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इस केंद्रीय मंत्री को उन्हीं के पिता ने ‘नालायक’ कहा – वजह जान कर आप भी यही कहेंगे

जयंत सिन्हा

देश में हुए मॉब लीचिंग मामले में हाल ही में आठ युवकों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी लेकिन केंद्रिय मंत्रियों से जान पहचान होने के कारण सभी को हाल ही में जमानत दे दी गई.

जमानत मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा द्वारा स्वागत करते उनकी तस्वीर वायरल होते ही बवाल मच गया. शाम होते-होते पूर्व केंद्रीय मंत्री और जयंत के पिता यशवंत सिन्हा ने उन्हें ‘नालायक बेटा’ तक करार दिया.

ये वारदात है झारखंड के रामगढ इलाके की, जिसे पीछले साल 29 जून को अलीमुद्दीन हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट के द्वारा 11 युवकों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी जिसे बाद हाई कोर्ट ने खारिज कर मुजरिमो को जमानत पर छोड़ दिया.

जेल से रिहाही के समय जेलके बहार परिजन व रामगढ भाजपा जिला अध्यक्ष के लोग युवकों को लेने पहुंचे थे.

सभी युवकों के साथ समर्थक जयंत सिन्हा के पास पहुंचे जहा उन्होंने उन सभी का स्वागत मिठाई खिलाकर व माला पहनाकर किया. वही माला पहने आरोपितो के साथ केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो उठी.

इन सभी तस्वीरों और वीडियो को वही मौजूद भाजपा मंत्री ने फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर किया था, और इसके तुरंत बाद ही बेहद विवाद शुरू हो उठे. इस विषय में जयंत सिन्हा का कहना है की “संविधान सर्वोपरि है, मैं पहले भी अलीमुद्दीन हत्याकांड व मॉबलीचिंग कि निंदा कर चुका हूँ. इस मामले में दो दोषी हैं जिन्हें सजा मिलेगी और अन्य निर्दोषियो को न्याय. मैंने उन्हें आगे के लिए केवल अपने आवास पर शुभकामनाएँ दी थी.”

कुछ ये कहना था यशवंत सिन्हा का

मामले की गरमा गर्मी देखते हुए यशवंत सिन्हा ने ट्विटर के जरिए एक बेहतरीन पैतरा खेला और अपने बेटे को शाम तक नालायक बता कर खुद अच्छे बनने की कोशिश करने लगे. यशवंत सिन्हा ने लिखा – “पहले मैं एक लायक बेटे का नालायक बाप था, लेकिन अब रोल उलट गए हैं. मैं अपने बेटे के कार्य का अनुमोदन नहीं करता, लेकिन मैं जानता हूँ कि यह भी आगे दुरुपयोग का कारण बनेगा.

बता दे की इस मामले में अभी तक सभी को रिहा नहीं किया गया है, अभी भी जिला गौरक्षा प्रमुख छोटूवर्माव विश्व ड्क्षह्दू परिषद के नगर संयोजक रहे दीपक मिश्रा उम्रकैद की सजा पाने के बाद जेल में ही हैं. वही एक और अभियुक्त के नाबालिग होने के कारण मामला जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन है.

जयंत सिन्हा

अलीमुद्दीन अंसारी को 29 जून 2017 को प्रतिबंधित मांस के साथ पकड़े जाने के कारण भीड़ ने उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी. इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 लोगों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी.

पूरे रामगढ में गरमा गर्मी का माहौल इतना ज्यादा बड़ चुका था की यहाँ लगातार आंदोलन होने लगे, भाजपा ने कई बार सीबीआई जांच की मांग भी की लेकिन ऐसा ना होने पर रामगढ़ बंद का भी आह्वान किया गया था.

अगर देखा जाए तो जयंत सिन्हा को अपनी गलती पर निंदा होना चाहिए क्योंकि आरोप में शामिल हुए लोगों का सम्मान करना अन्य अपराधियों का मनोबल बढ़ाने के योग्य साबित होगा. जो कि एक बहुत बड़ी समस्या बन सकती है.