल्म, दुविधा का निर्देशन किया था बॉलीवुड के सबसे अच्छे निर्देशकों में से एक, मणि कॉल ने. इस फिल्म की बहुत सराहना हुई थी और इस फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशन. नेशनल फिल्म अवार्ड जीता था.

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ये थीं वे 8 फिल्में जो महान तो थीं लेकिन इन्हें ज्यादा बड़ी पहचान नहीं मिल पाई. मुझे आशा है कि भारतीय लोग ऐसी फिल्मों की सराहना करना जल्द ही सीख लेंगे और जिन फिल्मों की कमाई होनी चाहिए, उन्ही फिल्मों की कमाई होगी!

धन्यवाद!

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