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क्यों भारत के लिए कजाकस्तान जरूरी है?

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कजाकस्तान के दौरे में हैं. कजाकस्तान दौरा भारत के लिए खासा अहम् है. भारत में उर्जा की जरूरत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में कजाकिस्तान भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

विश्व के 15 प्रतिशत यूरेनियम भंडार कज़ाकस्तान में हैं. ऐसे में, कजाकस्तान के साथ सहयोग परमाणु बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. कजाकस्तान के तेल और गैस के भंडार भी भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
फिलहाल भारत में 21 परमाणु ऊर्जा संयंत्र चल रहे हैं जबकि 6 दूसरे संयंत्र बन रहे हैं.

इस वक़्त भारत करीब 6 हज़ार मेगावाट बिजली परमाणु उर्जा से हासिल करता है. जो कि भारत की कुल बिजली उत्पादन का मात्र तीन प्रतिशत है. भारत चाहता है की अगले 17 साल में करीब 45000 मेगावाट तक बिजली परमाणु उर्जा से प्राप्त की जा सके.

ऐसा तभी संभव हो पायेगा जब भारत को आराम से यूरेनियम मिलती रहे. फिलहाल भारत में यूरेनियम का उत्पादन 350-400 मीट्रिक टन है.

भारत को ऐसे सहयोगियों की जरूरत है जो की यूरेनियम की बढती जरूरतों को पूरा कर सके. कजाकस्तान यूरेनियम निर्यात करने वाला एक बड़ा देश है. भारत को अपने अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए कजाकस्तान की जरूरत होगी. और उससे सम्बन्ध भी बेहतर बनाने की आवश्यकता होगी.

भारत को एक लम्बे समय तक पश्चिमी देशों से यूरेनियम पाने पर प्रतिबन्ध का सामना करना पड़ा है. कनाडा ने 1954 में भारत के परमाणु बिजली प्लान निर्माण में सहयोग किया था. लेकिन 1974 में भारत के पहले परमाणु परिक्षण के बाद उसने यूरेनियम देने पर रोक लगा दी थी.
अप्रैल 2015 में कनाडा और भारत के बीच संधि हुई जिसके तहत भारत को कनाडा अगले 5 सालों में 35 करोड़ डॉलर में 3200 टन यूरेनियम देगा.

पिछले 6 सालों में भारत ने कजाकस्तान से 2100 टन यूरेनियम का आयात किया है. इसके अलावा भारत ने रूस से भी 2058 टन और फ़्रांस से 300 टन यूरेनियम लिया. भारत सिर्फ इतना चाहता है की उसे यूरेनियम की सप्लाई आसानी से मिलती रहे ताकि उसकी उर्जा जरूरतों पर किसी तरह की रुकावट ना आये.

फिलहाल कजाकस्तान तेल की गिरती कीमतों के कारण अपने खर्चों पर समीक्षा कर रहा है. और साथ ही भारत के प्रस्ताव में दिलचस्पी भी ले रहा है. भारत भी ऊर्जा क्षेत्र में मिले हर मौक़े का खुले दिल से स्वागत कर रहा है. भारत कज़ाकस्तान के साथ टेक्नॉलॉजी ट्रांसफ़र से जुड़े समझौते भी करेगा.और साथ ही भारत ने कज़ाकस्तान की राजधानी में स्थित गेमलेफ यूनिवर्सिटी में एक अध्ययन केन्द्र बनाने की पेशकश की है. इस केंद्र में भारत में तैयार किया गया सुपर कम्प्यूटर लगाया जाएगा.

भारत कज़ाकस्तान में स्थिति आंतरिक्ष के अड्डों का भी इस्तेमाल करना चाहता है जिसके कारण यह संभव हो सके कि भारतीय अंतरिक्ष मिशन चांद और ग्रहों पर भेजा जा सके.

भारत में उर्जा की मांग दिनों दिन बढ़ रही है. 2016-17 में भारत में तेल की मांग 681-738 मिलियन टन हो सकती है. जिसका 70 प्रतिशत भारत को आयत करना पड़ेगा.

इन सभी कारणों को देखते हुए ये कहा जा सकता है की प्रधानमंत्री मोदी का यह कजाकस्तान दौरा भारत के लिए बहुत जरूरी है. और साथ ही कजाकस्तान को भी भारत की उतनी ही जरूरत होने वाली है.

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