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बिना किसी सरकारी मदद के इस आईएएस ऑफिसर ने बनवा दी 100 किमी लंबी सड़क !

कहते हैं कि जिसके सिर पर कुछ कर गुज़रने का जुनून सवार होता है तो फिर वो हर मुश्किल हालात का सामना करते हुए अपनी मंज़िल को हांसिल कर ही लेता है.

ऐसे लोग अपने किसी भी काम के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं होते बल्कि वो आत्मनिर्भर होकर अपने सभी कामों को अंजाम देते हैं और दुनिया के सामने एक अनोखी मिसाल पेश करते हैं.

आज हम आपको जुनून और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करनेवाले एक ऐसे आईएएस ऑफिसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने बिना किसी सरकारी मदद के 100 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने का सराहनीय काम किया है.

आर्मस्ट्रॉन्ग पेम बने मिरैकल मैन

साल 2009 बैच के आईएएस ऑफिसर आर्मस्ट्रॉन्ग पेम एक ऐसे शख्स हैं जो ना सिर्फ अपनी कर्मठता के लिए जाने जाते हैं बल्कि देखते ही देखते उनके जुनून ने उन्हें मिरैकल मैन भी बना दिया.

दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज से 2005 में ग्रैजुएट होने वाले पेम ने यूपीएससी की परीक्षा दी थी और साल 2009 में परीक्षा पास करके पेम आईएएस बने और मणिपुर के टूसेम ज़िले में एसडीएम के पद पर उन्हें नियुक्त किया गया.

आपको बता दें कि इस जगह पर लोगों को ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं नहीं मिलती थीं. इसलिए आर्मस्ट्रॉन्ग ने इस समस्या को दूर करने के बारे में सोचा और उन्होंने ठान लिया कि चाहे सरकार की मदद मिले या नहीं वो सड़क बनावकर ही रहेंगे. इसके लिए उन्होंने करीब 31 गांवों का दौरा किया ताकि वो लोगों की इस समस्या को अच्छी तरह से जान सकें.

आर्मस्ट्रॉन्ग ने बनवाई 100 किमी लंबी सड़क

बताया जाता है आज से करीब पांच साल पहले सड़क न होने की वजह  मणिपुर के दो इलाके दुनिया से कटे हुए थे. सड़क न होने की वजह से लोगों को काफी दिक्कतें होती थीं और कहीं बाहर जाने के लिए उन्हें घंटों पैदल चलना पड़ता था या फिर उन्हें नदी पार करने का जोखिम उठाना पड़ता था.

दरअसल मणिपुर के दूरस्थ इलाके के दो गांव टूसेम और तमेंगलॉन्ग तक जाने के लिए सड़क नहीं थी. इसलिए इस आईएएस अधिकारी ने बिना किसी सरकारी सहायता के 100 किलोमीटर सड़क बनवा दी. वर्तमान में यह सड़क मणिपुर को आसाम और नागालैंड से जोड़ती है. बताया जाता है कि पेम ने सड़क बनवाने के लिए फेसबुक के जरिए 40 लाख रुपये इकट्ठा किए थे.

सड़क बनाने के लिए सरकार से नहीं मिली मदद

ऐसा नहीं है कि सरकार ने सड़क बनवाने के लिए कभी अपनी दिलचस्पी नहीं दिखाई. बताया जाता है कि साल 1982 में ही इस सड़क को बनवाने का प्रस्ताव भेजा गया था और केंद्र सरकार ने 101 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी थी, लेकिन किसी कारण सड़क बनाने का यह काम आगे नहीं बढ़ सका.

आपको बता दें कि आईएएस ऑफिसर पेम खुद एक दूरस्थ गांव से आते हैं जहां सुख सुविधाओं को अभाव रहा है. इसलिए उन्हें गांव वालों का दर्द समझ में आ गया और वो इन ग्रामीण इलाकों में बदलाव लाना चाहते थे.

इसके लिए उन्होंने मणिपुर सरकार को पत्र लिखकर सड़क बनवाने के लिए मदद मांगी लेकिन सरकार ने अपने हाथ खड़े कर लिए. सरकार से मदद ना मिलने पर भी पेम ने अपनी हिम्मत नहीं हारी और उन्होंने अपने दम पर सड़क बनवाने का फैसला कर लिया.

उन्होंने मदद जुटाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया और उन्हें सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों का भरपूर समर्थन मिला. भारत के बाकी इलाकों में रहने वाले लोगों ने आर्थिक मदद करने के लिए हाथ बढ़ाए और पेम के माता-पिता ने भी पांच लाख रुपये दान किए. लोगों के सहयोग से कुछ ही दिनों में 40 लाख रुपयों का इंतज़ाम हो गया.

गौरतलब है कि इस सड़क को बनवाने का सारा श्रेय इस युवा आईएएस ऑफिसर को ही जाता है. ऐसा करके इस युवा अधिकारी ने दुनिया के सामने ये मिसाल पेश की है कि हर काम के लिए सरकार से आस लगाना ज़रूरी नहीं है क्योंकि बिना सरकारी मदद के भी आम इंसान और समाज के लोग मिलकर किसी भी नेक काम को अंजाम दे सकते हैं.

 

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