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भगवान शिव ने आखिर क्यों लिया था हनुमान जी का अवतार! कहानी जो आपके रोंगटे खड़े कर देगी!

शिव का अवतार हनुमान

इतना तो सभी जानते ही होंगे कि भगवान हनुमान जी को शिव का अवतार बताया जाता है.

यह कहानी रामायण के प्रारंभ की है. पृथ्वी पर भगवान का अवतार श्री राम जी के रूप में हुआ था. सारे देवता लोग जानते थे कि यह राम ही जगत का पालनहार बनेगा और यही नाम सभी तरह के दुःख भी खत्म किया करेगा.

तो आखिर इस कहानी का शिव के हनुमान रूप से क्या तात्पर्य है?

असल में शिव का अवतार हनुमान ही थे. भगवान राम ही शिव के हनुमान अवतार का कारण बने थे.

असल में शिव का अवतार हनुमान कहानी को सुना तो सभी ने होगा लेकिन किसी ने भी इस कहानी के एक दर्दनाक पक्ष की तरफ ध्यान नहीं दिया होगा, जो आज हम शिव का अवतार हनुमान की कहानी से आपको पूरी तरह से रूबरू कराते हैं-

शिव का अवतार हनुमान – 

जब शिव की इच्छा हुई, राम दर्शन की

रामायण में बताया गया है कि एक बार भगवान शिव की भी इच्छा हुई कि पृथ्वी पर लोक पर चलकर भगवान राम के दर्शन किये जाये. उस समय राम जी की आयु कुछ 5 वर्ष हो गयी थी. लेकिन शिव अपने असली रूप में जा नहीं सकते थे. तो शिव ने माता पार्वती से अचानक से खड़े होकर बोला- जानती हो पार्वती मेरे राम ने जन्म लिया है और उनके दर्शन की सेवा का मन हुआ है. मेरी इच्छा है कि अब में यहाँ से चला जाऊ और राम के लोक में ही रहूँ.

यह सुनकर पार्वती जी रोने लगती हैं

यह सुनकर कि अब शिव मुझे छोड़कर जा रहे हैं तो पार्वती जी का दिल विचलित हो गया और माता रोते हुए बोली कि हे स्वामी मुझसे ऐसी कौन-सी गलती हो गयी है कि आप मुझे यहाँ छोड़कर अयोध्या नगरी रहने जा रहे हैं. स्वामी आप यदि जाते हैं तो जाइये लेकिन एक बात सुन लीजिये कि आपके बिना मैं यहीं पर अपने प्राण दे दूंगी.

यह कथा सुनकर शिव को वाकई मालूम हुआ कि पार्वती भी मेरे बिना नहीं रह सकती हैं. और अगर मैं यहाँ से गया तो निचित रूप से पार्वती अपने प्राणों की बलि दे देगी. तब शिव भगवान मोह के एक चक्रव्यूह में फँस जाते हैं. क्योकि एक तरफ माता पार्वती जी के पास भी रहना था और दूसरी तरफ भगवान राम के लोक में भी जाना था.

तो शिव ने यह विचार कर पार्वती से बोला

शिव का अवतार हनुमान

हे प्राण पारी उमा मैं तुम्हे कैसे त्याग सकता हूँ. तब भगवान शिव ने अपने ग्यारह रुद्रों का पूरा राज माता पार्वती को बताया और बोले-
देखो पार्वती इन ग्यारह रुद्रों में से एक रूप वानर का अवतार आज में करने वाला हूँ. एक रुद्राक्ष में से आज एक रूप वानर होगा जो बाद में हनुमान के रूप में जाना जायेगा. बाकी 10 रुद्राक्ष से आज में मदारी का रूप लेने वाला हूँ.

शिव ने हनुमान जी को अपने जैसी शक्तियां दी

वैसे शास्त्र बताते हैं कि भगवान शिव सब जानते थे. शिव जी राम जी के पूरे जीवनकाल को देख पा रहे थे. इन्हें पता था कि जीवन में एक बार राम जी को पृथ्वी का कल्याण करने के लिए मेरी आवश्यकता होगी. तब मेरा यही वानर रूप राम की मदद करेगा. इसलिए हनुमान अवतार में शिव अपने जैसी शक्तियां डालते हैं.

कलयुग में यह रूप ही जगत का बेड़ा पार करेगा

शिव को यह भी पता था कि कलयुग में ना मैं नजर आऊंगा और ना ही राम नजर आयेंगे. तब कोई अवतार भी जन्म लेकर धरती पर नहीं जायेगा. इसलिए शिव ने अपने एक शक्तिशाली रूप को जन्म दिया जो कलयुग में भी अजर-अमर रहेगा और पृथ्वी लोक के लोगों के दुःख-दर्द को दूर किया करेगा.

इसलिए आज भी भक्त लोग हनुमान जी के दर्शन साक्षात् कर लेते हैं. इस बात के कई सबूत मिल चुके हैं कि हनुमान जी आज भी धरती पर मौजूद हैं.

ये थी शिव का अवतार हनुमान की कहानी – तो इस प्रकार से शिव ने हनुमान जी का अवतार लिया था. पहले इस अवतार ने शिव को भगवान राम के दर्शन कराए. बाद में यही शिव रूप राम का परम भक्त कहलाया और रावण युद्ध में सबसे अधिक मददगार साबित हुआ. इस युद्ध के बाद कलयुग में शिव का हनुमान रूप ही जगत का पालनहार बना हुआ है.

कहते हैं कि कलयुग में यदि कोई सच्चे दिल से हनुमान जी को याद करता है तो हनुमान पल में भक्त के पास हाजिर हो जाते हैं.

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