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आखिर “Sunday” को ही क्यों दी जाती है छुट्टी !

रविवार की छुट्टी

पूरे हफ्ते में अगर किसी दिन का सभी को बेसब्री इंतज़ार रहता है तो वो है सन्डे का।

फिर चाहे इसको रविवार बोलो या ईतवार बोलो छुट्टी सबको बराबर ही मिलती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हफ्ते में सिर्फ रविवार के ही दिन क्यों छुट्टी दी जाती है?

अगर आपने नहीं सोचा है फिर भी हम आपको बता देते है।

सालों से रविवार की छुट्टी मना रहे हो लेकिन इसके पीछे क्या कहानी है वो भी जानलों।

जानिए थोड़ा सा इतिहास-

हर बात का अपना इतिहास होता है और यही बात संडे पर भी लागू होती है।

इतिहास कहता है कि 1843 ई. से रविवार की छुट्टी की शुरूआत हुई। दरअसल उस वक्त लोगों मानना था कि हिन्दू धर्म में सूर्य को ही प्रतक्ष्य देवता माना गया है और रविवार को सूर्य का दिन यानि रवि का दिन माना जाता है। इसलिये इस दिन छुट्टी देने की वजह थी कि लोग नित्यकर्म के साथ पूजा पाठ कर सके और तभी से रविवार की छुट्टी देने की शुरूआत हुई।

ईसाई धर्म के अनुसार-

ईसाई धार्मिक ग्रंथो के अनुसार भगवान ईशू को सूली पर लटकाएं जाने के तीसरे दिन वो पुनर्जीवित हो गए थे और उस दिन रविवार था। हालाँकि ईसाई धर्म में रविवार को ईस्टर कहा जाता है। भगवान ईशु के पुनर्जीवित होने के इस दिन को ईसाई, ईस्टर दिवस या ईस्टर रविवार मानते है। इस दिन को ईसाई समुदाय समारोह की तरह मनाने लगा और धीरे-धीरे इस दिन ने एक स्थाई छुट्टी का रूप ले लिए जो कि हर हफ्ते दी जाने लगी।

अंग्रेजो के काल में करना पड़ा रविवार की छुट्टी के लिए संघर्ष-

हम सभी जानते है कि अंग्रेजो ने हमारे देश पर लगभग 200 सालों तक राज किया था, ऐसे में कानून और नियम सब ब्रिटिश गवर्नमेंट के हाथ में हुआ करते थे। उस समय हफ्ते के पूरे दिन काम करना पड़ता था। ऐसे में एक महापुरुष की वजह से हमें सन्डे की छुट्टी मिलनी शुरू हुई वे कोई और नहीं  ‘नारायण मेघजी लोखंडे’ थे। लोखंडे साहब जोतीराव फुलेजी सत्यसोधक आन्दोलन के कार्यकर्त्ता थे और कामगार नेता भी थे। उन्होंने रविवार की छुट्टी के लिए अंग्रेजों के सामने 1881 में प्रस्ताव रखा लेकिन वो नहीं माने। तब नारायण लोखंडे को आन्दोलन करना पड़ा ये आन्दोलन दिन-ब-दिन बढ़ता गया और हार मानकर अंग्रेजों को 8 साल बाद 1889 में रविवार की छुट्टी का ऐलान करना पड़ा।

तो अब आप समझ ही गए होंगे की सन्डे की छुट्टी क्यों दी जाती है। वैसे वजह जो भी हो लेकिन सन्डे को हैप्पी डे भी बोला जाए तो कम नहीं होगा क्योंकि हफ्ते में एक ही छुट्टी का दिन होता है जिसमें सब लोग एन्जॉय करते है।

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