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जानिए योगी ने किन मुस्लिमों के लिए कहा कि उनके लिए देश में जगह नहीं

विश्व हिंदू परिषद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि मोहम्मद गोरी और बाबर से रिश्ता जोडने वालों की समाज में कोई जगह नहीं है.

ये कोई पहली बार नहीं है कि योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकार की बात कही हो. लेकिन सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोहम्मद गोरी और बाबर को लेकर अपने फिर वही पुराने तेवर दिखाए हैं.

वह भी विश्व हिंदू परिषद के मंच से.

उनके इस बयान ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है. दरअसल, महाराज सुहेलदेव की स्मृति में आयोजित हिंदू विजयोत्सव दिवस पर आयोजित कार्यक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि थे. इसका आयोजन विश्व हिंदू परिषद ने किया था.

मुख्यमंत्री योगी के ये तेवर और बयान बता रहे हैं कि कुछ भी हो उनकी सरकार हिंदुत्व के एजेंडे से नहीं हटेगी. लेकिन वो किसी अन्य धर्म को सताएगी भी नहीं.

विश्व हिंदू परिषद के मंच से मुख्यमंत्री ने कहा कि हर मजहब में राष्ट्रवादी होते हैं. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अशफाक उल्ला खां, परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम इसके उदाहरण हैं. इन पर सबको गर्व है पर गजनी, गोरी, खिलजी, बाबर और औरंगजेब से रिश्ता जोडने वालों के लिए समाज में कोई जगह नहीं.

यानी योगी एक प्रकार से सीधे सीधे मुसलमानों के उस वर्ग को चेता रहे थे जो गजनी, गोरी, खिलजी, बाबर और औरंगजेब को अपना आदर्श मानता है. यही नहीं उन्होंने हिंदुओं को भी नसीहत दी की वे अपने महापुरूषों के सम्मान में उनके साथ खड़े हो.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो कौम अपने इतिहास व महापुरुषों की रक्षा नहीं कर सकती, वह मिट जाती हैं. उसके इतिहास और भूगोल का वजूद खत्म हो जाता है. मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वालों का सम्मान होना चाहिए लेकिन, हमारे देश में कुछ लोगों ने साजिशन इतिहास से छेड़छाड़ की.

उनका इशारा कांग्रेस और वामपंथियों की ओर था.

जिन्होंने राष्ट्र के असली नायकों को हमेशा ही कमतर आंका है. योगी का कहना था कि महाराणा प्रताप, शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह और गुरु तेगबहादुर जैसे लोगों के संघर्षों को अपेक्षित जगह नहीं मिली.

इसी क्रम में उन्होंने इतिहास से विस्मृत कर दिए गए सुहेल देव के पराक्रम की चर्चा करते हुए कि करीब हजार साल पहले पहले उन्होंने सैयद सालार मसूद को कड़ी शिकस्त दी थी. इस युद्ध में आक्रांता के दो सैनिकों को छोड़ कोई जीवित नहीं बचा.

यही कारण था कि अगले 150 साल तक कोई भी विदेशी आक्रांता देश पर हमले की हिमाकत नहीं कर सका.

लेकिन जब हम उनके योगदान को भूले तो न केवल देश पर हमले हुए बल्कि हम गुलाम भी हो गए. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब समय आ गया है कि सांप्रदायिकता व राष्ट्रवाद पर बहस हो ही जानी चाहिए.

देश में कब तक सेक्युरवाद के नाम पर बहुसंख्यकों को गाली दी जाती रहेगी.