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क्यों करना चाइये, सचिन तेंदुलकर और राहुल गाँधी को संसद से बर्खास्त ?

politics in india

कितनी उम्मीदों से सचिन तेंदुलकर और राहुल गाँधी जी जैसे लोगों को राज्यसभा और लोकसभा में चुनकर भेजा गया है पर अब अफ़सोस होता है कि इतने बड़े नाम संसद से हमें निराश कर रहे हैं.

और कांग्रेस पार्टी तो अब तक अपनी हार से कुछ नहीं सीख रही है.

अभी खत्म हुए लोकसभा बजट सत्र में सांसद सचिन तेंदुलकर की हाजरी, जहाँ मात्र 22 प्रतिशत रही, वहीँ कांग्रेस से टॉप नेता राहुल गाँधी जी तो पूरी संसद से ही बिना किसी सूचना गायब रहे हैं.

अब ऐसे में राहुल जी को तो संसद से सैलरी लेने का कोई अधिकार ही नहीं है. सचिन जी को सैलरी 22 प्रतिशत हाज़री की ही मिलनी चाहिए. हमारे प्रिय नेताओं को समझना होगा कि इनको मिलने वाला धन जनता का है जो जनता के खून-पसीने की कमाई है.

आइये अब आपको कुछ ऐसे ही 16 लोकसभा एवम राज्यसभा सांसदों की सूची पेश करते हैं जो हमारे देश के लोगों की भलाई करना तो दूर, संसद से ही दूर हो चुके हैं. संसद में इनकी कुल भागीदारी भी बहुत कम है.

राहुल जी जहाँ अब तक 49 प्रतिशत हाज़िर हुए हैं, वहीँ सचिन तेंदुलकर 6 प्रतिशत हाजिरी को ही दर्शाते हैं.

भारतीय जनता पार्टी की ओर से सांसद हेमा मालिनी जी 37 प्रतिशत ही संसद में हाजिरी दर्ज करा पाई हैं.

आइये नज़र डालते हैं ऐसे ही कुछ सांसदों पर-

नाम पार्टी हाजरी प्रतिशत बजट सत्र में हाजरी प्रतिशत
 rahul- gandhi श्री राहुल गाँधी (लोकसभा) राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी 49% 0
 sachin-tendulkar श्री सचिन तेंदुलकर(राज्यसभा) निर्दलीय 6% 22 %
 miss- rekha श्रीमती रेखा (राज्यसभा) निर्दलीय 5% 0
 amrinder-singh श्री कैप्टेन अमरिंदर (लोकसभा) राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी 11% 6%
 hema-malini श्रीमती हेमा मालिनी         (लोकसभा) भारतीय जनता पार्टी 37% 50%
 dimple-yadav श्रीमती डिंपल यादव (लोकसभा) समाजवादी पार्टी 45% 39%

 

वैसे इस 16 लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के सभी सांसदों का हाज़री प्रतिशत गज़ब का है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भाजपा के अधिकतर सांसद 85 प्रतिशत से ऊपर हाज़िर रह रहे हैं. यह शायद प्रधानमंत्री मोदी जी का भी असर हो सकता है.

अब ऐसे में इन सांसदों को खुद की अंतरात्मा से यह बात पूछनी चाइये कि क्या वह देश की जनता को निराश नहीं कर रहे हैं? या तो इन्हें अपनी उपस्थिति को बढ़ाना चाइये या अगर वक़्त की कमी के चलते इन्हें संसद नहीं आने का मौका मिल पा रहा है तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

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