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एक सर्वे कहता है कि महिलायें 24 घंटे में यह काम तक़रीबन 30 बार करती हैं! उफ़ तौबा!

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जनाब ये तो आप मानते ही होंगे कि आजकल की महिलायें किसी भी क्षेत्र में मर्दों से पीछे नहीं हैं, है न?

और कुछ कामों में तो हमारी नारीजाती की प्रतिनिधियों ने मर्दों को कहीं पीछे छोड़ दिया है, और ज़रूरी नहीं कि ये काम सिर्फ घर कि चारदीवारी के अंदर ही होते हों! आज की नारी है बाहर भी सब पर भारी!

फिर चाहे ये मुक़ाबला झूठ बोलने का ही क्यों न हो!

महिलायें वहाँ भी आगे निकल गयी हैं हुज़ूर! गौर फरमाइयेगा!

सच्चाई और शराफत का प्रतीक मानी जाने वाली महिलायें आजकल नए आयाम तय कर रही हैं!

हम में से बहुत सारे लोग संभवतः यह स्वीकार करेंगे कि वे मौके बे मौके झूठ बोलते हैं| तथ्य ये है कि तीन में से एक इंसान हर रोज दिन में एक बार झूठ बोलता है| लेकिन क्या ये सच है?

हाल ही में किए गए एक सर्वे के मुताबिक पांच महिलाओं में से चार महिलाएं हर रोज झूठ बोलती है.

सर्वे में शामिल कुछ महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे दिन में कम से कम 30 बार झूठ बोलती हैं!! है न हैरान कर देने वाली बात?

हालांकि इस झूठ के खेल में साफ रंग की महिलाएं ज्यादा आगे हैं. इसके मुकाबले सर्वे में पांच में से सिर्फ दो पुरुषों ने हर रोज झूठ बोलना स्वीकार किया!

सौभाग्य से तस्वीर उतनी धुंधली नहीं है, जितना कि आंकड़े दर्शा रहे हैं| सर्वे में शामिल महिलाओं ने कहा कि लोगों की भावनाएँ आहत ना हो इसलिए वे सच बोलने से कतराती हैं. वहीं 55 फीसदी ने माना कि उनके झूठ बोलने का कारण दूसरे को बेहतर अहसास कराना है| वहीं 32 फीसदी चाहती हैं कि वे सच बोलकर किसी परेशानी में ना पड़े|

इसके अलावा चार में से एक महिला ने कहा कि जीवन बहुत उलझा हुआ है और बिना झूठ बोले ज़िंदा रहना बहुत ही मुश्किल है! हालांकि अपनी बात को सही साबित करने और चेहरा बचाने को भी महिलाओं ने झूठ बोलने के आम कारणों में गिनाया|

तो जनाब, आज कल कि प्रगतीशील नारी झूठ बोलने को पाप नहीं समझती हैं और उस का अच्छा ख़ासा इस्तेमाल करती है, वो भी एक बार नहीं, एक दिन में तक़रीबन 30 बार!

तो आप का क्या कहना है इस बारे में?

 

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